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पक्षकार को उसके वकील द्वारा गलत सलाह के लिए पीड़ित होना पडे़गा, उसके लिए कोई उदारता नहीं बरती जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
24 April 2018 4:30 PM GMT
पक्षकार को उसके वकील द्वारा गलत सलाह के लिए पीड़ित होना पडे़गा, उसके लिए कोई उदारता नहीं बरती जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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एक पक्षकार ये आवेदन दाखिल नहीं कर सकता कि उसके वकील ने उसे सही कानूनी सलाह नहीं दी  इसलिए उसे पीड़ित नहीं होना चाहिए, अदालत ने कहा।

 मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा है कि एक वादी ये नहीं कह सकता कि वो मुकदमा दाखिल ना कर पाया क्योंकि उसके वकील ने उसे सही कानूनी सलाह नहीं दी थी इसलिए उसे प्रतिकूल आदेशों से पीड़ित नहीं किया जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय के सामने एक ट्रायल कोर्ट  के फैसले के खिलाफ एक अपील में, जिसमें टाइटल की घोषणा और अनुबंध के विशिष्ट प्रदर्शन की डिक्री दी गई थी, अपीलार्थी द्वारा अंतरिम आवेदन दाखिल कर इसे हस्तक्षेप विशेषज्ञ को भेजने का आग्रह किया गया  के लिए एक  गया था ताकि हस्ताक्षर की पुष्टि हो सके।

 स्पष्टीकरण के रूप में कि ट्रायल कोर्ट के सामने क्यों ऐसा कोई आवेदन दायर नहीं किया गया, अपीलकर्ता के वकील ने अदालत से कहा कि अपीलकर्ता देहाती ग्रामीण हैं और वे कानून की तकनीकीताओं के बारे में नहीं जानते हैं  और तब उनके वकील द्वारा इसकी सलाह नहीं दी गई थी। सही सलाह देने में वकील के विलंब के कारण मुकदमेबाजी के लिए पक्षकार को पीड़ित नहीं होना चाहिए, अपीलकर्ता के वकील ने अदालत के समक्ष दलील दी।

उस दलील को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया ने कहा: "वकील खुद को कानून के ज्ञान रखने वाले पेशेवर होने का दावा करते हैं। वे कानून स्नातक हैं। वे दावा नहीं कर सकते कि उन्हें कानून का ज्ञान नहीं था। वकील यह नहीं कह सकते कि पक्षकार को पीड़ित नहीं होना चाहिए क्योंकि वे तकनीकी रूप से सक्षम नहीं थे। "

अदालत ने यह भी देखा कि चूंकि मुकदमेबाजी में दो पक्ष हैं, यदि वकील की गलती को अनदेखा करके बहुत ही नरम रुख अपनाया जाता है, तो यह हमेशा अन्य पक्षकार के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।”

अगर एक पक्षकार का मानना ​​है कि उसे उचित कानूनी सलाह नहीं देकर उसके वकील द्वारा धोखा दिया गया है, तो कहा गया पक्षकार

 अपने वकील के खिलाफ देश के कानून के तहत उपाय कर सकता है लेकिन अन्य पक्षकार केहित के नुकसान को देखते हुए एक पक्षकार के प्रति   कोई उदारता बरती नहीं जा सकती क्योंकि  इस तरह के मुकदमे से जुड़े वकील व्यावसायिक रूप से सक्षम नहीं थे।

अदालत ने यह भी देखा कि एक वकील की पेशेवर अक्षमता को नहीं माना जा सकता और यदि वकील ने जानबूझकर फैसला किया था कि ट्रायल के चरण में अर्जी दाखिल नहीं करना है तो   तो ऐसे में वकील को कोई दोष नहीं दिया जा सकता।

"अगर किसी व्यक्ति ने कम ज्ञान रखने वाले वकील को शामिल करने का फैसला किया है, तो यह पक्षकार है जिसे अपनी पसंद के लिए पीड़ित होना है। एक पक्षकार ये आवेदन दाखिल नहीं कर सकता कि उसके वकील ने उसे सही कानूनी सलाह नहीं दी  इसलिए उसे पीड़ित नहीं होना चाहिए," अदालत ने कहा।


 
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