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कर्नाटक में राजनीतिक संकट : सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान स्पीकर ने अयोग्य विधायकों का पक्ष लिया

LiveLaw News Network
25 Sep 2019 3:14 PM GMT
कर्नाटक में राजनीतिक संकट : सुप्रीम कोर्ट में वर्तमान स्पीकर ने अयोग्य विधायकों का पक्ष लिया
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कर्नाटक में अयोग्य करार दिए गए 17 बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई के दौरान कर्नाटक विधानसभा के वर्तमान स्पीकर ने अयोग्य विधायकों का पक्ष लेते हुए सुप्रीम कोर्ट में कहा कि विधायकों को इस्तीफा देने का लोकतांत्रिक अधिकार है और तत्कालीन स्पीकर को इस्तीफे पर फैसला देना चाहिए था न कि अयोग्यता पर।

बुधवार को जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ के सामने स्पीकर की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वो उस समय के फैसले की आलोचना नहीं कर रहे, लेकिन यह बता रहे हैं कि ऐसे हालात में क्या होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सुप्रीम कोर्ट को इस पर गाइडलाइन जारी करनी चाहिए। पीठ ने कहा कि स्पीकर एक संवैधानिक पद है और कोर्ट इसमें अतिक्रमण नहीं कर सकता।

चुनाव आयोग को भी पक्षकार बनाने का अनुरोध

वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश मुकुल रोहतगी ने चुनाव आयोग को भी पक्षकार बनाने का अनुरोध करते हुए कहा कि विधायकों को इस तरह चुनाव के दौरान जनता के पास जाने से रोका नहीं जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने ही विधायकों को सरंक्षण दिया था कि उन्हें विश्वास मत के दौरान उपस्थित रहने पर विवश नहीं किया जा सकता, लेकिन स्पीकर ने इसी आधार पर अयोग्य करार दिया कि उन्होंने पार्टी व्हिप का पालन नहीं किया। ऐसे में यदि कोई विधायक सदन से इस्तीफा देना चाहता है तो उसे रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि या तो उपचुनाव पर रोक लगाई जाए या फिर इन अयोग्य विधायकों को जनता के बीच जाने का मौका मिले।

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश आर्यम सुंदरम ने भी दलील दी कि स्पीकर को सिर्फ यह तय करना था कि विधायकों ने स्वेच्छा से इस्तीफे दिए हैं या नहीं। अब गुरुवार को दूसरे पक्ष की ओर से कपिल सिब्बल दलीलें पेश करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट इसका परीक्षण करने को तैयार

दरअसल सुप्रीम कोर्ट इसका परीक्षण करने को तैयार हो गया कि कर्नाटक में उपचुनाव कराने पर रोक लगाई जाए या विद्रोही अयोग्य विधायकों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जाए। पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश मुकुल रोहतगी की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि वो अंतरिम राहत के लिए बुधवार और गुरुवार दो दिन सुनवाई करेगी।

हालांकि इस दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा था कि उपचुनाव पर रोक नहीं लगाई जा सकती लेकिन अयोग्यता किसी के भी चुनाव लड़ने के अधिकार के बीच में नहीं आ सकती। कांग्रेस नेताओं की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने किसी भी अंतरिम राहत का विरोध किया था। पीठ ने कांग्रेस नेता सिद्धारामैया, दिनेश गुंडूराव, कर्नाटक विधानसभा स्पीकर और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है।

अयोग्य विधायकों का तर्क

कर्नाटक के अयोग्य विधायकों की ओर से तर्क दिया गया है कि 17 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव नहीं होने चाहिए क्योंकि चुनाव आयोग ने शनिवार को उपचुनावों की अधिसूचना जारी कर दी है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि अन्यथा उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। रोहतगी ने कहा कि वर्तमान विधानसभा के कार्यकाल के लिए उन्हें 2023 तक अयोग्य घोषित करने का स्पीकर का फैसला कानूनी रूप से गलत है।

रोहतगी ने तर्क दिया कि स्पीकर ने नोटिस का जवाब देने के लिए केवल 3 दिन का समय दिया जबकि विधानसभा के नियमों के अनुसार न्यूनतम 7 दिन का समय दिया जाना चाहिए। अयोग्य ठहराए जाने वाले मामले को फिर से अध्यक्ष के पास भेजा जाना चाहिए। मुकुल ने कहा कि उपचुनाव लड़ने से उन्हें रोका नहीं जा सकता क्योंकि ये उनका संवैधानिक अधिकार है।

गौरतलब है कि कर्नाटक के 17 अयोग्य विधायकों ने तत्कालीन स्पीकर के रमेश कुमार के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं जिसमें उनके इस्तीफे को खारिज कर दिया था और उन्हें 15 वीं कर्नाटक विधानसभा के कार्यकाल के लिए अयोग्य घोषित कर दिया।

विधायकों को येदियुरप्पा मंत्रालय में शामिल नहीं किया जा सका क्योंकि उन्हें अयोग्य घोषित किया गया था। विधायकों ने अयोग्य ठहराए जाने को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन बताया है क्योंकि शीर्ष अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि विश्वास मत के दौरान सदन में उपस्थित होने के लिए बाध्य करने के लिए स्पीकर द्वारा कोई कदम नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने अध्यक्ष पर 10 वीं अनुसूची के प्रावधानों को तोड़-मरोड़कर

अयोग्य ठहराने को गलत बताया और यह भी कहा है कि अनिवार्य नोटिस अवधि के बिना निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने संविधान की व्याख्या के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की।

अपनी याचिका में बागी विधायकों ने यह भी तर्क दिया है कि उनमें से अधिकांश ने पहले ही इस्तीफा दे दिया था और उनके इस्तीफे पर फैसला करने के बजाए स्पीकर ने अवैध रूप से उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया जबकि स्पीकर को पहले इस्तीफों पर फैसला करना चाहिए था। यह भी तर्क दिया गया है कि स्पीकर ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन किया है क्योंकि अयोग्यता से पहले कोई सुनवाई नहीं की गई।

इन अयोग्य विधायकों ने कहा है कि 28 जुलाई को पारित स्पीकर के आदेश "पूरी तरह से अवैध, मनमानी और दुर्भावनापूर्ण" हैं क्योंकि उन्होंने मनमाने ढंग से उनके स्वैच्छिक इस्तीफे को अस्वीकार कर दिया था।उन्होंने कहा है कि उन्होंने 6 जुलाई को इस्तीफा दे दिया था लेकिन स्पीकर केआर रमेश कुमार ने कांग्रेस पार्टी द्वारा 10 जुलाई को "पूरी तरह से गलत" याचिका के आधार पर उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया।

वहीं तीन JDS सदस्यों - एएच विश्वनाथ, के गोपालैया और केसी नारायगौड़ा ने उन्हें अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर के आदेश की वैधता पर सवाल उठाते हुए अपनी अलग रिट याचिका दायर की है और स्पीकर के आदेश को रद्द करने की मांग की है।

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