मुख्य सुर्खियां
CRZ क्षेत्र में तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण की सहमति के बिना निर्माण कार्य की अनुमति नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने गत सप्ताह केरल के एर्नाकुलम जिले के मरादु नगर निगम में बने CRZ-III श्रेणी के क्षेत्र में निर्माण कार्य को अवैध ठहराते हुए इन निर्माणों को गिराने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि ये निर्माण तटीय विनियमन ज़ोन नियम विनियम के नियमों के ख़िलाफ़ हैं। न्यायमूर्ति अरुण मिश्र और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा ने कहा कि अधिसूचित CRZ क्षेत्र में निर्माण कार्य की अनुमति तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरण की अनुमति से ही दी जा सकती है।केरल हाईकोर्ट ने इससे पहले उन बिल्डरों की याचिका स्वीकार की थी जिनके...
सीआरपीसी की धारा 362 के तहत किसी अदालती आदेश या फ़ैसले की समीक्षा, इसकी वापसी या इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 482 के तहत हाईकोर्ट के एक आदेश को ख़ारिज करते हुए कहा कि अदालती आदेश की समीक्षा के लिए आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए था। एक वक्ति पर आईपीसी की धारा 364 और 323 के तहत अपराध करने के आरोप थे और उसने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अर्ज़ी देकर अपने खिला एफआईआर को ख़ारिज करने की माँग की। उसकी इस अर्ज़ी के लंबित रहने के दौरान उसके ख़िलाफ़ चार्ज शीट दाख़िल कर दिया गया। हाईकोर्ट ने उसकी याचिका ख़ारिज कर दी और याचिकाकर्ता को उचित प्रावधानों के तहत अपने ख़िलाफ़ दायर...
सरकार की सुस्ती के कारण होने वाली देरी को माफ़ नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार पर देरी से विशेष अनुमति याचिका दायर करने के लिए ₹20,000 का जुर्माना लगाया और कहा कि सरकार जिस सुस्ती से काम कर रही है उसको देखते हुए इस देरी को माफ़ नहीं किया जा सकता। इस मामले में हाईकोर्ट की एकल पीठ के फ़ैसले की खंडपीठ ने आलोचना की क्योंकि इसमें 367 दिनों की देरी हुई। खंडपीठ ने इस देरी को माफ़ किए जाने की अपील ख़ारिज कर दी। खंडपीठ के आदेश के 728 दिनों के बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई। इस देरी का कारण यह बताया गया कि संबंधित...
अपंजीकृत परिवारिक समझौता पक्षकारों के खिलाफ पूर्ण विबंध (Estoppel) के रूप में काम करेगा-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई पारिवारिक समझौता पंजीकृत नहीं है तो भी यह उन सभी मूल पक्षकारों के खिलाफ पूर्ण विबंध या एस्टापल के रूप में काम करेगा जो इस समझौते के पक्षकार थे।जस्टिस एल.नागेरश्वरा राॅव व जस्टिस एम.आर शाह की पीठ इस मामले में उस अपील (थुलसिधारा बनाम नारायणप्पा) पर सुनवाई कर रही थी जो कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने निचली दोनों अदालतों के फैसले को पलटते हुए कहा था कि दस्तावेज डी 4 जिसे पालुपति की तरह प्रदर्शित किया गया है,का पंजीकरण जरूरी है। जबकि...
सुनवाई शुरू होने के बाद एक मुविक्कल को जज पर '' कथित पूर्वग्रह या पक्षपाती'' होने के लिए सवाल उठाने या संदेह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
अपने आदेश में हर्ष मंदर की याचिका को खारिज करते हुए,जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को असम डिटेंशन सेंटर के मसमलों की सुनवाई से हटाने की मांग की गई थी,सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक मुविक्कल को इस बात की अनुमति नहीं दी जा सकती है कि कोर्ट की सुनवाई के आधार पर वह एक जज पर 'कथित पूर्वग्रह या पक्षपाती' होने के लिए सवाल उठाए या संदेह करे।भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि-''ऐसा करने से, पक्षकारों को जज बदलने की मांग करने के लिए उकसाने जैसा होगा। वह इस उम्मीद में...
PSU को पर्यावरण नियमों को मानने के बारे में आदर्श उपस्थित करना चाहिए; NGT ने IOCL की पानीपत रिफ़ाइनरी पर ₹17.31 करोड़ का जुर्माना लगाया [आर्डर पढ़े]
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने इंडियन ऑयल कॉर्परेशन (आईओसीएल) की पानीपत रिफ़ाइनरी पर पर्यावरण के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में ₹17.31 करोड़ का जुर्माना लगाया है।यह निर्णय NGT की पीठ ने लिया जिसमें उसके अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल, एसपी वांगडी, के रामकृष्णन और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. नगिन नंदा ने लिया। पीठ ने कहा कि जुर्माने की इस राशि का प्रयोग पर्यावरण को हुएनुक़सान की क्षतिपूर्ति के लिए होगा। पृष्ठभूमिआरोप यह था कि पानीपत रिफ़ाइनरी की वजह से जल प्रदूषण हो रहा है जिसकी वजह से आसपास के लोग...
बिक्री के क़रार के विशिष्ट प्रावधान को लागू करने के आदेश : आदेश से कठिनाई होने की बात नहीं की जा सकती अगर लिखित बयान में इसका ज़िक्र नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी विशेष मामले में प्रतिवादी को इस बात का ज़िक्र करना चाहिए कि अगर उसको क़रार के किसी विशिष्ट प्रावधान को लागू करने को कहा गया तो उसे क्या मुश्किलें पेश आ सकती हैं। अगर ऐसा नहीं हुआ है तो इस तरह की अपील की बाद में इजाज़त नहीं दी जा सकती। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने एक बिक्री की तिथि 30.12.1985 संबंधी क़रार को लागू करने के बारे में निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराया।आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने बीमानेनी महा लक्ष्मी बनाम गंगुमल्ला अप्पा...
बार के लिए आरक्षित पदों पर अब सेवारत उम्मीदवारों की जिला न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति नहीं होगी : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है कि अब से बार के लिए आरक्षित कोटा के तहत सेवारत उम्मीदवारों की जिला जजों के पद पर कोई भी नई नियुक्ति नहीं की जाएगी।अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करने से किया इनकारन्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने परीक्षा में अपना दावा करने के लिए या बार के लिए आरक्षित कोटा में नियुक्त होने के लिए सेवारत उम्मीदवारों को अनुमति देने को लेकर कोई भी अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है।मामले में दिया गया तर्कइस मामले में यह तर्क दिया गया था कि कुछ मामलों...
धारा 138 NI एक्ट : शिकायत में देरी माफ की जा सकती है अगर शिकायतकर्ता इसके पर्याप्त कारण दे : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दायर शिकायत पर अदालत द्वारा निर्धारित अवधि के बाद भी संज्ञान लिया जा सकता है, यदि शिकायतकर्ता अदालत को इस बात को लेकर संतुष्ट करता है कि उसके पास ऐसे समय में शिकायत ना करने का पर्याप्त कारण है।पटना HC के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर आया फैसलान्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने पटना उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ एक अपील पर यह फैसला दिया जिसमें चेक बाउंस शिकायत में मुख्य न्यायिक...
क्या जांच अधिकारी ट्रांसजेंडर का जैविक तरीके से लिंग निर्धारण कर सकता है ? उत्तराखंड हाई कोर्ट ने राज्य से पूछा
क्या कोई जांच अधिकारी डीएनए परीक्षण करके लिंग परिवर्तन करने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्ति के लिंग का निर्धारण कर सकता है और बदले हुए लिंग को स्वीकार करने से मना कर सकता है? उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने इसी मुद्दे पर राज्य सरकार से अपना जवाब देने के लिए कहा है।क्या है यह मामला?दरअसल इस मामले में याचिकाकर्ता ने यह शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके साथ बलात्कार किया गया था। उसने खुद को एक महिला के रूप में बताया और उसने बताया कि लिंग परिवर्तन के लिए वह सर्जिकल प्रक्रिया से गुजरी थी।यह कहते हुए पीड़िता ने उच्च...
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य : आरोप-पत्र दाखिल करते समय धारा 65 बी के तहत प्रमाण पत्र पेश करने विफलता अभियोजन के लिए घातक नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
"ऐसे प्रमाण पत्र को प्रस्तुत करने की आवश्यकता तब उत्पन्न होगी जब ट्रायल के दौरान साक्ष्य में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पेश करने की मांग की जाती है। यह वो चरण है जब प्रमाण पत्र के प्रस्तुत करने की आवश्यकता उत्पन्न होगी।"
सीमा रेखा या थ्रेश-होल्ड पर खारिज की गई एसएलपी न तो कानून की घोषणा होती है न ही एक बाध्यकारी मिसाल,सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया है कि बिना विस्तृत कारण बताए सीमा रेखा या थ्रेश-होल्ड पर खारिज की गई एसएलपी यानि विशेष अवकाश याचिका में संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत न तो कानून की घोषणा होती है और न ही एक बाध्यकारी मिसाल।इस मामले में हाईकोर्ट ने अपने द्वारा एक अन्य मामले में दिए गए फैसले पर और उस फैसले के खिलाफ दायर एसएलपी को शीर्ष कोर्ट ने खारिज कर दिया था। प्रतिवादी ने वर्तमान में अपील में लगाए गए उस फैसले का बचाव करते हुए दलील दी थी कि उस फैसले की सर्वोच्च न्यायालय पुष्टि कर चुका है।...
एससी-एसटी आरक्षण समानता स्थापित करने के सच्चे रास्ते : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण देने के कर्नाटक के 2018 के क़ानून को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एससी-एसटी आरक्षण उस संरचनात्मक स्थितियों में समानता लाने का सच्चा उपाय हैजिसमें लोग जन्म लेते हैं।इस मामले में फ़ैसला लिखने वाले न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि प्रशासनिक सक्षमता और एससी-एसटी के केंद्र और राज्यों की सेवाओं में नियुक्ति के दावे के बीच कोई विरोध नहीं है।पीठ ने कहा, "आरक्षण अवसरों की समानता के नियम का अपवाद नहीं है…।"पीठ ने इस आलोचना का जवाब दिया कि...
तकनीकी और सीमांत देरी के आधार पर उपभोक्ता की शिकायत खारिज करना न्याय के उद्देश्य को परास्त करना है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
"हालांकि अधिनियम किसी उपभोक्ता की शिकायत के निपटान के लिए एक अवधि निर्धारित करता है, यह भी एक गंभीर सच्चाई है कि संसाधनों और बुनियादी ढांचे की उपलब्धता ना होने के कारण शिकायतों का निपटान नहीं किया जा सकता।”
जज कोई भयभीत संत नहीं हैं : सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक अवमानना के दोषी वक़ील को इलाहाबाद ज़िला अदालत परिसर में प्रवेश पर 3 साल की पाबंदी लगाई [आर्डर पढ़े]
समाज में जो बातें दूसरों के लिए उचित है, उसके (एक वक़ील के) लिए नहीं हो सकता है क्योंकि वह समाज के बौद्धिक वर्ग का हिस्सा है और एक नेक पेशे का हिस्सा होने के कारण उससे ज़्यादा उम्मीदें हैं।"एक वक़ील को न्यायिक मजिस्ट्रे पर हमला करने और उसके साथ दुर्व्यवहार के आरोप में आपराधिक अवमानना का दोषी ठहराने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जज कोई डरावने संतनहीं होते बल्कि उन्हें एक भयहीन उपदेशक की भूमिका का निर्वाह करना पड़ता है।न्यायमूर्ति अरुण मिश्र और नवीन...
समझौते की शर्तो का पालन करे अन्यथा कोर्ट की अवमानना को तैयार रहे, आपसी समझौते से तलाक लेने वाले दंपत्ति को सुप्रीम कोर्ट ने कहा [आर्डर पढ़े]
समझौते की शर्तो का पालन करे या फिर कोर्ट की अवमानना के लिए तैयार रहे,यह बात सुप्रीम कोर्ट ने उस दंपत्ति से कही है,जिसने आपसी समझौते के आधार पर कोर्ट से तलाक लिया था।पति ने इस मामले में शीर्ष कोर्ट में याचिका दायर की थी क्योंकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालत के उस आदेश को सही ठहराया था,जिसमें जिला कोर्ट ने उसकी तलाक की अर्जी को नामंजूर कर दिया था।इस मामले में अपील पर सुनवाई के दौरान पीठ ने दंपत्ति को मध्यस्थता केंद्र में भेज दिया था। मध्यस्थता केंद्र में दोनों पक्षकार आपस में मिलकर मामला...
क्रमिक या लगातार दायर जमानत के आवेदनों को रखा जाना चाहिए उसी जज के समक्ष,जिसने सुनवाई की थी पहले आवेदन पर-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराते हुए कहा है कि क्रमिक या लगातार दायर जमानत के आवेदनों को उसी जज के समक्ष रखा जाना चाहिए,जिसने पहले आवेदन के समय जमानत देने से इंकार किया था। बशर्ते वह जज इस आवेदन पर सुनवाई के लिए उपलब्ध न हो या छुट्टी पर हो।इस मामले में आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420,465,467,468 व 472 के तहत मामला दर्ज हुआ था। उसने मद्रास हाईकोर्ट के समक्ष अग्रिम जमानत अर्जी दायर की,जिसे मदुरई बेंच के जज ने खारिज कर दिया। इस आदेश के खिलाफ दायर एसएलपी को शीर्ष कोर्ट ने खारिज कर...
वकील नहीं है अपने ग्राहक या मुविक्कल का मुखपत्र,न्यायालय में प्रस्तुतीकरण करते समय रहे जिम्मेदार -सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सभी को कोर्ट के समक्ष कुछ भी प्रस्तुतीकरण देते समय जिम्मेदारी और सतर्कता से काम लेना चाहिए- यह टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि अगर एक वकील सिर्फ अपने मुवक्किल के मुखपत्र के रूप में काम करे तो वह अपनी ही प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचता है. यह टिप्पणी जस्टिस अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक लेक्चरार की तरफ से दायर अपील को स्वीकार करते हुए की। याचिकाकर्ता एक निजी, गैर सहायता प्राप्त कालेज,जो की चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त है, में कार्यरत है । हाईकोर्ट...
कोर्ट रोज़गार के लिए अर्हता और आवश्यक योग्यता का निर्धारण नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक हाईकोर्ट न्यायिक समीक्षा के अधिकारों का प्रयोग करते हुए इस बात का निर्णय नहीं कर सकता कि नियोक्ता के लिए क्या बेहतर है और इस बारे में विज्ञापन की सरल भाषा के विपरीत उसकी स्थिति की व्याख्याया नहीं कर सकता है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने इस बारे में बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले को निरस्त करते हुए कहा कि किसी पद पर नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यता के निर्धारण का काम नियोक्ता का है। हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के एक...
प्रवासी अनुसूचित जनजाति को केंद्र शासित प्रदेश दादर और नगर हवेली में आरक्षण का लाभ मिल सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रवासी अनुसूचित जनजाति के लोगों को दादरा एवं नगर हवेली में आरक्षण का लाभ मिल सकता है। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और एमआर शाह की पीठ ने केंद्र शासित प्रदेश की इस दलील को ख़ारिज कर दिया कि केंद्र शासित प्रदेश में आरक्षण का लाभ उन्हें ही मिल सकता है जो स्थानीय निवासी हैं। कोर्ट ने कहा कि इसका मतलब तो यह हुआ कि यहाँ पर आने वाले अनुसूचित जनजाति के प्रवासी लोगों को आरक्षण नहीं मिल सकता है। पीठ ने कहा कि दादरा एवं नगर हवेली के लिए जारी राष्ट्रपति की अधिसूचना के तहत...


![सीआरपीसी की धारा 362 के तहत किसी अदालती आदेश या फ़ैसले की समीक्षा, इसकी वापसी या इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े] सीआरपीसी की धारा 362 के तहत किसी अदालती आदेश या फ़ैसले की समीक्षा, इसकी वापसी या इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/05/500x300_359687-358921-justice-dy-chandrachud-and-justice-hemant-gupta1.jpg)
![सरकार की सुस्ती के कारण होने वाली देरी को माफ़ नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े] सरकार की सुस्ती के कारण होने वाली देरी को माफ़ नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/10/500x300_357343-supreme-court-of-india-1.jpg)
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![सुनवाई शुरू होने के बाद एक मुविक्कल को जज पर कथित पूर्वग्रह या पक्षपाती होने के लिए सवाल उठाने या संदेह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े] सुनवाई शुरू होने के बाद एक मुविक्कल को जज पर कथित पूर्वग्रह या पक्षपाती होने के लिए सवाल उठाने या संदेह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती: सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/30/500x300_360429-360377-supreme-court-of-india-1.jpg)
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![बिक्री के क़रार के विशिष्ट प्रावधान को लागू करने के आदेश : आदेश से कठिनाई होने की बात नहीं की जा सकती अगर लिखित बयान में इसका ज़िक्र नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] बिक्री के क़रार के विशिष्ट प्रावधान को लागू करने के आदेश : आदेश से कठिनाई होने की बात नहीं की जा सकती अगर लिखित बयान में इसका ज़िक्र नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/02/500x300_359580-358915-justice-l-nageswara-rao-and-justice-mr-shah.jpg)
![धारा 138 NI एक्ट : शिकायत में देरी माफ की जा सकती है अगर शिकायतकर्ता इसके पर्याप्त कारण दे : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] धारा 138 NI एक्ट : शिकायत में देरी माफ की जा सकती है अगर शिकायतकर्ता इसके पर्याप्त कारण दे : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356387-cheque-bounce-cases.jpg)

![इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य : आरोप-पत्र दाखिल करते समय धारा 65 बी के तहत प्रमाण पत्र पेश करने विफलता अभियोजन के लिए घातक नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य : आरोप-पत्र दाखिल करते समय धारा 65 बी के तहत प्रमाण पत्र पेश करने विफलता अभियोजन के लिए घातक नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356899-electronic-evidence.jpg)
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![एससी-एसटी आरक्षण समानता स्थापित करने के सच्चे रास्ते : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] एससी-एसटी आरक्षण समानता स्थापित करने के सच्चे रास्ते : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/05/14/500x300_360861-justice-chandrachud.jpg)
![तकनीकी और सीमांत देरी के आधार पर उपभोक्ता की शिकायत खारिज करना न्याय के उद्देश्य को परास्त करना है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े] तकनीकी और सीमांत देरी के आधार पर उपभोक्ता की शिकायत खारिज करना न्याय के उद्देश्य को परास्त करना है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/03/31/500x300_359544-358918-justice-dy-chandrachud-and-justice-hemant-gupta.jpg)
![समझौते की शर्तो का पालन करे अन्यथा कोर्ट की अवमानना को तैयार रहे, आपसी समझौते से तलाक लेने वाले दंपत्ति को सुप्रीम कोर्ट ने कहा [आर्डर पढ़े] समझौते की शर्तो का पालन करे अन्यथा कोर्ट की अवमानना को तैयार रहे, आपसी समझौते से तलाक लेने वाले दंपत्ति को सुप्रीम कोर्ट ने कहा [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/05/13/500x300_360832-divorce.jpg)
![क्रमिक या लगातार दायर जमानत के आवेदनों को रखा जाना चाहिए उसी जज के समक्ष,जिसने सुनवाई की थी पहले आवेदन पर-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] क्रमिक या लगातार दायर जमानत के आवेदनों को रखा जाना चाहिए उसी जज के समक्ष,जिसने सुनवाई की थी पहले आवेदन पर-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/19/500x300_357649-justice-nv-ramana-and-justice-mohan-m-shantanagoudar.jpg)
![प्रवासी अनुसूचित जनजाति को केंद्र शासित प्रदेश दादर और नगर हवेली में आरक्षण का लाभ मिल सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] प्रवासी अनुसूचित जनजाति को केंद्र शासित प्रदेश दादर और नगर हवेली में आरक्षण का लाभ मिल सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/20/500x300_357668-justice-nageswara-rao-mr-shah.jpg)