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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष दूसरी अपील में 'क़ानून का व्यापक प्रश्न' आवश्यक रूप से ज़रूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

Live Law Hindi
23 May 2019 6:35 AM GMT
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष दूसरी अपील में क़ानून का व्यापक प्रश्न आवश्यक रूप से ज़रूरी नहीं : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
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न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा है कि हाल में दो पीठ (न्यायमूर्ति एएम सप्रे और दिनेश माहेश्वरी) द्वारा दिए गए फ़ैसले 'लागू नहीं होंगे' क्योंकि ये फ़ैसले Pankajakshi (Dead) Through L.Rs Vs. Chandrika मामले में संविधान पीठ के फ़ैसले के उलट हैं।

सूरत सिंह (मृत) बनाम सीरी भगवान एवं अन्य एवं चाँद कौर(D) वाया वक़ील बनाम महर कौर (D) वाया वक़ील में पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (दूसरी अपील) के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर की गई थी। इस आदेश में कहा गया था कि दूसरी अपील की अनुमति के लिए ज़रूरी है कि पहले मामले में क़ानून के तहत व्यापक प्रश्न गढ़े जाएँ और फिर इन प्रश्नों का उत्तर देते हुए दूसरी अपील के बारे में निर्णय दिए जाएँ।

अपीलकर्ता ने किरोड़ी बनाम राम प्रकाश के मामले में आए फ़ैसलों को इन फ़ैसलों के लिए आधार बनाया और कहा कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश ऐसा है जिसे निरस्त कर दिया जाना चाहिए क्योंकि नियमित दूसरीअपील पर निर्णय क़ानून के तहत कोई सवाल गढ़ने के बिना ही ले लिया गया है।

पीठ ने Pankajakshi (Dead) Through L.Rs Vs. Chandrika मामले में संविधान पीठ के फ़ैसले पर ग़ौर करते हुए कहा :

यह दुर्भाग्य है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दूसरी अपील से आए दोनों फ़ैसलों में संविधान पीठ के फ़ैसले को इस पर निर्णय करने वाले पीठ के संज्ञान में नहीं लाया गया।

कोर्ट ने कहा कि नागरिक प्रक्रिया संहिता का यह तक़ाज़ा है कि उसके साथ क़ानून के तहत एक व्यापक प्रश्न गढ़ा जाए। पर जहाँ तक कि पंजाब राज्य की बात है, पीठ ने कहा कि पंजाब अदालत अधिनियम, 1918 की धारा 41 मेंइस तरह के प्रश्न के गढ़ने की बात नहीं है।

संविधान पीठ ने पंकजाक्षी मामले में कुलवंत कौर एवं अन्य बनाम गुरदियाल सिंह मान मामले के फ़ैसले को नज़रंदाज़ कर दिया था जिसमें कहा गया था कि पंजाब अधिनियम की धारा 41 नागरिक प्रक्रिया संहिता की धारा 100 केख़िलाफ़ है और यह माना जाए कि इसे निरस्त कर दिया गया। पीठ ने कहा कि चूँकि नागरिक प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1976 पंजाब अदालत अधिनियम की धारा 41 पर लागू नहीं होता और यह क़ानून के रूप मेंआवश्यक रूप से लागू रहेगा।

"संविधान पीठ के फ़ैसले का असर यह है कि जहाँ तक पंजाब राज्य की बात है, दूसरी अपील के लिए किसी व्यापक प्रश्न को क़ानून के तहत गढ़ने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि पंजाब अधिनियम सिर्फ़ राज्य पर ही लागू होगा।इसलिए, संहिता की धारा 100 लागू नहीं होगा…"

ऊपर जिस तरह के क़ानूनी स्थिति का ज़िक्र किया गया है, चाँद कौर (D) वाया वक़ील और सूरत सिंह (मृत) के मामलों में पंकजाक्षी के मामले में इस अदालत की संविधान पीठ के फ़ैसले के विपरीत है। संविधान पीठ के फ़ैसले कोइन मामलों पर फ़ैसला लेने वाली पीठ के संज्ञान में नहीं लाया गया और इसलिए ये लागू नहीं होंगे।


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