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मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 – अतिरिक्त दस्तावेज़ पेश करने की अनुमति नहीं देने का आदेश अंतरिम फ़ैसला नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 – अतिरिक्त दस्तावेज़ पेश करने की अनुमति नहीं देने का आदेश अंतरिम फ़ैसला नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

मध्यस्थता क़ानून के तहत एक महत्त्वपूर्ण निर्णय में, दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि अगर मध्यस्थता अधिकरण ने अतिरिक्त दस्तावेज़ पेश करने की अनुमति रद्द कर दी है तो इसका मतलब यह नहीं कि उसने 'अंतरिम फ़ैसला' दे दिया है। अदालत ने कहा कि ONGC Petro Additions Limited (ओपल) v. Tecnimont S.P.A and Another मामले में न्यायमूर्ति संजीव नरूला ने जो फ़ैसला दिया है उसके मुताबिक़ इस तरह के आदेश को मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 34 के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती। ओपल और टेक्निमोंट एसपीए के बीच...

मिताक्षरा कानून - एक पुरुष द्वारा प्राप्त की गई संपत्ति, 3 डिग्री नीचे तक के उत्तराधिकारियों के लिए सहसंयोजक (कोपार्सनरी) संपत्ति के रूप में बनी रहेगी: SC [निर्णय पढ़ें]
मिताक्षरा कानून - एक पुरुष द्वारा प्राप्त की गई संपत्ति, 3 डिग्री नीचे तक के उत्तराधिकारियों के लिए सहसंयोजक (कोपार्सनरी) संपत्ति के रूप में बनी रहेगी: SC [निर्णय पढ़ें]

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि मिताक्षरा कानून के तहत यह नियम कि जब भी कोई पुरुष अपने पूर्वजों में से किसी से भी 3 डिग्री ऊपर तक की संपत्ति प्राप्त करता है, तो उसके बाद उसके 3 डिग्री तक के कानूनी रूप से पुरुष उत्तराधिकारियों को उस संपत्ति में सहसंयोजक (कोपार्सनर्स) होने के नाते बराबर अधिकार प्राप्त होगा, यह नियम उत्तराधिकार के उन मामलों में लागू होगा जहाँ संपत्ति हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 से पहले खोली गई थी।इस नियम को लागू करते हुए, जस्टिस यू. यू. ललित और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की पीठ...

पत्नी की कमाई के बावजूद भी पति को देना होगा बच्चों के लिए गुजारा भत्ता-दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
पत्नी की कमाई के बावजूद भी पति को देना होगा बच्चों के लिए गुजारा भत्ता-दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले दिनों कहा है कि पति सिर्फ इस आधार पर अपने बच्चों के रख-रखाव की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता है क्योंकि उसकी पत्नी कमाती है।जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ इस मामले में एक पुनविचार याचिका पर सुनवाई कर रही थी,जिसमें एक सेशन कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। सेशन कोर्ट ने याचिकाकर्ता की उस अपील को खारिज कर दिया था,जो उसने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर की थी।याचिकाकर्ता एक मुस्लिम है,जिसने प्रतिवादी जो कि एक क्रिश्चियन है,से वर्ष 2004 में निकाह किया था। जिसके बाद इनकी शादी...

समीक्षा का अधिकार सूचना के अधिकार में निहित नहीं और यह सूचना आयुक्त के अधिकार क्षेत्र के बाहर है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
समीक्षा का अधिकार सूचना के अधिकार में निहित नहीं और यह सूचना आयुक्त के अधिकार क्षेत्र के बाहर है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 सूचना आयुक्त को समीक्षा का अधिकार नहीं देता है। कोर्ट ने नागपुर के 60 साल के एक व्यक्ति की इस बारे में याचिका स्वीकार कर ली।नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति एएस चंदूरकर ने डॉमिनिक फ़िलिप की याचिका पर ग़ौर किया। फ़िलिप ने सेंट जॉन्स हाई स्कूल, नागपुर के प्रिंसिपल और सूचना अधिकारी के समक्ष मई 2013 में आवेदन देकर अधिनियम के तहत कुछ सूचना माँगीथी।हालाँकि, याचिकाकर्ता को जवाब यह मिला कि स्कूल कोई सार्वजनिक अथॉरिटी नहीं है इसलिए जो जानकारी माँगी गई...

भूमि अधिग्रहण के सभी मामलों में मालिक को वैकल्पिक जगह या फ्लैट देने का कोई नियम नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
भूमि अधिग्रहण के सभी मामलों में मालिक को वैकल्पिक जगह या फ्लैट देने का कोई नियम नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि ऐसा कोई नियम नहीं है कि भूमि अधिग्रहण के सभी मामलों में भूमि मालिक को वैकल्पिक जगह या फ्लैट दिया जाना चाहिए।क्या था यह पूरा मामला ?दरअसल एमआरटीएस (रेलवे) की एक परियोजना के लिए अधिग्रहण से संबंधित एक रिट याचिका में मद्रास उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड को भूमि मालिकों को विस्थापितों की एक विशेष श्रेणी के रूप में वैकल्पिक भूमि प्रदान करने के लिए निर्देश जारी किया था। अपील में राज्य की दलील [तमिलनाडु राज्य बनाम डॉ वासंती वीरसेकरन] यह थी कि उच्च...

जनता की पहुंच वाले स्थान पर निजी वाहन में भी शराब पीना बिहार आबकारी कानून के तहत अपराध : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
जनता की पहुंच वाले स्थान पर निजी वाहन में भी शराब पीना बिहार आबकारी कानून के तहत अपराध : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि एक निजी वाहन को बिहार आबकारी (संशोधन) अधिनियम 2016 के तहत दी गयी 'सार्वजनिक स्थान' की परिभाषा से छूट नहीं है। इसका मतलब यह है कि सार्वजनिक स्थान पर निजी वाहन के भीतर शराब का सेवन बिहार में शराबबंदी कानून के तहत अपराध होगा।अपीलकर्ताओं के खिलाफ दायर चार्जशीट को रद्द करने के लिए पटना हाईकोर्ट के दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत शक्तियों का प्रयोग करने से इनकार करने के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ की पीठ ने...

घरेलू हिंसा : तलाकशुदा पत्नी तलाक की डिक्री से पहले भरण-पोषण के आदेश को निष्पादित कराने की हकदार : कलकत्ता हाई कोर्ट [निर्णय पढ़े]
घरेलू हिंसा : तलाकशुदा पत्नी तलाक की डिक्री से पहले भरण-पोषण के आदेश को निष्पादित कराने की हकदार : कलकत्ता हाई कोर्ट [निर्णय पढ़े]

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह माना है कि यदि तलाकशुदा पत्नी को घरेलू हिंसा अधिनियम [डीवी अधिनियम] के तहत भरण-पोषण और अन्य राहत का आदेश मिला है तो वो तलाक की डिक्री से पहले उसे निष्पादित करने की हकदार है अगर वह खुद के भरण-पोषण में असमर्थ है और उसने पुनर्विवाह नहीं किया है।कृष्णेंदु दास ठाकुर बनाम पश्चिम बंगाल राज्य के मामले में न्यायमूर्ति मधुमती मित्रा ने इन 2 महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दों पर विचार किया- • क्या घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 में महिलाओं के संरक्षण के प्रावधान के तहत उनके पक्ष में पहले से...

आरटीआई के तहत है छात्रों को अपनी खुद की उत्तर पुस्तिका के निरीक्षण का अधिकार-सीआईसी [आर्डर पढ़े]
आरटीआई के तहत है छात्रों को अपनी खुद की उत्तर पुस्तिका के निरीक्षण का अधिकार-सीआईसी [आर्डर पढ़े]

केंद्रीय सूचना आयोग यानि सीआईसी ने पिछले दिनों माना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत एक परीक्षार्थी को अपनी उत्तर पुस्तिका की जांच या निरीक्षण करने का अधिकार है।सीआईसी इस मामले में यूजीसी में कार्यरत एक सीनियर रिसर्च फैलो की तरफ से दायर अर्जी पर सुनवाई कर रहा था। इस मामले में एक आरटीआई की अर्जी सीपीआईओ,नेशनल इंस्ट्टियूट आॅफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंस (एनआईएमएचएएनएस) के खिलाफ दायर की गई थी। इस मामले में अर्जी दायर करने वाले ने अपनी उत्तर पुस्तिका के संबंध में सात तथ्यों पर जानकारी...

बीस सप्ताह से कम की गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए दुष्कर्म पीड़िताओं को न अपनाना पड़े कोर्ट का रास्ता -मद्रास हाईकोर्ट ने जारी किए दिशा-निर्देश [आर्डर पढ़े]
बीस सप्ताह से कम की गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए दुष्कर्म पीड़िताओं को न अपनाना पड़े कोर्ट का रास्ता -मद्रास हाईकोर्ट ने जारी किए दिशा-निर्देश [आर्डर पढ़े]

मद्रास हाईकोर्ट ने यौन शोषण के मामले की पीड़िताओं के अनचाहे गर्भ का गर्भपात करवाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए है।जस्टिस एन.आनंद वेंकेटश इस मामले में दुष्कर्म पीड़िता की अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे। पीड़िता अपने गर्भ का चिकित्सीय समाप्ति करवाना चाहती थी। कोर्ट ने इस मामले में पाया कि पीड़िता को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेज दिया गया,जबकि सबसे पहले वाला अस्पताल बिना उसके केस को मेडिकल बोर्ड के पास भेजे गर्भपात कर सकता था। कोर्ट ने अधिनियम के प्रावधानों को हवाला देते हुए कहा कि स्थाई मेडिकल बोर्ड के...

आधार लिंक ना कराने वाले कर्मचारी को वेतन में देरी के लिए ब्याज चुकाएं : बॉम्बे हाई कोर्ट ने पोर्ट ट्रस्ट को कहा [आर्डर पढ़े]
आधार लिंक ना कराने वाले कर्मचारी को वेतन में देरी के लिए ब्याज चुकाएं : बॉम्बे हाई कोर्ट ने पोर्ट ट्रस्ट को कहा [आर्डर पढ़े]

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पोर्ट ट्रस्ट को अपने उस कर्मचारी को लगभग 30 महीनों की देरी से वेतन पर ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया है जिसने अपने आधार कार्ड को वेतन भुगतान से जोड़ने से इनकार कर दिया था।देरी से वेतन के भुगतान पर देना होगा ब्याजन्यायमूर्ति अखिल कुरैशी और न्यायमूर्ति एस. जे. काथावाला ने कर्मचारी रमेश कुरहडे द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए कहा, "मुंबई पोर्ट ट्रस्ट द्वारा देरी से वेतन के भुगतान के चलते, याचिकाकर्ता को प्रति वर्ष 7.5% @ साधारण ब्याज का भुगतान देना होगा। ये...

कोई सरकारी कर्मचारी लंबे समय से निलंबित है सिर्फ़ इस आधार पर उसका निलंबन आदेश समाप्त नहीं किया जा सकता : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
कोई सरकारी कर्मचारी लंबे समय से निलंबित है सिर्फ़ इस आधार पर उसका निलंबन आदेश समाप्त नहीं किया जा सकता : उत्तराखंड हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले को मानने से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि अगर क़सूरवार कर्मचारी के ख़िलाफ़ उसके निलंबन के दिन से तीन महीने के भीतर चार्ज शीट दाख़िल नहीं होता है तो उसे उसके पद पर पुनर्बहाली का हक़ होगा। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथ और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फ़ैसले को उद्धृत किया और कहा कि अगर किसी कर्मचारी के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई या आपराधिक मामलों को पूरा करने में लंबा...

पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण :  जाट सिख  भी OBC के तहत आरक्षण के हकदार : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़े]
पिछड़ेपन के आधार पर आरक्षण : " जाट सिख " भी OBC के तहत आरक्षण के हकदार : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सिविल सेवा के एक अभ्यर्थी को बड़ी राहत देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय ने यह कहा है कि राजस्थान राज्य (भरतपुर और धौलपुर जिलों को छोड़कर) में सिख जाति के लोग 'जाट' समुदाय से संबंधित हैं और पिछड़ा वर्ग प्रमाण पत्र प्राप्त करने के हकदार हैं।व्यक्ति उस राज्य का स्थायी निवासी है या नहीं, पता लगाना जरूरीहालांकि अदालत ने कहा कि इस तरह के प्रमाण पत्र जारी करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति उस राज्य का स्थायी निवासी है या नहीं।कोर्ट ने यह कहा है कि प्रवासी ओबीसी, जो एक राज्य से...

विवरणों का पूरा ख़ुलासा करने की ज़िम्मेदारी बीमित व्यक्ति की है, बीमाकर्ता को अपर्याप्त ख़ुलासे के बार में बताने को कहकर उस पर इसका अनावश्यक बोझ नहीं डाला जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]
विवरणों का पूरा ख़ुलासा करने की ज़िम्मेदारी बीमित व्यक्ति की है, बीमाकर्ता को अपर्याप्त ख़ुलासे के बार में बताने को कहकर उस पर इसका अनावश्यक बोझ नहीं डाला जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह बीमित व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह बीमा प्रस्ताव प्रस्तुत करने के समय स्पष्ट रूप से विशेष जानकारियों का ख़ुलासा करे।संबंधित पॉलिसी की जहाँ तक बात है, पिछले तीन सालों में दावों के बारे में जो विवरण जमा कए गए हैं वे ऐसे विवरण थे जो उन्हें जमा कराना ज़रूरी था पर बीमित व्यक्ति ने इन्हें जमा नहीं कराया।एनसीडीआरसी ने कहा कि चूँकि पूर्व की पॉलिसी को प्रस्ताव में शामिल किया गया, बीमाकर्ता को जाँच-पड़ताल करने पर यह पता चल सकता था कि पहलेवाले बीमाकर्ता के समक्ष किए गए दावे...

रिटायर हो जाने का मतलब यह नहीं कि काम पर रहते हुए जो ग़लतियाँ की उसके लिए कार्रवाई नहीं होगी; बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिटायर हुए जज को राहत देने से मना किया [निर्णय पढ़े]
रिटायर हो जाने का मतलब यह नहीं कि काम पर रहते हुए जो ग़लतियाँ की उसके लिए कार्रवाई नहीं होगी; बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिटायर हुए जज को राहत देने से मना किया [निर्णय पढ़े]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अगर कोई कर्मचारी रिटायर हो जाता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि नौकरी में रहते हुए उसने अगर कोई ग़लती की है तो अथॉरिटी उसके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं कर सकते हैं।न्यायमूर्ति आरएम बोर्डे और न्यायमूर्तिएनजे जमदार ने रिटायर हुए एक पूर्व न्यायिक अधिकारी को कोई भी राहत देने से मना कर दिया। जज का दर्जा ज़िला जज का था और उन्होंने अपने ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई को जारी रखने को चुनौती दी है।पृष्ठभूमियाचिकाकर्ता जूनियर डिविज़न में दीवानी जज के कैडर में 7 सितम्बर...

गुवहाटी हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति के नागरिकता के दावे को खारिज कर दिया,जिसने 1965 में भारत में प्रवेश की बात कही थी [निर्णय पढ़े]
गुवहाटी हाईकोर्ट ने उस व्यक्ति के नागरिकता के दावे को खारिज कर दिया,जिसने 1965 में भारत में प्रवेश की बात कही थी [निर्णय पढ़े]

गुवहाटी हाईकोर्ट ने असम में स्थित विदेशी ट्रिब्यूनल के एक व्यक्ति के खिलाफ दिए विष्कर्ष परिणाम को सही ठहराया है। इस व्यक्ति ने वर्ष 1965 में भारत में प्रवेश करने का दावा किया था।पिछले सितम्बर में बरपेटा में स्थित ट्रिब्यूनल ने एक अनिल बर्मन नामक व्यक्ति को विदेशी घोषित कर दिया था। बर्मन को इस आधार पर विदेशी घोषित किया गया था क्योंकि वह इस बात का कोई सबूत पेश नहीं कर पाया था कि वह असम में वर्ष 1971 से पहले से रह रहा है।हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ट्रिब्यूनल के विष्कर्ष परिणाम को चुनौती दी गई थी।...

सुधार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है- एमपी हाईकोर्ट ने  बेटी से दुष्कर्म व हत्या करने के मामले में फांसी की सजा पाए आरोपी को दी राहत [निर्णय पढ़े]
सुधार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है- एमपी हाईकोर्ट ने बेटी से दुष्कर्म व हत्या करने के मामले में फांसी की सजा पाए आरोपी को दी राहत [निर्णय पढ़े]

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपनी की छह साल की बेटी से दुष्कर्म करने व उसकी हत्या करने के मामले में फांसी की सजा पाए आरोपी को राहत देते हुए उसकी सजा को बदल दिया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार अफजल खान ने अपनी की बेटी से दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं उसने अपने घर के उपरी तल पर एक दुप्पटे की सहायता से बेटी को पंखे पर लटका दिया था। डीएनए रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी के डीएनए का मिलान बच्ची के योनि से मिले डीएनए प्रोफाइल से हो गया था। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे फांसी...