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दुष्कर्म के मामलों में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सूचना देने वाले या उसके द्वारा अधिकृत व्यक्ति को उपस्थित रहना होगा : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से सूचना देने वाले या उसके द्वारा अधिकृत किसी व्यक्ति की उपस्थिति को दुष्कर्म के आरोपी की जमानत याचिका की सुनवाई के समय अनिवार्य कर दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीएन पटेल ने आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 के मद्देनजर मंगलवार को उपरोक्त निर्देश दिए हैं, जिनमें इस आशय के लिए सीआरपीसी की धारा 439 में संशोधन किया गया था। इस संशोधन के तहत धारा 439 में उपधारा 1 ए को जोड़ा गया है, जिसके अनुसार आईपीसी की धारा 376,376-एबी, 376-डीए और...
हाईकोर्ट जज नियुक्त करने की कॉलेजियम की सिफारिश को केंद्र ने आय मानदंड के आधार पर रोका
सरकार ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की कुछ वकीलों के नाम की सिफारिशों पर रोक लगा दी है, जिनकी वार्षिक पेशेवर आय निर्धारित मानदंडों से कम है। दरअसल जब बार के किसी उम्मीदवार की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए सिफारिश की जाती है, तो उस पर विचार करने के लिए यह जरूरी है कि उस व्यक्ति की कम से कम 5 सालों में औसतन 7 लाख रुपये की वार्षिक आय होनी चाहिए। फरवरी में कॉलेजियम ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के...
अधिवक्ताओं द्वारा अदालतों में हड़ताल करना अवैध, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा
एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं द्वारा अदालतों में हड़ताल करना/ अदालत के बहिष्कार का सहारा लेना अवैध है और यह भी एक कदाचार है, जिसके लिए स्टेट बार काउंसिल और इसकी अनुशासन समितियों द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की पीठ ने कहा, "हड़ताल का सहारा लेना एक अधिवक्ता के लिए अव्यावहारिक और गैर-जिम्मेदाराना है। अधिवक्ता जिसने एक केस स्वीकार कर लिया है, हड़ताल या बहिष्कार के आह्वान के लिए...
अयोध्या सुनवाई का 31वां दिन : सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा, राम चबूतरे को भगवान राम का जन्मस्थान नहीं मानते
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को अयोध्या विवाद की 31वें दिन की सुनवाई के दौरान सुन्नी वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वह राम चबूतरे को भगवान राम का जन्मस्थान नहीं मानता। बोर्ड की ओर से जफरयाब जिलानी ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की संविधान पीठ के समक्ष स्पष्टीकरण दिया कि बोर्ड अभी तक यह नहीं मानता कि राम चबूतरा ही वह जगह है जहां राम का जन्म हुआ था, जैसा कि मीडिया के कुछ हिस्से में खबरें प्रकाशित...
कर्नाटक में राजनीतिक संकट : सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान स्पीकर ने अयोग्य विधायकों का पक्ष लिया
कर्नाटक में अयोग्य करार दिए गए 17 बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई के दौरान कर्नाटक विधानसभा के वर्तमान स्पीकर ने अयोग्य विधायकों का पक्ष लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विधायकों को इस्तीफा देने का लोकतांत्रिक अधिकार है और तत्कालीन स्पीकर को इस्तीफे पर फैसला देना चाहिए था न कि अयोग्यता पर। बुधवार को जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ के सामने स्पीकर की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वो उस समय के फैसले की आलोचना नहीं कर रहे, लेकिन यह बता रहे...
पुलिस द्वारा गिरफ्तार व्यक्ति मजिस्ट्रेट के सामने बिना पेश हुए ज़मानत के लिए आवेदन करने का हकदार, कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला
कर्नाटक हाईकोर्ट ने निचली अदालत के मजिस्ट्रेट को यह कहते हुए एक ज़मानत याचिका पर वाद और कानून के अनुसार विचार करने के निर्देश दिए हैं कि " यदि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है और न्यायिक न्यायालय के समक्ष पेश नहीं किया गया है तो वह दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) 1973 की धारा 437 के तहत याचिका दायर करने का हकदार है।" साईं रामकृष्ण को केरल पुलिस द्वारा सम्पिगे हल्ली (Sampige Halli) पुलिस के अधिकार क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी की सूचना VII के अतिरिक्त मुख्य...
अफसरों व बिल्डरों की सांठगांठ : सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के FIR दर्ज करने के फैसले पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है जिसमें बिल्डरों के साथ कथित सांठ गांठ के चलते महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) अधिकारियों पर FIR दर्ज करने के आदेश जारी किए गए थे। म्हाडा की अपील पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आर. एफ. नरीमन की पीठ ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के साथ-साथ नोटिस भी जारी किया है। क्या था बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला दरअसल 18 सितंबर को एक महत्वपूर्ण फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को वर्ष...
सुप्रीम कोर्ट में SC/ST एक्ट पुनर्विचार याचिका पर आ सकता है 3 अक्टूबर से पहले फैसला
SC/ST एक्ट के प्रावधानों को हलका करने के 20 मार्च, 2018 के फैसले पर केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 3 अक्टूबर से पहले अपना फैसला सुना सकता है। बुधवार को जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह कहा कि पहले वो केंद्र की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुनाएंगे इसके बाद वे 3 अक्टूबर को फैसले के बाद लाए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे। इससे पहले 18 सितंबर को 3 जजों की पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सीवर सफाई के दौरान होने वाली मौतों पर सरकार को...
रायबरेली सड़क हादसा : सुप्रीम कोर्ट ने जांच पूरी करने के लिए CBI को दो सप्ताह का समय और दिया
उन्नाव गैंगरेप मामले से जुड़े रायबरेली सड़क हादसे मामले की जांच पूरी करने के लिए सीबीआई को 2 सप्ताह का और समय मिल गया है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को सीबीआई की अर्जी पर विचार किया जिसमें यह कहा गया था कि एजेंसी को जांच पूरी करने के लिए और समय चाहिए । पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पीड़िता के वकील महेंद्र सिंह की हालत अभी भी गंभीर है और वो होश में नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी करने के लिए उनके बयान होना जरूरी है। पीठ ने इन...
बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा ने वकीलों के नामांकन के लिए पुलिस वेरिफिकेशन की अनिवार्यता समाप्त की
बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र एंड गोवा ने फैसला किया है कि गोवा और महाराष्ट्र राज्यों में वकील के रूप में नामांकन करवाने के लिए पुलिस सत्यापन की आवश्यकता नहीं होगी। इस प्रकार बार काउंसिल ने वकील के रूप में नामांकन के लिए पुलिस वेरिफिकेशन की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। अविनाश जनार्दन भिडे, अध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र और गोवा ने लाइव लॉ से बात करते हुए पुष्टि की कि ऐसा प्रस्ताव पारित किया गया है, जिसमें बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकन करवाने के लिए पुलिस वेरिफिकेशन की...
न्यायाधीशों का स्थानांतरण उनके विरूद्ध शिकायतों का समाधान नहीं : न्यायमूर्ति चंद्रचूड़
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि न्यायाधीशों का स्थानांतरण, उनके खिलाफ शिकायतों का समाधान नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस ने जस्टिस चंद्रचूड़ के हवाले से कहा, "महाभियोग और स्थानांतरण के बीच कुछ भी नहीं है। हमें एक ऐसी प्रणाली की आवश्यकता है, जो वर्तमान प्रणाली की तुलना में न्यायाधीशों को जवाबदेह बनाने के लिए अधिक बारीक हो।" न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की यह टिप्पणी मद्रास उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश वी के ताहिलरामनी के इस्तीफे के मद्देनजर महत्वपूर्ण है। मद्रास...
अगर उपहार से विशेष रूप से इंकार नहीं है तो उपहार लेने वाले के लिए ज़रूरी नहीं है कि वह सत्यापित करने वाले गवाह की जांच करे : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब उपहार के क़रार से मुक़दमे में विशेष रूप से इंकार नहीं किया गया तो उपहार लेने वाले के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि वह सत्यापित करने वाले गवाह की भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 68 के एक परंतुक के तहत जांच करे। वर्तमान मामले (गोविंदभाई छोटाभाई पटेल बनाम पटेल रमनभाई माथुरभाई), में हाईकोर्ट ने वादी के मुक़दमे को यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि उन्होंने इस दस्तावेज़ तैयार किए जाने से इंकार नहीं किया बस यह आरोप लगाया था कि इसमें धोखाधड़ी और जालसाज़ी की गई है। यह भी...
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने वेब स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के विनियमन के लिए याचिका पर नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम और अन्य को नोटिस जारी किया
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने सोमवार को कथित स्ट्रीमिंग अश्लील और यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के खिलाफ नियमन के लिए नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, आदि जैसे ओवर द टॉप (ओटीटी) मीडिया प्लेटफार्मों के खिलाफ दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया। न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति शैलेन्द्र शुक्ला की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और दस प्रतिवादी कंपनियों को जवाब देने को कहा है। AltBalaji, Netflix, Amazon Prime, Ullu, Voot, Vuclip, Hoichoi, Yashraj Films, Arre और Zee5 ने छह हफ्तों के भीतर इस पर अपना...
NI एक्ट की धारा 138 : मृत दोषी के कानूनी वारिसों को भी दोषसिद्धि को चुनौती देने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराए गए एक मृत अभियुक्त के कानूनी उत्तराधिकारियों को उसकी दोषसिद्धि को चुनौती देने का अधिकार है ताकि वो यह दिखा सकें कि वह व्यक्ति किसी अपराध का दोषी नहीं था।एम. अब्बास हाजी बनाम टी. एन. चन्नाकेशवा मामले में मृतक अभियुक्त द्वारा दायर अपील पर मुकदमा चलाने के लिए कानूनी उत्तराधिकारियों द्वारा दायर आवेदन की अनुमति देते हुए न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा : "कानूनी वारिस, ऐसे...
बेंगलुरु एडवोकेट्स एसोसिएशन ने CJI को लिखा पत्र, जस्टिस ताहिलरामनी, जस्टिस कुरैशी पर लिए गए फैसलों के कारण खुलासा करने का आग्रह
एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ बेंगलुरु ने भारत के मुख्य न्यायाधीश ( CJI) रंजन गोगोई से जजों की नियुक्ति, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों, सुप्रीम कोर्ट के जजों के तबादलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है और उनसे कुछ जजों के "रहस्यमय" तबादलों के कारणों का खुलासा करने का भी निवेदन किया है। CJI को संबोधित एक पत्र में एसोसिएशन ने कॉलेजियम की निर्णय लेने की प्रक्रिया की अस्पष्टता पर अपनी चिंता व्यक्त की। एसोसिएशन न्यायमूर्ति कुरैशी को त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में...
सोशल मीडिया का दुरुपयोग खतरनाक स्तर पर, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को गाइडलाइन बनाने के निर्देश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार को यह निर्देश दिया है कि वह ऑनलाइन निजता और राज्य की संप्रभुता के हितों को संतुलित करके सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने के बारे में अदालत में एक हलफनामा दायर करे। जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। दरअसल पीठ फेसबुक द्वारा मद्रास, बॉम्बे और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों में दाखिल उन याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए दायर...
पंचायत चुनाव में दो बच्चों की नीति : सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका पर नोटिस जारी किया, हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार
उच्च न्यायालय के पंचायती राज चुनाव में 2 बच्चों से अधिक होने पर अयोग्य करार देने के फैसले को चुनौती देने वाली उत्तराखंड सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने को लेकर सहमति तो जताई है लेकिन फिलहाल उत्तराखंड उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सोमवार को न्यायमूर्ति एन. वी. रमना, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने उत्तराखंड सरकार द्वारा दायर विशेष अवकाश याचिका पर नोटिस जारी किया लेकिन 5 अक्टूबर को होने वाले पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में...
स्लम से बेघर हुए परिवारों को राज्य सरकार व्यवस्था होने तक 15,000 रुपये महीना किराया दे, बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के महुल में परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (पीएपी) को बड़ी राहत प्रदान करते हुए सोमवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह उन लोगों के लिए रहने की वैकल्पिक व्यवस्था करे, साथ ही जब तक यह व्यवस्था नहीं होती है तब तक उन्हें 15,000 रुपये प्रतिमाह ट्रांजिट किराया तथा 45,000 रुपये जमानत राशि का भुगतान करे। कोर्ट ने कहा कि महुल इलाके में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है और हवा में कैंसरकारी तत्व मौजूद हैं। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की...




















