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बेंगलुरु एडवोकेट्स एसोसिएशन ने CJI को लिखा पत्र, जस्टिस ताहिलरामनी, जस्टिस कुरैशी पर लिए गए फैसलों के कारण खुलासा करने का आग्रह

LiveLaw News Network
24 Sep 2019 12:17 PM GMT
बेंगलुरु एडवोकेट्स एसोसिएशन ने CJI को लिखा पत्र, जस्टिस ताहिलरामनी, जस्टिस कुरैशी पर लिए गए फैसलों के कारण  खुलासा करने का आग्रह
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एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ बेंगलुरु ने भारत के मुख्य न्यायाधीश ( CJI) रंजन गोगोई से जजों की नियुक्ति, उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों, सुप्रीम कोर्ट के जजों के तबादलों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया है और उनसे कुछ जजों के "रहस्यमय" तबादलों के कारणों का खुलासा करने का भी निवेदन किया है।

CJI को संबोधित एक पत्र में एसोसिएशन ने कॉलेजियम की निर्णय लेने की प्रक्रिया की अस्पष्टता पर अपनी चिंता व्यक्त की। एसोसिएशन न्यायमूर्ति कुरैशी को त्रिपुरा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने के कॉलेजियम के बदले हुए फैसले पर सवाल उठाया। कॉलेजियम ने अपने पहले फैसले में जस्टिस कुरैशी की मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सिफारिश की थी।

एसोसिएशन ने कहा कि इस जल्दबाजी के फैसले के पीछे एक उचित स्पष्टीकरण का अभाव लग रहा है और स्थानांतरण केंद्र सरकार के 'हुक्मनामे' के अनुसार दिखाई दे रहा है जो मध्य प्रदेश में न्यायमूर्ति कुरैशी की नियुक्ति के लिए अपरिहार्य था।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि न्यायमूर्ति ताहिलरमानी को मेघालय उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का निर्णय, जिसके कारण उनका इस्तीफा भी हुआ, राजनीतिक हस्तक्षेप से हुआ। एसोसिएशन ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जयंत पटेल के स्थानांतरण पर भी सवाल उठाया, जो न्यायमूर्ति ताहिलरामनी के मामले की तरह ही था। एसोसिएशन ने कहा,

"जब संवैधानिक अदालतों के न्यायाधीश रहस्यमय परिस्थितियों में इस्तीफा दे देते हैं, या मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनके स्थानांतरण या उन्नयन को उन परिस्थितियों में बदल दिया जाता है जो स्पष्ट रूप से सामान्य नहीं होती हैं तो यह न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास को हिला देता है और उच्चतर न्यायपालिका में निर्णय लेने वाले निकाय में बैठे लोगों के लिए कई असुविधाजनक सवाल उठाता है "।

न्यायमूर्ति जयंत पटेल ने अपनी वरिष्ठता के बावजूद, किसी भी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपने नाम की सिफारिश न होने के विरोध में 2017 में कर्नाटक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में इस्तीफा दे दिया था।

एसोसिएशन ने जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस एस बोपन्ना को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति में देरी को याद किया। जस्टिस डीएच वाघेला का रहस्यमय ट्रांसफर का ज़िक्र भी किया और कहा,

"न्यायपालिका को मजबूत करने और अपनी निरंतर स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए, न्यायाधीश ताहिलरामनी, न्यायमूर्ति जयंत पटेल, न्यायमूर्ति डीएच वाघेला, न्यायमूर्ति कुरैशी जैसे न्यायाधीशों के स्थानांतरण के कारण पर और सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति केएम जोसेफ, न्यायमूर्ति एस को समय पर पदोन्नति से वंचित क्यों किया गया, इसका जवाब देना ज़रूरी है।"



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