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पूरी तरह समय की बर्बादी: सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद रिट याचिका दायर करने वाले वादी पर जुर्माना लगाया
'पूरी तरह समय की बर्बादी: सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद रिट याचिका दायर करने वाले वादी पर जुर्माना लगाया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाया, जिसने अपने मामले को फिर से खोलने के लिए उसकी पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद रिट याचिका दायर की थी, जिसमें दावा किया गया कि उसके साथ अन्याय हुआ है।जस्टिस एसके कौल और जस्टिस अरविंद कुमार की खंडपीठ ने इसे 'न्यायिक समय की पूरी बर्बादी' बताते हुए रिट याचिका खारिज कर दी और जुर्माना लगाया। हालांकि, याचिकाकर्ता की वित्तीय बाधाओं को देखते हुए इसने जुर्माना राशि को 10,000 रुपये तक सीमित कर दिया।खंडपीठ इस बात से परेशान थी कि पुनर्विचार...

नागरिकों की स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में न्यायालयों को शीघ्रता से कार्य करना चाहिए; जमानत याचिकाओं में साक्ष्य के विस्तृत विचार-विमर्श से बचें: सुप्रीम कोर्ट
नागरिकों की स्वतंत्रता से संबंधित मामलों में न्यायालयों को शीघ्रता से कार्य करना चाहिए; जमानत याचिकाओं में साक्ष्य के विस्तृत विचार-विमर्श से बचें: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका की अनुमति देते हुए आदेश में कहा कि किसी नागरिक की स्वतंत्रता से संबंधित आदेश पारित करने में अत्यधिक देरी संवैधानिक जनादेश के अनुरूप नहीं है। इस मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें यह देखते हुए अंतरिम संरक्षण दिया कि (i) यह दीवानी विवाद से उत्पन्न क्रॉस केस है, (ii) प्रथम दृष्टया यह दिखाने के लिए कोई सामग्री नहीं है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों को लागू...

सुप्रीम कोर्ट ने नौकरी और एडमिशन में 58% आरक्षण देने वाले छत्तीसगढ़ सरकार के कानूनी संसोधन को रद्द करने वाले हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने नौकरी और एडमिशन में 58% आरक्षण देने वाले छत्तीसगढ़ सरकार के कानूनी संसोधन को रद्द करने वाले हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार को बड़ी राहत देते हुए सोमवार को हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 58 प्रतिशत आरक्षण देने के कदम को 'असंवैधानिक' घोषित किया गया था।जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसुचित जातियों, जन जातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 2011 को रद्द करने के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।इस 2011 अधिनियम द्वारा, 1994 में अधिनियमित मूल...

हम किसी का करियर खत्म कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के लंबित रहने के दौरान जिला न्यायाधीशों की पदोन्नति की अधिसूचित जारी करने के लिए गुजरात सरकार की खिंचाई की
'हम किसी का करियर खत्म कर सकते हैं': सुप्रीम कोर्ट ने याचिका के लंबित रहने के दौरान जिला न्यायाधीशों की पदोन्नति की अधिसूचित जारी करने के लिए गुजरात सरकार की खिंचाई की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हाईकोर्ट द्वारा अनुशंसित नामों को चुनौती देने वाली याचिका के लंबित रहने के दौरान मार्च में सरकारी अधिसूचना द्वारा गुजरात में जिला न्यायाधीशों को दी गई पदोन्नति पर कड़ी आपत्ति जताई।जस्टिस एमआर शाह ने कहा,'ऐसी कौन-सी असाधारण जल्दबाजी थी कि राज्य सरकार पदोन्नति की अधिसूचना जारी करने से पहले दस दिन इंतजार नहीं कर सकी? क्या आपका सचिव कानून से ऊपर है? यह और कुछ नहीं बल्कि इस अदालत और वर्तमान कार्यवाही को खत्म करने का प्रयास है। हम इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं। हम...

अंतिम समय में जांच के लिए समय बढ़ाने की मांग न करें, आरोपी डिफ़ॉल्ट जमानत के हकदार होंगे : सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए, पुलिस से कहा
अंतिम समय में जांच के लिए समय बढ़ाने की मांग न करें, आरोपी डिफ़ॉल्ट जमानत के हकदार होंगे : सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए, पुलिस से कहा

सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों को अंतिम समय में जांच पूरी करने के लिए समय बढ़ाने की मांग करने वाले आवेदन दाखिल करने के प्रति आगाह किया है।भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने यह टिप्पणी यह देखने के बाद की कि पंजाब पुलिस (जांच बाद में एनआईए द्वारा हाथ में ले ली गई) ने यूएपीए की धारा 43 डी (2) (बी ) के अनुसार जांच के लिए समय बढ़ाने की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया था, जब केवल 90 दिनों का समय समाप्त होने के लिए दो दिन शेष थे। कोर्ट ने 101वें दिन समय...

यह कैसे तय किया जाए कि विवाह असाध्य रूप से टूट गया है? सुप्रीम कोर्ट ने कारकों को चिन्हित किया
यह कैसे तय किया जाए कि विवाह असाध्य रूप से टूट गया है? सुप्रीम कोर्ट ने कारकों को चिन्हित किया

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में माना है कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों को लागू करके 'विवाह को असाध्य रूप से टूटने' के आधार पर उसे भंग कर सकता है, जिसके अनुसार सुप्रीम कोर्ट ऐसा करने के लिए पूर्ण न्याय के लिए असाधारण निर्देश जारी कर सकता है।यह ध्यान दिया जा सकता है कि "विवाह का असाध्य रूप से टूटना" तलाक के लिए वैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त आधार नहीं है। इसलिए, इस मुद्दे को एक संविधान पीठ को यह तय करने के लिए भेजा गया था कि क्या अनुच्छेद 142 के तहत शक्तियों को एक ऐसे आधार...

सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों से रितु छाबरिया के फैसले के आधार पर डिफॉल्ट जमानत के लिए आवेदनों को टालने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों से 'रितु छाबरिया' के फैसले के आधार पर डिफॉल्ट जमानत के लिए आवेदनों को टालने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को रितु छाबरिया बनाम भारत संघ और अन्य में शीर्ष अदालत की दो-न्यायाधीशों की पीठ के हालिया फैसले को वापस लेने की मांग करने वाली केंद्र की याचिका पर विचार करने के लिए 4 मई को तीन-न्यायाधीशों की पीठ गठित करने पर सहमति व्यक्त की। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि छबड़िया फैसले के आधार पर डिफॉल्ट जमानत की मांग करने वाली किसी भी अदालत के समक्ष दायर किसी भी आवेदन को 4 मई के बाद की तारीख तक टाल दिया जाना चाहिए। रितु छाबरिया मामले में जस्टिस कृष्णा मुरारी और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ...

क्या दोष सिद्ध होने पर निर्वाचित प्रतिनिधि की अयोग्यता अपराध की प्रकृति के आधार पर होनी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान की याचिका पर सवाल पूछा
क्या दोष सिद्ध होने पर निर्वाचित प्रतिनिधि की अयोग्यता अपराध की प्रकृति के आधार पर होनी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम खान की याचिका पर सवाल पूछा

सुप्रीम कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के नेता मोहम्मद अब्दुल्ला आज़म खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सवाल उठाया कि क्या एक आपराधिक मामले में सजा के कारण एक विधायक का निलंबन अपराध में शामिल नैतिक पतन पर आधारित होना चाहिए?इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले माह मोहम्मद अब्दुल्ला आज़म खान की ओर से 15 साल पुराने एक मामले में उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था। दोषसिद्धि के कारण विधायक के रूप में अब्दुल्ला आज़म खान को आयोग्य घो‌षित कर ‌दिया गया था।इसी को चुनौती देते हुए...

राजद्रोह कानून - आईपीसी की धारा 124ए की फिर से जांच की प्रक्रिया जारी, परामर्श एडवांस स्टेज में : एजी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया
राजद्रोह कानून - आईपीसी की धारा 124ए की फिर से जांच की प्रक्रिया जारी, परामर्श एडवांस स्टेज में : एजी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि वह भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए की फिर से जांच करने की प्रक्रिया में है और उक्त प्रक्रिया एक एडवांस स्टेज में है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी परदीवाला की पीठ के समक्ष भारत के अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने यह दलील तब दी, जब पीठ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत 152 साल पुराने राजद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।आईपीसी की धारा 124ए के अनुसार-" जो कोई भी, मौखिक या लिखित शब्दों द्वारा, या संकेतों...

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13बी(2) के अनुसार आपसी सहमति से तलाक के लिए प्रतीक्षा अवधि को अनुच्छेद 142 के तहत माफ किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13बी(2) के अनुसार आपसी सहमति से तलाक के लिए प्रतीक्षा अवधि को अनुच्छेद 142 के तहत माफ किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने हाल ही में कहा कि वह हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के अनुसार आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए निर्धारित 6 से 8 महीने की प्रतीक्षा अवधि को समाप्त करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का उपयोग कर सकती है।जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस एएस ओका, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पांच जजों की पीठ ने माना कि सुप्रीम कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 142 (1) के तहत पार्टियों के बीच समझौते और हिंदू विवाह अधिनियम की धारा...

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उन निजी सचिवों को सांकेतिक वरिष्ठता प्रदान की, जिनके नंबर आंसर शीट्स के पुनर्मूल्यांकन के बाद बढ़े
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उन निजी सचिवों को सांकेतिक वरिष्ठता प्रदान की, जिनके नंबर आंसर शीट्स के पुनर्मूल्यांकन के बाद बढ़े

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट में उन निजी सचिवों को सांकेतिक वरिष्ठता प्रदान की, जिन्होंने 2016 में 27 रिक्त पदों पर आवेदन किया था। कोर्ट ने आवेदकों की आंसर शीट के पुनर्मूल्यांकन में अंकों में हुई वृद्धि के बाद बनी संशोधित योग्यता सूची के आधार पर उक्त फैसला सुनाया। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट की एक विशेष समिति की ओर से तैयार की गई संशोधित योग्यता सूची को रद्द कर दिया गया था, जिसमें उन निजी सचिव को...

सीपीसी आदेश VII नियम 11 - वाद यदि प्रताड़ित करने के लिए, भ्रमपूर्ण तथ्यों पर आधारित हो और परिसीमा द्वारा वर्जित हो तो उसे खारिज किया जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
सीपीसी आदेश VII नियम 11 - वाद यदि प्रताड़ित करने के लिए, भ्रमपूर्ण तथ्यों पर आधारित हो और परिसीमा द्वारा वर्जित हो तो उसे खारिज किया जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीपीसी के नियम XI (ए) और (डी) के आदेश VII के तहत वाद यदि प्रताड़ित करने के लिए, भ्रमपूर्ण तथ्यों पर आधारित हो और परिसीमा (limitation) द्वारा वर्जित हो तो उसे खारिज किया जाना चाहिए।इस मामले में प्रतिवादी ने यह कहते हुए वाद की अस्वीकृति की मांग करते हुए आवेदन दायर किया कि वाद स्पष्ट रूप से परिसीमा द्वारा वर्जित है। इसलिए वाद को सीपीसी के आदेश VII नियम XI(डी) के तहत खारिज कर दिया जाना चाहिए। ट्रायल कोर्ट ने उक्त आवेदन को खारिज कर दिया और उक्त आदेश को हाईकोर्ट ने बरकरार...

चार्जशीट सिर्फ इसलिए अधूरी नहीं मानी जा सकती, क्योंकि इसे मंजूरी के बिना दायर किया गया, आरोपी इस आधार पर डिफॉल्ट जमानत नहीं मांग सकता : सुप्रीम कोर्ट
चार्जशीट सिर्फ इसलिए अधूरी नहीं मानी जा सकती, क्योंकि इसे मंजूरी के बिना दायर किया गया, आरोपी इस आधार पर डिफॉल्ट जमानत नहीं मांग सकता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक फैसला सुनाते हुए कहा कि एक आरोपी व्यक्ति इस आधार पर डिफ़ॉल्ट जमानत का हकदार नहीं होगा कि उसके खिलाफ दायर चार्जशीट वैध प्राधिकरण की मंजूरी के बिना दाखिल की गई और इसलिए एक अधूरी चार्जशीट है। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जेबी पारदीवाला की खंडपीठ ने फैसला सुनाया।खंडपीठ ने कहा कि चार्जशीट के लिए एक वैध प्राधिकारी की मंजूरी की आवश्यकता थी या नहीं, यह एक अपराध का संज्ञान लेते समय संबोधित किया जाने वाला प्रश्न नहीं है, बल्कि, यह अभियोजन के दौरान संबोधित किया...

सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक नामों और चिन्हों वाले राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने की याचिका वापस लेने के साथ खारिज की; हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी
सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक नामों और चिन्हों वाले राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने की याचिका वापस लेने के साथ खारिज की; हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को धार्मिक नामों और चिन्हों का इस्तेमाल करने वाले राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका को वापस लेने की अनुमति दी।कोर्ट ने कहा,"उपस्थित वकील ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की स्वतंत्रता के साथ वर्तमान याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगी है। उपरोक्त स्वतंत्रता के साथ रिट याचिका को वापस ले लिया गया है। हमने किसी भी पक्ष के पक्ष में मैरिट के आधार पर कुछ भी व्यक्त नहीं किया है।"जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अहसानद्दिन अमानुल्लाह की पीठ उत्तर...

आनंद मोहन की समयपूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका: सुप्रीम कोर्ट दिवंगत आईएएस अधिकारी की पत्नी की याचिका पर 8 मई को सुनवाई करेगा
आनंद मोहन की समयपूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका: सुप्रीम कोर्ट दिवंगत आईएएस अधिकारी की पत्नी की याचिका पर 8 मई को सुनवाई करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में गोपालगंज के जिलाधिकारी जी कृष्णैया की मॉब लिंचिंग के मामले में बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन को समय से पहले रिहाई देने के बिहार सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर 8 मई को सुनवाई करने पर सहमति जताई।याचिका जिला मजिस्ट्रेट जी कृष्णैया की विधवा उमा कृष्णैया द्वारा दायर की गई, जिन्हें मोहन के नेतृत्व वाली भीड़ के हमले के बाद मार दिया गया था। इस अपराध के लिए मोहन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, बिहार सरकार द्वारा दी गई सजा में छूट के मद्देनजर 14 साल...

धर्मांतरण विरोधी कानून का अल्पसंख्यकों के खिलाफ दुरुपयोग होने की संभावना; राज्य में कई वर्षों से जबरदस्ती धर्मांतरण का कोई मामला नहीं: सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार ने कहा
'धर्मांतरण विरोधी कानून का अल्पसंख्यकों के खिलाफ दुरुपयोग होने की संभावना; राज्य में कई वर्षों से जबरदस्ती धर्मांतरण का कोई मामला नहीं': सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार ने कहा

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष धर्मांतरण विरोधी कानून पर एक मसौदा तैयार करने के लिए भारत के विधि आयोग को निर्देश देने के लिए दायर जनहित याचिका के जवाब में तमिलनाडु सरकार ने प्रस्तुत किया कि धर्मांतरण विरोधी कानूनों का अल्पसंख्यकों के खिलाफ दुरुपयोग होने की संभावना है।भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका में राज्य में ईसाई धर्म का प्रसार करने वाले मिशनरियों के खिलाफ विशिष्ट आरोपों के साथ, जबरन या धोखाधड़ी वाले धार्मिक रूपांतरणों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने के लिए सरकार को निर्देश...

शादी का असाध्य रूप से टूटना अनुच्छेद 142 शक्तियों का उपयोग करते हुए विवाह को भंग करने का आधार: सुप्रीम कोर्ट
'शादी का असाध्य रूप से टूटना' अनुच्छेद 142 शक्तियों का उपयोग करते हुए विवाह को भंग करने का आधार: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसले में सोमवार को कहा कि वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग कर सकता है, जो विवाह के असाध्य रूप से टूटने के आधार पर तलाक दे सकता है, जो अभी तक वैधानिक रूप से मान्यता प्राप्त आधार नहीं है।कोर्ट ने कहा,"हमने माना कि इस अदालत के लिए विवाह के असाध्य रूप से टूटने के आधार पर विवाह को भंग करना संभव है। यह सार्वजनिक नीति के विशिष्ट या मौलिक सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं करेगा।"न्यायालय ने माना कि इसने उन कारकों को...

दिल्ली किराया नियंत्रण। आवेदन में संपत्ति का उचित विवरण ना होना धारा 25-बी (8) के तहत कब्जा रद्द करने का आधार नहीं : सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली किराया नियंत्रण। आवेदन में संपत्ति का उचित विवरण ना होना धारा 25-बी (8) के तहत कब्जा रद्द करने का आधार नहीं : सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजय कुमार की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कुसुम लता शर्मा बनाम अरविंद सिंह में दायर एक अपील का फैसला करते हुए कहा है कि जब किराया नियंत्रक मकान मालिक द्वारा सद्भावनापूर्वक आवश्यकता के आधार पर किराएदारों को बेदखल करने की अनुमति देता है, तथ्य और साक्ष्य रिकॉर्ड पर हैं, तो इस तरह के आदेश को हाईकोर्ट द्वारा दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम, 1958 की धारा 25-बी (8) के तहत समीक्षा में इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता है कि आवेदन में संपत्ति का विवरण उचित नहीं था।पृष्ठभूमि...

पेंशन : सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन के लिए कार्य प्रभारित सेवा कर्मियों की पूरी अवधि गिनने की याचिका को खारिज किया
पेंशन : सुप्रीम कोर्ट ने पेंशन के लिए कार्य प्रभारित सेवा कर्मियों की पूरी अवधि गिनने की याचिका को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में माना है कि कार्य प्रभारित कर्मचारी के रूप में की गई सेवा को पेंशन के उद्देश्य से नहीं गिना जा सकता है। न्यायालय ने पेंशन की गणना के लिए कार्य प्रभारित सेवा की पूरी अवधि को सेवा के रूप में मानने की याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और बिहार सरकार द्वारा बनाए गए एक नियम को बरकरार रखा जिसके द्वारा कार्य प्रभारित सेवा की गणना एक कर्मचारी के लिए पेंशन की सेवा की अवधि न्यूनतम योग्यता में कमी की सीमा तक ही की जाएगी, जिसे बाद में नियमित किया गया था।जस्टिस एमआर शाह और...