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सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के लिए अलग और पर्याप्त फंड के आवंटन की मांग वाली याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका खारिज की, जिसमें न्यायपालिका के लिए अलग और पर्याप्त फंड के आवंटन के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।सीजेआई रमाना, जस्टिस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की अगुवाई वाली तीन-न्यायाधीशों की बेंच जनहित याचिका की बहाली के लिए किए गए आवेदन पर सुनवाई कर रही थी, जिसे मार्च में पूर्व सीजेआई एसए बोबडे के नेतृत्व वाली शीर्ष अदालत की बेंच ने गैर अभियोजन के लिए खारिज कर दिया था।पीठ ने कहा कि, "क्षमा करें, हम नहीं चाहते कि सरकार को फंड आवंटित करने के लिए आपके...

केवल शासक बदलने का अधिकार अत्याचार के खिलाफ गारंटी नहीं: सीजेआई एनवी रमाना
'केवल शासक बदलने का अधिकार अत्याचार के खिलाफ गारंटी नहीं': सीजेआई एनवी रमाना

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना ने बुधवार को कहा कि कुछ वर्षों में केवल एक बार शासक बदलने का अधिकार अत्याचार के खिलाफ गारंटी नहीं है।भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि,"असली में शासन चलाने की शक्ति जनता के पास ही है, यह विचार मानवीय गरिमा और स्वायत्तता की धारणाओं में भी पाए जाते हैं। एक सार्वजनिक विचाए जो तर्कसंगत और उचित दोनों है, को मानवीय गरिमा के एक अंतर्निहित पहलू के रूप में देखा जाना चाहिए और इसलिए कामकाजी लोकतंत्र उचित रूप से आवश्यक है। "सीजेआई ने इस तथ्य का उल्लेख किया कि भारत में अब...

सोशल मीडिया के रुझान संस्थानों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, इस पर डिस्कोर्स शुरू करना अनिवार्य: CJI रमाना
सोशल मीडिया के रुझान संस्थानों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, इस पर डिस्कोर्स शुरू करना अनिवार्य: CJI रमाना

CJI एनवी रमाना ने बुधवार को 17वें जस्टिस पीडी देसाई स्मारक व्याख्यान में "कानून के शासन" विषय पर भाषण दिया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के रुझान संस्थानों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, इस पर एक ड‌िस्कोर्स शुरू करना अनिवार्य है।"जबकि कार्यपालिका के दबाव के बारे में बहुत चर्चा हो रही है, यह चर्चा शुरू करना भी अनिवार्य है कि सोशल मीडिया के रुझान संस्थानों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।"CJI ने हालांकि स्पष्ट किया कि इसे इस अर्थ में नहीं समझा जाना चाहिए कि न्यायाधीशों और न्यायपालिका को जो हो रहा है...

सुप्रीम कोर्ट का हिस्सा होना गर्व की बात : जस्टिस अशोक भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में विदाई के दौरान कहा
"सुप्रीम कोर्ट का हिस्सा होना गर्व की बात" : जस्टिस अशोक भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में विदाई के दौरान कहा

सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर न्यायमूर्ति अशोक भूषण का आज आखिरी कार्यदिवस था। वह 4 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।परंपरा के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश की अदालत में न्यायमूर्ति अशोक भूषण के लिए एक विदाई समारोह आयोजित किया गया था।भारत के अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल, विदाई के लिए सबसे पहले बोले। उन्होंने कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय के लिए एक "दुखद दिन" है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने महामारी के दौरान COVID के दौरान प्रवासी श्रमिकों की की पीड़ा को कम करने के निर्देश...

सीए परीक्षा : ऑप्ट-आउट के लिए आर-पीसीआर की जरूरत नहीं, छात्र अपने या परिजन को COVID संबंधी परेशानी होने पर ऑप्ट-आउट विकल्प ले सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट
सीए परीक्षा : ऑप्ट-आउट के लिए आर-पीसीआर की जरूरत नहीं, छात्र अपने या परिजन को COVID संबंधी परेशानी होने पर ऑप्ट-आउट विकल्प ले सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) को निर्देश दिया कि वह 5 जुलाई से शुरू होने वाली सीए परीक्षा में उम्मीदवार को "ऑप्ट-आउट" विकल्प दे,जो उसके लिए COVID से संबंधित कठिनाइयों के लिए अपने या परिवार के सदस्य के लिए एक पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी चिकित्सा प्रमाण पत्र प्रस्तुत करेंगे।न्यायालय ने "ऑप्ट-आउट" विकल्प की मांग के लिए आरटी-पीसीआर प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की आईसीएआई की आवश्यकता को भी समाप्त कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में कहा, "हम यह स्पष्ट...

सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव से COVID-19 के एलोपैथी इलाज पर उनके बयानों का वीडियो और टेप पेश करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव से COVID-19 के एलोपैथी इलाज पर उनके बयानों का वीडियो और टेप पेश करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को योग गुरु बाबा रामदेव को COVID-19 के एलोपैथी इलाज पर उनके बयानों का वीडियो और टेप को पेश करने को कहा।मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ रामदेव द्वारा दायर एक रिट याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें उनकी कथित टिप्पणी एलोपैथी COVID-19 ​​​​का इलाज नहीं कर सकती, पर विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज कई एफआईआर को एक ही स्थान पर समेकित करने की मांग की गई है।इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की शिकायतों के आधार पर बिहार और छत्तीसगढ़ राज्यों में...

वकीलों द्वारा मुवक्किलों को बेईमानी से सलाह देने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की जरूरत, जुर्माना लगे : सुप्रीम कोर्ट
वकीलों द्वारा मुवक्किलों को बेईमानी से सलाह देने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की जरूरत, जुर्माना लगे : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वकीलों द्वारा मुवक्किलों को बेईमानी से सलाह देने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की जरूरत है।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की पीठ पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय की एक पीठ के मार्च के फैसले से उत्पन्न एक एसएलपी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने एकल न्यायाधीश के उस फैसले की पुष्टि की थी जिसमें याचिकाकर्ताओं को केंद्र सरकार के कर्मचारियों होने के कारण केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के माध्यम से वैकल्पिक उपचार के...

सिर्फ भारत के सुप्रीम कोर्ट में कोई एकल जज द्वारा अंतरिम चरण में पारित प्रक्रियात्मक निर्देश के खिलाफ आ सकता है, यूएस सुप्रीम कोर्ट में ऐसा नहीं होगा
सिर्फ भारत के सुप्रीम कोर्ट में कोई एकल जज द्वारा अंतरिम चरण में पारित प्रक्रियात्मक निर्देश के खिलाफ आ सकता है, यूएस सुप्रीम कोर्ट में ऐसा नहीं होगा

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने मंगलवार को टिप्पणी की, "यह केवल भारत के सुप्रीम कोर्ट में होता है कि कोई एकल न्यायाधीश द्वारा अंतरिम चरण में पारित प्रक्रियात्मक निर्देश के खिलाफ आ सकता है। यूएस सुप्रीम कोर्ट में ऐसा नहीं होगा।"ये टिप्पणी दिल्ली उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश द्वारा दिए गए विचार को चुनौती देने के संबंध में थी कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी की दिग्गज कंपनी मर्क के विभिन्न विंग के बीच ट्रेडमार्क उल्लंघन के लिए एक मुकदमा रिकॉर्ड पर सामग्री के आधार पर तय किया जा सकता है, बिना किसी और...

जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने स्टूडेंट्स को प्रमोट करने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एनएलएसआईयू की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया
जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी ने स्टूडेंट्स को प्रमोट करने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ एनएलएसआईयू की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी ने मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इस आदेश में हाईकोर्ट ने एनएलएसआईयू के उस आदेश को खारिज कर दिया था जिसमें उसने कानून के छात्र को बीए एलएलबी (ऑनर्स) का चौथा वर्ष में प्रवेश देने से इनकार कर दिया था।मामले की सुनवाई होते ही न्यायाधीशों ने कहा कि मामले को दूसरी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।बेंच द्वारा...

सेवा में प्रवेश का तरीका दिव्यांग लोगों की पदोन्नति के लिए प्रासंगिक मानदंड नहीं है : सुप्रीम कोर्ट
सेवा में प्रवेश का तरीका दिव्यांग लोगों की पदोन्नति के लिए प्रासंगिक मानदंड नहीं है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीडब्ल्यूडी कोटे के तहत पदोन्नति के लिए सेवा में प्रवेश का तरीका प्रासंगिक मानदंड नहीं है।"भर्ती के स्रोत से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए लेकिन मुख्य बात यह है कि कर्मचारी पदोन्नति के लिए विचार के समय एक पीडब्ल्यूडी है। 1995 का अधिनियम उस व्यक्ति के बीच भेद नहीं करता है जिसने दिव्यांग होने के कारण सेवा में प्रवेश किया हो सकता है और एक व्यक्ति जो सेवा में प्रवेश करने के बाद दिव्यांग हो सकता है, " न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने अपने फैसले...

सुप्रीम कोर्ट 2015 के विधानसभा हंगामे के मामलों को वापस लेने की मांग वाली याचिकाओं पर पांच जुलाई को सुनवाई करेगा
सुप्रीम कोर्ट 2015 के विधानसभा हंगामे के मामलों को वापस लेने की मांग वाली याचिकाओं पर पांच जुलाई को सुनवाई करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केरल विधानसभा में 2015 में हुए हंगामे और तोड़फोड़ के लिए माकपा के छह प्रमुख सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मामले वापस लेने की मांग करने वाली केरल राज्य की याचिका पर अगले सोमवार यानी पांच जुलाई को सुनवाई करने का फैसला किया।केरल सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के बाद छह आरोपी सदस्यों ने भी मामलों को वापस लेने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति रवींद्र भट की तीन-न्यायाधीशों की पीठ...

राज्यों को 31 जुलाई तक एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना लागू करनी चाहिए; प्रवासियों के लिए सामुदायिक रसोई चलाएं : सुप्रीम कोर्ट
राज्यों को 31 जुलाई तक 'एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड' योजना लागू करनी चाहिए; प्रवासियों के लिए सामुदायिक रसोई चलाएं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि सभी राज्यों को 31 जुलाई तक "एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड" योजना लागू करनी चाहिए। यह योजना प्रवासी श्रमिकों को देश के किसी भी हिस्से से राशन लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी श्रमिकों के लाभ और कल्याण के लिए कई अन्य निर्देश भी पारित किए।निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिए:(i) केंद्र सरकार को असंगठित मजदूरों/प्रवासी कामगारों के पंजीकरण के लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के परामर्श से पोर्टल विकसित करने का निर्देश दिया जाता है।...

सीए परीक्षा : आरटी-पीसीआर प्रमाणपत्र शर्त में छूट दीजिए, आखिरी क्षण में केंद्र बदलने पर ऑप्ट- आउट विकल्प दीजिए : सुप्रीम कोर्ट ने आईसीएआई को सुझाव दिया
सीए परीक्षा : आरटी-पीसीआर प्रमाणपत्र शर्त में छूट दीजिए, आखिरी क्षण में केंद्र बदलने पर ऑप्ट- आउट विकल्प दीजिए : सुप्रीम कोर्ट ने आईसीएआई को सुझाव दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) से पूछा कि क्या आरटी-पीसीआर प्रमाणपत्र के अलावा अन्य वैकल्पिक तरीकों को अपनाया जा सकता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कोई उम्मीदवार COVID से संबंधित कठिनाइयों के कारण सीए परीक्षा में बैठने के लिए चिकित्सकीय रूप से अनुपयुक्त है, जो 5 जुलाई से शुरू होने वाली है।जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बेंच ने सीए परीक्षा से संबंधित तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि COVID के...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने गैर-वाणिज्यिक मामले में भी प्रति दाखिल करने के लिए भी 45 दिन की अवधि अनिवार्य करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि गैर-वाणिज्यिक, सामान्य सिविल सूट के लिए भी प्रति दाखिल करने के लिए भी अधिकतम 45 दिन की अवधि अनिवार्य है और उसके बाद दाखिल प्रति को रिकार्ड में लेने के लिए अदालत इसकी अनुमति नहीं दे सकती। पीठ ने इसके खिलाफ एसएलपी को खारिज कर दिया।जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ दिल्ली उच्च न्यायालय की पीठ के अक्टूबर, 2020 के फैसले के खिलाफ एसएलपी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उसने एकल...

अनुच्छेद 21 में जीने के मौलिक अधिकार में भोजन का अधिकार और अन्य बुनियादी आवश्यकताएं शामिल  : सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के दिशानिर्देशों में कहा
"अनुच्छेद 21 में जीने के मौलिक अधिकार में भोजन का अधिकार और अन्य बुनियादी आवश्यकताएं शामिल " : सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के दिशानिर्देशों में कहा

संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित जीने के मौलिक अधिकार की व्याख्या मानवीय गरिमा के साथ जीने के अधिकार को शामिल करने के लिए की जा सकती है, जिसमें भोजन का अधिकार और अन्य बुनियादी आवश्यकताएं शामिल हो सकती हैं, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (29 जून 2021) को दिए अपने फैसले में सभी राज्यों को "एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड" योजना को लागू करने और प्रवासियों के लिए सामुदायिक रसोई चलाने का निर्देश देते हुए कहा।जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने कहा कि गरीब लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करना सभी...

National Uniform Public Holiday Policy
सुप्रीम कोर्ट ने शादी की अलग-अलग उम्र निर्धारित करने वाली याचिका को शादी की समान उम्र की मांग वाली याचिकाओं के साथ टैग किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष याचिकाओं को स्थानांतरित करने की मांग वाली एक लंबित याचिका के साथ उन प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका को टैग किया, जो दोनों पुरुषों और महिलाओं के लिए एक समान शादी की उम्र की मांग करती हैं।न्यायमूर्ति एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सोनिया माथुर को सुना और याचिका को उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।हालांकि, कोर्ट ने याचिका पर नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया और...

चुनिंदा तरीके से चुनौती : सुप्रीम कोर्ट ने COVID के दौरान सेंट्रल विस्टा का काम ना रोकने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि की
"चुनिंदा" तरीके से चुनौती" : सुप्रीम कोर्ट ने COVID के दौरान सेंट्रल विस्टा का काम ना रोकने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि की

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया जिसमें COVID महामारी की दूसरी लहर के दौरान सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के काम को रोकने की याचिका खारिज कर दी गई थी।सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के इस विचार से सहमति व्यक्त की कि याचिकाकर्ताओं ने एक परियोजना को "चुनिंदा" तरीके से चुनौती दी थी। पीठ ने कहा,"उच्च न्यायालय का दृष्टिकोण एक संभावित दृष्टिकोण है। आपने एक परियोजना को चुनिंदा रूप से चुनौती दी।"पीठ ने आदेश में कहा,...

फिरौती के लिए अपहरण : 364 ए के तहत दोषसिद्धि के लिए मौत या चोट पहुंचाने का खतरा साबित करना अनिवार्य
फिरौती के लिए अपहरण : 364 ए के तहत दोषसिद्धि के लिए मौत या चोट पहुंचाने का खतरा साबित करना अनिवार्य

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 364 ए के तहत 'फिरौती के लिए अपहरण' के अपराध के लिए किसी व्यक्ति के अपहरण को साबित करना ही पर्याप्त नहीं है। यह भी साबित किया जाना चाहिए कि अपहृत व्यक्ति को मौत या चोट पहुंचाने का खतरा था या अपहरणकर्ता ने अपने आचरण से एक उचित आशंका को जन्म दिया कि ऐसे व्यक्ति को मौत के घाट उतारा जा सकता है।न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ धारा 364 ए आईपीसी (शेख अहमद बनाम तेलंगाना राज्य) के तहत एक व्यक्ति की सजा के खिलाफ दायर आपराधिक...