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खेड़ा में मुस्लिम पुरुषों को कोड़े मारने के मामले में पीड़ितों ने पुलिस से आर्थिक मुआवजा लेने से इनकार किया, गुजरात एचसी को सूचित किया
पिछले साल गुजरात के खेड़ा जिले में पुलिस द्वारा कथित तौर पर पीटे गए पांच मुस्लिम लोगों ने अदालत की अवमानना के आरोपों का सामना कर रहे चार पुलिसकर्मियों से मौद्रिक मुआवजा लेने से इनकार कर दिया। सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट को इस बारे में सूचित किया गया। जस्टिस एएस सुपेहिया और जस्टिस गीता गोपी की पीठ के समक्ष आरोपी पुलिसकर्मियों की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट प्रकाश जानी ने पीठ को सूचित किया कि पुलिस ने पीड़ितों और उनके वकील से मुलाकात की थी, जिसमें उन्होंने किसी भी मौद्रिक मुआवजे को स्वीकार करने से...
दिल्ली हाईकोर्ट ने पीड़िता के पॉलीग्राफ टेस्ट के आधार पर बलात्कार मामले में आरोपियों को बरी करने के लिए ट्रायल कोर्ट की खिंचाई की
दिल्ली हाईकोर्ट ने बलात्कार के मामले में पीड़िता पर किए गए पॉलीग्राफ टेस्ट के परिणामों के आधार पर आरोपी को बरी करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी की निचली अदालत की खिंचाई की।जस्टिस स्वर्णकांत शर्मा ने इसे गलत बताते हुए कहा कि पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजे को जांच का हिस्सा माना जा सकता है और मुकदमे के दौरान पीड़िता और अन्य गवाहों की गवाही की कसौटी पर परखा जा सकता है, क्योंकि ऐसा नतीजा अपने आप में सही नहीं है।अदालत ने कहा,"ट्रायल कोर्ट द्वारा पॉलीग्राफ टेस्ट पर भरोसा करना और यह टिप्पणी करते हुए कि पीड़िता...
सरकारी खर्च पर धार्मिक शिक्षा: 'मदरसों को अनुदान सहायता के तहत लाने वाली योजनाएं स्पष्ट करें': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, यूओआई से कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के साथ-साथ भारत संघ (यूओआई) को तीन सप्ताह के भीतर अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें उन प्रासंगिक योजनाओं को रिकॉर्ड पर लाने के लिए कहा गया है जिनके तहत मदरसों को अनुदान सहायता के तहत लाया गया है। जस्टिस अताउ रहमान मसूदी और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने मदरसों जैसे संस्थानों में धार्मिक शिक्षा के सरकारी वित्तपोषण के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान जनहित याचिका (पीआईएल) पर यह आदेश पारित किया।न्यायालय का ध्यान इस मुद्दे ने आकर्षित किया कि " क्या...
दिल्ली हाईकोर्ट ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण देने से किया इनकार, कहा- पति-पत्नी योग्य हों और समान रूप से कमाते हैं
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि जहां दोनों पति-पत्नी समान रूप से योग्य हैं और समान रूप से कमाते हैं, वहां हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत पत्नी को अंतरिम गुजारा भत्ता नहीं दिया जा सकता।जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की खंडपीठ ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अधिनियम के तहत वैवाहिक कार्यवाही के दौरान कोई भी पक्ष विकलांग न हो और केवल धन की कमी के कारण मुकदमा चलाने में वित्तीय अक्षमता का सामना न करना पड़े।यह देखते हुए कि अंतरिम भरण-पोषण...
Sec. 138 NI Act| चेक राशि चुकाने की कंपनी की देनदारी कार्यालयधारकों में बदलाव से प्रभावित नहीं होती: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में माना कि चेक से जुड़ी राशि चुकाने की कानूनी बाध्यता कार्यालयधारकों में बदलाव से नहीं बदलती है और दायित्व की धारणा का खंडन करने के लिए सबूत का बोझ कंपनी या उसके अधिकारियों पर रहता है।जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा कि किसी कंपनी के चेयरमैन या चेक पर हस्ताक्षर करने वाले अन्य अधिकारी एनआई एक्ट की धारा 139 के तहत उत्तरदायी होते हैं, जब तक कि वे यह साबित करने के लिए सबूत पेश नहीं कर सकते कि चेक कानूनी रूप से लागू लोन या देनदारी के भुगतान के लिए जारी नहीं किए गए...
एनडीपीएस मामला | आरोपी का दावा-पुलिस कर रही थी जबरन वसूली, मना करने पर प्रतिबंधित पदार्थ प्लांट किए; पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एसआईटी जांच के आदेश दिए
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि "कानून को बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति पुलिस शक्तियों के घोर दुरुपयोग के माध्यम से खुद ही हमलावर और उल्लंघनकर्ता में बदल गए हैं", एनडीपीएस मामले में पुलिस का कथित दुर्व्यवहार की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का निर्देश दिया है।यह आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने आरोपी को एनडीपीएस मामले में झूठा फंसाया था, जब उसने पुलिस अधिकारियों की जबरन वसूली की मांग से इनकार कर दिया था, "जिन्होंने उसे उसके...
धारा 138 एनआई एक्ट| अदालतों को आरोपी को सजा सुनाते समय शिकायतकर्ता को "चेक अमाउंट के अनुरूप" मुआवजा देना चाहिए: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि आपराधिक अदालतों को चेक के अनादरण के लिए एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत कार्यवाही में किसी आरोपी को दोषी ठहराते समय शिकायतकर्ता को मुआवजा देने के महत्व पर भी विचार करना चाहिए।जस्टिस सीएस डायस ने आरोपी पर लगाया गया जुर्माना बढ़ा दिया, ताकि शिकायतकर्ता को सीआरपीसी की धारा 357 के तहत मुआवजा प्रदान किया जा सके। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम की धारा 138 के तहत लगाया गया जुर्माना चेक राशि के अनुपात में होना चाहिए और यह चेक राशि के दोगुने से अधिक नहीं होना चाहिए।पुनरीक्षण...
[बंदी प्रत्यक्षीकरण] अदालत कॉर्पस की मानसिक स्थिरता का पता लगाने के लिए मेडिकल टेस्ट को बाध्य नहीं कर सकती: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने समन्वय पीठ की ओर से दिए गए एक आदेश के खिलाफ अपनी एक महत्वपूर्ण असहमति व्यक्त की। कोर्ट ने कहा कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के तहत व्यक्तियों को उनकी मानसिक स्थिरता निर्धारित करने के लिए चिकित्सा परीक्षण से गुजरने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।जस्टिस एआई सुपेहिया और जस्टिस गीता गोपी की खंडपीठ ने कहा,“हमारा सुविचारित मत है कि प्रतिवादी संख्या 3 और 4 को उनकी मानसिक स्थिरता (क्षमता) का पता लगाने के लिए जबरदस्ती चिकित्सा परीक्षण के अधीन नहीं किया जा सकता है, वह भी बंदी...
विवाह समझौते के तहत साथ रह रहे जोड़े पति-पत्नी नहीं, धारा 498 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकताः केरल हाईकोर्ट
एक मृतक महिला के खिलाफ क्रूरता के आरोप में आईपीसी की धारा 498 ए के तहत दोषी करार दिए गए एक व्यक्ति और उसके परिजनों को केरल हाईकोर्ट ने बरी कर दिया। कोर्ट का निष्कर्ष था कि दोनों पक्ष विवाह समझौते के आधार पर पति और पत्नी के रूप में एक साथ रह रहे थे, जबकि उनका विवाह संपन्न नहीं हुआ था।जस्टिस सोफी थॉमस ने कहा,"मौजूदा मामले में चूंकि प्रथम पुनरीक्षण याचिकाकर्ता और मृतक चंद्रिका के बीच विवाह संपन्न नहीं हुआ था और वे एक विवाह समझौते के आधार पर एक साथ रहने लगे थे, जिसकी कानून की नजर में कोई वैधता नहीं...
पति से अलग रह रही महिला ने गर्भावस्था समाप्त करने के लिए दायर की याचिका, दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी जांच के लिए एम्स को मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को पति से अलग हुई महिला, जिसने अपनी 22 सप्ताह की गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए आवेदन किया है, की जांच के लिए एम्स को एक मेडिकल बोर्ड का गठन करने का निर्देश दिया।जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि मेडिकल बोर्ड इस बात पर विचार करना होगा कि क्या महिला का पंजीकृत चिकित्सक द्वारा गर्भावस्था को समाप्त करने की प्रक्रिया से गुजरना सुरक्षित होगा। साथ ही कोर्ट ने भ्रूण की स्थिति का पता लगाना का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड 48 घंटे के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंप...
हिंदी भाषी आरोपी का डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट मलयालम में दर्ज किया गया, अनुवादक से पूछताछ भी नहीं की गई; केरल हाईकोर्ट ने बरी का आदेश दिया
केरल हाईकोर्ट ने हिंदी भाषी एक व्यक्ति को डकैती और हत्या के दोष से इस आधार पर बरी कर दिया कि उसका डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट ऐसी भाषा में रिकॉर्ड किया गया था, जिसे वह बोलता नहीं था। व्यक्ति पश्चिम बंगाल का मूल निवासी है और हिंदी भाषा बोलने में दक्ष है।जस्टिस पीबी सुरेश कुमार और जस्टिस पीजी अजितकुमार की खंडपीठ ने कहा कि डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट उसी भाषा में दर्ज किया जाना चाहिए जो आरोपी ने बोली है। यह पाया गया कि पुलिस ने एक ट्रांसलेटर की मदद से सामान की बरामदगी की, जिसने डिस्क्लोज़र स्टेटमेंट का...
इनडोर पेशेंट और आउटडोर पेशेंट के बीच भेदभाव करके मेडिकल प्रतिपूर्ति से इनकार नहीं कर सकते: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने माना कि किसी पेशेंट को "इनडोर" या "आउटडोर" के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित अस्पताल में उपस्थित डॉक्टरों के विशेषज्ञ निर्णय पर निर्भर करता है। न्यायालय ने आगे इस बात पर जोर दिया है कि यदि मेडिकल पेशेवर रोगी को "इनडोर पेशेंट" के रूप में अस्पताल में भर्ती किए बिना उपचार प्रदान करने का निर्णय लेते हैं तो केवल "आउटडोर पेशेंट" के रूप में वर्गीकृत उपचार के आधार पर प्रतिपूर्ति से इनकार करना उचित नहीं है। ऐसा उपचार व्यय में अंतर को उचित वर्गीकरण नहीं...
कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कोलकाता में अदालतों और सुधार गृहों के बीच वीसी सिस्टम का उद्घाटन किया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को कोलकाता में अदालतों और सुधार गृहों के बीच वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम के उद्घाटन और इन-कैमरा परीक्षण-पहचान परेड की होस्टिंग की। इस सुविधा का उद्घाटन मुख्य न्यायाधीश टीएस शिवगणम ने किया।मुख्य न्यायाधीश ने निर्भया परियोजना की मूलभूत विशेषताओं और अदालतों और सुधार गृहों के बीच वीसी सुविधाओं की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें कैदियों की सुरक्षा, पलायन को रोकने और विभिन्न सत्र अदालतों के समक्ष विचाराधीन कैदियों की निर्बाध पेशी पर जोर दिया गया।दिसंबर 2012 की त्रासदी के बाद इस...
केरल हाईकोर्ट ने हिंदी बोलने वाले आरोपी को बरी किया, कहा- साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत उसका खुलासा बयान मलयालम में दर्ज किया गया था
केरल हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मूल निवासी और हिंदी बोलने वाले आरोपी को बरी कर दिया। उक्त आरोपी को डकैती और हत्या का दोषी ठहराया गया था। कोर्ट ने आरोपी को बरी करते हुए कहा कि क्योंकि उसका खुलासा बयान उस भाषा में दर्ज किया गया, जो वह अपराध के दौरान नहीं बोलता था।जस्टिस पी.बी.सुरेश कुमार और जस्टिस पी.जी.अजितकुमार की खंडपीठ ने कहा कि खुलासा बयान उसी भाषा में दर्ज किया जाना चाहिए, जो आरोपी ने बोली है। यह पाया गया कि पुलिस ने अनुवादक की मदद से भौतिक वस्तुओं की बरामदगी की, जिसने खुलासा बयान का मलयालम...
न्यूज़क्लिक के मुख्य संपादक और एचआर हेड ने यूएपीए मामले में गिरफ़्तारियों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
न्यूज़क्लिक का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ और एचआर हेड अमित चक्रवर्ती ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए एक विशेष अनुमति याचिका दायर की है, जिसमें गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम के तहत एक मामले में राष्ट्र-विरोधी प्रचार को बढ़ावा देने के लिए कथित चीनी फंडिंग पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी को बरकरार रखा गया था। सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सोमवार सुबह भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के समक्ष याचिका को...
निठारी हत्याकांड : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को 12 मामलों में, मोनिंदर पांडेर को 2 मामलों में बरी किया, मौत की सज़ा रद्द की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को 2005-2006 के नोएडा सिलसिलेवार हत्या मामले (निठारी कांड) से संबंधित 12 मामलों में मुख्य संदिग्ध सुरिंदर कोली को बरी कर दिया । सभी 12 मामलों में उसे ट्रायल कोर्ट द्वारा मौत की सजा सुनाई गई थी। वहीं, एक अन्य संदिग्ध मोनिंदर सिंह पंढेर को भी कोर्ट ने उन दो मामलों में बरी कर दिया है, जिनमें उसे ट्रायल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई थी।जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिजवी की पीठ ने पिछले महीने मामलों में फैसला सुरक्षित रखने के बाद पंढेर और कोली द्वारा...
एनडीपीएस एक्ट की धारा 52ए का अनुपालन न करने पर अभियुक्त ऑटोमैटिकली जमानत का हकदार नहीं हो जाता, धारा 37 के तहत जमानत के लिए कड़ी शर्तें अभी भी लागू हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में माना कि नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत कोई आरोपी केवल इसलिए जमानत का हकदार नहीं हो जाएगा, क्योंकि फोरेंसिक विश्लेषण के लिए भेजे गए सैंपल मजिस्ट्रेट के सामने नहीं लिए गए थे।जस्टिस एमएस कार्णिक ने कोडीन की व्यावसायिक मात्रा रखने के आरोप में गिरफ्तार व्यक्ति को यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया कि धारा 37 के तहत जमानत के लिए कड़ी शर्तें लागू रहेंगी, भले ही सैंपल लेने के लिए एक्ट की धारा 52 ए के तहत निर्धारित प्रक्रिया का...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (09 अक्टूबर 2023 से 13 अक्टूबर 2023) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।ट्रायल कोर्ट को सीआरपीसी के तहत अपनी कार्यवाही पर रोक लगाने का अधिकार नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्टमध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि एक ट्रायल कोर्ट किसी आपराधिक मामले में अपनी कार्यवाही पर रोक नहीं लगा सकता है और संबंधित सिविल मामले के फैसले का आपराधिक मामले की कार्यवाही पर कोई असर नहीं...
फोन पर पुलिस अधिकारी को गाली देना आईपीसी की धारा 294(बी) के तहत अपराध नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने फोन पर एक पुलिस अधिकारी को धमकाने और गालियां देने की आरोपी 51-वर्षीय महिला के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही को यह पाते हुए रद्द कर दिया है कि यह धारा 294 (बी) तहत अपराध को आकर्षित नहीं करेगी। जस्टिस पीवी कुन्हिकृष्णन ने पाया कि धारा 294(बी) के तहत अपराध को आकर्षित करने के लिए, जेम्स जोस बनाम केरल राज्य (2019) में उजागर की गई दो सामग्री आवश्यक होंगी-1. कि अपराधी ने किसी भी सार्वजनिक स्थान पर कोई अश्लील हरकत की हो या किसी सार्वजनिक स्थान पर या उसके निकट कोई अश्लील गीत या...
'दादा-दादी बच्चों के पालन-पोषण का अभिन्न अंग': छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पोते-पोतियों से मिलने का अधिकार दिया
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अस्सी वर्षीय एक दादा को अपने पोते-पोतियों से मिलने की इजाजत दे दी है, जब तक कि उनके बेटे और बहू के बीच बच्चों की कस्टडी की लड़ाई चल रही है।निचली अदालत के उस आदेश को संशोधित करते हुए, जिसने दादा को अपने पोते-पोतियों से मिलने के अधिकार से इनकार कर दिया था, जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस दीपक कुमार तिवारी की खंडपीठ ने कहा,“भारतीय समाज में, दादा-दादी बच्चों के पालन-पोषण के लिए एक अभिन्न अंग होते हैं और स्नेह और योगदान के उस हिस्से को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है और यह बच्चों...








![[बंदी प्रत्यक्षीकरण] अदालत कॉर्पस की मानसिक स्थिरता का पता लगाने के लिए मेडिकल टेस्ट को बाध्य नहीं कर सकती: गुजरात हाईकोर्ट [बंदी प्रत्यक्षीकरण] अदालत कॉर्पस की मानसिक स्थिरता का पता लगाने के लिए मेडिकल टेस्ट को बाध्य नहीं कर सकती: गुजरात हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2023/06/22/500x300_477874-750x450404238-gujarathigh-court.jpg)









