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 NBFC का लोन पर मोहलत की पात्रता : सुप्रीम कोर्ट ने मामले को RBI के लोन मोहलत पर ब्याज के खिलाफ मामलों के साथ जोड़ा

LiveLaw News Network
9 Jun 2020 8:13 AM GMT
 NBFC का लोन पर मोहलत की पात्रता : सुप्रीम कोर्ट ने मामले को RBI के लोन मोहलत पर ब्याज के खिलाफ मामलों के साथ जोड़ा
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सभी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी ( NBFC) की लोन पर मोहलत की पात्रता पर स्पष्टीकरण मांगने वाली याचिका को उन मामलों के साथ जोड़ दिया है जिसमें लॉकडाउन के दौरान लोन में मोहलत देने के आरबीआई के फैसले पर बैंकों द्वारा ऋण पर ब्याज लेने को चुनौती दी गई है।

जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस वी रामसुब्रमणियम की पीठ ने मामले को उपरोक्त याचिका के साथ टैग किया, जिसकी 12 जून को सुनवाई की जानी है।

15 मई को जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर नोटिस जारी किया था। वो द कॉन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) के लिए पेश हुए थे।

आखिरी सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को सूचित किया था कि वह आरबीआई, सेबी और वित्त मंत्रालय से निर्देश लेंगे। उसी के प्रकाश में, बेंच ने एसजी को मामले पर पूरी स्पष्टता के साथ वापस आने का निर्देश दिया था।

पृष्ठभूमि:

27 मार्च को, COVID-19 महामारी और परिणामस्वरूप राष्ट्रीय लॉकडाउन के मद्देनजर, RBI ने एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें सभी बैंकों को ऋणों के संबंध में किश्तों के भुगतान पर तीन महीने की स्थगन अवधि की अनुमति देने की स्वतंत्रता दी गई थी जो उधारकर्ता से इस तरह का अनुरोध करने के अधीन रहेगा।

साल्वे ने कहा था कि उपरोक्त परिपत्र के संदर्भ में मोहलत के लिए पात्रता के बावजूद कुछ बैंक लाभ देने से इनकार कर रहे हैं।

साल्वे ने प्रस्तुत किया था कि,

"वास्तविक समस्या RBI के साथ ही हो रही है।जब मामला कोर्ट में आया, तो RBI ने कहा कि परिपत्र बाध्यकारी है। लेकिन, कुछ बैंक लाभ नहीं दे रहे हैं जबकि RBI जवाब देता है कि यह बैंक का विवेक है। RBI गवर्नर के भाषण में कहा गया कि यह बाध्यकारी है।"

इसके अलावा, साल्वे ने यह भी स्वीकार किया कि हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जो नया वित्तीय पैकेज घोषित किया था, वह इस मुद्दे को हल कर सकता है।

इंडियाबुल्स कमर्शियल क्रेडिट लिमिटेड (ICCL) जैसे NBFC ने परिपत्र की प्रयोज्यता के बारे में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका भी दायर की थी। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने ICCL से ऋण की किस्त की मांग करने से पहले राज्य के लघु औद्योगिक विकास बैंक (SIDBI) को निर्देश दिया था कि वह इसे स्पष्ट करे।

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