मुख्य सुर्खियां
ट्रायल शुरू होने के बाद भी मामले में आगे की जांच की जा सकती है, अदालत की मंज़ूरी की आवश्यकता नहीं, केरल हाईकोर्ट का फैसला
केरल हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जांच अधिकारी के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह आगे की जांच करने के लिए अदालत से कोई अनुमति ले। न्यायमूर्ति आर नारायण पिशराडी ने यह भी देखा कि मामले का ट्रायल शुरू होने के बाद आगे की जांच करने के लिए जांच अधिकारी की शक्ति पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (8) और राम चौधरी बनाम राज्य AIR 2009 SC 2308 के फैसले का हवाला देते हुए कहा। "अदालत से किसी भी अनुमति के बिना भी, जांच अधिकारी के पास आगे की जांच करने की...
जब खनिज और खनन अधनियम के तहत अपराध को माफ़ कर दिया गया है तो आईपीसी की धारा 379 के तहत अभियोजन नहीं टिकेगा : कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर खनिज और खान (विकास और विनियमन) (एमएमआरडी) अधिनियम के तहत अगर अपराध को जुर्माना वसूलकर माफ़ कर दिया गया है तो आईपीसी की धारा 379 के तहत उसका अभियोजन अदालत में नहीं टिकेगा। न्यायमूर्ति पीबी बजंथ्री ने सुरेश के और फ्रंसिक @मंजुनाथ जोसफ के खिलाफ कदाबा पुलिस थाने में खनिज और खान (विकास और विनियमन) अधिनियम की धारा 4(1) और 21(A) और कर्नाटक गौण खनिज छूट नियम के नियम 31(R), 42 और आईपीसी की धारा 379 के तहत दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया। क्या है मामला याचिकाकर्ता के...
राजीव गांधी हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट ने MDMA से जांच की नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी साजिश की जांच कर रही मल्टी डिस्पलेनेरी मॉनिटरिंग अथॉरिटी ( MDMA) से नई स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। पीठ ने कहा है कि एजेंसी चार हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। पीठ ने ये आदेश दोषी एजी पेरारीवलन की आजीवन कारावास की सजा के निलंबन की याचिका पर दिया है। पेरारीवलन ने दायर की थी याचिका दरअसल पेरारीवलन ने अपनी याचिका में कहा है कि जब तक मल्टी डिस्पलेनेरी मॉनिटरिंग अथॉरिटी ( MDMA) की जांच पूरी नहीं होती उनकी सजा निलंबित की...
पुलिस मुठभेड़ की जांच के लिए क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश
हाल ही में केरल के अट्टाप्पडी जंगल में चार माओवादियों को मार गिराये जाने की घटना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि ऐसे आरोप लगाये जा रहे हैं कि पुलिस ने इन माओवादियों को फर्जी मुठभेड़ में मार गिराया है। कथित मुठभेड़ में मारे गये दो व्यक्तियों के परिजनों ने त्रिशुर की सत्र अदालत में याचिका दायर करके कहा है कि पुलिस ने मुठभेड़ में हुई मौत की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशानिर्देशों का अनुसरण नहीं किया है। शीर्ष अदालत ने 2014 में 'पीयूसीएल बनाम महाराष्ट्र सरकार' के मामले में पुलिस...
क्या हैं महिलाओं के लिए वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर? कैसे कर रहे हैं काम
- पलक जावा एक महिला द्वारा किसी भी तरह की हिंसा झेलने पर उसे तुरंत कई तरह की सहायता की जरूरत पड़ सकती है, जैसे मेडिकल सपोर्ट, कानूनी सहायता, कई बार अस्थायी रूप से रहने के लिए स्थान, मानसिक और भावनात्मक सहयोग आदि। ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि एक महिला को ये सभी सहयोग एक स्थान पर मिल जाएं और उसे अलग-अलग संस्थाओ के पास भटकना न पड़े। यही परिकल्पना है वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर की, जो महिला को वे सभी सहयोग और मदद देते हैं, जो मुश्किल पलों में उसे चाहिए होते हमहिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय की वन...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जेल में कैदियों का मानवीय जीवन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि जेल ठीक से काम करें और राज्य के जेल में कैदियों को मानवीय जीवन प्रदान किया जाए। अंतरिम आदेश डॉक्टर स्वर्णदीप सिंह द्वारा दायर याचिका पर दिया गया है। डॉक्टर स्वर्णदीप सिंह ने केंद्रीय जेल, लुधियाना की अपनी यात्रा के दौरान जेलों के कामकाज में गंभीर अनियमितताओं की शिकायत की थी। सिंह ने पंजाब राज्य में जेलों के कामकाज की स्वतंत्र जांच करने और जेल के कैदियों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के लिए...
क्या 'नाजायज़' बच्चा पिता की पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकारी बन सकता है? सुप्रीम कोर्ट के सामने फिर आया सवाल
क्या एक 'नाजायज' बच्चे को पिता की पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकारी बनने का अधिकार है? जितेंद्र कुमार बनाम जसबीर सिंह के मामले में विशेष अवकाश याचिका में यह मुद्दा फिर से सुप्रीम कोर्ट के सामने आया है। इस मामले में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने दूसरी अपील को खारिज करते हुए, भरत मठ और एक अन्य बनाम आर विजया रेंगनाथन और अन्य, एआईआर 2010 एससी 2685 और जिनिया केओटिन बनाम कुमार सीताराम (2003) 1 एससीसी 730 के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर भरोसा किया था और यह माना कि शून्य विवाह से पैदा...
उत्तरदाता को याचिका की प्रति दे दी गई है तो उसके अधिवक्ता फिर से वह प्रति प्राप्त करने के हकदार नहीं, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने कहा
उत्तरदाताओं का यह कर्तव्य है कि वे अपने वकील को याचिका की प्रति उपलब्ध करवाएं। ऐसे उत्तरदाता अपने वकील को देने के लिए याचिका की अतिरिक्त प्रति प्राप्त करने के लिए आग्रह नहीं कर सकते।
सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के बावजूद क्यों नहीं रुक रही हैं बोरवेल दुर्घटनाएं, शीर्ष अदालत ने दिए थे ये निर्देश
बोरवेल दुर्घटना के कारण तमिलनाडु में दो वर्षीय सुजीत विल्सन की दुखद मौत एक आंख खोलने वाली घटना होनी चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह की घटनाएं अभी भी जारी हैं, जबकि बोरवेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नौ साल पहले व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए थे। शीर्ष अदालत द्वारा स्वत संज्ञान लिए गए एक मामले में बोरवेल में गिरने और ट्यूबवेल में गिरने के कारण छोटे बच्चों के साथ होने वाली घातक दुर्घटनाओं की रोकथाम के उपायों पर फिर से विचार किया गया था। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश जस्टिस...
सिनेमा घरों में राष्ट्रगान बजने पर खड़े होना क्या अनिवार्य है? क्या कहता है कानून
सोशल मीडिया में वायरल हो रहे एक वीडियो में बेंगलुरु के एक सिनेमा हॉल में कुछ लोगों के समूह को दिखाया गया है, जो फिल्म की स्क्रीनिंग से पहले राष्ट्रगान बजने के दौरान बैठे रहने वाले लोगों पर चिल्लाते हुए दिख रहे हैं। "देश के लिए 52 सेकंड भी नहीं बचे हैं, लेकिन आपके पास यहां बैठकर तीन घंटे की फिल्म देखने का दुस्साहस है? क्या आप पाकिस्तानी आतंकवादी हैं?" एक आदमी को वीडियो पर कहते हुए सुना जा सकता है, क्योंकि उसने देखा कि लोगों का एक समूह राष्टगान बजने के दौरान अपनी सीट पर बैठा रहा। "हमारे...
क्या मृतक के शरीर में जहर नहीं मिलने पर भी उसे दोषी करार दिया जा सकता है? ऐसे केस की कुछ खास बातें
मनु सेबेस्टियनइस आलेख में इस बात पर चर्चा की जा रही है कि जहर देकर मार देने के मामले में सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर कैसे दोषी ठहराया जा सकता है। क्या किसी व्यक्ति को जहर देकर मारने के मामले में सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहराया जा सकता है जबकि यह पता नहीं है कि जहर कैसे दिया गया? केरल पुलिस के इस आरोप के बाद कि उत्तरी केरल के कूदाथायी गांव की जॉली जोसफ नामक एक महिला ने अपने ही परिवार के छः लोगों की 17 साल की अवधि के दौरान जहर देकर हत्या कर दी, कानूनी क्षेत्र में...
शोध अक्षमता और दिवालिया कोड पर सुप्रीम कोर्ट के कुछ महत्वपूर्ण फैसले (Insolvency & Bankruptcy Code)
शोध अक्षमता और दिवालिया कोड क़ानून (Insolvency & Bankruptcy Code) 2016 में आया और नवंबर-दिसंबर 2016 से यह लागू हो गया। इस क़ानून का उद्देश्य निगमित व्यक्तियों, पार्टनरशिप फर्मों और निजी व्यक्तियों के फर्मों के पुनर्गठन या उनको दिवालिया घोषित किये जाने की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से करने का था ताकि इस तरह के व्यक्तियों की परिसंपत्तियों का महत्तम मूल्यांकन हो सके उद्देश्य था। इन्सोल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ़ इंडिया के गठन और सरकार के बकाये का के भुगतान को वरीयता दी जा सके। कोड के कुछ...
NDPS एक्ट के तहत आरोपी को दोषी करार देने के लिए सिर्फ जांच अधिकारी के सबूतों पर विश्वास करना सही नहीं, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने किया अभियुक्तों को बरी
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने गुरुवार को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत पारित दोषसिद्धि के एक आदेश को पलटते हुए कहा कि स्वतंत्र गवाहों द्वारा कोई पुष्टि नहीं होने के बाद, केवल जांच अधिकारियों के साक्ष्य पर भरोसा करते हुए, जिनके बयान विरोधाभासी थे, आरोपी को दोषी ठहराना अनुचित है। अदालत ने आरोपियों को बरी कर दिया। न्यायमूर्ति अरविंद सिंह चंदेल ने कहा, "उपरोक्त सबूतों की एक मिनट की जांच पर, यह स्पष्ट है कि मामला केवल जांच अधिकारी दीपेश सैनी (PW11) और अन्य...
धारा 498ए का झूठा मामला : कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला, पत्नी करे पूर्व पति को 25,000 रुपये का भुगतान, केस भी खारिज
कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महिला को निर्देश दिया है कि वह अपने पूर्व पति को 25,000 रुपये बतौर हर्जाने के तौर पर दे, क्योंकि महिला ने उसे प्रताड़ित करने के लिए आईपीसी की धारा 498ए के तहत आपराधिक केस दर्ज करवाकर कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग किया है। इसी के साथ कोर्ट ने आपराधिक केस को भी खत्म कर दिया। कर्नाटक हाईकोर्ट ने पूर्व पत्नी द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को खारिज करते हुए कहा, '' यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए पूर्व पति को...
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया, रेवेन्यू रिकॉर्ड में हुईं एंट्रीज़ से नहीं तय होता संपत्ति का स्वामित्व
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश फिर दोहराया है कि राजस्व अभिलेखों यानी रेवेन्यू रिकॉर्ड में की गई एंट्रीज से संपत्ति का स्वामित्व तय नहीं होता। शीर्ष अदालत ने कहा, ऐसी प्रविष्टियों से स्वामित्व का संभावित मूल्य भी तय नहीं होता। जस्टिस इंदू मल्होत्रा और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने प्रह्लाद प्रधान बनाम सोनू कुम्हार के मामले में स्पष्ट किया कि ऐसी प्रविष्टियां केवल उस व्यक्ति को, जिसके नाम पर म्युटेशन रिकॉर्ड है, मुकदमें में शामिल जमीन का राजस्व अदा करने के लिए अधिकृत करती हैं। प्रह्लाद...
जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, सुनवाई से अलग हुआ तो भावी पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी, सुनवाई से न हटने का फैसला न्याय के हित में
भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा एवं पारदर्शिता का अधिकार, सुधार तथा पुनर्वास अधिनियम, 2013 की धारा 24(2) की व्याख्या संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए संविधान पीठ की अगुवाई कर रहे जस्टिस अरुण मिश्रा द्वारा सुनवाई से खुद को अलग न करने पर आदेश जारी किया गया है। अपने आदेश में जस्टिस मिश्रा बता रहे हैं कि उन्होंने सुनवाई से खुद को अलग नहीं करने का फैसला क्यों किया है। उन्होंने कहा कि सुनवाई से खुद को अलग न करना न्याय के हित में है और यदि वह मामले से हटते हैं तो यह एक अपराध होगा। न्यायाधीश...
फोन कॉल टेप करने की अनुमति केवल सार्वजनिक सुरक्षा के हित में दी जा सकती है, पढ़िए बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को मुंबई के एक 54 वर्षीय व्यवसायी को राहत दे दी है और केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पारित तीन अलग-अलग आदेशों को रद्द कर दिया है। इन आदेशों के तहत मंत्रालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को रिश्वतखोरी के एक मामले में याचिकाकर्ता व्यवसायी के फोन कॉल को टेप करने की अनुमति दे दी थी। रिश्वतखोरी के इस मामले में सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक का एक अधिकारी भी शामिल था। न्यायमूर्ति रंजीत मोर और न्यायमूर्ति एन.जे जमादार की दो सदस्यीय पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो को निर्देश दिया है...
(बलात्कार) सिर्फ पुलिस को सीआरपीसी की धारा 154/161 के तहत दिए गए बयानों के आधार पर नहीं हो सकती सजा, पढ़िए सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के एक आरोपी को बरी करते हुए कहा है कि एक अभियुक्त की सजा पूरी तरह से दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 161 या 154 के तहत पुलिस द्वारा दर्ज किए गए गवाहों के बयान पर आधारित नहीं हो सकती। न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने बलात्कार के मामले में एक आरोपी को बरी कर दिया, जिसे पंद्रह साल पहले वर्ष 2004 में इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने दोषी करार दिया था। यह था मामला नारा पेद्दि राजू बनाम ए.पी राज्य मामले में, लड़की ने खुद प्राथमिकी दर्ज...
पति ने भरण पोषण के भुगतान से बचने के लिए फर्ज़ी दस्तावेज़ किए पेश, अदालत ने अंतरिम भरण पोषण की राशि दो गुना करने के आदेश दिए
निचली अदालत में लंबित घरेलू हिंसा के मामले में पति की झूठी गवाही और किराए का फर्जी करारनामा पेश करने पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने पत्नी को दी जानेवाली अंतरिम मुआवजे की राशि को बढ़ा दिया, जिसका भुगतान पति को करना है। अदालत ने यह निर्देश भी दिया कि इस मामले की सुनवाई सीआरपीसी की धारा 340 के तहत होनी चाहिए। पति की दलील याचिकाकर्ता पति अभिषेक दुबे ने निचली अदालत और अपीली अदालत के आदेश में संशोधन के लिए हाइकोर्ट में अपील की थी। इन अदालतों ने अभिषेक को निर्देश दिया था कि वह...




















