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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के कहा, फांसी पर लटकाना प्राणघातक सुई देकर मारने या गोली मारने से ज्यादा सुरक्षित तरीका [प्रति-शपथपत्र पढ़ें]

LiveLaw News Network
24 April 2018 3:29 PM GMT
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के कहा, फांसी पर लटकाना प्राणघातक सुई देकर मारने या गोली मारने से ज्यादा सुरक्षित तरीका [प्रति-शपथपत्र पढ़ें]
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प्राणघातक सूई देकर मौत की नींद सुलाना ज्यादा वहशियाना

 केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मौत की सजा पाए अभियुक्तों को फांसी पर लटकाना किसी अन्य तरीके से ज्यादा बेहतर है। केंद्र ने कहा कि प्राणघातक सुई देकर या फायरिंग स्क्वाड द्वारा गोली से उड़ाना ज्यादा पाशविक है।

केंद्र ने यह भी कहा है कि मौत की सजा विरलों में विरल मामले में दिया जाता है और अगर उसको सजा पर अमल की प्रक्रिया को अगर सरल किया गया तो अपराधियों में डर पैदा करने का इसका महत्त्व समाप्त हो जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऋषि मल्होत्रा द्वारा दायर जनहित याचिका पर दायर अपने जवाब में केंद्र ने यह बात कही है। याचिका में कहा गया था कि रस्सी के द्वारा फांसी पर लटकाने के तरीके को बंद किया जाए क्योंकि इस तरीके से मृत्यु तत्काल नहीं होती और यह गरिमा से मौत के खिलाफ है।

मल्होत्रा ने कहा था कि सीआरपीसी की धारा 354(5) के प्रावधानों को क़ानून के बाहर घोषित कर देना चाहिए क्योंकि यह अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है।

केंद्र ने इस बारे में नोटिस दिए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट को अपने हलफनामे में बताया है कि यह पूरी तरह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र का मामला है और इस बारे में कोई जनहित याचिका स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थी।

किसी दोषी को सजा किस तरीके से की जाएगी इसके बारे में सीआरपीसी की धारा 354(5) में बताया गया है। और इसमें कहा गया है कि मौत की सजा मिलने के बाद किसी व्यक्ति को तब तक गर्दन में फांसी लगाकर लटकाया जाए जबतक कि वह मर न जाए।

केंद्र के हलफनामे में दीना बनाम भारत संघ मामले का हवाला दिया गया है जिसमें कोर्ट ने कहा है कि धारा 354(5) के प्रावधान अनुच्छेद 21 के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करते। इस मामले में मौत की सजा को अन्य तरीकों पर भी गौर किया गया था।

 रस्सी से फांसी देने को -

-आसान, शीघ्र मौत और साधारण बताया गया है।

-दुर्घटना की आशंका सुरक्षित रूप से टाला जा सकता है।

-मृत्यु में विलंब नहीं।

केंद्र के हलफनामे यह भी कहा गया है कि अगर फांसी से लटकाकर मौत की सजा नहीं दी गई और किसी अन्य तरीके को अपनाने को कहा गया तो किसी विकल्प के अभाव में वर्तमान क़ानून निष्प्रभावी हो जाएगा और इस तरह एक रिक्ति पैदा होगी जिसकी वजह से मौत की सजा पर रोक लगानी पड़ेगी।


 
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