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समीक्षा का अधिकार सूचना के अधिकार में निहित नहीं और यह सूचना आयुक्त के अधिकार क्षेत्र के बाहर है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]

Live Law Hindi
4 July 2019 9:16 AM GMT
समीक्षा का अधिकार सूचना के अधिकार में निहित नहीं और यह सूचना आयुक्त के अधिकार क्षेत्र के बाहर है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़े]
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 सूचना आयुक्त को समीक्षा का अधिकार नहीं देता है। कोर्ट ने नागपुर के 60 साल के एक व्यक्ति की इस बारे में याचिका स्वीकार कर ली।

नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति एएस चंदूरकर ने डॉमिनिक फ़िलिप की याचिका पर ग़ौर किया। फ़िलिप ने सेंट जॉन्स हाई स्कूल, नागपुर के प्रिंसिपल और सूचना अधिकारी के समक्ष मई 2013 में आवेदन देकर अधिनियम के तहत कुछ सूचना माँगीथी।

हालाँकि, याचिकाकर्ता को जवाब यह मिला कि स्कूल कोई सार्वजनिक अथॉरिटी नहीं है इसलिए जो जानकारी माँगी गई है वह नहीं दी जा सकती।

याचिकाकर्ता ने 14 जून 2013 प्रथम अपीली अधिकारी के समक्ष आवेदन दिया जिसने 30 अगस्त 2013 को स्कूल से संबंधित सूचना सात दिन के अंदर देने को कहा।

याचिकाकर्ता ने सूचना अधिनियम की धारा 19(2) के तहत एक और याचिका दायर की क्योंकि आयोग के कहने के बाद भी उसे सूचना नहीं दी गई। सूचना आयोग ने 15 जनवरी 2015 को विशेष अपील स्वीकार कर ली और स्कूल को नोटिसजारी कर पूछा कि सूचना नहीं देने के लिए उस पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाए।

चूँकि, आदेश के अनुरूप सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, याचिकाकर्ता ने धारा 18 (1)(e) के तहत नया आवेदन दायर किया और 19 अक्टूबर 2015 को राज्य सूचना आयोग यह सूचना देने के लिए बाध्य नहीं है जिसका आदेश पहले दिया गयाथा।

याचिकाकर्ता के वकील जीएम शितुत ने कहा कि राज्य सूचना आयोग नहीं कह सकता कि स्कूल माँगी गई सूचना देने के लिए बाध्य नहीं है।

दूसरी ओर, स्कूल के वक़ील बर्नार्ड जॉन ने कहा कि याचिकाकर्ता को सारी जानकारियाँ उपलब्ध कराई गईं इसलिए एक और याचिका दायर करने की कोई ज़रूरत नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सूचना आयोग के संज्ञान में यहजानकारी लाई गई कि स्कूल को सरकार की ओर से किसी तरह की सहायता नहीं मिल रही है इसलिए अधिनियम के उक्त प्रावधान उस पर लागू नहीं होता।

फ़ैसला

अदालत ने इस बात को माना कि राज्य सूचना आयोग ने अपने अधिकार क्षेत्र के बाहर जाकर काम किया और कहा,

"यह आदेश देकर राज्य सूचना आयोग ने उस आदेश को निरस्त कर दिया है जो अपीलकर्ता के पक्ष में प्रभावी था और प्रतिवादी नम्बर 2 ने इस बात को चुनौती नहीं दी। समीक्षा का अधिकार अंतर्निहित नहीं है और इस अधिनियम के प्रावधानोंके तहत यह नहीं दिया गया है और इस अधिकार का राज्य सूचना आयोग द्वारा प्रयोग प्रयोग करना अपने अधिकारक्षेत्र के बाहर जाना है। इस तरह यह स्पष्ट है कि संबंधित आदेश एक ऐसे अधिकार के प्रयोग का है जो उसका नहीं है। इसलिएइस पर नए सिरे से ग़ौर किए जाने की ज़रूरत है।"

इस तरह अदालत ने राज्य सूचना आयोग के आदेश को स्थगित कर दिया और धारा 18 (1)(e) के तहत दायर याचिकाकर्ता की शिकायत को बहाल कर दिया।


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