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स्वतंत्रता सेनानियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के तहत विवाहित बेटी, नाती व नातिन के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
स्वतंत्रता सेनानियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं के तहत विवाहित बेटी, नाती व नातिन के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने यह कहा है कि बेटियों की बेटी या बेटा (यानी बेटी से पैदा नाती या नातिन) भी स्वतंत्रता सेनानी के परिवार के रूप में आश्रितों की परिभाषा के तहत आएंगे और स्वतंत्रता सेनानियों के लाभ के लिए बनाई गई योजनाओं का फायदा उठाने में उनसे लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।"नहीं किया जा सकता भेदभाव"जस्टिस शरद कुमार शर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी की बेटी, नातिन या नाती के साथ लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने 5 एक जैसी याचिकाओं का निपटारा करते हुए ये कहा। अदालत...

हाईकोर्ट को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) से आपराधिक अवमानना के संदर्भ पर ग़ौर करने का अधिकार नहीं है : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
हाईकोर्ट को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) से आपराधिक अवमानना के संदर्भ पर ग़ौर करने का अधिकार नहीं है : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि अदालत अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 15(2) के तहत केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के संदर्भ में अवमानना पर लागू नहीं होती है। कैट ने आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी के वक़ील एडवोकेट महमूद प्राचा को एक कारण बताओ नोटिस से जुड़ा मामला अग्रसारित किया था। न्यायमूर्ति मनमोहन और संगीत ढींगरा सहगल ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 323 A (2)(b) के अनुसार इस अनुच्छेद की उप-उपबन्ध (1) के तहत गठित कैट को अपनी अवमानना करने वाले को ख़ुद दोषी ठहराने का अधिकार होगा अगर उक्त प्रावधान...

गंगा प्रदूषण: NGT ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को निरंतर नुकसान के लिए अंतरिम क्षतिपूर्ति के तौर पर 25 लाख जमा कराने के आदेश दिए [आर्डर पढ़े]
गंगा प्रदूषण: NGT ने बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को निरंतर नुकसान के लिए अंतरिम क्षतिपूर्ति के तौर पर 25 लाख जमा कराने के आदेश दिए [आर्डर पढ़े]

एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गंगा नदी में प्रदूषण के चलते क्षति के मामले में जवाब दाखिल करने में निष्क्रियता बरतने पर बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों को जमकर फटकार लगाई है।दरअसल ग्रीन ट्रिब्यूनल, 14.05.2019 को दिए एम. सी. मेहता बनाम भारत संघ और अन्य मामले में गंगा नदी के प्रदूषण की रोकथाम और बचाव के संबंध में ट्रिब्यूनल के दिनांक 10.12.2015 और 13.07.2017 के निर्देशों के निष्पादन पर अपने आदेश के आगे विचार कर रहा था। पर्यावरण के नियमों पर कानून की विफलता...

सुप्रीम कोर्ट ने लगाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर रोक,परिजनों की मर्जी के खिलाफ शादी करने वाली महिला की मनोरोग जांच का दिया था आदेश [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने लगाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर रोक,परिजनों की मर्जी के खिलाफ शादी करने वाली महिला की मनोरोग जांच का दिया था आदेश [आर्डर पढ़े]

'हादिया केस'जैसे एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एक आदेश पर रोक लगा दी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उस महिला की मनोरोग जांच का आदेश दिया था जिसने अपने माता-पिता की मर्जी के खिलाफ एक व्यक्ति से शादी कर ली थी।महिला के पिता ने दलील दी थी कि वह एक मनोरोग मरीज है और उसका इलाज चल रहा है। जिसके आधार पर हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के अग्रवाल ने कहा था कि तीन डाक्टरों की एक टीम महिला की मनोरोग जांच करे। इस टीम में एक मनोरोग चिकित्सक भी शामिल किया जाए और इस टीम का गठन रायपुर...

Allahabad High Court expunges adverse remarks against Judicial Officer
मरने से पहले बयान रिकॉर्ड करने के लिए मृतक को शपथ दिलाने से वह अविश्वसनीय नहीं हो जाता है : इलाहाबाद हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मरने से पहले बयान रिकॉर्ड करने के लिए मृतक को एक तरह की शपथ दिलाई गई है जिसकी वजह से वह बयान अविश्वसनीय नहीं बन जाता है और इसलिए वह निरर्थक नहीं हो जाता। अगर कार्यपालक मजिस्ट्रेट मरने से पहले के बयान की रिकॉर्डिंग के लिए कोई विशेष तरह की भाषा चाहता है तो मृतक को इसमें किसी तरह की गड़बड़ी के लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है और न ही अभियोजन की ही इसमें ग़लती मानी जा सकती है।न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति अली ज़मीन की पीठ ने संबंधित फ़ैसले के ख़िलाफ़...

नियुक्ति अवैध होने के आधार पर किसी कर्मचारी को टर्मिनेट या सेवा समाप्त करना है छंटनी के समान-सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
नियुक्ति अवैध होने के आधार पर किसी कर्मचारी को टर्मिनेट या सेवा समाप्त करना है छंटनी के समान-सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 25एफ तब भी लागू होगी,जब किसी वर्कमैन या कर्मचारी को इस आधार पर टर्मिनेट या सेवा समाप्त की गई हो कि उसकी नियुक्ति अवैध थी।जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस एम.आर शाह की पीठ ने कहा कि 'अमान्य नियुक्ति' ने औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 2(ओओ) के अपवाद के तहत नहीं आती है।छंटनीधारा 2(ओओ) के तहत 'छंटनी' का मतलब है कि नियोक्ता द्वारा अपने कर्मचारी की सेवा किसी भी कारण से समाप्त करना बशर्ते अनुशासनात्मक कार्रवाई के माध्यम से सजा के रूप में न हो। इसी...

पति/बच्चों का पत्नी/माँ के साथ रहने का अधिकार मौलिक अधिकार है : दिल्ली हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी महिला को भारत छोड़ने के नोटिस को निरस्त किया [निर्णय पढ़े]
पति/बच्चों का पत्नी/माँ के साथ रहने का अधिकार मौलिक अधिकार है : दिल्ली हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी महिला को भारत छोड़ने के नोटिस को निरस्त किया [निर्णय पढ़े]

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में काम उम्र के बच्चों का अपनी माँ और पति का अपनी पत्नी के साथ रहने का अधिकार भी शामिल है। कोर्ट ने एक भारतीय नागरिक से शादी करने वाली पाकिस्तानी नागरिक को 'भारत छोड़ने के नोटिस' को निरस्त कर दिया।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि "परिवार" समाज की स्वाभाविक और मौलिक इकाई है और इसलिए राज्य के मनमाने हस्तक्षेप से इसकी पवित्रता को बचाए रखने का हक़ है।पृष्ठभूमिनौशीन नाज़ पाकिस्तानी नागरिक हैं और...

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया कस्टम को निर्देश,केन्याई निवासी को दे 93 लाख रुपए,बिना नोटिस के बेच दिया था उसका सोना [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिया कस्टम को निर्देश,केन्याई निवासी को दे 93 लाख रुपए,बिना नोटिस के बेच दिया था उसका सोना [आर्डर पढ़े]

एक महत्वपूर्ण आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट ने कस्टम अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह केन्याई निवासी को 93 लाख 34 हजार 783 रुपए दे क्योंकि कस्टम ने उसका सोना जब्त किया और बिना कारण बताओ नोटिस जारी किए ही उसे बेचदिया।यह आदेश दो सदस्यीय खंडपीठ के न्यायमूर्ति एस.मुरलीधर और आई.एस मेहता ने एक केन्याई महिला झीनीत बानू नजीर दादनी की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। 5 जनवरी 2015 को दिल्ली एयरपोर्ट पर उसका 3732.8ग्राम सोना कस्टम विभाग ने सीज कर लिया था। झीनीत ने दावा किया है कि वह...

एनआई अधिनियम की धारा 138: नोटिस में ऋण की प्रकृति और देनदारी के बारे में कुछ नहीं बताने से नोटिस व्यर्थ नहीं हो जाता है : केरल हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
एनआई अधिनियम की धारा 138: नोटिस में ऋण की प्रकृति और देनदारी के बारे में कुछ नहीं बताने से नोटिस व्यर्थ नहीं हो जाता है : केरल हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि एनआई की धारा 138 के तहत दिए गए नोटिस में ऋण या देनदारी के बारे में बताने से चूकने के कारण नोटिस अमान्य नहीं हो जाता है। न्यायमूर्ति आर नारायण पिशारदी ने कहा कि इस बात की क़ानूनी बाध्यता नहीं है कि शिकायतकर्ता को अपनी शिकायत में अपनी देनदारी के बारे में बताने की बाध्यता नहीं है। कोर्ट एक याचिका पर ग़ौर कर रहा था जिसमें एक आपराधिक प्रक्रिया को इस आधार पर निरस्त करने की माँग की गई थी कि शिकायतकर्ता ने जो नोटिस भेजी उसमें चेक की राशि के भुगतान की कोई माँग नहीं की गई थी।...

अनपढ़ ड्राइवर पैदल यात्रियों के लिए ख़तरा, राजस्थान हाईकोर्ट ने सभी अनपढ़ लोगों को मिले ड्राइविंग लाइसेन्स को रद्द करने का आदेश दिया
'अनपढ़ ड्राइवर पैदल यात्रियों के लिए ख़तरा', राजस्थान हाईकोर्ट ने सभी अनपढ़ लोगों को मिले ड्राइविंग लाइसेन्स को रद्द करने का आदेश दिया

एक ऐसे फ़ैसले में जिसका व्यापक परिणाम हो सकता है, राजस्थान हाईकोर्ट ने अनपढ़ लोगों को जारी हल्के वाहनों के ड्राइविंग लाइसेन्स को रद्द करने का आदेश दिया।दिलचस्प बात यह है कि यह आदेश एक रिट याचिका पर दी गई है जिसमें एक व्यक्ति ने परिवहन वाहन को चलाने के लिए लाइसेन्स दिए जाने का आदेश देने की माँग की। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह माँग की है कि यहलाइसेन्स उस इस आधार पर दिया जाए कि उसे हल्के वाहनों को चलाने का लाइसेन्स 13 साल पहले जारी किया गया था।इस याचिका पर ग़ौर करते हुए एकल पीठ ने पाया कि...

एनआई अधिनियम की धारा 141: इसमें शामिल हैं साझेदारी फ़र्म या व्यक्तियों के अन्य संघ [निर्णय पढ़े]
एनआई अधिनियम की धारा 141: इसमें शामिल हैं साझेदारी फ़र्म या व्यक्तियों के अन्य संघ [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धारा 141 के तहत "कंपनी" शब्द का तात्पर्य है फ़र्म या लोगों के संघ से। इस मामले में आरोपी वैंकर कोर्पोरेट सर्विसेज़ है जो साझीदारी फ़र्म के रूप में डाटा एंट्री का काम करती है। हाईकोर्ट ने एक साझीदार के ख़िलाफ़ शिकायत की याचिका को इस आधार पर ख़ारिज कर दिया कि शिकायत में इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि वह कंपनी के इंचार्ज हैं और इस तरह कंपनी के कामकाज के लिए ज़िम्मेदार हैं। हाईकोर्ट का यह मानना था कि शिकायत के पैराग्राफ़ 5 में जिस बात का उल्लेख है उससे प्रथम प्रतिवादी...

मानसिक बीमारी से ग्रसित हर व्यक्ति को है गरिमा के साथ जीने का अधिकार-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
मानसिक बीमारी से ग्रसित हर व्यक्ति को है गरिमा के साथ जीने का अधिकार-सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों दिए अपने एक फैसले में कहा है कि मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 यानि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम के तहत मानसिक बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को यह वैधानिक अधिकार है कि वह गरिमा के साथ जिए।जस्टिस एन.वी रमाना, जस्टिस मोहन एम.शांतनागौड़र और जस्टिस इंद्रा बनर्जी की पीठ ने कहा कि मेंटल हेल्थ की धारा 20(1) स्पष्ट रूप से बताती है कि 'मानसिक बीमारी से ग्रसित हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है।'कोर्ट ने आरोपी एक्स बनाम महाराष्ट्र सरकार के मामले में कहा कि सजा के बाद मानसिक...

लिखित बयान दाख़िल करने के लिए आवश्यक 120 दिन की समय सीमा उन मामलों पर लागू नहीं होंगे जो वाणिज्यिक अदालत अधिनियम बनाए जाने के पहले दायर हुए : बॉम्बे हाईकोर्ट
लिखित बयान दाख़िल करने के लिए आवश्यक 120 दिन की समय सीमा उन मामलों पर लागू नहीं होंगे जो वाणिज्यिक अदालत अधिनियम बनाए जाने के पहले दायर हुए : बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि वाणिज्यिक मामलों में 120 दिनों के भीतर बयान दाख़िल करने की समय सीमा उन मामलों में लागू नहीं होगा जो वाणिज्यिक अदालत अधिनियम 2015 को बनाए जाने के पहले दायर किए गए हैं।न्यायमूर्ति एसजे कठवल्ला ने कहा कि वाणिज्यिक अदालत इस तरह के मामले में प्रबंधन की सुनवाई कर सकते हैं जिन्हें "स्थानांतरित" मामले भी कहा जाता है। केस प्रबंधन सुनवाई की इजाज़त सीपीसी के नए प्रावधान आदेश XV-A के तहत दी गई है। अदालत कलोनीयल लाइफ़ इंस्योरेंश कम्पनी लिमिटेड द्वारा दायर एक मामले की सुनवाई के...

घरेलु हिंसा अधिनियम के तहत विधवा के भरण पोषण का भुगतान करने का आदेश दिया जा सकता है देवर को-सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
घरेलु हिंसा अधिनियम के तहत विधवा के भरण पोषण का भुगतान करने का आदेश दिया जा सकता है देवर को-सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि देवर यानि पति के भाई को यह आदेश दिया जा सकता है कि वह विधवा को गुजारा भत्ता दे।इस मामले में महिला व उसका पति उस घर में रहते थे,जो उनकी हिंदू संयुक्त परिवार की पैतृक संपत्ति थी। मृतक पति व उसका भाई संयुक्त रूप से बिजनेस करते थे और उनका किरयाना स्टोर था।महिला ने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दायर शिकायत में आरोप लगाए थे कि उसके पति की मौत के बाद उसे व उसके बच्चे को ससुरालवाले घर में नहीं रहने दिया गया।निचली अदालत ने इस मामले में अंतरिम गुजारे भत्ते का आदेश देते हुए...

कोर्ट को पितृत्व की स्थापना के लिए डीएनए टेस्ट कराने का आदेश पारित करने से पहले परिस्थितियों के प्रति सावधान व संदेवनशील रहना चाहिए-राजस्थान हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
कोर्ट को पितृत्व की स्थापना के लिए डीएनए टेस्ट कराने का आदेश पारित करने से पहले परिस्थितियों के प्रति सावधान व संदेवनशील रहना चाहिए-राजस्थान हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि उन मामलों में अदालतों को परिस्थितियों के प्रति बहुत ज्यादा सावधान व संवेदनशील रहना चाहिए,जिनमें पितृत्व को स्थापित करने के लिए डीएनए टेस्ट कराने का आदेश दिया जाता है। कोर्ट ने कहा है िकइस तरह के मामलों में अदालतों को ऐसी मांग स्वीकार करने से पहले सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए और सभी एंगज से मामले को देखना चाहिए क्योंकि इस तरह की मांग किसी व्यक्ति के जीवन को प्रभावित कर सकती है,इस बात को नकारा नहीं जा सकता है।हालांकि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए...

अगर शिकायतकर्ता का सम्पत्ति पर क़ब्ज़ा नहीं है तो आईपीसी की धारा 447 के तहत उस पर कोई अभियोग नहीं लगाया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
अगर शिकायतकर्ता का सम्पत्ति पर क़ब्ज़ा नहीं है तो आईपीसी की धारा 447 के तहत उस पर कोई अभियोग नहीं लगाया जा सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने जगदीश कपिला बनाम राज कुमार एवं अन्य मामले में कहा कि जब इस बात के सबूत नहीं हैं कि याचिकाकर्ता ने जो क़ब्ज़ा छोड़ा उसे शिकायतकर्ता को सौंप दिया गया, तो उस स्थिति में शिकायतकर्ता के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 447 के तहत मामला नहीं बन सकता। अदालत ने निचली अदाल द्वारा दिए गए आदेश के ख़िलाफ़ चुनौती पर दिए गए आदेश को यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि निचली अदालत ने अभियोग यह समझकर लगाया था कि शिकायतकर्ता के पास उस समय दुकान का क़ब्ज़ा है जो कि सही नहीं है। जिस दुकान पर...

वित्तीय अभाव घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आर्थिक उत्पीड़न है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
वित्तीय अभाव घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आर्थिक उत्पीड़न है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

एक महत्त्वपूर्ण निर्णय में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि वित्तीय अभाव घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आर्थिक उत्पीड़न की श्रेणी में आता है। अदालत ने कहा कि अगर संयुक्त परिवार की कोई विधवा जिसे वित्तीय संसाधनप्राप्त करने का हक़ है, और उसे इससे वंचित किया जाता है तो यह आर्थिक उत्पीड़न है।नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति एमजी गिरतकर ने एक आपराधिक समीक्षा याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मत ज़ाहिर किया। यह याचिका 38 वर्षीय विधवा सपना पटेल ने दायर की है जिसके पति निलेश पटेल की 27 मार्च2010 को निधन हो...