ताज़ा खबरें

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने ईवीएम से राजनीतिक दलों के चिन्ह हटाने की मांग वाली जनहित याचिका पर विचार करने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बीजेपी नेता और एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें ईवीएम से पार्टी चिन्ह हटाने की मांग की गई थी।उपाध्याय की ओर से पेश सीनियर वकील विकास सिंह और गोपाल शंकरनारायण ने संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के उल्लंघन का आरोप लगाया।उन्होंने प्रस्तुत किया कि ईवीएम पर पार्टी चिन्ह मतदाताओं की पसंद को प्रभावित करता है और उन्हें चुनावी उम्मीदवारों की विश्वसनीयता के आधार पर चुनाव करने का मौका नहीं मिलता है।उन्होंने प्रस्तुत किया कि...

सीजेआई यूयू ललित ने सुनवाई के लिये तैयार मामले को सूचीबद्ध नहीं करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से जवाब मांगा
सीजेआई यूयू ललित ने "सुनवाई के लिये तैयार" मामले को सूचीबद्ध नहीं करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से जवाब मांगा

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया यूयू ललित ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री से एक ऐसे मामले को सूचीबद्ध नहीं करने के लिए स्पष्टीकरण देने को कहा, जो डेढ़ साल से सूचीबद्ध होने के लिए तैयार था। यह मुद्दा तब उठा जब सीजेआई यूयू ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ के सामने एक ऐसा मामला आया जो सूचीबद्ध होने के लिए तैयार होने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट में लंबे समय से लंबित था।सीजेआई ललित ने आदेश पढ़कर कहा-" हम रजिस्ट्री को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण दाखिल करने के लिए कह रहे हैं कि मामला तैयार होने के बावजूद...

सोली सोराबजी भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के चैंपियन थेः चीफ जस्टिस यूयू ललित
सोली सोराबजी भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के चैंपियन थेः चीफ जस्टिस यूयू ललित

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) यू.यू. ललित ने सोमवार को कहा कि अनुच्छेद 19 (1) (ए) में निहित भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का विस्तार सोराबजी को "बहुत प्रिय" था। उन्होंने कहा कि कभी सोली सोराबजी के चैंबर्स के प्रख्यात न्यायविद थे।जस्टिस ललित ने असहिष्णुता पर लोकतांत्रिक समाज के लिए उनके लेखों के अंश पढ़ते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि कानून के क्षेत्र में इस दिग्गज के लिए सहिष्णुता का सिद्धांत कितना महत्वपूर्ण था।सीजेआई ने कहा,"यह संवैधानिक दर्शन है, जिसे सोली सोराबजी ने जीया, सिखाया और अभ्यास...

मोरबी पुल हादसा
'मोरबी पुल ढहना सरकारी अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है': सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक जांच की मांग वाली जनहित याचिका दायर

गुजरात में हाल ही में मोरबी पुल के ढहने (Morbi Bridge Collapse) के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें न्यायिक जांच की मांग की गई है। इस हादसे में 137 लोगों की जान चली गई।सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की देखरेख में न्यायिक जांच आयोग गठित करके तुंरत हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए इस मामले का आज सीजेआई के समक्ष उल्लेख किया गया।याचिकाकर्ता-इन-पर्सन एडवोकेट विशाल तिवारी ने कहा,"कई अन्य राज्यों को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संरचनाओं के मूल्यांकन की...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
एमवी एक्ट| 15 वर्ष के आयु वर्ग के पीड़ितों के गुणक को '15' के रूप में लिया जाना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मोटर दुर्घटना मुआवजे की गणना करते समय, 15 वर्ष की आयु तक के पीड़ितों के गुणक को '15' के रूप में लिया जाना चाहिए। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि 15 वर्ष तक की आयु वर्ग के पीड़ितों के मामले में '15' के निचले गुणक का चयन करने का निश्चित रूप से औचित्य है। मौजूदा मामले में पीड़िता का दो साल की उम्र में एक्सीडेंट हो गया था। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने कुछ तकनीकी आधारों पर मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया। उक्त आदेश को उलटते हुए मद्रास हाईकोर्ट...

अरुण पुरी
'पर्याप्त आरोपों के अभाव में चीफ एडिटर पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता': सुप्रीम कोर्ट ने अरुण पुरी के खिलाफ मानहानि केस रद्द करते हुए कहा

चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की खंडपीठ ने कहा कि 'विशिष्ट आरोपों' के अभाव में चीफ एडिटर पर मानहानि का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।कोर्ट ने कहा कि प्रेस और पुस्तक पंजीकरण अधिनियम, 1867 की धारा 7 के तहत मुख्य संपादक या प्रधान संपादक के खिलाफ मुकदमा नहीं लगाया जा सकता है अगर उनके खिलाफ कोई विशिष्ट और पर्याप्त आरोप नहीं हैं।इस प्रकार कोर्ट ने इंडिया टुडे के संस्थापक-निदेशक अरुण पुरी के खिलाफ मैगजीन में प्रकाशित एक न्यूज आर्टिकल को लेकर दायर मानहानि की शिकायत को खारिज कर...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने एंटी-रेबीज वैक्सीन की प्रभावशीलता की जांच करने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने भारत में कुत्तों को दी जाने वाली इंट्रा डर्मल रेबीज टीके (IDRV) की प्रभावकारिता का अध्ययन करने के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन करने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने एडवोकेट वी श्याममोहन की सहायता से एडवोकेट कुरियाकोस वर्गीस को सुनने के बाद नोटिस जारी किया।याचिका कई लोगों की पृष्ठभूमि में दायर की गई है, जिन्हें कुत्तों ने काटा था। एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस के बावजूद रेबीज के कारण दम तोड़ दिया। ...

विभिन्न जोन/डिवीजन में काम करने वाले रेलवे कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार करने की आवश्यकता : सुप्रीम कोर्ट
विभिन्न जोन/डिवीजन में काम करने वाले रेलवे कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार करने की आवश्यकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विभिन्न जोन/डिवीजनों में काम करने वाले रेलवे कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार किया जाना आवश्यक है। साथ ही वे समान लाभों और व्यवहार के हकदार हैं।जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि उत्तर रेलवे में काम करने वाले आयोग के वेंडरों/वाहकों को उनके नियमितीकरण से पहले दी गई सेवाओं का 50 प्रतिशत पेंशन लाभ के लिए गिना जाएगा।अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ भारत संघ द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए इस प्रकार कहा, जिसमें उत्तर रेलवे को पेंशन लाभ प्रदान...

कोर्ट को क़ानूनों की व्याख्या करने के लिए मूल्यों पर आधारित निर्णयों और नीतिगत विचारों को व्यक्त करने से बचना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट को क़ानूनों की व्याख्या करने के लिए मूल्यों पर आधारित निर्णयों और नीतिगत विचारों को व्यक्त करने से बचना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोर्ट को क़ानून की व्याख्या करने के लिए मूल्यों पर आधारित निर्णयों और नीतिगत विचारों को व्यक्त करने से बचना चाहिए।न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता और न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की पीठ ने कहा कि कानूनों को सरल भाषा में पढ़ा जाना चाहिए, न कि इतर तरीके से।इस मामले में, केआईएडीबी द्वारा भूमि अधिग्रहण दो कंपनियों - मेसर्स एमएसपीएल लिमिटेड और मेसर्स आरेस आयरन एंड स्टील लिमिटेड के लिए किया गया था। [एआईएसएल एमएसपीएल की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है]। एक भूमि मालिक द्वारा दायर रिट अपील...

मृत्यु पूर्व दिया गया बयान सिर्फ इसलिए अस्वीकार्य नहीं हो जाता क्योंकि यह पुलिस कर्मियों द्वारा दर्ज किया गया था : सुप्रीम कोर्ट
मृत्यु पूर्व दिया गया बयान सिर्फ इसलिए अस्वीकार्य नहीं हो जाता क्योंकि यह पुलिस कर्मियों द्वारा दर्ज किया गया था : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मृत्यु पूर्व दिया गया बयान सिर्फ इसलिए अस्वीकार्य नहीं हो जाता क्योंकि यह पुलिस कर्मियों द्वारा दर्ज किया गया था।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने कहा कि हालांकि मृत्यु से पहले दिया गया बयान आदर्श रूप से एक मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया जाना चाहिए, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि पुलिस कर्मियों द्वारा दर्ज मृत्यु पूर्व दिया गया बयान केवल इसी कारण से अस्वीकार्य है। अदालत ने कहा कि पुलिस द्वारा दर्ज किया गया मृत्यु पूर्व दिया गया बयान स्वीकार्य है...

अगले संसद सत्र में कुछ हो सकता है: सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल ने राजद्रोह कानून को खत्म करने पर बताया
"अगले संसद सत्र में कुछ हो सकता है": सुप्रीम कोर्ट में अटॉर्नी जनरल ने राजद्रोह कानून को खत्म करने पर बताया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 124 ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं के बैच को जनवरी, 2023 तक के लिए स्थगित कर दिया।सीजेआई यूयू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की।शुरुआत में ही भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कहा कि केंद्र आपराधिक कानूनों की समीक्षा करने की प्रक्रिया में है।उन्होंने कहा,"अगले संसद सत्र में कुछ हो सकता है।"तद्नुसार उन्होंने केन्द्र को अतिरिक्त समय दिये जाने का अनुरोध किया ताकि उचित कदम उठाये जा...

वोट डालने का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने कैदियों को वोट डालने के अधिकार से वंचित करने वाली धारा 62(5) को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

चीफ जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की खंडपीठ ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 62(5) को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया, जो कैदियों को वोट देने से रोकता है।मामले को सुनवाई के लिए 29 दिसंबर, 2022 के लिए लिस्ट किया गया है।याचिका में कहा गया है कि जेल में कैद व्यक्तियों को मताधिकार से वंचित करने के लिए कई चुनौतियां हैं जैसे कि विचाराधीन कैदियों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित करना, जिनकी बेगुनाही या अपराध निर्णायक रूप से निर्धारित नहीं किया गया...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए हर जिले में स्पेशल कोर्ट बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया

सीजेआई यूयू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की खंडपीठ ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के लिए हर जिले में स्पेशल कोर्ट बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार किया।पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि याचिका ठोस नहीं है। तदनुसार, पीठ ने याचिकाकर्ता को याचिका वापस लेने की सलाह दी। ऐसे में याचिका वापस ले ली गई।यह याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर की गई थी।याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर वकील विजय हंसरिया द्वारा तर्क दिया गया कि...

CAA
सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 6 दिसंबर तक के लिए स्थगित की

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई 6 दिसंबर 2022 तक के लिए स्थगित की।इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने की।पीठ ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की दायर याचिका को प्रमुख मामला मानने का फैसला किया।कोर्ट ने दो वकीलों को नोडल काउंसल के रूप में भी नियुक्त किया है जो यह सुनिश्चित करेंगे कि अगली तारीख तक संकलन तैयार हो जाए।पीठ ने कहा,"यह ध्यान देने के बाद कि कई मुद्दों को...

सीएए असम समझौते और उत्तर-पूर्व में लोगों के सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने बताया
सीएए असम समझौते और उत्तर-पूर्व में लोगों के सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने बताया

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 (सीएए) असम और उत्तर पूर्वी राज्यों में मूल निवासियों के सांस्कृतिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करता।विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों के संबंध में उठाए गए मुद्दों को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर अतिरिक्त जवाबी हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा कि "सीएए में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो असम और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्य के नागरिकों की विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति को प्रभावित करे।"एमएचए ने समझाया कि अधिनियम का उद्देश्य...

अरुण पुरी
सुप्रीम कोर्ट ने इंडिया टुडे के पूर्व चीफ एडिटर अरुण पुरी के खिलाफ आपराधिक मानहानि केस रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने इंडिया टुडे के संस्थापक-निदेशक अरुण पुरी को मानहानि के मुकदमे में राहत दी।इंडिया टुडे पत्रिका में 2007 के एक न्यूज आर्टिकल "मिशन मिसकनडक्ट" के खिलाफ आपराधिक मानहानि शिकायत को चुनौती देते हुए अरुण पुरी की ओर से याचिका दायर की गई थी।हालांकि, अदालत ने न्यूज आर्टिकल के ऑथर को राहत नहीं दी।पीठ ने आज फैसला सुनाते हुए कहा कि कोर्ट ने पुरी की अपील को स्वीकार कर लिया है।विचाराधीन न्यूज आर्टिल ने तत्कालीन भारतीय...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
ब्रेकिंग- सुप्रीम कोर्ट ने टू-फिंगर टेस्ट पर रोक लगाई; कोर्ट ने कहा- यह पितृसत्तात्मक मानसिकता पर आधारित है कि सैक्चुली एक्टिव महिला का रेप नहीं किया जा सकता

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रेप के मामलों में टू-फिंगर टेस्ट (Two Finger test) के इस्तेमाल पर रोक लगा दी और चेतावनी दी कि इस तरह के टेस्ट करने वाले व्यक्तियों को कदाचार का दोषी ठहराया जाएगा।जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमा कोहली की पीठ ने बलात्कार के एक मामले में दोषसिद्धि बहाल करते हुए खेद व्यक्त किया और कहा कि यह खेदजनक है कि टू-फिंगर टेस्ट आज भी जारी है।पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा,"इस अदालत ने बार-बार बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामलों में टू फिंगर टेस्स के उपयोग को रोक...

कानूनी पेशा लोक सेवा है, वकीलों को समाज से सार्थक रूप से जुड़ना चाहिए: जस्टिस संजय किशन कौल
कानूनी पेशा लोक सेवा है, वकीलों को समाज से सार्थक रूप से जुड़ना चाहिए: जस्टिस संजय किशन कौल

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय किशन कौल ने WAII इंटरनेशनल, ईटानगर में तिवारी एंड एसोसिएट्स के सहयोग से गुवाहाटी हाईकोर्ट ईटानगर स्थायी बेंच बार एसोसिएशन (GHCIPBBA) द्वारा आयोजित 'प्रथम वार्षिक व्याख्यान सीरीज' में उद्घाटन व्याख्यान दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने की।जस्टिस कौल ने इस मौके पर सबसे पहले न्याय तक पहुंच की अवधारणा के महत्व को रेखांकित किया, जिसे उन्होंने संवैधानिक और कानूनी ढांचे का प्राथमिक सिद्धांत बताया। तदनुसार, उन्होंने कहा कि वकीलों का यह...

सुप्रीम कोर्ट ने प्ली बार्गेनिंग, अपराधों में समझौते और परिवीक्षा अपराधी अधिनियम के माध्यम से केसों के निपटारे के लिए गाइडलाइन जारी की
सुप्रीम कोर्ट ने प्ली बार्गेनिंग, अपराधों में समझौते और परिवीक्षा अपराधी अधिनियम के माध्यम से केसों के निपटारे के लिए गाइडलाइन जारी की

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने पारित एक आदेश में, आपराधिक मामलों के निपटान के लिए निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए, जिसमें प्ली बार्गेनिंग, अपराधों में समझौते और परिवीक्षा अपराधी अधिनियम, 1958 के तहत तिहरे तरीकों का सहारा लिया गया।1. एक पायलट मामले के रूप में, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, प्रत्येक जिले में एसीजेएम या सीजेएम, और सत्र न्यायालय का चयन किया जा सकता है।2. उक्त अदालतें पूर्व-ट्रायल चरण, या साक्ष्य चरण में लंबित मामलों की पहचान कर सकती हैं और जहां आरोपी के खिलाफ अधिकतम 7 साल की...