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राज्यव्यापी प्रतिबंध के बावजूद बढ़ रही हैं गोहत्या की घटनाएं, यूपी पुलिस ऐसे मामलों की जांच में गंभीर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
राज्यव्यापी प्रतिबंध के बावजूद बढ़ रही हैं गोहत्या की घटनाएं, यूपी पुलिस ऐसे मामलों की जांच में गंभीर नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले सप्ताह यूपी गोहत्या निवारण अधिनियम, 1955 (U.P. Prevention of Cow Slaughter Act, 1955) के तहत दर्ज एफआईआर की जांच में राज्य पुलिस की ढिलाई पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।कोर्ट ने यह भी कहा कि गोहत्या पर राज्यव्यापी प्रतिबंध के बावजूद ऐसे मामले बढ़ रहे हैं और जब भी ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज की जाती है तो यूपी पुलिस इसे लेकर लचीला रवैया अपनाती है।जस्टिस शेखर कुमार यादव की पीठ ने ये टिप्पणियां सैफ अली खान नामक व्यक्ति द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कीं,...

PMLA Act की धारा 8 | अभियुक्त को स्वयं दावेदार नहीं माना जा सकता, जिसने अच्छे विश्वास से काम किया और पर्याप्त नुकसान उठाया: एमपी हाईकोर्ट
PMLA Act की धारा 8 | अभियुक्त को स्वयं 'दावेदार' नहीं माना जा सकता, जिसने 'अच्छे विश्वास से काम किया और पर्याप्त नुकसान उठाया': एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी व्यक्ति पीएमएलए नियम, 2016 के नियम 2 (बी) और पीएमएलए, 2002 की धारा 8 (8) में उल्लिखित 'दावेदार' की परिभाषा में नहीं आते हैं।जस्टिस प्रेम नारायण सिंह ने विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए की धारा 8(8)) के आदेश रद्द करते हुए अभियुक्तों से संबंधित संपत्तियों को जारी किया, जो कथित तौर पर 'अपराध की आय' है। उन्होंने ने कहा कि इस तरह का आदेश स्पष्ट रूप से क़ानून में संबंधित प्रावधान का उल्लंघन करके पारित किया गया था।इंदौर में बैठी पीठ ने...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी के 15 साल तक फरार रहने पर आश्चर्य जताया, कहा- सीआरपीसी की धारा 83 के तहत संपत्ति की कुर्की महत्वपूर्ण घटक
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने आरोपी के 15 साल तक फरार रहने पर आश्चर्य जताया, कहा- सीआरपीसी की धारा 83 के तहत संपत्ति की कुर्की महत्वपूर्ण घटक

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से बचने पर सख्त रुख अपनाया, यह देखते हुए कि मुकदमे के दौरान आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए संपत्ति की कुर्की महत्वपूर्ण घटक है। साथ ही यह उन मामलों में भी प्रासंगिक है, जहां आरोपी को दोषी पाया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पीड़ित या राज्य को जुर्माना या मुआवजा देने का आदेश दिया गया।इस मामले में एक आरोपी पिछले 15 वर्षों से फरार था और उसने 2008 में पारित आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे घोषित अपराधी घोषित किया गया था।यह देखते हुए कि मामले के...

2018 में कॉलेजियम द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में मेरा ट्रांसफर मुझे परेशान करने के इरादे से किया गया था: रिटायर्ड चीफ जस्टिस प्रितिंकर दिवाकर
2018 में कॉलेजियम द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में मेरा ट्रांसफर मुझे परेशान करने के इरादे से किया गया था: रिटायर्ड चीफ जस्टिस प्रितिंकर दिवाकर

इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस जज प्रीतिंकर दिवाकर ने मंगलवार को कहा कि 2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाले कॉलेजियम द्वारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनका ट्रांसफर "गलत इरादे" से किया गया था और इसका उद्देश्य उन्हें "परेशान" करना था।जस्टिस दिवाकर ने कहा,"ऐसा लगता है कि मेरा ट्रांसफर ऑर्डर मुझे परेशान करने के गलत इरादे से जारी किया गया था। हालांकि, जैसा कि भाग्य ने चाहा, यह अभिशाप मेरे लिए वरदान में बदल गया, क्योंकि मुझे न्यायाधीशों के साथ-साथ बार के...

धारा 69 साक्ष्य अधिनियम के अनुसार एक रैंडम गवाह द्वारा यह साबित नहीं किया जा सकता है कि उसने प्रमाणित गवाह को इस पर हस्ताक्षर करते हुए देखा था: सुप्रीम कोर्ट
धारा 69 साक्ष्य अधिनियम के अनुसार एक रैंडम गवाह द्वारा यह साबित नहीं किया जा सकता है कि उसने प्रमाणित गवाह को इस पर हस्ताक्षर करते हुए देखा था: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (20.11.2023) को माना कि वसीयत की वास्तविकता साबित करने के लिए, एक रैंडम गवाह की जांच करना पर्याप्त नहीं है, जो दावा करता है कि उसने प्रमाणित गवाह को वसीयत में अपने हस्ताक्षर करते देखा है।साक्ष्य अधिनियम की धारा 69 उन मामलों में दस्तावेज़ की प्रामाणिकता साबित करने से संबंधित है, जहां कोई प्रमाणित गवाह नहीं मिलता है। उक्त प्रावधान के तहत, यह साबित किया जाना चाहिए कि साक्ष्य देने वाले एक गवाह का सत्यापन कम से कम उसकी लिखावट में है, और दस्तावेज़ को निष्पादित करने वाले व्यक्ति...

भ्रामक विज्ञापन बंद करें, झूठे इलाज का दावा करने वाले हर उत्पाद पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा: सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद से कहा
भ्रामक विज्ञापन बंद करें, झूठे इलाज का दावा करने वाले हर उत्पाद पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा: सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि आयुर्वेद से कहा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (21 नवंबर) को आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के खिलाफ भ्रामक दावे और विज्ञापन प्रकाशित करने के लिए पतंजलि आयुर्वेद को फटकार लगाई।भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर विचार करते हुए जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने बाबा रामदेव द्वारा सह-स्थापित कंपनी को कड़ी चेतावनी जारी की।जस्टिस अमानुल्लाह ने मौखिक रूप से कहा,“पतंजलि आयुर्वेद के ऐसे सभी झूठे और भ्रामक विज्ञापनों को तुरंत बंद करना होगा। न्यायालय ऐसे...

धारा 196 सीआरपीसी | मंजूरी के लिए आवेदन करने में अत्यधिक देरी को सीमा की गणना करते समय धारा 470 के तहत बाहर नहीं किया जा सकता: केरल हाईकोर्ट
धारा 196 सीआरपीसी | मंजूरी के लिए आवेदन करने में अत्यधिक देरी को सीमा की गणना करते समय धारा 470 के तहत बाहर नहीं किया जा सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि आईपीसी की धारा 153 (ए) (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए मंजूरी प्राप्त करने के लिए अनुरोध को दोबारा प्रस्तुत करने में लगभग पांच साल की देरी को स्वीकार नहीं किया जा सकता.जस्टिस पीजी अजितकुमार ने कहा, यह भी माना गया कि अभियोजन पक्ष यह तर्क नहीं दे सकता कि उस अवधि को सीआरपीसी की धारा 470(3) के तहत बाहर रखा जा सकता है।पुनरीक्षण याचिकाकर्ताओं पर धारा 143 (गैरकानूनी सभा के...

कानूनी औचित्य के बिना यूएपीए गिरफ्तारी अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन, धारा 43डी(5) के बावजूद ऐसे मामलों में आरोपी जमानत का हकदार: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट
कानूनी औचित्य के बिना यूएपीए गिरफ्तारी अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन, धारा 43डी(5) के बावजूद ऐसे मामलों में आरोपी जमानत का हकदार: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पत्रकार फहद शाह को जमानत देते हुए कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत 'कानूनी औचित्य' के बिना गिरफ्तारी संविधान के तहत समानता और स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन होगी।अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि भले ही जांच एजेंसी के पास आतंकवाद विरोधी कानून के तहत गिरफ्तारी करने की विवेकाधीन शक्तियां हैं, फिर भी गिरफ्तारी के बाद एक ठोस तर्क दिया जाना चाहिए, जिसमें आरोपी को जमानत पर रिहा करने पर समाज को होने वाले खतरे की...

दिल्ली दंगे: अदालत ने 22 शिकायतों को एक एफआईआर में जोड़ने के अवैध और अड़ियल रवैये के लिए दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई
दिल्ली दंगे: अदालत ने 22 शिकायतों को एक एफआईआर में जोड़ने के 'अवैध और अड़ियल रवैये' के लिए दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई

दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली दंगों के एक मामले में अवैध रूप से 22 शिकायतों को एक एफआईआर में जोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस की खिंचाई की और कहा कि वह जांच एजेंसी के ऐसे "अवैध दृष्टिकोण" में पक्ष नहीं बन सकती।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने कहा,“वर्तमान मानसिकता कानून के आदेश की अनदेखी करते हुए इन सभी अतिरिक्त शिकायतों की जांच एक ही एफआईआर के तहत करने के लिए अड़ियल दृष्टिकोण दिखाती है, वह भी इन सभी शिकायतों में आरोपी व्यक्तियों की मिलीभगत के बारे में आरोप पत्र के माध्यम से जांच के...

कर्नाटक हाईकोर्ट ने आरोपी द्वारा पीड़िता से शादी करने के आरोप में बलात्कार का मामला रद्द किया, कहा- वे आपसी सहमति से रिलेशनशिप में थे
कर्नाटक हाईकोर्ट ने आरोपी द्वारा पीड़िता से शादी करने के आरोप में बलात्कार का मामला रद्द किया, कहा- वे आपसी सहमति से रिलेशनशिप में थे

कर्नाटक हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार का मामला रद्द कर दिया, बशर्ते उसने पीड़िता के साथ विवाह किया हो, जिसने दावा किया कि जब वह नाबालिग थी तब वे सहमति से रिलेशनशिप में थे। अब वयस्क होने के बाद एक-दूसरे से शादी करने का इरादा रखते हैं।जस्टिस हेमंत चंदनगौदर की एकल न्यायाधीश पीठ ने चिक्कारेडप्पा द्वारा दायर याचिका स्वीकार कर ली और उन्हें एक महीने के भीतर पीड़िता से शादी करने और सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रजिस्ट्रेशन कराने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा...

गुजरात हाईकोर्ट ने जाली पासपोर्ट घोटाले में शामिल आरोपी को जमानत से इनकार किया, कहा वो फरार होने के लिए अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का फायदा उठा सकता है
गुजरात हाईकोर्ट ने जाली पासपोर्ट घोटाले में शामिल आरोपी को जमानत से इनकार किया, कहा वो फरार होने के लिए अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का फायदा उठा सकता है

हाल के एक फैसले में गुजरात हाईकोर्ट ने विभिन्न विदेशी देशों के लिए जाली पासपोर्ट और फर्जी वीज़ा स्टिकर बनाने से संबंधित आरोपों का सामना कर रहे एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार कर दिया।साथ ही इस संभावना पर बल दिया कि यदि जमानत पर रिहा किया जाता है, तो आरोपी कानूनी परिणामों से बचने के लिए इन संपर्कों का लाभ उठा सकता है। जस्टिस निर्जर एस देसाई ने कहा, "वर्तमान आवेदक के दुनिया भर में संपर्क हैं और इसलिए, अवैध रूप से लोगों को विदेश भेजने और उन्हें सफलतापूर्वक सीमा पार करने की अनुमति देने के बारे...

जब तक कि वैधानिक उल्लंघन प्रदर्शित न हो, नियोक्ता-कर्मचारी के बीच निजी विवाद रिट क्षेत्राधिकार के अधीन नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जब तक कि वैधानिक उल्लंघन प्रदर्शित न हो, नियोक्ता-कर्मचारी के बीच निजी विवाद रिट क्षेत्राधिकार के अधीन नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने रोज़गार से संबंधित विवादों में रिट क्षेत्राधिकार की सीमाओं पर प्रकाश डालते हुए हाल ही में देखा कि नियोक्ता और कर्मचारियों के बीच सभी विवाद रिट क्षेत्राधिकार के अधीन नहीं हैं।जस्टिस रजनेश ओसवाल की पीठ ने स्पष्ट किया कि नियोक्ता और कर्मचारी के बीच निजी विवाद नियोक्ता द्वारा किसी वैधानिक उल्लंघन का प्रदर्शन किए बिना सेवा के अनुबंध के लिए न्यायालय द्वारा रियायत की गारंटी नहीं देता है।ये टिप्पणियां ऐसे मामले में की गईं, जिसमें गैर-सरकारी संगठन/सोसाइटी द्वारा...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ 23 साल पुराने संवासिनी मामला रद्द करने से इनकार किया, कहा- वह ट्रायल को लम्बा खींच रहे हैं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस सांसद रणदीप सुरजेवाला के खिलाफ 23 साल पुराने संवासिनी मामला रद्द करने से इनकार किया, कहा- वह ट्रायल को लम्बा खींच रहे हैं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ्ते कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें कथित राजनीतिक आंदोलन, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के 23 साल पुराने मामले में आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई थी, जब सुरजेवाला युवा कांग्रेस नेता के रूप में कार्यरत थे।संदर्भ के लिए सुरजेवाला ने इस आधार पर अदालत का रुख किया कि मामले में एफआईआर वर्ष 2000 में दर्ज की गई थी, लेकिन मामला वर्ष 2022 में सत्र न्यायालय को सौंप दिया गया। इस प्रकार, मुकदमे में लंबी...

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कौशल विकास घोटाला मामले में टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू को नियमित जमानत दी
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कौशल विकास घोटाला मामले में टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू को नियमित जमानत दी

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपये के कौशल विकास मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और टीडीपी (तेलुगु देशम पार्टी) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू को नियमित जमानत दे दी।जस्टिस टी मल्लिकार्जुन राव ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री से यह निश्चित रूप से निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है कि गलत तरीके से की गई रकम तेलुगु देशम पार्टी के बैंक अकाउंट्स में भेज दी गई थी।कोर्ट ने कहा,"याचिकाकर्ता ए.37 को 9 सितंबर, 2023 को गिरफ्तार किया गया था और अदालत के आदेशों के बाद 31 अक्टूबर, 2023 को स्वास्थ्य के आधार पर अंतरिम...

नागरिकों की निजता और मौलिक अधिकारों के सम्मान के लिए पुलिस निगरानी रजिस्टर प्रविष्टियों को सीमित करे : जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
नागरिकों की निजता और मौलिक अधिकारों के सम्मान के लिए पुलिस निगरानी रजिस्टर प्रविष्टियों को सीमित करे : जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों से नागरिकों की मौलिक स्वतंत्रता का सम्मान करने, सतर्क और वैध निगरानी सुनिश्चित करने के लिए निगरानी रजिस्टर प्रविष्टियों की सख्ती से व्याख्या करने और उन्हें सीमित करने का आग्रह किया है।जस्टिस जावेद इकबाल वानी ने कहा कि निगरानी को व्यक्तिगत गरिमा से समझौता नहीं करना चाहिए और निगरानी रजिस्टर प्रविष्टियों और निगरानी कानूनों को नियंत्रित करने वाले नियमों को इन प्रक्रियाओं में पुलिस अधिकारियों द्वारा आवश्यक सावधानी और देखभाल को स्वीकार करना...

सरकार के आलोचकों को हिरासत में लेने की प्रवृत्ति प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून का दुरुपयोग: हाईकोर्ट ने कश्मीर पत्रकार की हिरासत रद्द की
'सरकार के आलोचकों को हिरासत में लेने की प्रवृत्ति प्रिवेंटिव डिटेंशन कानून का दुरुपयोग': हाईकोर्ट ने कश्मीर पत्रकार की हिरासत रद्द की

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने कश्मीरी पत्रकार सज्जाद अहमद डार की हिरासत रद्द करते हुए केवल सरकार के आलोचक होने के कारण व्यक्तियों को हिरासत में लेने की अधिकारियों की प्रवृत्ति की आलोचना की और इसे निवारक हिरासत कानून का दुरुपयोग बताया।सज्जाद गुल के नाम से लिखने वाले डार को हिरासत में लेने वाले अधिकारियों के आरोपों के आधार पर 16 जनवरी, 2022 से जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया कि उनके ट्वीट और बयान दुश्मनी को बढ़ावा देते हैं और राज्य की व्यवस्था और सुरक्षा के...

सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कथित तौर पर आरोपी को हिरासत से भागने में मदद करने वाले बर्खास्त पुलिसकर्मी को अंतरिम जमानत दी
सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कथित तौर पर आरोपी को हिरासत से भागने में मदद करने वाले बर्खास्त पुलिसकर्मी को अंतरिम जमानत दी

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने बर्खास्त सिपाही प्रीतपाल सिंह को अंतरिम जमानत दी, जिसने कथित तौर पर सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के आरोपी गैंगस्टर दीपक टीनू को पुलिस हिरासत से भागने में मदद की थी। टीनू लॉरेंस बिश्नोई का कथित सहयोगी है जिसने हत्या के लिए शार्प शूटरों की व्यवस्था करने में मदद की थी। आरोप है कि सीआईए की हिरासत में रहने के दौरान दीपक तत्कालीन सीआईए सब-इंस्पेक्टर प्रीतपाल सिंह की मदद से फरार हो गया था।इस प्रकार सिंह पर अक्टूबर 2022 में जिला मानसा में आईपीसी की धारा 222, 224, 225-ए, 212,...

वसीयत पर तभी संदेह किया जा सकता है जब कटिंग और ओवरराइटिंग द्वारा महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएं: दिल्ली हाईकोर्ट
वसीयत पर तभी संदेह किया जा सकता है जब कटिंग और ओवरराइटिंग द्वारा महत्वपूर्ण बदलाव किए जाएं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि केवल जहां यह पाया जाता है कि वसीयत में कुछ काट-छांट और ओवरराइटिंग करके महत्वपूर्ण बदलाव किए जाने की मांग की गई है, तभी अदालत यह निष्कर्ष निकाल सकती है कि वसीयत संदिग्ध है और उसे खारिज कर दिया जाना चाहिए।जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि वसीयत में कटिंग और ओवरराइटिंग का प्रभाव हमेशा प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।अदालत ने कहा कि वसीयत में ऐसी काट-छांट और ओवरराइटिंग के मामलों में प्रभाव की जांच की जानी चाहिए, भले ही ऐसे बदलाव उत्तराधिकार अधिनियम की...

सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पीड़िता का बयान पुष्टि के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, दोषसिद्धि का एकमात्र आधार नहीं हो सकता: पटना हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को बरी किया
सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पीड़िता का बयान पुष्टि के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, दोषसिद्धि का एकमात्र आधार नहीं हो सकता: पटना हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को बरी किया

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में बलात्कार के आरोपी को यह कहते हुए बरी कर दिया कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत दर्ज पीड़िता का बयान सजा का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह और जस्टिस गुन्नू अनुपमा चक्रवर्ती की खंडपीठ ने कहा,“हालांकि, आरोपी यौन कार्य करने में सक्षम है, लेकिन वह अपने आप में आरोपित अपराधों के लिए अपराध साबित नहीं कर सकता है। मेडिकल साक्ष्य के साथ पुष्टि किए गए ठोस मौखिक साक्ष्य के अभाव में यह माना जा सकता है कि अपीलकर्ता को आरोपित अपराधों के लिए...