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WB Universities VC Appointments | जस्टिस ललित की समिति की 12 सर्वसम्मत सिफारिशों पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल और सरकार से विचार मांगे
पश्चिम बंगाल के कुछ विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि खोज-सह-चयन समिति ने 12 विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद पर नियुक्ति के लिए 12 उम्मीदवारों के नामों की सर्वसम्मति से सिफारिश की।अदालत ने इन सर्वसम्मत सिफारिशों पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति (राज्यपाल) और राज्य सरकार से विचार मांगे। अटॉर्नी आर. वेंकटरमणी और सीनियर एडवोकेट जयदीप गुप्ता को क्रमशः कुलाधिपति और सरकार से निर्देश प्राप्त करने के लिए कहा गया।अदालत ने कहा,"मुख्यमंत्री और माननीय...
चांदनी चौक अवैध निर्माण: सुप्रीम कोर्ट ने 31 दिसंबर से प्रभावी, MCD के सीलिंग आदेशों पर लगी रोक हटाई
दिल्ली के चांदनी चौक इलाके में अनधिकृत और अवैध निर्माणों से संबंधित मामले पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से दिल्ली नगर निगम (ATMCD) के अपीलीय न्यायाधिकरण के लिए एक पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया।यह आदेश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने तब पारित किया, जब दिल्ली नगर निगम के वकील ने उन्हें बताया कि ATMCD ने उन संपत्तियों के संबंध में प्रस्तावित सीलिंग कार्रवाई पर स्थगन आदेश पारित कर दिए, जहां अनधिकृत निर्माण किए गए या जहां...
सेशन कोर्ट के CrPC की धारा 439(2) के तहत याचिका खारिज किए जाने के बाद ज़मानत रद्द करने के लिए हाईकोर्ट की अंतर्निहित शक्ति का प्रयोग किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 439(2) और धारा 482 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करके ज़मानत रद्द करने की याचिका हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जा सकती है, भले ही सेशन कोर्ट ने CrPC की धारा 439(2) के तहत रद्द करने की अर्ज़ी पहले ही अस्वीकार कर दी हो।अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि एक बार सेशन कोर्ट द्वारा CrPC की धारा 439(2) के तहत ज़मानत रद्द करने की अर्ज़ी खारिज कर दिए जाने के बाद उसी प्रावधान के तहत दूसरी अर्ज़ी सीधे हाईकोर्ट के समक्ष दायर नहीं की जा...
S. 27 Evidence Act | एकाधिक अभियुक्तों के एक साथ दिए गए प्रकटीकरण बयानों की गहन जांच की आवश्यकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (22 सितंबर) को कहा कि साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) की धारा 27 के तहत एक साथ कई अभियुक्तों द्वारा दिए गए संयुक्त प्रकटीकरण बयानों को स्वीकार्य बनाने के लिए अभियुक्तों को किसी प्रकार की शिक्षा दिए जाने की संभावना खारिज करने हेतु गहन जांच की आवश्यकता है।अदालत ने आगे कहा कि यद्यपि एक साथ दिए गए प्रकटीकरण बयान कानूनी रूप से स्वीकार्य हो सकते हैं। हालांकि, अदालतों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए और अभियोजन पक्ष पर यह साबित करने का दायित्व है कि ये खुलासे वास्तविक, स्वतंत्र और...
सिर्फ आपराधिक पृष्ठभूमि ज़मानत रद्द करने का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (22 सितम्बर) को केरल हाईकोर्ट का वह आदेश रद्द कर दिया, जिसमें एसडीपीआई (SDPI) राज्य सचिव के.एस. शान की दिसंबर 2021 में हुई हत्या के मामले में पांच आरोपियों की ज़मानत रद्द की गई थी। जस्टिस दिपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की खंडपीठ ने पांच आरोपियों (अभिमन्यु, अतुल, सनंद, विष्णु और धनीश) को ज़मानत दी। आरोप है कि वे आरएसएस से जुड़े हैं और हत्या राजनीतिक दुश्मनी में की गई थी।ट्रायल कोर्ट ने दिसंबर 2022 में एक साल की हिरासत के बाद उन्हें ज़मानत दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने दिसंबर...
सुप्रीम कोर्ट ईसाई धर्म अपनाने के कारण महिला को एससी-रिज़र्व्ड पोस्ट के लिए अयोग्य घोषित करने वाले आदेश पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें पंचायत की महिला अध्यक्ष को आरक्षित पद पर आसीन होने से अयोग्य ठहराए जाने को बरकरार रखा गया था। यह आदेश यह देखते हुए दिया गया था कि उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यह आदेश पारित किया।हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने प्रतिवादी की उस याचिका पर विचार किया, जिसमें याचिकाकर्ता को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी।...
सुप्रीम कोर्ट ने फिर उठाई हाईकोर्ट जजों के कार्य मूल्यांकन की मांग, कहा– जजों को रखना होगा 'स्व-प्रबंधन तंत्र'
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक बार फिर हाईकोर्ट जजों के परफॉर्मेंस इवैल्यूएशन (कार्य प्रदर्शन मूल्यांकन) पर दिशा-निर्देश बनाने की ज़रूरत पर जोर दिया और कहा कि जनता की वैध अपेक्षाओं को न्यायपालिका को पूरा करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि जजों को अपना "स्व-प्रबंधन सिस्टम" रखना होगा ताकि फाइलें लंबित न हों और बार-बार स्थगन (adjournment) से बचा जा सके।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ झारखंड हाईकोर्ट द्वारा आपराधिक अपीलों में लगभग तीन साल की देरी से फैसले सुनाने के मुद्दे पर...
'सुप्रीम कोर्ट ज़मानत कोर्ट बनकर रह गया है': ज़मानत मामलों पर सुनवाई करते-करते थक गईं जस्टिस नागरत्ना
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आने वाले ज़मानत मामलों की बड़ी संख्या पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट वास्तव में "ज़मानत कोर्ट" बन गया है। उन्होंने बताया कि पीठ ने शुक्रवार को 25 और आज 19 ज़मानत मामलों की सुनवाई की।उन्होंने कहा,"एक के बाद एक हम ज़मानत देने या न देने पर विचार कर रहे हैं।"उन्होंने आगे कहा,"सुप्रीम कोर्ट एक ज़मानत कोर्ट बन गया है।"जस्टिस नागरत्ना की यह टिप्पणी सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन द्वारा आभार व्यक्त करने के बाद आई कि उनके नेतृत्व...
दिल्ली दंगों मामले में उमर खालिद और अन्य की ज़मानत याचिकाओं पर नोटिस जारी, 7 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा और शिफा उर रहमान द्वारा दिल्ली दंगों की व्यापक साजिश मामले में ज़मानत की मांग वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी किया।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को तय की।सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, एएम सिंघवी, सिद्धार्थ दवे आदि याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए।जस्टिस कुमार ने सबसे पहले पिछले शुक्रवार (19 सितंबर) को मामले की सुनवाई न करने के लिए माफ़ी मांगी। जस्टिस कुमार ने कहा...
एयर इंडिया विमान दुर्घटना | सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक रिपोर्ट के चुनिंदा लीक से पायलट की गलती के दावे की आलोचना की
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के चुनिंदा लीक पर चिंता व्यक्त की, जिससे जून 2025 में एयर इंडिया की उड़ान AI171 के दुर्घटनाग्रस्त होने के लिए पायलट की गलती को ज़िम्मेदार ठहराने वाले मीडिया के दावे को बल मिला।कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट का चुनिंदा और टुकड़ों में प्रकाशन "दुर्भाग्यपूर्ण" है। कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि जांच पूरी होने तक, पूर्ण गोपनीयता बनाए रखना ज़रूरी है।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ 12 जून, 2025 को अहमदाबाद हवाई अड्डे...
Tirupati Laddu Row | हाईकोर्ट की टिप्पणी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची CBI
सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को CBI डायरेक्टर की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें कहा गया कि तिरुमाला तिरुपति मंदिर के प्रसाद में मिलावटी घी के आरोपों की जांच के लिए SIT से बाहर के अधिकारी को नियुक्त करके उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने जब इस मामले की सुनवाई की तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अनुरोध किया कि चूंकि जांच अभी जारी है, इसलिए...
अब समय आ गया है कि मानहानि को अपराध की श्रेणी से बाहर किया जाए: द वायर मामले में सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार 22 सितंबर को फाउंडेशन फॉर इंडिपेंडेंट जर्नलिज़्म (ऑनलाइन पोर्टल द वायर का संचालन करता है) और इसके डिप्टी एडिटर अजोय आशिर्वाद महाप्रस्था की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया। याचिकाएं उस आपराधिक मानहानि मामले से संबंधित हैं, जिसे JNU की पूर्व प्रोफेसर अमिता सिंह ने दायर किया था। इस याचिका के तहत ट्रायल कोर्ट ने द वायर के संपादकों को तलब किया था।यह मामला 2016 में प्रकाशित द वायर की एक रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसका टाइटल डॉसियर कॉल्स JNU Den of Organised Sex Racket Students,...
अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज़ ने 200 करोड़ मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
बॉलीवुड अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज़ ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उनकी याचिका खारिज किए जाने को चुनौती दी है, जिसमें उन्होंने 200 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग केस (अभियुक्त सुकेश चंद्रशेखर से जुड़ा) में दायर ईडी की ECIR और दूसरी सप्लीमेंट्री शिकायत, जिसमें उन्हें दसवां आरोपी बनाया गया था, को रद्द करने की मांग की थी। अंतरिम राहत के तौर पर उन्होंने ट्रायल पर रोक लगाने की मांग भी की है।जैकलीन का कहना है कि ईडी की फ़ाइल की गई सामग्री साबित करती है कि वह...
सुप्रीम कोर्ट ने 1971 के विक्रय पत्र मामले में 71 वर्षीय महिला के खिलाफ FIR दर्ज कराने वाले वकील को फटकार लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने वकील को यह बताने का निर्देश दिया कि पांच दशक से भी पहले, 1971 में निष्पादित विक्रय पत्र में जालसाजी का आरोप लगाते हुए 2023 में FIR दर्ज कराने के लिए उन पर अनुकरणीय जुर्माना क्यों न लगाया जाए। यह देखते हुए कि यह मामला कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग प्रतीत होता है, अदालत ने संबंधित थाना प्रभारी को भी कारण बताने के लिए कहा कि कार्यवाही को रद्द क्यों न कर दिया जाए।FIR में आरोपी एक 71 वर्षीय महिला है।जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एनके सिंह की पीठ उस महिला द्वारा दायर...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (15 सितंबर, 2025 से 19 सितंबर, 2025 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।नाबालिग के गुप्तांगों को छूना बलात्कार नहीं, POCSO Act के तहत यौन उत्पीड़न का अपराध: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 12 वर्ष से कम आयु की नाबालिग लड़की के गुप्तांगों को छूना मात्र भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375/376एबी के तहत बलात्कार या यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO...
नाबालिग के गुप्तांगों को छूना बलात्कार नहीं, POCSO Act के तहत यौन उत्पीड़न का अपराध: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 12 वर्ष से कम आयु की नाबालिग लड़की के गुप्तांगों को छूना मात्र भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375/376एबी के तहत बलात्कार या यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की धारा 6 के तहत प्रवेशात्मक यौन उत्पीड़न का अपराध नहीं माना जाएगा।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा आचरण POCSO Act की धारा 9(एम) के तहत परिभाषित "गंभीर यौन उत्पीड़न" के अपराध के साथ-साथ IPC की धारा 354 के तहत "महिला की गरिमा को ठेस पहुँचाने" के अपराध के समान होगा।बिना किसी प्रवेशात्मक कृत्य के नाबालिग...
सुप्रीम कोर्ट का हिमाचल प्रदेश में अतिक्रमणों को नियमित करने के अधिकार को रद्द करने के फैसले पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, जिसमें हिमाचल प्रदेश भूमि राजस्व अधिनियम, 1952 की धारा 163-ए को असंवैधानिक घोषित किया गया था।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मामले में नोटिस जारी किया।अधिनियम की धारा 163-ए राज्य सरकार को सरकारी भूमि पर अतिक्रमणों के नियमितीकरण के लिए नियम बनाने का अधिकार देती है।हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि विवादित प्रावधान 'बेईमान व्यक्तियों के एक वर्ग के लिए...
चीफ जस्टिस ने लंबित मामलों को कम करने के लिए सरकारी अपीलों को दायर करने से पहले फ़िल्टर करने का सुझाव दिया
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) भूषण रामकृष्ण गवई ने शनिवार को एक केंद्रीय एजेंसी का आह्वान किया, जो अदालतों में लंबित मामलों की संख्या को कम करने के लिए यह फ़िल्टर करे कि सरकार किन फैसलों के लिए अपील करती है।वह केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के 10वें अखिल भारतीय सम्मेलन, 2025 को संबोधित कर रहे थे।जस्टिस गवई ने कहा कि वर्तमान में CAT के समक्ष एक लाख से अधिक मामले और राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरणों के समक्ष कई अन्य मामले लंबित हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में सबसे...
मांग नोटिस में चेक की सही राशि का उल्लेख नहीं है तो NI Act की धारा 138 के तहत शिकायत सुनवाई योग्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत किसी शिकायत को सुनवाई योग्य बनाने के लिए मांग के वैधानिक नोटिस में चेक की राशि का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। यदि मांग नोटिस में उल्लिखित राशि चेक की राशि से भिन्न है, तो शिकायत सुनवाई योग्य नहीं है।अदालत ने कहा,"NI Act की धारा 138 के प्रावधान (बी) के तहत जारी किए जाने वाले नोटिस में उसी राशि का उल्लेख होना चाहिए, जिसके लिए चेक जारी किया गया। यह अनिवार्य है कि वैधानिक नोटिस में मांग चेक की राशि के बराबर ही हो।"चीफ...
"भारतीय फुटबॉल में बदलाव की उम्मीद": सुप्रीम कोर्ट ने AIFF संविधान को अंतिम रूप दिया, 4 हफ्तों में अपनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 सितंबर) को अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के संविधान का ड्राफ्ट अंतिम रूप दे दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि महासंघ जल्द से जल्द, अधिमानतः 4 हफ्तों के भीतर, जनरल बॉडी मीटिंग बुलाकर संविधान को अपनाए। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह फैसला 2017 के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश (जिसमें तत्कालीन अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल सहित AIFF पदाधिकारियों का चुनाव रद्द किया गया था) के खिलाफ AIFF की याचिका पर दिया।कोर्ट ने कहा कि खेल संवैधानिक आदर्श बंधुत्व से...



















