मुख्य सुर्खियां
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तहत मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए पीएचडी की आवश्यकता नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के तहत एक मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर पद पर पदोन्नति के लिए पीएचडी की आवश्यकता नहीं है।दरअसल इलाहाबाद उच्च न्यायालय विश्वविद्यालय द्वारा संशोधित अध्यादेश (कार्यकारी) के खंड 12 (19) की व्याख्या करते हुए, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) द्वारा जो दवा के संकाय के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम योग्यता निर्धारित करता है, कहा गया कि इसकी पूर्ति अध्यादेश (कार्यकारी) में निर्धारित 'अन्य स्थितियों' में क्लॉज 12 (5) शामिल होगा जिसमें प्रोफेसर पद पर...
पक्षकार को उसके वकील द्वारा गलत सलाह के लिए पीड़ित होना पडे़गा, उसके लिए कोई उदारता नहीं बरती जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
एक पक्षकार ये आवेदन दाखिल नहीं कर सकता कि उसके वकील ने उसे सही कानूनी सलाह नहीं दी इसलिए उसे पीड़ित नहीं होना चाहिए, अदालत ने कहा। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक वादी ये नहीं कह सकता कि वो मुकदमा दाखिल ना कर पाया क्योंकि उसके वकील ने उसे सही कानूनी सलाह नहीं दी थी इसलिए उसे प्रतिकूल आदेशों से पीड़ित नहीं किया जाना चाहिए।उच्च न्यायालय के सामने एक ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक अपील में, जिसमें टाइटल की घोषणा और अनुबंध के विशिष्ट प्रदर्शन की डिक्री दी गई थी, अपीलार्थी द्वारा अंतरिम...
कार्यपालक अधिकारियों से तदर्थ जज बने लोग न्यायपालिका में स्वतः नहीं लिए जा सकते : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
एक महत्त्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कार्यपालक अधिकारियों (एग्जीक्यूटिव ऑफिसर) को स्वतः ही न्यायिक सेवाओं में सिर्फ इसलिए नहीं लिया जाएगा कि वे तदर्थ जज के रूप में कार्य कर रहे हैं।न्यायमूर्ति एके सिकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने गौहाटी हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए यह फैसला दिया।वर्तमान मामले में अतिरिक्त उप आयुक्तों को अतरिक्त सत्र जजों का अधिकार देकर फास्ट ट्रैक अदालतों में जजों के रूप में तदर्थ नियुक्ति की गई थी। कुछ वर्षों के बाद इन लोगों ने अतिरिक्त सत्र...
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के कहा, फांसी पर लटकाना प्राणघातक सुई देकर मारने या गोली मारने से ज्यादा सुरक्षित तरीका [प्रति-शपथपत्र पढ़ें]
प्राणघातक सूई देकर मौत की नींद सुलाना ज्यादा वहशियाना केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मौत की सजा पाए अभियुक्तों को फांसी पर लटकाना किसी अन्य तरीके से ज्यादा बेहतर है। केंद्र ने कहा कि प्राणघातक सुई देकर या फायरिंग स्क्वाड द्वारा गोली से उड़ाना ज्यादा पाशविक है।केंद्र ने यह भी कहा है कि मौत की सजा विरलों में विरल मामले में दिया जाता है और अगर उसको सजा पर अमल की प्रक्रिया को अगर सरल किया गया तो अपराधियों में डर पैदा करने का इसका महत्त्व समाप्त हो जाएगा।सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा...
केंद्र ने कॉलेजियम की अनुशंसा को बदला, अतरिक्त जज को स्थाई करने के बजाय उनके कार्यकाल की अवधि बढ़ा दी
केंद्र और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के बीच चल रही खींचतान थोड़ी और बढ़ गई है। अब केंद्र ने एक पक्षीय रूप से कॉलेजियम की अनुशंसा को बदल दिया है। केंद्र ने अतरिक्त जज को स्थाई बनाने के सुझाव की जगह उनके कार्यकाल को बढ़ा दिया है।19 अप्रैल को जारी एक अधिसूचना में केंद्र ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अतरिक्त जज न्यायमूर्ति रामेन्द्र जैन की कार्य अवधि को छह महीने के लिए बढ़ा दिया।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की कॉलेजियम ने इस वर्ष मार्च में न्यायमूर्ति जैन को स्थाई...
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के सामने पेश होने के बारे में जारी होने वाले नोटिस को लेकर दिशानिर्देश जारी किया [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में ऐसे दिशानिर्देश जारी किए हैं जो सीआरपीसी की धारा 41A के तहत पुलिस अधिकारियों के समक्ष पेशी की सूचना के बारे में है।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ये दिशानिर्देश पुलिस महकमे के कार्यकलाप में पारदर्शिता लाने और संदिग्ध आरोपी व्यक्ति और उन लोगों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए जारी किए जा रहे हैं जिन्हें पुलिस के समक्ष पेश होना है।पीठ ने स्पष्ट किया कि इस प्रक्रिया का सीआरपीसी की धारा 91, 160 और 175 पर अमल के दौरान आवश्यक रूप से...
भगोड़े आर्थिक अपराधियों से संबंधित अध्यादेश, 2018 और इसकी मुख्य बातें [अध्यादेश पढ़ें]
एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने भगोड़े आर्थिक अपराधी अद्यादेश 2018 जारी कर दिया है। यह अध्यादेश आर्थिक अपराधियों को क़ानून से बच निकलने का मौक़ा नही देने के लिए लाया गया है। शनिवार को राष्ट्रपति की स्वीकृतिक के बाद इसको लागू कर दिया गया।मुख्य विशेषताएं “भगोड़े आर्थिक अपराधी” का मतलब ऐसे व्यक्ति से है जिसके खिलाफ भारत के किसी भी कोर्ट द्वारा अनुसूचित अपराधों के तहत नोटिस जारी किया गया है जिसने— (i) आपराधिक दंड से बचने के लिए भारत छोड़ दिया है; या(ii) विदेश में बैठा है और भारत आकर अपने...
सुप्रीम कोर्ट ने दस राज्यों व एक UT को लोकायुक्त की नियुक्ति में तेजी लाने को कहा था, राज्यों ने देरी के लिए हलफनामे दाखिल किए (आदेश पढ़ें)
न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की पीठ द्वारा 23 मार्च को लोकायुक्त की नियुक्ति में देरी के बारे में पूछे जाने सवाल कि लोकायुक्त के नियुक्ति में देरी क्यों हुई, इस पर दस राज्यों व एक केंद्रशासित प्रदेश ने हलफनामे के जरिए प्रगति के बारे में जानकारी दी है।मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, उड़ीसा, मणिपुर, तेलंगाना और अरुणाचल प्रदेश से पीठ ने प्रक्रिया को तेज करने के लिए कहा था क्योंकि उनके वकीलों ने कहा था, "प्रक्रिया चालू है।”वहीं जम्मू-कश्मीर ने कहा कि वह नियुक्ति पर विचार कर रहा...
प्रो.शमनाद बशीर ने सुप्रीम कोर्ट से कहा : सीएलएटी को बार काउंसिल को सौंपना हजारों छात्रों को तवे से निकालकर आग में झोंकना होगा
बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया के यह कहने पर कि वह कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (सीएलएटी) आयोजित कर सकता है, इस मामले में याचिकाकर्ता प्रो. शमनाद बशीर ने कहा कि ऐसा करना छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करना होगा। उन्होंने कहा कि यह वैसे ही होगा जैसे किसी को तवे से निकालकर आग में झोंक दिया जाए।सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान बीसीआई के वकील अर्धेन्दुमौली कुमार प्रसाद ने कहा कि सीएलएटी के आयोजन के लिए बीसीआई बेहतर संसथान है। उन्होंने कहा कि बीसीआई की हमेशा आलोचना की जाती है पर उसे कभी भी मौक़ा नहीं दिया...
सेवानिवृत्ति की उम्र में अस्थाई वृद्धि को एकपक्षीय रूप से वापस लेना गैरकानूनी : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने पारादीप फॉस्फेट्स लिमिटेड बनाम उड़ीसा राज्य मामले में कहा कि कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में बढ़ोतरी के निर्णय को एकपक्षीय रूप से वापस लेना अधिनियम की धारा 9A का उल्लंघन है। यह वृद्धि अस्थाई प्रकृति का था।मामलासरकार ने 19 मई 1998 को केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र को 58 से बढ़ाकर 60 करने का निर्णय लिया था और यह दलील दी गई थी कि इससे कंपनियों को अपना घाटा कम करने में मदद मिलेगी।बाद में, सरकार ने 22 अगस्त 2001 को इस निर्णय को वापस लेने का निर्णय...
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल आधार पर मरणासन्न रूप से बीमार विचाराधीन कैदी को जमानत दी [आदेश पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बीमार विचाराधीन कैदी को जमानत दी है जिसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 420, 467, 468, 471 और 120 बी के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया था।न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर बानुमति की पीठ के सामने 77 वर्षीय व्यक्ति का केस था जो प्राकृतिक दिनचर्या करने में भी असमर्थ है और विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है। याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील अंजना प्रकाश और वकील नमित सक्सेना ने किया था। याचिकाकर्ता की तरफ से यह तर्क दिया गया कि अदालत की एक संविधान पीठ...
वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह को फॉर्च्यून ने विश्व के 50 महानतम नेताओं की सूची में शामिल किया
जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया मामले में उनकी दलीलों के खिलाफ कुछ कठोर टिप्पणियां की, तभी भारत की पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह को फॉर्च्यून पत्रिका ने 2018 के विश्व के 50 महानतम नेताओं में से एक के रूप में नामित किया है। जयसिंह ने बैंगलोर विश्वविद्यालय से 1962 में अपनी बैचलर ऑफ आर्ट की डिग्री पूरी की और बॉम्बे विश्वविद्यालय से एलएलएम पूरा करने के लिए चली गईं। उन्होंने 1960 के दशक में अभ्यास करना शुरू किया और तब से वो कई मामलों में पहला क्रेडिट पा चुकी हैं।उन्हें...
दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला : माँ-बाप से कहा, पसंद के अधिकार के हनन और उसको जबरन मानसिक अस्पताल भेजने के एवज में बेटी को मुआवजा दें [निर्णय पढ़ें]
हादिया मामले में फैसले के बाद एक और बहुत ही अहम फैसला आया है। यह फैसला दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाया है। कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया है कि लोगों के पसंद के अधिकार और इसलिए जीवन, स्वतंत्रता, निजता और गरिमा को ख़तरा उस व्यक्ति के अपने माँ-बाप से आता है। कोर्ट ने एक लड़की के माँ-बाप से कहा है कि वह अपनी बेटी को तीन लाख रुपए का मुआवजा दे जिसको उसने संगीत के शिक्षक के घर से उठाया था और उसको एक दिन और एक रात मानसिक अस्पताल में गुजारने के लिए बाध्य किया जो कि एमएचए की धारा 19 और अनुच्छेद 21 का साफ़...
लोक अदालत के फैसले के खिलाफ अपील नहीं; बहुत सीमित मामलों में ही रिट याचिका दायर करने की अनुमति : इलाहाबाद हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा है कि लोक अदालत के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती और संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत रिट याचिका दायर करने का अवसर भी सीमित है।वर्तमान मामले में एक महिला ने लोक अदालत द्वारा तलाक के एक फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। महिला ने कहा कि यह फैसला देते हुए फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 और विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।न्यायमूर्ति अजय लाम्बा और न्यायमूर्ति अनंत कुमार की पीठ ने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम,...
बैंक के लिए क्रेडिट कार्ड का बकाया वसूलना कोई भड़काऊ काम नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि बैंकों की ओर से क्रेडिट कार्ड का बकाया वसूलना कोई भड़काऊ कार्य नहीं है।न्यायमूर्ति पीडी नाइक ने रायगड के सत्र न्यायाधीश के इस बारे में आदेश को ख़ारिज कर दिया। सत्र न्यायाधीश ने आरोपी द्वारा दिए गए आवेदन को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने आरोपी बैंक कर्मचारी एआर सतीश की अपील को स्वीकार कर लिया।मामले की पृष्ठभूमिएफआईआर भारत पेट्रोलियम में कार्य करने वाले शंकर देवर ने दर्ज कराया था। उसके पास तीन अलग अलग बैंकों का क्रेडिट कार्ड था जिसका प्रयोग वह सामान खरीदने के लिए करता...
आरोपी का दूसरी शादी करने की बात सिर्फ मान लेना बहुविवाह मामले को साबित करने का साक्ष्य नहीं हो सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि आरोपी द्वारा दूसरे विवाह की बात सिर्फ मान लेना से ये साबित नहीं होता कि उसने बहुविवाह का अपराध किया है।द्विविवाह (आईपीसी की धारा 494 ) के तहत दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की अपील को अनुमति देते हुए न्यायमूर्ति एएस गडकरी ने कहा कि रिकॉर्ड के आधार पर कोई सबूत नहीं है कि आरोपी ने कानून के जनादेश के अनुसार आवश्यक और आवश्यक समारोहों के अनुसरण में दूसरा विवाह किया।इस मामले में आदमी ने अपनी पहली पत्नी को छोड़ दिया और फिर दूसरी महिला से शादी की जिसने बाद में आत्महत्या कर ली। उस...
प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 6(2) के तहत पिछले प्रभाव से नोटिस का प्रावधान नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने एससीएम सोलिफर्ट लिमिटेड बनाम भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग मामले में कहा कि प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 6(2) के तहत पिछली प्रभाव से कोई सूचना नहीं दी जा सकती और ऐसा किया जाता है तो तो यह इस अधिनियम का उल्लंघन होगा।वर्तमान मामले में शेयरों की पहली और दूसरी खरीद के बारे में नियमतः नहीं बताने पर कंपनी को दंडित किया। कंपनी ने कहा कि प्रस्तावित संयोजन की अनुमति मिलने के बाद उस पर दंड नहीं लगाया जाना चाहिए था और अगर नियमों का कोई उल्लंघन हुआ है तो वह तकनीकी था और ऐसा जानबूझकर नहीं किया...
सामुदायिक सेवा के नाम पर बलात्कार के आरोपी को जमानत देना गैर जरूरी : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाई कोर्ट ने बलात्कार के आरोपी 26 साल के एक युवक को निचली अदालत से मिली जमानत को निरस्त कर दिया। इस युवक ने वंचित तबके के बच्चों को पढ़ाने जैसे सामुदायिक सेवा का प्रस्ताव दिया था और कोर्ट ने इस आधार पर उसे जमानत दे दी थी।न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने निचली अदालत के जमानत देने के आदेश को खारिज कर दिया और कहा कि सत्र न्यायाधीश ने खुद ही कहा था कि इस स्थिति में उसको जमानत नहीं दिया जा सकता।न्यायमूर्ति सचदेवा ने 5 फरवरी 2018 को अपने आदेश में कहा था कि इस समय आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती पर बाद...
सरकारी क्षेत्र की कंपनियों में विधि अधिकारी के लिए अनुभव आवश्यक होना मनमाना नहीं : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाई कोर्ट ने गत सप्ताह अपने फैसले में कहा कि सरकारी/अर्ध सरकारी/सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों/राष्ट्रीयकृत बैंकों/बीएसई या एनएसई में अधिसूचित कंपनी में विधि अधिकारी की नौकरी के लिए एक साल के अनुभव की आवश्यक शर्त मनमाना नहीं है और यह अवसरों की समानता के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है।न्यायमूर्ति सुनील गौड़ ने कहा, कहा, “...अनुभव से उपरोक्त कंपनियों और संस्थाओं में विधि अधिकारी के रूप में उसके कार्य को आसान बनाता है। ऐसा नहीं है कि वकील इससे पूरी तरह अलग हैं। विज्ञापन के अनुसार, एक वकील के रूप...
उड़ान में सुरक्षा संबंधी विनियमनों की अनदेखी करने पर जेट एयरवेज के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका; नोटिस जारी
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को एक पत्रकार की जनहित याचिका पर केंद्र, नागर विमानन निदेशालय (डीजीसीए) और जेट एयरवेज को नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया है कि जेट एयरवेज अनधिकृत लोगों विमान चालक दल के सदस्य के रूप में एक “सामान्य घोषणा” (जीडी) के तहत विमान में जाने की इजाजत देकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय उड़ान सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर रहा है।कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और सी हरि शंकर की पीठ ने दिल्ली के इस पत्रकार रजनीश कपूर की याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।याचिका में...

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![केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के कहा, फांसी पर लटकाना प्राणघातक सुई देकर मारने या गोली मारने से ज्यादा सुरक्षित तरीका [प्रति-शपथपत्र पढ़ें] केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के कहा, फांसी पर लटकाना प्राणघातक सुई देकर मारने या गोली मारने से ज्यादा सुरक्षित तरीका [प्रति-शपथपत्र पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/04/Death-Penalty-LiveLaw.jpg)

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![भगोड़े आर्थिक अपराधियों से संबंधित अध्यादेश, 2018 और इसकी मुख्य बातें [अध्यादेश पढ़ें] भगोड़े आर्थिक अपराधियों से संबंधित अध्यादेश, 2018 और इसकी मुख्य बातें [अध्यादेश पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/Nirav-Modi-Mehul-Chosky-Vijay-Mallya-Lalit-Modi.jpg)


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![बैंक के लिए क्रेडिट कार्ड का बकाया वसूलना कोई भड़काऊ काम नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें] बैंक के लिए क्रेडिट कार्ड का बकाया वसूलना कोई भड़काऊ काम नहीं : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/bombay-hc.png)
![आरोपी का दूसरी शादी करने की बात सिर्फ मान लेना बहुविवाह मामले को साबित करने का साक्ष्य नहीं हो सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें] आरोपी का दूसरी शादी करने की बात सिर्फ मान लेना बहुविवाह मामले को साबित करने का साक्ष्य नहीं हो सकता : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/08/Bombay-Hc-6.jpg)
![प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 6(2) के तहत पिछले प्रभाव से नोटिस का प्रावधान नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 6(2) के तहत पिछले प्रभाव से नोटिस का प्रावधान नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/04/supreme-court-of-india-2.jpg)
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