मुख्य सुर्खियां
जबरन यौन-संबंध है पत्नी की निजता में अवैध घुसपैठ या अनुचित हस्तक्षेप,माना जाएगा क्रूरता के समान-इलाहाबाद हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माना है कि जबरन सेक्स,अप्राकृतिक या प्राकृतिक,पत्नी की गोपनीयता में एक अवैध घुसपैठ या अनुचित हस्तक्षेप है और यह उसके पर क्रूरता करने के समान है। जस्टिस शशिकांत गुप्ता और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एक जिला अदालत के आदेश को उचित ठहराया है,जिसमें एक पत्नी द्वारा दायर तलाक की अर्जी को स्वीकार कर लिया गया था। पीठ ने केरला हाईकोर्ट द्वारा बीनी टी.जोन बनाम साजी कुरूविला नामक मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया,जिसमें माना गया था कि प्रकृति के खिलाफ सेक्स...
सरकारी कर्मचारी नहीं है पूर्ण पेंशन/मृत्यु सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी यानि ऐच्छिक दान का हकदार,अगर लंबित है अनुशासनात्मक/न्यायिक कार्यवाही-इलाहाबाद हाईकोर्ट
यह उतनी ही पक्की या स्पष्ट है जितनी की मौत,के अगर किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कोई न्यायिक कार्यवाही लंबित है भले ही वह सिविल प्रकृति की हो या आपराधिक प्रकृति की,उसको ग्रेच्युटी या ऐच्छिक दान नहीं मिल सकता है।
किसी आरोपी को ज़मानत नहीं दे पाने के कारण उसे अनिश्चित काल तक के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी आरोपी को सिर्फ़ इसलिए अनिश्चित काल तक के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता है क्योंकि वह कुछ ऐसी वजहों से ज़मानत नहीं दे सकता जो उसके वश में नहीं है।न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट को यह निर्देश दिया कि वह वसीम अहमद नामक व्यक्ति की ज़मानत की अर्ज़ी पर दिए गए अपने आदेश को संशोधित करे और आदेश में पंजीकृत ज़मानत पर ज़ोर न डाले।दरअसल कलकत्ता के चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने वसीम अहमद को इस शर्त पर ज़मानत दी थी...
NRC में नाम शामिल नहीं होने के ख़िलाफ़ अपील की अनुमति तभी जब विदेशी अधिकरण ने राष्ट्रीयता के मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं लिया है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि विदेशी अधिकरण के समक्ष नेशनल रेजिस्टर ऑफ़ सिटिज़ेन्स में नाम नहीं होने की शिकायत तभी की जा सकती है अगर अधिकरण ने इस बारे में निर्णय नहीं लिया ही कि संबंधित व्यक्ति भारतीय नागरिक है या विदेशी।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता और संजीव खन्ना की पीठ ने इस बारे में किसी अपीली मंच के गठन करने के आग्रह को भी ठुकरा दिया ताकि इस बारे में असम के निवासी के बारे में होने वाले किसी विवाद को वहाँ निपटाया जा सके।पीठ इस संबंध में कई सारे अपीलों पर सुनवाई कर रहा था...
पत्नी को दिया जाने वाला गुजारा भत्ता नहीं है कोई दान या इनाम-दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने विकास भूषण बनाम राज्य व अन्य के मामले में माना है कि पत्नी को दिया जाने वाला गुजारा कोई दान या इनाम नहीं है। यह राशि उसके गुजर-बसर या उत्तरजीविता के लिए दी गई है।जस्टिस संजीव सचदेवा वाली पीठ इस मामले में उस सवाल पर विचार कर रही थी,जिसमें पूछा गया था कि गुजारे भत्ते की राशि जिस दिन अर्जी दायर की गई है उस तारीख से दी जानी चाहिए या जिस दिन गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया है,उस तारीख से।कोर्ट ने महिलाओं के लिए बने ''गुजारा भत्ता या रख-रखाव''प्रावधान के उद्देश्य के तहत इस सवाल...
मात्र शिकायतकर्ता व आरोपी के बीच लंबित सिविल केस,नहीं हो सकता है आपराधिक केस खत्म करने का कारण-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ इस कारण से कि शिकायतकर्ता व आरोपी के बीच सिविल केस लंबित है, कोई आपराधिक केसरद्द या खत्म नहीं किया जा सकता है ।इस मामले में दो व्यक्ति भारतीय दंड संहिता की धारा 323,379 (रेड विद 34) के तहत आरोपी थे। हाईकोर्ट ने उनके खिलाफलंबित आपराधिक कार्यवाही को इस आधार पर रद्द कर दिया कि दोनों पक्षों के बीच सिविल कोर्ट में एक दुकान के मकानमालिक व किराएदार के तौर पर विवाद लंबित है और यह मामला वास्तव में दोनों पक्षों के बीच का एक सिविल विवाद है।हाईकोर्ट के इस विचार को गलत...
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष दूसरी अपील में 'क़ानून का व्यापक प्रश्न' आवश्यक रूप से ज़रूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा है कि हाल में दो पीठ (न्यायमूर्ति एएम सप्रे और दिनेश माहेश्वरी) द्वारा दिए गए फ़ैसले 'लागू नहीं होंगे' क्योंकि ये फ़ैसले Pankajakshi (Dead) Through L.Rs Vs. Chandrika मामले में संविधान पीठ के फ़ैसले के उलट हैं।सूरत सिंह (मृत) बनाम सीरी भगवान एवं अन्य एवं चाँद कौर(D) वाया वक़ील बनाम महर कौर (D) वाया वक़ील में पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (दूसरी अपील) के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर की गई थी। इस आदेश में कहा गया था कि दूसरी...
बाद के दायित्व के लिए जारी चेक का बाउंस होना स्पष्टतौर पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट यानि परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत -छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मदन तिवारी बनाम यशंत कुमार साहू और अन्य के केस में माना है कि बाद के दायित्व के निर्वहन के लिए जारी किया गया चेक अगर बाउंस हो जाता है तो वह स्पष्ट तौर परनेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट यानि परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881के तहत आता है।जस्टिस रजनी दूबे की पीठ ने आगे कहा कि चेक निस्संदेह बकाया जिम्मेदारी का प्रतिनिधित्व करते है। जब एक बार जब ऋण का वितरण हो जाता है और समझौते के अनुसार किश्त चेक की तारीख पर लंबित हो जातीहै तो ऐसे चेक का अनादर या बाउंस होना नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स...
क्या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को SARFAESI अधिनियम की धारा 14 के तहत आवेदन पर ग़ौर करने का अधिकार है?
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश के ख़िलाफ़ सीधे अपील की अनुमति देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि SARFAESI अधिनियम की धारा 14 के तहत सीजेएम के क्षेत्राधिकारों के बारे में विभिन्नहाइकोर्टों ने अलग-अलग मत व्यक्त किया है।इस अधिनियम की धारा 14 के तहत सीजेएम या ज़िलाधिकारी को यह अधिकार है कि वह सुरक्षित ऋणदाताओं को को सुरक्षित परिसंपत्ति को हासिल करने में मदद करे। केरल हाईकोर्ट द्वारा इस बारे में जोमिसाल स्थापित किया है उसके हिसाब से राज्य में सीजेएम धारा 14 के तहत आवेदन की सुनवाई करता है।इसी...
मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 32 के तहत समाप्त हो चुकी मध्यस्था की कार्यवाही की नहीं हो सकती है वापसी-सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 32(2)सी के तहत मध्यस्थ द्वारा मध्यस्थता की कार्यवाही को समाप्त करने के उसे फिर से शुरू नहीं किया जा सकता है या उसकी वापसी नहीं हो सकती है।इस मामले में,एकमात्र मध्यस्थ ने 32(2)सी के तहत कार्यवाही को इस आधार पर समाप्त कर दिया कि कार्यवाही को जारी रखना अनावश्यक या असंभव बन गया है। बाद में,उन्होंने एक पक्ष द्वारा दायर उस अर्जी को स्वीकार कर लिया,जिसमें कार्यवाही समाप्त करने कके आदेश को वापिस लेने की मांग की गई थी। कर्नाटक हाईकोर्ट ने...
सीआरपीसी धारा 319: अगर किसी व्यक्ति का एफआईआर में नाम है पर अगर उसके ख़िलाफ़ चार्ज शीट नहीं हुआ है तो विरोध याचिका का समय समाप्त हो जाने के बाद भी उसे अदालत में बुलाया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निचली अदालत सीआरपीसी की धारा 319 के तहत उस व्यक्ति को अदालत में बुला सकता है अगर उसका नाम एफआईआर में है पर उसे चार्ज शीट नहीं दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा विरोध की याचिका दायर करने का समय निकल जाने के बाद भी किया जा सकता है। राजेश और अन्य लोगों का नाम हत्या के लिए दर्ज एक एफआईआर में था। हालाँकि, चार अन्य लोगों के ख़िलाफ़ चार्ज शीट दायर किया गया और उनके ख़िलाफ़ अदालती कार्रवाई शुरू हुई। गवाहों से पूछताछ के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाह ने राजेश और अन्य लोगों के इस...
स्वेच्छा से भुगतान न करने या विलफुल डिफाॅल्ट' के मामले की जांच कर रही इन-हाउस कमेटी के समक्ष वकील के जरिए पेश होने का अधिकार नहीं है उधारकर्ता के पास-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
’’पहली समिति को अपना आदेश जितना जल्द हो सके उधारकर्ता को दे देना चाहिए। जिसके बाद उधारकर्ता 15 दिनों के अदंर समीक्षा समिति के समक्ष इस आदेश के खिलाफ अपना पक्ष पेश कर सकता है या प्रस्तुत कर सकता है।’’
सीआरपीसी की धारा 319ः क्या अतिरिक्त आरोपी को मामले में फैसला आने के बाद सह-आरोपी के तौर पर समन जारी हो सकता है?सुप्रीम कोर्ट ने मामले को भेजा बड़ी पीठ के पास
’’ सीआरपीसी की धारा 319 के तहत मिली शक्ति असाधारण प्रकृति की होने के नाते,निचली कोर्ट को किसी आरोेपी को समन जारी करते समय सतर्क रहना चाहिए ताकि जटिलताओं से बचा जा सके और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित हो सके।’’
दिल्ली हाईकोर्ट ने हैदराबाद की दवा कंपनी नैटको फ़ार्मा को नोवार्टिस की पेटेंट वाली कैंसर की दवा सेरिटिनिब के उत्पादन से रोका [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने हैदराबाद की कंपनी नैटको फ़ार्मा को 'सेरिटिनिब' नामक कैंसर की दवा का उत्पादन करने से रोक दिया है। पर कोर्ट ने मरीज़ों का ख़याल रखते हुए कंपनी को वर्तमान स्टॉक को बेचने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने एक आदेश पास कर स्विस दवा कंपनी नोवार्टिस के आवेदन पर नैटको को नोटिस भी जारी किया है। नोवार्टिस ने दावा किया कि उसे सेरिटिनिब का पेटेंट मिला हुआ है। नोवार्टिस ने दावा किया कि उसने यह मुक़दमा पैटेंट कन्वेंशन ट्रीटी के तहत दायर किया है जो 2007 से...
हैबियस काॅर्पस की रिट तब जारी की जा सकती है,जब नाबालिग को ऐसे व्यक्ति ने हिरासत में रखा हो,जिसके पास उसकी कानूनी कस्टडी नहीं है-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बंदी प्रत्यक्षीकरण यानि हैबियस काॅर्पस की याचिका उस समय सुनवाई योग्य है,जहां यह साबित होता है कि माता-पिता या अन्य व्यक्ति द्वारा नाबालिग बच्चे को अवैध रूप और बिना किसी कानूनके अधिकार से हिरासत में रखा गया है।इस मामले में उठाए गए विवाद (तेजस्विनी गौड़ बनाम शेखर जगदीश प्रसाद तिवारी) में कहा गया था कि हिन्दू माइनॉरिटी एवं गार्डियनशिप एक्ट 1956 के तहत पिता के पास जब अन्य प्रभावी विकल्प मौजूद हो तो बंदीप्रत्यक्षीकरण की रिट जारी नहीं की जा सकती है या दायर नहीं की जा सकती है।...
OROP : देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिकों द्वारा उठाए गए मुद्दों या मामलों पर गंभीरता से किया जाए विचार,सुप्रीम कोर्ट ने कहा केंद्र से [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह वन रैंक वन पेंशन के मामले में सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों द्वारा उठाए गए मुद्दों या मामला पर गंभीरता से विचार करें।जस्टिस डी.वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि-"यह उचित और न्याय के हित में होगा कि सशस्त्र बलों के उन कर्मियों की ओर से व्यक्त की गई चिंताए ,जिन्होंने सेवानिवृत्ति से पहले संघ के सदस्यों के रूप में देश की सेवा की है, पर केंद्र सरकार उचित स्तर पर गंभीरता से विचार करें।''भारतीय भूतपूर्व सैनिक आंदोलन (याचिकाकर्ताओं ) ने उस...
शेयरधारकों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज,कंपनी के कागजात चुराकर कंपनी लाॅ बोर्ड के समक्ष इस्तेमाल करने का था आरोप [निर्णय पढ़े]
बिड़ला काॅर्पोरेशन लिमिटेड बनाम एडवेंट्ज इंवेस्टमेंट्स एंड होल्डिंग्स लिमटेड में सुप्रीम कोर्ट का फैसला उसके राफेल आदेश के साथ कुछ समानतांए रखता है।राफेल में, मुद्दा मंत्रालय से कथित रूप से 'चुराए' गए दस्तावेजों की स्वीकार्यता के बारे में था। यहां जस्टिस आर.भानूमथि व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की पीठ के समक्ष यह मुद्दा था कि क्या किसी व्यक्ति द्वारा कंपनी से चुराए गए दस्तावेजों को कंपनी लाॅ बोर्ड व अन्य न्यायिक फोरम के समक्ष पेश करना भारतीय दंड संहिता के तहत 'चोरी और गड़बड़ी या धोखाधड़ी' माना जाएगा। ...
किसी लेन-देन को बेनामी मानने के लिए आंशिक बिक्री या स्टांप ड्यूटी का भुगतान एकमात्र मापदंड नहीं -सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी अन्य व्यक्ति द्वारा आंशिक बिक्री या स्टांप ड्यूटी का भुगतान,बिक्री या लेन-देनको बेनामी मानने के लिए एकमात्र मापदंड नहीं हो सकता है।इस मामले में कोर्ट एक निचली कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर विचार कर रही थी,जिसमें कहा गया था कि केस की संपत्ति बेनामी लेन-देन है क्योंकि संपत्ति की खरीद के समय किसी अन्य व्यक्ति (नारायणसामी मुदलियार) द्वारा संपत्तिके मूल्य या बिक्री का आंशिक भुगतान किया गया था। यह भी देखा गया कि सेल डीड के निष्पादन के समय स्टैंप...

![जबरन यौन-संबंध है पत्नी की निजता में अवैध घुसपैठ या अनुचित हस्तक्षेप,माना जाएगा क्रूरता के समान-इलाहाबाद हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] जबरन यौन-संबंध है पत्नी की निजता में अवैध घुसपैठ या अनुचित हस्तक्षेप,माना जाएगा क्रूरता के समान-इलाहाबाद हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/07/500x300_359712-marriage.jpg)

![किसी आरोपी को ज़मानत नहीं दे पाने के कारण उसे अनिश्चित काल तक के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े] किसी आरोपी को ज़मानत नहीं दे पाने के कारण उसे अनिश्चित काल तक के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/05/24/500x300_361051-360821-justices-indira-banerjee-and-justice-sanjiv-khanna1.jpg)
![सीआरपीसी की धारा 482 : हाईकोर्ट को कारण बताना चाहिए क्यों याचिका स्वीकार की गई या खारिज की गई-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] सीआरपीसी की धारा 482 : हाईकोर्ट को कारण बताना चाहिए क्यों याचिका स्वीकार की गई या खारिज की गई-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/20/500x300_360118-360058-justice-am-sapre-and-justice-dinesh-maheshwari.jpg)

![पत्नी को दिया जाने वाला गुजारा भत्ता नहीं है कोई दान या इनाम-दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े] पत्नी को दिया जाने वाला गुजारा भत्ता नहीं है कोई दान या इनाम-दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356737-delhi-high-court.jpg)
![पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष दूसरी अपील में क़ानून का व्यापक प्रश्न आवश्यक रूप से ज़रूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े] पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष दूसरी अपील में क़ानून का व्यापक प्रश्न आवश्यक रूप से ज़रूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/05/23/500x300_361031-360935-justice-sk-kaul-and-justice-indira-banerjee.jpg)
![बाद के दायित्व के लिए जारी चेक का बाउंस होना स्पष्टतौर पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट यानि परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत -छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े] बाद के दायित्व के लिए जारी चेक का बाउंस होना स्पष्टतौर पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट यानि परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत -छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356956-cheque-ll-size-min.jpg)

![मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 32 के तहत समाप्त हो चुकी मध्यस्था की कार्यवाही की नहीं हो सकती है वापसी-सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े] मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 32 के तहत समाप्त हो चुकी मध्यस्था की कार्यवाही की नहीं हो सकती है वापसी-सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/28/500x300_360359-360268-supreme-court-of-india-2.jpg)
![इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को दिलाया याद, संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं रहने के बावजूद अभी भी संवैधानिक अधिकार है [आर्डर पढ़े] इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को दिलाया याद, संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं रहने के बावजूद अभी भी संवैधानिक अधिकार है [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/05/20/500x300_360968-360372-allahabad-hc-1.jpg)
![सीआरपीसी धारा 319: अगर किसी व्यक्ति का एफआईआर में नाम है पर अगर उसके ख़िलाफ़ चार्ज शीट नहीं हुआ है तो विरोध याचिका का समय समाप्त हो जाने के बाद भी उसे अदालत में बुलाया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] सीआरपीसी धारा 319: अगर किसी व्यक्ति का एफआईआर में नाम है पर अगर उसके ख़िलाफ़ चार्ज शीट नहीं हुआ है तो विरोध याचिका का समय समाप्त हो जाने के बाद भी उसे अदालत में बुलाया जा सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/20/500x300_357668-justice-nageswara-rao-mr-shah.jpg)
![स्वेच्छा से भुगतान न करने या विलफुल डिफाॅल्ट के मामले की जांच कर रही इन-हाउस कमेटी के समक्ष वकील के जरिए पेश होने का अधिकार नहीं है उधारकर्ता के पास-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] स्वेच्छा से भुगतान न करने या विलफुल डिफाॅल्ट के मामले की जांच कर रही इन-हाउस कमेटी के समक्ष वकील के जरिए पेश होने का अधिकार नहीं है उधारकर्ता के पास-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/01/28/500x300_357869-justice-nariman-and-justice-vineet-saran.jpg)

![दिल्ली हाईकोर्ट ने हैदराबाद की दवा कंपनी नैटको फ़ार्मा को नोवार्टिस की पेटेंट वाली कैंसर की दवा सेरिटिनिब के उत्पादन से रोका [आर्डर पढ़े] दिल्ली हाईकोर्ट ने हैदराबाद की दवा कंपनी नैटको फ़ार्मा को नोवार्टिस की पेटेंट वाली कैंसर की दवा सेरिटिनिब के उत्पादन से रोका [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in//356120-online-sale-of-drugs-min.jpg)
![हैबियस काॅर्पस की रिट तब जारी की जा सकती है,जब नाबालिग को ऐसे व्यक्ति ने हिरासत में रखा हो,जिसके पास उसकी कानूनी कस्टडी नहीं है-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] हैबियस काॅर्पस की रिट तब जारी की जा सकती है,जब नाबालिग को ऐसे व्यक्ति ने हिरासत में रखा हो,जिसके पास उसकी कानूनी कस्टडी नहीं है-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/02/08/500x300_358172-358074-justice-r-banumathi-justice-r-subhash-reddy.jpg)
![OROP : देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिकों द्वारा उठाए गए मुद्दों या मामलों पर गंभीरता से किया जाए विचार,सुप्रीम कोर्ट ने कहा केंद्र से [आर्डर पढ़े] OROP : देश की सेवा करने वाले पूर्व सैनिकों द्वारा उठाए गए मुद्दों या मामलों पर गंभीरता से किया जाए विचार,सुप्रीम कोर्ट ने कहा केंद्र से [आर्डर पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/05/18/500x300_360940-360571-dc-cover-tbn75ce3d78j9hfnvqahdtvhd2-20160314152850medi.jpg)
![शेयरधारकों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज,कंपनी के कागजात चुराकर कंपनी लाॅ बोर्ड के समक्ष इस्तेमाल करने का था आरोप [निर्णय पढ़े] शेयरधारकों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज,कंपनी के कागजात चुराकर कंपनी लाॅ बोर्ड के समक्ष इस्तेमाल करने का था आरोप [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/30/500x300_360429-360377-supreme-court-of-india-1.jpg)
![किसी लेन-देन को बेनामी मानने के लिए आंशिक बिक्री या स्टांप ड्यूटी का भुगतान एकमात्र मापदंड नहीं -सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े] किसी लेन-देन को बेनामी मानने के लिए आंशिक बिक्री या स्टांप ड्यूटी का भुगतान एकमात्र मापदंड नहीं -सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/19/500x300_360107-358915-justice-l-nageswara-rao-and-justice-mr-shah.jpg)