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स्वामी विवेकानंद ने धर्मनिरपेक्षता और सहिष्णुता की वकालत की, सांप्रदायिक संघर्षों से उत्पन्न खतरों का विश्लेषण किया: सीजेआई एनवी रमाना
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना ने रविवार को स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं की तीव्र प्रासंगिकता पर विचार किया। सीजेआई स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक शिकागो संबोधन की 128वीं वर्षगांठ और विवेकानंद मानव उत्कृष्टता संस्थान, हैदराबाद के 22वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।सीजेआई ने स्वामी विवेकानंद के 1893 में शिकागो के 'धर्मों की संसद' के संबोधन का जिक्र करते हुए टिप्पणी की,"स्वामी विवेकानंद ने अपने संबोधन में सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति के...
वर्चुअल सुनवाई के कारण सुप्रीम कोर्ट वास्तव में एक राष्ट्रीय न्यायालय बन गया है: न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़
सुप्रीम कोर्ट ई-समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने उड़ीसा हाईकोर्ट डिजिटाइजेशन सेंटर, पेपरलेस कोर्ट, अधिवक्ताओं के लिए ई-फाइलिंग स्टेशनों, वर्चुअल सुनवाई के संचालन से संबंधित न्यायिक अधिकारियों व्यावहारिक प्रशिक्षण और वकीलों के लिए ई-सेवाओं के ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए कहा कि भारत का सुप्रीम कोर्ट वास्तव में एक राष्ट्रीय अदालत बन गया है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा,"मुझे विश्वास है कि हमारे सामने पेश होने वाले वकीलों के मामले...
किसी विशेष स्थान पर स्थानांतरण करने के लिए कर्मचारी ज़ोर नहीं दे सकता, यह नियोक्ता को तय करना है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले सप्ताह कहा कि किसी विशेष स्थान पर स्थानांतरण या स्थानांतरण न करने पर जोर देना कर्मचारी का अधिकार नहीं है, बल्कि आवश्यकता को देखते हुए नियोक्ता स्थानांतरण के मुद्दे पर निर्णय ले सकता है।न्यायमूर्ति एमआर शाह और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने उस विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता के प्रतिनिधित्व में हस्तक्षेप करने से इनकार करने के आदेश को खारिज कर दिया गया था, जिसमें याचिकाकर्ता ने स्वयं को दूसरे कॉलेज में स्थानांतरण करने...
बार और बेंच की मानसिकता में बदलाव के बिना पेपरलेस कोर्ट संभव नहीं : जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि बार और बेंच की मानसिकता में बदलाव के बिना सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट की ई-समिति का कोई भी प्रयास संभव नहीं हो सकता।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, "मेरा मानना है कि वकीलों और न्यायाधीशों दोनों को मानसिकता में बदलाव लाना चाहिए। जब मैंने लगभग डेढ़ साल पहले पेपरलेस कोर्ट (कागज रहित अदालत) में काम करना शुरू किया तो मैं किसी भी अन्य न्यायाधीश की तरह था, जिसे सीखने और अपना काम करने के लिए पारंपरिक तरीकों से तैयार और प्रशिक्षित किया...
अचल संपत्ति के स्वामित्व हस्तांतरण के मामले में सेवा में कमी का आरोप लगाने वाली उपभोक्ता शिकायतें सुनवाई योग्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अचल संपत्ति के स्वामित्व के हस्तांतरण से संबंधित सेवा में कमी के आधार पर उपभोक्ता की शिकायतें सुनवाई योग्य नहीं है। जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति 'सेवा' में आवास निर्माण शामिल है न कि किसी साइट या भूखंड का आवंटन।इस मामले में जिला उपभोक्ता फोरम के समक्ष शिकायतकर्ता ने चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा आवंटित प्लॉट को अपेक्षित रूपांतरण शुल्क की स्वीकृति पर लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड साइट में बदलने की मांग की है। जिला फोरम ने चंडीगढ़ प्रशासन के अधीन...
इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित आपराधिक मामले बहुत चिंताजनक: सीजेआई एनवी रमाना
भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने शनिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबे समय से लंबित आपराधिक मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए हाईकोर्ट और बार एसोसिएशन से इस मुद्दे को हल करने के लिए काम करने का अनुरोध किया।सीजेआई ने कहा,"मैं इलाहाबाद हाईकोर्ट में आपराधिक मामलों से संबंधित लंबित मामलों के बारे में कोई सवाल नहीं उठाना चाहता। न ही कोई दोष नहीं देना चाहता। हालांकि यह बहुत चिंताजनक है। मैं इलाहाबाद बार और बेंच से अनुरोध करता हूं कि वे एक साथ मिलकर काम करें और इस मुद्दे को हल करने में सहयोग...
केंद्र संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में मध्यस्थता पर नया कानून पेश करेगा: कानून मंत्री किरेन रिजिजू
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में मध्यस्थता पर एक नया कानून पेश करने के लिए तैयार है।कानून मंत्री उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थापित होने वाले प्रस्तावित नए राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मुनीश्वर नाथ भंडारी और अन्य...
RTI आवेदन कैसे दायर करें? एक्टिविस्ट सुभाष चंद्र अग्रवाल दे रहे हैं सभी सवालों के जवाब
आरटीआई का अर्थ है सूचना का अधिकार (Right To Information)। यह कानून हमारे देश में साल 2005 में लागू हुआ। सूचना प्राप्त करना लोगों का एक महत्वपूर्ण अधिकार है। इस कानून का उपयोग करके आप सरकार और किसी भी सरकारी विभाग से संबंधित जानकारी (सूचना) मांग सकते हैं।आरटीआई का उपयोग करके आप सरकारी कामकाज का निरीक्षण कर सकते हैं। सरकार से सावल पूछ सकते हैं और इसके साथ ही आप किसी भी सरकारी दस्तावेज की जांच, दस्तावेज की प्रमाणित कॉपी की भी मांग कर सकते हैं। ये हो गई आरटीआई के महत्व की बात। अब सबसे बड़ा सवाल आप...
पीसी एक्ट खुद में एक कोड है- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के आरोपी का बैंक खाता सीआरपीसी की धारा 102 के तहत अटैच नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसीए) के तहत आरोपी व्यक्ति के बैंक खाते को आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 102 के तहत कुर्क (अटैच) नहीं किया जा सकता है।जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एमएम सुंदरेश की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील मंजूर करते कहा, "सीआरपीसी की धारा 102 का सहारा लेकर अपीलकर्ता के बैंक खाते की फ्रीजिंग को जारी रखना संभव नहीं है, क्योंकि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम अपने आप में एक संहिता (कोड) है।"इस मामले में, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (6 सितंबर 2021 से 9 सितंबर 2021) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं, सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप।पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।आम धारणा है कि सीबीआई की सफलता दर कम है : सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को सजा का डेटा दाखिल करने को कहासुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (3 सितंबर) को निदेशक, सीबीआई से अदालत को अवगत कराने के लिए कहा कि उनकी अभियोजन इकाई को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और इसमें क्या बाधाएं हैं।यह देखते हुए कि एक आम धारणा है...
जब कोई वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हो तो अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट रिट याचिका पर केवल असाधारण परिस्थितियों में ही विचार कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब कोई वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हो तो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत एक रिट याचिका पर केवल निम्नलिखित असाधारण परिस्थितियों में ही हाईकोर्ट द्वारा विचार किया जा सकता है।ये परिस्थितियां इस प्रकार हैं-(i) मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो;( ii) प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हो (iii) अधिकार क्षेत्र की अधिकता; या (iv) क़ानून या प्रत्यायोजित कानून के अधिकार को चुनौती।इस मामले में तेलंगाना उच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करते...
सुप्रीम कोर्ट ने COVID-19 के इलाज में 'लाल चींटी की चटनी' के प्रभावी होने का दावा करने वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 सितंबर 2021) को COVID-19 के इलाज में 'लाल चींटी की चटनी' के प्रभावी होने का द्वारा करने वाली याचिका को खारिज कर दिया।याचिका में 'लाल चींटी की चटनी' से COVID-19 वायरस के संक्रमण को रोकने का दावा किया गया था।न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने उड़ीसा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर एसएलपी को खारिज करते हुए कहा,"हम विशेष अनुमति याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं।"सहायक अभियंता (सिविल), तकटपुर, आर एंड बी अनुभाग,...
लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहुमत की इच्छा प्रबलः सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा, "लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहुमत की इच्छा प्रबल होती है"। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने सौ संगीता w/o सुनील शिंदे बनाम महाराष्ट्र राज्य और या पंचायत समिति चुनावों में एक पार्टी के ग्रुप लीडर की मंजूरी से संबंधित मामले में यह टिप्पणी की।शीर्ष अदालत, बॉम्बे हाईकोर्ट (औरंगाबाद बेंच) के एक फैसले के खिलाफ दायर अपील पर विचार कर रही थी। हाईकोर्ट के फैसले में प्रतिवादी संख्या तीन डॉ वंदना ज्ञानेश्वर मुरकुटे को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, श्रीरामपुर...
उपभोक्ता संरक्षण नियमों की वैधता को तय करने में बॉम्बे हाईकोर्ट के रास्ते में कोई बाधा नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में स्पष्ट किया कि उपभोक्ता आयोगों (Consumer Commissions) में रिक्त पदों के मुद्दे से निपटने के लिए शीर्ष अदालत द्वारा लिया गया स्वत: संज्ञान मामला, केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए उपभोक्ता संरक्षण नियम 2020 को चुनौती देने में बॉम्बे हाईकोर्ट के रास्ते में कोई बाधा नहीं है।अधिवक्ता डॉ महिंद्रा लिमये द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट (नागपुर बेंच) के समक्ष एक याचिका दायर की गई है, जिसमें उपभोक्ता संरक्षण नियम 2020 के उन प्रावधानों को चुनौती दी है, जो राज्य आयोगों और जिला फोरम में...
अनुशासनात्मक जांच करने में की गई देरी वास्तव में जांच खराब नहीं करती : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुशासनात्मक जांच करने में की गई प्रत्येक देरी से वास्तव में तथ्यात्मक रूप से (ipso facto) जांच को खराब नहीं करती। जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस हिमा कोहली ने देखा कि जांच में देरी के कारण होने वाले कारणों और पूर्वाग्रह को बताया जाना जाना चाहिए और यह अनुमान का विषय नहीं हो सकता। इस मामले में एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ एक विभागीय जांच शुरू की गई, जिसने कथित तौर पर गुंडा दस्ता (Gunda Squad का गठन और संचालन किया। यह पता चला कि इस तरह के दस्ते के कुछ...
दूसरी अपील- हाईकोर्ट सीपीसी की धारा 103 के तहत सीमित तथ्यात्मक समीक्षा कर सकते हैं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उच्च न्यायालयों को नागरिक प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 103 के तहत सीमित तथ्यात्मक समीक्षा करने का अधिकार है।न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की खंडपीठ ने कहा कि यह नियम कि हाईकोर्ट कानून के महत्वपूर्ण प्रश्न के बिना निचली अदालत के निष्कर्षों या तथ्य के समवर्ती निष्कर्षों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता, निम्नलिखित दो महत्वपूर्ण कैविएट के अधीन है।पहला, यदि तथ्य के निष्कर्ष स्पष्ट रूप से विकृत हैं या न्यायालय की अंतरात्मा को ठेस पहुँचाते हैं;...
मजिस्ट्रेट UAPA मामलों की जांच पूरी करने के लिए समय नहीं बढ़ा सकता : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि गैर-कानूनी गतिविधि अधिनियम (यूएपीए) मामलों की जांच पूरी करने के लिए समय बढ़ाना मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।जस्टिस उदय उमेश ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने कहा कि जैसा कि यूएपीए की धारा 43-डी (2) (बी) में प्रावधान में निर्दिष्ट है, उसके अनुसार इस तरह के अनुरोध पर विचार करने के लिए एकमात्र सक्षम प्राधिकारी "कोर्ट" होगा।इस मामले में, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, भोपाल ने यूएपीए की धारा 43-डी (2) (बी) के तहत जांच तंत्र द्वारा दायर...
सरकार कराधान व्यवस्था को सुविधाजनक और सरल बनाए रखने का प्रयास करे : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह सरकार की जिम्मेदारी है कि कराधान व्यवस्था को सुविधाजनक और सरल बनाए रखने का प्रयास किया जाए।जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा,जिस तरह सरकार कर से बचने को पसंद नहीं करती है, उसी तरह यह शासन की जिम्मेदारी है कि वह ऐसी कर प्रणाली तैयार करे जिसके तहत एक विषय बजट और योजना बन सके।कोर्ट ने कहा कि अगर इन दोनों के बीच उचित संतुलन बना लिया जाए तो राजस्व सृजन से समझौता किए बिना अनावश्यक मुकदमेबाजी से बचा जा सकता है।अदालत विभिन्न बैंकों द्वारा दायर अपीलों पर...
सुप्रीम कोर्ट ने NHRC को पूरे कार्यबल के साथ चलाने के लिए हस्तक्षेप की मांग वाली याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ( NHRC) को पूरे कार्यबल से चलाने को सुनिश्चित करने के लिए शीर्ष अदालत के हस्तक्षेप की मांग करने वाली एक जनहित याचिका को निष्फल बताते हुए खारिज कर दिया।शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अरुण मिश्रा की NHRC के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर ध्यान देते हुए , जस्टिस एलएन राव और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि, "अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति को देखते हुए, यह रिट याचिका निष्फल हो गई है। खारिज की जाती है।"व्यक्तिगत रूप से याचिकाकर्ता...

















