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प्रवासियों के मुद्दे पर संज्ञान लेने में हाईकोर्ट अपने क्षेत्राधिकार में सही, SC ने कहा, विभिन्न उच्च न्यायालयों में सुनवाई जारी रहेगी
यह देखते हुए कि प्रवासी श्रमिकों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का संज्ञान लेने के लिए उच्च न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर अच्छी तरह से हैं, सुप्रीम कोर्टने मंगलवार को स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालयों में कार्यवाही जारी रहेगी।जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिसए स के कौल और जस्टिस एम आर शाह की पीठ ने प्रवासी मजदूरों की पीड़ा पर स्वतः संज्ञान मामले में पारित आदेश में यह अवलोकन किया।"यह भी हमारे सामने लाया गया है कि विभिन्न उच्च न्यायालयों ने प्रवासी मजदूरों के मामलों पर भी ध्यान दिया है।...
अंतिम सेमेस्टर के छात्रों को छोड़कर सभी कानून छात्रों को पिछले साल के अंक और आंतरिक अंकों के आधार पर पास किया जाएगा
कोरोना महामारी को देखते हुए, बार काउंसिल ऑफ इंडिया की जनरल काउंसिल ने हाल ही में विश्वविद्यालयों द्वारा ऑनलाइन परीक्षाओं के संचालन के संबंध में कुछ दिशानिर्देश जारी किए हैं।अंतिम वर्ष के छात्र3 साल के एलएलबी और 5 साल के एलएलबी पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष के छात्रों को ऑनलाइन परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दी जा सकती है। वैकल्पिक रूप से, एलएलबी अंतिम वर्ष के छात्रों के लिए जैसा कि ऊपर बताया गया है, विश्वविद्यालय किसी भी अन्य उपयुक्त तरीके को अपना सकते हैं जो उन्हें लगता है कि नियमित...
अर्नब गोस्वामी को बुधवार को मुंबई पुलिस के सामने पेश होने के निर्देश, बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को राहत देने से इनकार कर दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अर्नब गोस्वामी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें नागपुर और मुंबई में उनके और चैनल के खिलाफ दायर दो एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिका में अर्नब ने पूछताछ के लिए पुलिस के सामने पेश होने से छूट मांगी जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया, लेकिन अदालत ने अर्नब को गिरफ्तारी से सुरक्षा दे दी है। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति रियाज चागला की खंडपीठ...
NBFC का लोन पर मोहलत की पात्रता : सुप्रीम कोर्ट ने मामले को RBI के लोन मोहलत पर ब्याज के खिलाफ मामलों के साथ जोड़ा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सभी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी ( NBFC) की लोन पर मोहलत की पात्रता पर स्पष्टीकरण मांगने वाली याचिका को उन मामलों के साथ जोड़ दिया है जिसमें लॉकडाउन के दौरान लोन में मोहलत देने के आरबीआई के फैसले पर बैंकों द्वारा ऋण पर ब्याज लेने को चुनौती दी गई है। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस वी रामसुब्रमणियम की पीठ ने मामले को उपरोक्त याचिका के साथ टैग किया, जिसकी 12 जून को सुनवाई की जानी है।15 मई को जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस बीआर गवई...
फंसे हुए प्रवासियों को 15 दिनों में उनके मूल स्थान पर पहुंचाएं, लॉकडाउन के उल्लंघन के केस वापस लेने पर विचार करें : सुप्रीम कोर्ट ने दिए कई निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लॉकडाउन के दौरान प्रवासी कामगारों के संकट पर लिए गए स्वतः संज्ञान मामले में कई दिशा-निर्देश जारी किए। ये दिशा निर्देश इस प्रकार हैं : 1 सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फंसे प्रवासियों की पहचान करने और उन्हें 15 दिनों के भीतर मूल स्थानों पर वापस पहुंचाया जाए।2 राज्यों को प्रवासियों के अपने मूल स्थानों पर जाने की कोशिश में, स्टेशनों पर भीड़ लगाने आदि के लिए लॉकडाउन उल्लंघन के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत इन प्रवासियों के खिलाफ दायर सभी मामलों को वापस लेने...
[ किराया नियंत्रण कानून ] HC पुनरीक्षण क्षेत्राधिकार में अपीलीय प्राधिकारी के फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, जब तक कि कोई प्रतिकूलता या सबूतों का दुरुपयोग न हो : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि केरल बिल्डिंग (लीज़ एंड रेंट कंट्रोल) अधिनियम की धारा 20 द्वारा प्रदत्त अपने पुनरीक्षण क्षेत्राधिकार में उच्च न्यायालय, अपीलीय प्राधिकारी द्वारा तथ्य की खोज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है, जब तक कि वहां कोई प्रतिकूलता या सबूतों का दुरुपयोग न हो।इस मामले में, मकान मालिक ने तीन आधारों, किराए की बकाया राशि, मकान मालिक के व्यवसाय के लिए अतिरिक्त आवास की आवश्यकता और परिसर में सामग्री की क्षति पर किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 11(2)(b), 11(8) and...
सुप्रीम कोर्ट ने एनआई एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए डिमांड नोटिस की सेवा की व्यवहार्यता पर अटॉर्नी जनरल का जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए "चेक के अनादर" मामलों में डिमांड नोटिस की सेवा की मांग वाले एक आवेदन में सोमवार को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की प्रतिक्रिया मांगी। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अगुवाई वाली एक पीठ ने सेवा के वैकल्पिक साधनों की व्यवहार्यता पर अटॉर्नी जनरल की प्रतिक्रिया मांगी और यह सुनिश्चित करने के तरीके कि इन वैकल्पिक साधनों के माध्यम से उक्त सेवा का दुरुपयोग नहीं किया जाता है। COVID -19 के मद्देनजर मामलों को...
दिल्ली के निवासी न होने के आधार पर किसी व्यक्ति के इलाज के लिए इनकार नहीं किया जा सकता: दिल्ली LG ने दिल्ली सरकार के आदेश के खिलाफ निर्देश दिए
दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने सोमवार शाम को आदेश दिया कि राजधानी के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में निवास के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सभी COVOD -19 रोगियों को चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। उपराज्यपाल के इस आदेश ने दिल्ली सरकार द्वारा रविवार को दिल्ली के अलाव निवासियों को चिकित्सा उपचार को प्रतिबंधित करने के लिए पारित आदेश को प्रभावी रूप से रद्द कर दिया। दिल्ली सरकार ने आदेश दिया था कि दिल्ली के अस्पतालों में दिल्ली के निवासियों का ही इलाज होगा।दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के...
बाल तस्करी रोकने के लिए नीति तैयार करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र और राज्य सरकारों को उस जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया है जिसमें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) से बाल तस्करी के मामलों को रोकने के लिए दिशा-निर्देश मांगे गए, जो COVID -19 के चलते लॉकडाउन के बीच अचानक बढ़ गए हैं।सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की बेंच ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एचएस फुल्का और साथ ही सॉलिसिटर जनरल को बाल श्रम के मुद्दे पर अंकुश लगाने के उपायों के लिए कुछ शोध करने के लिए कहा। बाल तस्करी के खतरे के...
अस्पतालों में सिर्फ दिल्ली निवासियों का उपचार करने के मामले में जारी दिल्ली सरकार के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती
दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दिल्ली सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई है जिसमें राज्य के सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम में इलाज को प्रतिबंधित करते हुए सिर्फ दिल्ली निवासियों का इलाज करने की बात कही गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के दो छात्रों ने यह याचिका दायर की है। जो मूलतः यूपी और बिहार के निवासी हैं। याचिका में तर्क दिया गया है कि इस फैसले से दिल्ली में रहने वाले उन लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा,जिनके पास दिल्ली के निवास का...
2017 में जोधपुर NLU छात्र की संदिग्ध मौत को CBI को ट्रांसफर करने की छात्र की मांग की याचिका पर SC ने नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जोधपुर स्थित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में तृतीय वर्ष के छात्र विक्रांत नगाइच की अगस्त 2017 में रहस्यमय मौत के मामले में राज्य पुलिस से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को जांच ट्रांसफर करने की मांग करते वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।दरअसल 14 अगस्त, 2017 को विश्वविद्यालय के सामने रेलवे पटरियों के पास अप्राकृतिक परिस्थितियों में, अपने दोस्तों के साथ रात के खाने के लिए बाहर जाने से पहले, नागाइच को मृत पाया गया था। मृतक छात्र की मां, नीतू कुमार नगाइच द्वारा दायर याचिका में...
कांग्रेस नेता प्रो सैफुद्दीन सोज़ की हिरासत के खिलाफ दायर हैबियस कॉरपस पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रो सैफुद्दीन सोज़ की हिरासत के खिलाफ दायर एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर नोटिस जारी किया। जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने वरिष्ठ वकील पी चिदंबरम और डॉ अभिषेक मनु सिंघवी की सुनवाई के बाद नोटिस जारी किया, जिन्होंने कहा कि सोज़ को उचित रूप से सूचित किए बिना 10 महीने से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया है।हालांकि सोज़ के वकीलों ने सुनवाई के लिए जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की लेकिन पीठ ने इस...
केरल में गर्भवती हथिनी की मौत का मामला : CBI या SIT से जांंच करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर
सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें पटाखों से भरे अनानास खाने के कारण केरल में एक गर्भवती हथिनी की हाल ही में हुई मौत की सीबीआई या विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच करवाने मांग की गई है। याचिका एडवोकेट अवध बिहारी कौशिक द्वारा दायर की गई है और उन्होंने "केरल राज्य के मन्नारक्कड़ जिले में साइलेंट वैली नेशनल पार्क के लिए प्रतिबद्ध" कुछ ग्रामीणों के "भयानक, दुखद, क्रूर और अमानवीय कृत्य" के लिए शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप की मांग की है। यह बताते हुए कि यह घटना अपनी तरह की पहली घटना नहीं...
[परिसीमा अधिनियम अनुच्छेद 113] परिसीमा अवधि तब शुरू होती है जब राहत पाने का अधिकार शुरू होता है, न कि उस वक्त जहां से विवाद 'पहली' बार शुरू होता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि परिसीमा अधिनियम के अनुच्छेद 113 के तहत संचालित होने वाले मामलों में परिसीमा अवधि तब शुरू होती है जब राहत पाने का अधिकार शुरू होता है, न कि उस वक्त जहां से विवाद 'पहली'बार शुरू होता है।वादी ने अपने बैंक के खिलाफ एक मुकदमा दायर करके एक अप्रैल 1997 और 31 दिसम्बर 2000 के बीच की अवधि के लिए उसके चालू खाते पर ब्याज की राशि/कमीशन तथा काटी गयी राशि की उचित गणना करने को लेकर एक मुकदमा दायर किया था। अपीलकर्ता ने बैंक द्वारा काटी गयी अत्यधिक राशि वापस दिलाने और उसके खाते में पैसे...
एससीबीए ने कार्यकारी समिति में सामंजस्य को बिगाड़ने के लिए अशोक अरोड़ा के ख़िलाफ़ कारण बताओ नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) ने अशोक अरोड़ा को नोटिस जारी कर पूछा है कि कथित रूप से आरोप लगाने के लिए उनके ख़िलाफ़ तीन सदस्यीय समिति की एकतरफ़ा जाँच क्यों न शुरू की जाए।इन कथित आरोपों में कार्यकारी समिति में शत्रुता का वातावरण उत्पन्न करना, समिति के सामंजस्यपूर्ण कामकाज में बाधा पहुँचाना, एससीबीए के अधिकारियों के ख़िलाफ़ अपशब्द का प्रयोग, एससीबीए के कोषाध्यक्ष मीनेश दुबे को धमकाना, ग़ैरक़ानूनी कार्यकारी समिति की बैठक बुलाना, एससीबीए के कार्यक्रम में शर्मनाक स्थिति पैदा करना और...
''जूनियर अधिवक्ता कर रहे हैं तत्काल मामलों को सूचीबद्ध करवाने के लिए संघर्ष, रजिस्ट्री अमीरों के मामलों को बिना समय गंवाए लिस्ट कर रही है'' : जीएचसीएए अध्यक्ष ने CJ को पत्र लिखा
जूनियर अधिवक्ताओं और ''नाॅन-वीआईपी मुविक्कलों'' को उनके मामलों को सूचीबद्ध करवाने में आ रही परेशानियों को उजागर करते हुए गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (GHCAA) के अध्यक्ष ने मुख्य न्यायाधीश (CJ) को एक पत्र लिखा है।इस पत्र में आग्रह किया गया है कि वे न्यायालय में नियमित सुनवाई, फिज़िकल कामकाज को फिर से शुरू कर दें ताकि मामलों को सूचीबद्ध करने में रजिस्ट्री के अधिकार को समाप्त किया जा सके और प्रत्येक अधिवक्ता को समान रूप से रोस्टर के अनुसार सौंपे गए विषय के संबंध में सुनवाई करने वाले...
NGT ने गर्भवती हथिनी की मौत पर संज्ञान लेकर केस दर्ज किया
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने केरल के साइलेंट वैली फ़ॉरेस्ट मे गर्भवती हथिनी की मौत की घटना पर संज्ञान लेकर मुकदमा दायर किया है। पिछले दिनों साइलेंट वैली फ़ॉरेस्ट में एक गर्भवती हथिनी की अनानास में रखे विस्फोटक पदार्थ खाने के बाद मौत हो गई।न्यायमूर्ति के रामकृष्णन की अध्यक्षता वाले न्यायाधिकरण ने पाया कि ऐसी घटनाएं संभवत: जंगल में जंगली जानवरों की रक्षा के लिए मानदंडों का पालन न करने के विभिन्न पहलुओं के कारण हो रही हैं, जिससे वे मानव के साथ संघर्ष करने के लिए मजबूर हो रहे हैैं और उनका जीवन...
सांसद महुआ मोइत्रा की प्रवासी मुद्दे पर याचिका खारिज करने के अपने फैसले को वापस लेने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 13 अप्रैल को दिए उस आदेश को वापस लेने से इनकार कर दिया जिसमें TMC सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा भेजी गई एक पत्र याचिका पर कोर्ट द्वारा संज्ञान लेकर रिट याचिका दर्ज करने के बाद उसे खारिज कर दिया था।COVID-19 महामारी के मद्देनजर लगाए गए लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा को उजागर करते हुए अप्रैल माह में संसद सदस्य महुआ मोइत्रा द्वारा प्रवासी मज़दूरों की देखभाल के संबंध में मुख्य न्यायाधीश बोबडे को पत्र लिखा था, जिसके आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए...
जेलों से कैदियों की भीड़ कम करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार, याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने के लिए कहा
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को COVID-19 महामारी के मद्देनजर कैदियों को रिहा कर जेलों से भीड़ कम करने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली सर्वोच्च न्यायालय की खंडपीठ ने याचिका का निपटारा इस निर्देश के साथ किया कि याचिकाकर्ता को इस मामले में राहत के लिए क्षेत्राधिकार के उच्च न्यायालयों से संपर्क करने की स्वतंत्रता है। मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस सूर्यकांतकी बेंच ने 23 मार्च को स्वतः संज्ञान मामले में ...







![[ किराया नियंत्रण कानून ] HC पुनरीक्षण क्षेत्राधिकार में अपीलीय प्राधिकारी के फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, जब तक कि कोई प्रतिकूलता या सबूतों का दुरुपयोग न हो : सुप्रीम कोर्ट [ किराया नियंत्रण कानून ] HC पुनरीक्षण क्षेत्राधिकार में अपीलीय प्राधिकारी के फैसले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, जब तक कि कोई प्रतिकूलता या सबूतों का दुरुपयोग न हो : सुप्रीम कोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/04/28/500x300_360359-360268-supreme-court-of-india-2.jpg)





![[परिसीमा अधिनियम अनुच्छेद 113] परिसीमा अवधि तब शुरू होती है जब राहत पाने का अधिकार शुरू होता है, न कि उस वक्त जहां से विवाद पहली बार शुरू होता है : सुप्रीम कोर्ट [परिसीमा अधिनियम अनुच्छेद 113] परिसीमा अवधि तब शुरू होती है जब राहत पाने का अधिकार शुरू होता है, न कि उस वक्त जहां से विवाद पहली बार शुरू होता है : सुप्रीम कोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2019/07/30/500x300_362668-362599-supreme-court-of-india-1212.jpg)




