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भगोड़े आर्थिक अपराधियों से संबंधित अध्यादेश, 2018 और इसकी मुख्य बातें [अध्यादेश पढ़ें]

LiveLaw News Network
23 April 2018 5:52 PM GMT
भगोड़े आर्थिक अपराधियों से संबंधित अध्यादेश, 2018 और इसकी मुख्य बातें [अध्यादेश पढ़ें]
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एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने भगोड़े आर्थिक अपराधी अद्यादेश 2018  जारी कर दिया है। यह अध्यादेश आर्थिक अपराधियों को क़ानून से बच निकलने का मौक़ा नही देने के लिए लाया गया है। शनिवार को राष्ट्रपति की स्वीकृतिक के बाद इसको लागू कर दिया गया।

मुख्य विशेषताएं




  • “भगोड़े आर्थिक अपराधी” का मतलब ऐसे व्यक्ति से है जिसके खिलाफ भारत के किसी भी कोर्ट द्वारा अनुसूचित अपराधों के तहत नोटिस जारी किया गया है जिसने— (i) आपराधिक दंड से बचने के लिए भारत छोड़ दिया है; या(ii) विदेश में बैठा है और भारत आकर अपने खिलाफ आपराधिक सुनवाई का सामना करने से इनकार कर रहा है;

  • “अपराध से अर्जित धन” का मतलब ऐसी किसी भी संपत्ति से है जो प्रत्यक्ष या प्ररोक्ष रूप से ऐसे व्यक्ति द्वारा अनुसूचित अपराधों से सम्बद्ध आपराधिक गतिविधियों से अर्जित किया गया है, या इस तरह की किसी संपत्ति की कीमत या देश के बाहर स्थित इस तरह की संपत्ति जिसे देश के बाहर रखा गया है तो देश के अंदर या विदेश में उसके मूल्य के बराबर कीमत की संपत्ति;

  • “अनुसूचित अपराध” का मतलब ऐसे अपराध से है जिसका वर्णन अनुसूचि में है और इस तरह के अपराधों में शामिल कुल संपत्ति की कीमत अगर 100 करोड़ या अधिक है;

  • “विशेष अदालत” का अर्थ ऐसी सत्र अदालत से है जिसे प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लौंडरिंग एक्ट, 2002 के अधीन विशेष अदालत का दर्जा दिया गया है।

  • “निदेशक” और “उप निदेशक” का मतलब मनी लौंडरिंग एक्ट, 2002 के अधीन नियुक्त निदेशक/उप निदेशक।


भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया




  • निदेशक की अनुमति से निदेशक/अधिकारी जो कि उप निदेशक स्तर से कम नहीं है, विशेष अदालत को में आवेदन कर किसी व्यक्ति को भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करेगा

  • विशेष अदालत इस व्यक्ति को नोटिस जारी करेगा

  • अगर यह व्यक्ति खुद विशेष अदालत में पेश होता है तो प्रक्रिया समाप्त हो जाती है। अगर कोई वकील इस व्यक्ति के बदले पेश होता है तो अदालत उसको अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दे सकता है। अगर उसकी ओर से कोई पेश नहीं होता तो अदालत आवेदन पर सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।

  • अगर विशेष अदालत को यह विश्वास हो जाता है कि वह व्यक्ति एक भगौड़ा आर्थिक अपराधी है, तो वह एक आदेश जारी कर उस व्यक्ति को भगौड़ा आर्थिक अपराधीघोषित कर सकता है और वह लिखित में इसका कारण बताता है।


भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किए जाने के परिणाम




  • अदालत यह आदेश दे सकती है कि इनमें से कोई संपत्ति केंद्र सरकार जब्त कर सकती है ­— (a) अपराध के जरिये भारत या विदेश में हासिल संपत्ति भले ही वह भगौड़ा अपराधी उस संपत्ति का मालिक है या नहीं; और(b) भगौड़ा अपराधी की स्वामित्व वाली भारत या विदेश में स्थित अन्य कोई बेनामी संपत्ति।

  • कोई भी भारतीय अदालत या अधिकरण किसी भी दीवानी प्रक्रिया के तहत इस तरह का व्यक्ति दीवानी दावे पेश नहीं कर सकता है, और

  • भारत की कोई अदालत या अधिकरण किसी भी तरह की दीवानी सिविल प्रक्रिया के तहत किसी भी कंपनी या लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप फर्म को किसी दीवानी दावे पेश करने से रोक सकता है अगर उस कंपनी या लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप की ओर से दावा पेश करने वाला वह व्यक्ति जिसकी प्रबंधन में हिस्सेदारी है या जो प्रमुख व्यक्ति या कंपनी का बड़ा शेयरधारक है जिसे भगौड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जा चुका है।


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