मुख्य सुर्खियां
देवी दुर्गा के खिलाफ एफबी पर टिप्पणी पोस्ट करने के 'नाबालिग' आरोपी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दी, सितंबर 2022 से जेल में बंद था
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक नाबालिग को जमानत दे दी, जिस पर अपने फेसबुक अकाउंट पर देवी दुर्गा के खिलाफ टिप्पणी पोस्ट करने का आरोप है। उसकी हाई स्कूल की मार्कशीट और आधार कार्ड का अवलोकन करते हुए, जिसमें उसका जन्म वर्ष जनवरी 2006 दिया गया है, जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने उसे जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया। उसे सितंबर 2022 में गिरफ्तार किया गया था।नाबालिग आरोपी पर आईपीसी की धारा 298, 505 (i) (सी) और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसे 27 सितंबर, 2022 को इस...
पितृत्व अवकाश से इनकार अनुच्छेद 21 के तहत बच्चे के जीवन के अधिकार का उल्लंघन; मद्रास हाईकार्ट ने कहा, इस विषय पर कानून की जरूरत
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पितृत्व अवकाश कानून की आवश्यकता पर बल दिया। जस्टिस एल विक्टोरिया गौरी ने एक फैसले में एक पुलिस अधिकारी को राहत प्रदान की, जबकि विभाग की ओर से उसके खिलाफ परित्याग का आदेश पारित किया गया था। उसकी पत्नी गर्भवती थी और उसे अपनी पत्नी की देखभाल करनी थी।कोर्ट ने फैसले में बच्चे की प्रसवपूर्व और प्रसवोत्तर देखभाल के दिनों में पिता और मां दोनों की भूमिका के महत्व की चर्चा की।कोर्ट ने कहा कि एकल परिवारों की चुनौतियों के कारण, नीति निर्माताओं के लिए जैविक/दत्तक माता-पिता के...
'सुरक्षा और न्याय के लिए एक पीड़ित आत्मा की करुण मांग': उड़ीसा हाइकोर्ट ने 7 साल की बच्ची के साथ बलात्कार के दोषी की सजा बरकरार रखी
उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में सात वर्षीय बच्ची से बलात्कार के दोषी एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखा।जस्टिस संगम कुमार साहू की सिंगल जज बेंच ने अपराध को 'जघन्य' करार देते हुए कहा, “वर्तमान मामले में, पीड़िता ने किसी भी समय घटना को छुपाने की कोशिश नहीं की; बल्कि उसने तुरंत इसकी सूचना अपने माता-पिता को दी। पीड़ित की ओर से इस तरह का आचरण सुरक्षा और न्याय के लिए एक पीड़ित आत्मा के विलापपूर्ण मांग को प्रकट करता है, जो न केवल प्रासंगिक है बल्कि अपीलकर्ता के खिलाफ भी आरोप लगाने वाला है।''घटना के समय...
पूर्व पत्नी आईपीसी की धारा 498ए के तहत केवल विवाह के दौरान हुए कथित उत्पीड़न के लिए शिकायत दर्ज करा सकती है: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा है कि कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 498ए के तहत अपराध से संबंधित आरोपों पर एक महिला द्वारा मुकदमा चलाया जा सकता है, बशर्ते कि वह अपनी शादी के दरमियान हुए उत्पीड़न और क्रूरता की घटनाओं का दावा करे। जस्टिस जितेंद्र दोशी ने कहा, "...आईपीसी की धारा 498ए के तहत अपराध के आरोप तलाकशुदा पत्नी के कहने पर भी लगाए जा सकते हैं, बशर्ते कि वह उन उत्पीड़नों और क्रूरताओं की घटना का आरोप लगाए, जिनका सामना उन्हें शादी के दरमियान करना पड़ा था।”कोर्ट ने कहा,“महिला आईपीसी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने पीएमएलए के तहत 'रिपोर्टिंग संस्थाओं' में सीए को शामिल करने के खिलाफ याचिका पर केंद्र का जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत चार्टर्ड अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी या कॉस्ट अकाउंटेट को "रिपोर्टिंग संस्थाओं" की परिभाषा में शामिल करने और उन पर अन्य दायित्व डालने को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से रुख मांगा।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा को मामले में उचित निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया और इसे 04 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।यह याचिका पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट रजत...
कानूनी तौर पर विवाहित न होने के बावजूद दूसरी पत्नी मृत पति के सेवा संबंधित दावों को सुरक्षित करने की हकदारः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने माना है कि दूसरी पत्नी अपने मृत पति के सेवा और टर्मिनल लाभों को पाने की हकदार है, भले ही उसे ‘‘कानूनी रूप से विवाहित पत्नी’’ का दर्जा प्राप्त न हो। जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस के. मनमाधा राव की खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि, ‘‘हमारा विचार है कि ऐसे मामलों में, भले ही यह पाया जाए कि पहली शादी के अस्तित्व के दौरान किए गए इस विवाह के लिए दूसरी पत्नी को पत्नी का दर्जा प्राप्त नहीं है, फिर भी मृत पति के सेवा लाभ और सेवा संबंधित दावों को सुरक्षित करने की हकदार है। न्यायालयों...
नूंह विध्वंस: रहवासियों ने किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट होने के लिए समय देने के 2020 के आदेश की अवमानना का आरोप लगाते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नूंह के निवासियों द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता रहवासियों के घर इस महीने की शुरुआत में एक अतिक्रमण अभियान में कथित तौर पर ध्वस्त कर दिए गए थे।याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य के अधिकारियों ने जानबूझकर 2020 के न्यायालय के आदेश की अवज्ञा की, जिसमें नूंह-मेवात के उपायुक्त को कब्जा लेने से पहले निवासियों को स्थानांतरित करने के लिए पर्याप्त समय देने का निर्देश दिया गया था।आदेश में कहा गया है, "जब तक उनका प्रतिनिधित्व तय नहीं हो...
डायबिटीज ‘उपचार योग्य’ है, यह पत्नी और बच्चों को भरण-पोषण के भुगतान से बचने का बहाना नहींः कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अनंत कुमार केजी नामक एक व्यक्ति द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। फैमिली कोर्ट ने उसे अपनी अलग रह रही पत्नी को मासिक भरण-पोषण के रूप में 10,000 रुपये देने का निर्देश था। जस्टिस कृष्ण एस दीक्षित की पीठ ने याचिकाकर्ता की इस दलील को खारिज कर दिया कि वह डायबिटीज और संबंधित बीमारियों से पीड़ित है, इसलिए वह पिछले तीन वर्षों से अपने नाबालिग बच्चे के पालन-पोषण के लिए मासिक भरण-पोषण राशि का भुगतान करने में सक्षम नहीं है। ...
दिल्ली-एनसीआर एड्रेस वाले आधार कार्ड के आदेश को वापस लेने की अधिसूचना चार सप्ताह में प्रकाशित करें: हाईकोर्ट ने दिल्ली बार काउंसिल से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को बार काउंसिल ऑफ दिल्ली को अपनी वेबसाइट पर अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया, जिसने 13 अप्रैल को जारी पूर्व अधिसूचना को वापस ले लिया। वापस ली गई अधिसूचना में भविष्य में नामांकन के लिए दिल्ली या एनसीआर क्षेत्र के एड्रेस वाले आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र दाखिल करना अनिवार्य कर दिया गया था।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस संजीव नरूला की खंडपीठ ने वकीलों के संगठन को अगली अधिसूचना जारी करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।अदालत ने एडवोकेट रजनी कुमारी द्वारा अधिसूचना...
टूलकिट मामला : दिशा रवि ने पूर्व अनुमति के बिना विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाने वाली जमानत शर्त में संशोधन की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
साल 2021 के "टूलकिट मामले" में आरोपी क्लाइमेट एक्टिविस्ट दिशा रवि ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख कर जमानत की शर्त में संशोधन की मांग की है। दिशा रवि पर ज़मानत की शर्त लगाते हुए कहा गया है कि उन्हें विदेश यात्रा से पहले हर बार अदालत से पूर्व अनुमति प्राप्त करने की आवश्यकता होगी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने आदेश सुरक्षित रख लिया और कहा कि इसे आज शाम चार बजे सुनाया जाएगा।रवि को दिल्ली पुलिस ने 13 फरवरी, 2021 को उनके बेंगलुरु स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें 23 फरवरी, 2021 को ट्रायल कोर्ट...
मोटर वाहन दुर्घटना - पॉलिसी धारक के परिवार के सदस्य को थर्ड पार्टी इंश्योरेंस क्लेम में मुआवज़ा नहीं मिल सकता : आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस वी गोपाल कृष्ण राव ने मोटर दुर्घटना दावा मामले में कहा कि उल्लंघन करने वाले वाहन के मालिक का बेटा थर्ड पार्टी नहीं है और उसे थर्ड पार्टी के बीमा क्लेम के तहत बीमा कंपनी द्वारा मुआवजा नहीं दिया जा सकता।तथ्यात्मक मैट्रिक्सदावेदार लॉरी के क्लीनर के रूप में कार्यरत है और लॉरी चालक द्वारा लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण यह दुर्घटनाग्रस्त हो गया। याचिकाकर्ता को गंभीर चोटें आईं। याचिकाकर्ता ने मोटर वाहन अधिनियम के तहत दोषी वाहन के मालिक और बीमाकर्ता के खिलाफ मुआवजे और...
खेड़ा पिटाई कांड: घटना के वीडियो की गुणवत्ता खराब होने के कारण 14 आरोपी पुलिसकर्मियों में से 4 की पहचान की गई- अदालत की रिपोर्ट
मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बताया कि पिछले साल गुजरात के खेड़ा में मुस्लिम पुरुषों को सार्वजनिक रूप से पीटने की घटना के वीडियो खराब गुणवत्ता के हैं और आरोपियों की पहचान में बाधा उत्पन्न करते हैं।गुजरात हाईकोर्ट को नडियाद सीजेएम चित्रा रत्नू की रिपोर्ट में हालांकि घटना में आरोपी 14 पुलिसकर्मियों में से 4 की पहचान की गई। इसमें स्थानीय अपराध शाखा निरीक्षक, उप-निरीक्षक, हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल शामिल हैं।जस्टिस एएस सुपेहिया और जस्टिस एमआर मेंगडे की खंडपीठ ने जुलाई में सीजेएम को घटना से संबंधित पेन ड्राइव...
जब बर्थ सर्टिफिकेट बनाया जाता है तो पासपोर्ट एंट्री उसके अनुरूप होनी चाहिए: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि हालांकि पासपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन त्रुटियां हो सकती हैं और जब बर्थ सर्टिफिकेट (Birth Certificate) तैयार किया गया है तो पासपोर्ट एंट्री बर्थ सर्टिफिकेट के अनुरूप होनी चाहिए।जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने इस प्रकार कहा:“यह सच है कि पासपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज है और आवेदक को आवेदन के समय सही विवरण देना होगा। लेकिन कभी-कभी त्रुटियां हो जाती हैं। याचिकाकर्ता ने सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी अपना बर्थ सर्टिफिकेट संलग्न किया और उससे पता चलता है कि याचिकाकर्ता का जन्म...
ट्रायल कोर्ट को किशोर न्याय अधिनियम के तहत आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के आधार के बारे में अपनी प्रथम दृष्टया राय देनी चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट को प्रथम दृष्टया यह बताना होगा कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत किसी आरोपी के खिलाफ किस आधार पर आरोप तय किए गए हैं। जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने कहा,“ हालांकि आरोप के चरण में अदालत को विस्तृत आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है। हालाँकि, अदालत को प्रथम दृष्टया यह बताना होगा कि आरोप किस आधार पर तय किए गए थे।”अदालत ने 06 जुलाई, 2022 को पारित ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक महिला द्वारा दायर याचिका पर फैसला करते हुए यह टिप्पणी की। इस आदेश में उसके...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 20 महीने की बच्ची से बलात्कार के आरोपी को जमानत देने से इनकार किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह एक ऐसे व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिस पर 20 महीने की बच्ची के साथ बलात्कार करने का आरोप लगाया गया था। जस्टिस बृज राज सिंह की पीठ ने पीड़िता के प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें आने के तथ्य को ध्यान में रखते हुए आरोपी की दूसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी।पीठ ने कहा," ...यह स्पष्ट है कि मेडिकल रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि पीड़िता का प्राइवेट पार्ट फट गया था और योनि से रक्तस्राव पाया गया है, समरी डिस्चार्ज रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि पीड़िता के प्राइवेट...
'ईडी अधिकारियों को पुलिस शक्तियां दी गईं, लेकिन माना गया कि वे पुलिस नहीं हैं': जस्टिस दीपक गुप्ता ने पीएमएलए फैसले की आलोचना की
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता ने लाइव लॉ की 10वीं वर्षगांठ लेक्चर सीरीज़ के हिस्से के रूप में "पिछले 10 वर्षों में मौलिक अधिकार न्यायशास्त्र का विकास" ("Development of Fundamental Rights Jurisprudence in Last 10 years") विषय पर व्याख्यान दिया। जस्टिस दीपक गुप्ता ने मौलिक अधिकारों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास करने वाले कई फैसलों का जिक्र करने के बाद कहा कि कुछ फैसले ऐसे हैं जो स्वतंत्रता और स्वतंत्रता पर प्रहार करते हैं।उन्होंने आगे कहा,“ नागरिकों को दिए गए सबसे...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (14 जुलाई, 2023 से 18 अगस्त, 2023) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।अतिरिक्त जिला न्यायाधीश विशेष विवाह अधिनियम की धारा 27 के तहत तलाक की याचिका पर सुनवाई कर सकते हैं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्टआंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि एक अतिरिक्त जिला न्यायाधीश के पास विशेष विवाह अधिनियम, 1954 की धारा 27 के तहत दायर तलाक की याचिकाओं को सुनने और निस्तारित करने का अधिकार...
डॉक्टरों को ब्रांड-नेम वाली दवाओं के बजाय केवल जेनेरिक दवाएं लिखनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट में याचिका
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका (पीआईएल) में नोटिस जारी किया है, जिसमें उन डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई और दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है, जो मरीजों को समान सक्रिय सामग्री वाली अधिक सस्ती जेनेरिक दवाओं के बजाय ब्रांडेड दवाएं लिखते हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि जेनेरिक दवाएं लिखने वाले मेडिकल पेशेवरों से मरीजों पर वित्तीय बोझ कम करने और आवश्यक दवाओं तक पहुंच में सुधार करने में मदद मिल सकती है। “दवाओं तक पहुंच जरूरतमंद व्यक्तियों के इलाज के लिए जीवनरेखा देने में...
'कानूनी पागलपन' के सबूत के अभाव में केवल मकसद की कमी, आईपीसी की धारा 84 के तहत मानसिक अस्वस्थता के अपवाद को आकर्षित नहीं करेगी: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कल एक फैसले में माना कि प्रत्येक व्यक्ति जो मानसिक रूप से बीमार है, उसे आपराधिक जिम्मेदारी से वास्तव में छूट नहीं है। कोर्ट ने कहा कि केवल मकसद की कमी किसी मामले को मानसिक अस्वस्थता के सामान्य अपवाद के रूप में आईपीसी की धारा 84 के दायरे में नहीं लाएगी। जस्टिस पीबी सुरेश कुमार और जस्टिस सीएस सुधा ने माना कि अपराध बनाने के लिए इरादे और कार्य का मेल होना चाहिए, लेकिन पागल व्यक्तियों के मामले में, उन पर कोई दोष नहीं लगाया जा सकता क्योंकि उनकी कोई स्वतंत्र इच्छा नहीं है।कोर्ट ने कहा...
किराया नियंत्रण| मुकदमा शुरू होने पर पार्टियों के कानूनी अधिकार तय होते हैं, बाद की घटनाएं क्षेत्राधिकार को प्रभावित नहीं करतीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि पार्टियों के कानूनी अधिकार कानूनी कार्रवाई शुरू होने की तारीख से स्थापित हो जाते हैं, जैसे मुकदमा दायर करना। कानूनी कार्यवाही शुरू होने के बाद होने वाली बाद की घटनाएं अदालत के अधिकार क्षेत्र को प्रभावित नहीं करती हैं।जस्टिस एचपी संदेश ने कहा कि किरायेदार द्वारा उचित किराया तय करने के लिए किराया नियंत्रक के पास जाने जैसी घटनाएं पूर्वव्यापी रूप से ऐसे अधिकार नहीं बना सकती हैं, जो अदालत के अधिकार क्षेत्र को प्रभावित करते हैं।याचिकाकर्ता ने अपनी संपत्ति...




















