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विदेश यात्रा की ठोस योजना बताए बिना पासपोर्ट नहीं लौटाया जाएगा: तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोशल एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ की पासपोर्ट रिहाई संबंधी याचिका का निस्तारण करते हुए फिलहाल पासपोर्ट लौटाने से इनकार किया।अदालत ने कहा कि बिना स्पष्ट विदेश यात्रा योजना बताए पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता।जस्टिस दिपांकर दत्ता, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सीतलवाड़ को यह स्वतंत्रता दी कि जब भी वह विदेश यात्रा करना चाहें, तब नई अर्जी दाखिल कर सकती हैं।सुनवाई के दौरान सीतलवाड़ की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि फिलहाल उनकी कोई निर्धारित विदेश...
हत्या मामले में दोषपूर्ण जांच पर सुप्रीम कोर्ट की असम पुलिस को फटकार, 16 आरोपियों की गलत दोषसिद्धि पर जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में त्रुटिपूर्ण जांच के कारण 16 लोगों के विरुद्ध गलत अभियोजन चलने पर असम पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।अदालत ने कहा कि पुलिस की पूर्वनियोजित और दोषपूर्ण जांच ने आपराधिक न्याय प्रक्रिया को गंभीर क्षति पहुंचाई और निर्दोष लोगों को सजा का सामना करना पड़ा।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा,“अक्षम जांच या पूर्वनियोजित जांच दोनों ही आपराधिक अभियोजन के लिए घातक हैं, लेकिन यदि पूरी तरह निर्दोष व्यक्तियों को फंसाया जाए तो उसके परिणाम और भी विनाशकारी होते...
NCLT में समाधान योजनाओं की मंजूरी में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, कहा- स्थिति बेहद गंभीर
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में समाधान योजनाओं की मंजूरी में हो रही भारी देरी पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे अत्यंत गंभीर स्थिति बताया।अदालत ने कहा कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने NCLT प्रधान पीठ नई दिल्ली के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट पर विचार करते हुए कहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक और निराशाजनक है।अदालत के समक्ष बताया गया कि समाधान योजनाओं की मंजूरी...
सार्वजनिक स्थान पर कॉफी पीना भी डर का कारण बन गया': अंतरधार्मिक जोड़ों की उत्पीड़न पर NHRC की चुप्पी पर हाईकोर्ट में तीखी टिप्पणी, बेंच में मतभेद
इलाहाबाद हाईकोर्ट में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की भूमिका को लेकर सुनवाई के दौरान खंडपीठ के दो जजों के बीच असामान्य मतभेद देखने को मिले।जस्टिस अतुल श्रीधरन ने NHRC की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अंतरधार्मिक संबंधों में रहने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक स्थान पर साथ कॉफी पीना तक भय का कारण बन गया है, जबकि आयोग ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता।हालांकि जस्टिस विवेक सारन ने इन व्यापक टिप्पणियों से असहमति जताई और कहा कि बिना सभी पक्षों को सुने इस प्रकार की प्रतिकूल...
'लीगल प्रोफेशन में “ब्लैक शीप” पर तुरंत कार्रवाई जरूरी' : सुप्रीम कोर्ट ने BCI से मांगा जवाबदेही पर जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि विधिक पेशे (लीगल प्रोफेशन) में मौजूद “ब्लैक शीप” से तुरंत निपटना आवश्यक है, ताकि पेशे की साख और ईमानदारी बनी रहे। कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से उसके अनुशासनात्मक तंत्र की प्रभावशीलता और समयबद्धता पर सवाल उठाए।यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें एक वकील को कथित रूप से धोखाधड़ी के आरोप में एक बैंक द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। बैंक ने अन्य बैंकों को भी सूचित किया था कि संबंधित वकील भरोसेमंद नहीं है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस...
सबरीमाला सुनवाई: 'सुधार के नाम पर धर्म को खत्म नहीं कर सकते' – सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला संदर्भ मामले की सुनवाई के दसवें दिन बुधवार को 9-जजों की संविधान पीठ ने अहम मौखिक टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि सुधार के नाम पर धर्म को “खोखला” या समाप्त नहीं किया जा सकता और आस्था व अंतरात्मा के मामलों को न्यायिक बहस का विषय नहीं बनाया जा सकता।सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंग ने उन दो महिलाओं की ओर से दलीलें रखीं, जिन्होंने 2018 के फैसले के बाद सबरीमाला मंदिर में प्रवेश किया था। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25(1) के तहत व्यक्तियों को प्राप्त...
मदरसों की जांच का आदेश, लेकिन मॉब लिंचिंग पर स्वतः संज्ञान नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NHRC की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि आयोग उत्तर प्रदेश के मदरसों की जांच जैसे मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जबकि मॉब लिंचिंग, भीड़ हिंसा और सतर्कतावादी हमलों जैसे गंभीर मामलों में स्वतः संज्ञान लेने के उदाहरण सामने नहीं आते।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया ने वर्ष 2025 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा उत्तर...
CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए मजिस्ट्रेट को पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 196/197 के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती।कोर्ट ने कहा,"CrPC की धारा 196 और 197 (या BNSS में संबंधित प्रावधानों) के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत, संज्ञान लेने के चरण पर लागू होती है। यह CrPC की धारा 156(3)/BNSS की धारा 175(3) के तहत FIR दर्ज करने या जांच करने के संज्ञान-पूर्व चरण तक विस्तारित नहीं होती।" यह टिप्पणी CPI(M) नेता वृंदा...
BREAKING| हेट स्पीच पर कोई कानूनी खालीपन नहीं; केंद्र और राज्य विचार कर सकते हैं कि क्या संशोधनों की ज़रूरत है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि मौजूदा आपराधिक कानून हेट स्पीच के अपराध से निपटने के लिए पर्याप्त है। कोर्ट ने कहा कि यह सोचना गलत है कि हेट स्पीच का अपराध कानून के दायरे से बाहर है।कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि इस मामले में कोई कानूनी खालीपन नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि किसी अपराध को बनाना न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि यह पूरी तरह से विधायिका का काम है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच उन याचिकाओं के समूह पर फ़ैसला सुना रही थी, जिनमें हेट स्पीच के बढ़ते खतरे से...
जाली वसीयत पर आधारित संपत्ति खरीदने वाला खरीदार आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी जाली वसीयत (Will) के आधार पर खरीदी गई संपत्ति के मामले में, यदि खरीदार को उस जालसाजी की जानकारी नहीं थी, तो उसे आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने एक खरीदार के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब खरीद के समय खरीदार को कथित फर्जी वसीयत की जानकारी नहीं थी और वह संबंधित अवधि में विदेश में था, तो उसे धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया...
सुप्रीम कोर्ट में PIL: UP IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को बंगाल चुनावों में चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके तहत उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि यह अधिकारी "बेहद पक्षपाती" है और राजनीतिक उम्मीदवारों को धमका रहा है।'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 20B का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने बताया कि पर्यवेक्षक का काम "चुनावों के संचालन पर नज़र रखना" होता है और उसे एक "तटस्थ संस्थागत...
Sabarimala Reference | अनुच्छेद 25(2)(b) में सिर्फ़ मंदिरों को सभी के लिए खोलने का ज़िक्र, क्योंकि दूसरे धर्मों में जाति-व्यवस्था नहीं: जस्टिस नागरत्ना
सबरीमाला मामले की सुनवाई के नौवें दिन सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि संविधान का अनुच्छेद 25(2)(b)—जो हिंदू सार्वजनिक मंदिरों को हिंदुओं के सभी वर्गों के लिए खोलने के लिए कानून बनाने की अनुमति देता है—उसे जान-बूझकर उस समय समाज में प्रचलित जाति-आधारित भेदभाव को दूर करने के लिए बनाया गया।जज ने टिप्पणी की कि इस प्रावधान में दूसरे धर्मों का ज़िक्र इसलिए नहीं किया गया, क्योंकि ऐसा भेदभाव सिर्फ़ हिंदू धर्म में ही प्रचलित है।उन्होंने यह टिप्पणी एक वकील द्वारा उठाए...
'ठाणे की 193 एकड़ ज़मीन 'प्राइवेट फॉरेस्ट' के तौर पर अधिग्रहण से मुक्त': सुप्रीम कोर्ट ने लगाई बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले पर रोक लगाई। इस फ़ैसले में ठाणे के मानपाड़ा में लगभग 193 एकड़ ज़मीन को 'निजी जंगल' के तौर पर अधिग्रहण से मुक्त करने के फ़ैसले को सही ठहराया गया था। साथ ही ज़मीन मालिक के विकास के अधिकारों (Development Rights) के दावे के लिए रास्ता साफ़ किया गया था।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने ठाणे नगर निगम द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर नोटिस जारी किया। बेंच ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के फ़ैसले का अमल अगली सुनवाई तक, जो 20 जुलाई...
क्या आंसर शीट दिखाने के मामले में राज्य PSC के नियम RTI Act से ऊपर हैं? सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच
सुप्रीम कोर्ट अब इस बात की जांच करेगा कि क्या कोई राज्य लोक सेवा आयोग (State Public Service Commission) यह तय कर सकता है कि भर्ती परीक्षा से जुड़ी जानकारी किस चरण में दी जाएगी, और क्या उम्मीदवार उस चरण से पहले ऐसी जानकारी मांगने के लिए 'सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005' (RTI Act) का सहारा ले सकते हैं।कोर्ट ने कहा,"इन याचिकाओं में हमारे विचार के लिए जो सवाल सामने आया है, वह यह है: 'क्या कोई राज्य लोक सेवा आयोग - जो एक संवैधानिक संस्था है - अपने खुद के नियम बना सकता है, जो यह तय करें कि उसके द्वारा...
अगर नियुक्ति 'अगले आदेश तक' की शर्त पर है तो पूरा कार्यकाल करने का कोई अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (28 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि अगर किसी नियुक्ति आदेश में कार्यकाल को "अगले आदेश तक" की शर्त के अधीन रखा गया है तो इससे कर्मचारी को पूरे कार्यकाल तक पद पर बने रहने का कोई ऐसा अधिकार नहीं मिल जाता, जिसे वह कानूनी तौर पर लागू करवा सके।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सही ठहराया, जिसमें प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा अपीलकर्ता का कार्यकाल कम किए जाने का फैसला बरकरार रखा गया था। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि हालांकि...
मौत की सज़ा वाले संभावित मामलों में सज़ा सुनाने से पहले ट्रायल कोर्ट को कम करने वाले और बढ़ाने वाले कारकों पर रिपोर्ट मंगानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि ट्रायल कोर्ट को नियमित प्रक्रिया के तौर पर मौत की सज़ा वाले संभावित मामलों में दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद और सज़ा तय करने से पहले सज़ा को कम करने वाले और बढ़ाने वाले हालात पर रिपोर्ट मंगानी चाहिए। कोर्ट ने पाया कि शुरुआती चरण में ऐसी रिपोर्ट न मिलने से सज़ा सुनाने की संतुलित प्रक्रिया कमज़ोर होती है और सुधार से जुड़े कारकों पर सही ढंग से विचार करने में देरी होती है।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने पटना हाईकोर्ट के फैसले के...
RTE Act | स्कूल, राज्य द्वारा आवंटित स्टूडेंट का एडमिशन योग्यता पर विवाद का बहाना बनाकर नहीं रोक सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि प्राइवेट "पड़ोस के स्कूलों" को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के तहत राज्य द्वारा आवंटित स्टूडेंट्स को तुरंत एडमिशन देना होगा। इस मामले में वे इस आधार पर एडमिशन से मना नहीं कर सकते कि छात्र की योग्यता को लेकर कोई विवाद अभी लंबित है।कोर्ट ने साफ किया कि भले ही स्कूल को किसी स्टूडेंट की योग्यता को लेकर कोई शक हो तो भी वह स्पष्टीकरण के लिए अधिकारियों से संपर्क कर सकता है, लेकिन इस बीच वह एडमिशन नहीं रोक सकता।जस्टिस पमिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक...
लंबित अपील के कारण सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के दोषी की सजा निलंबित की, जमानत दी
सुप्रीम कोर्ट ने एक असाधारण परिस्थिति में हत्या के एक दोषी की सजा निलंबित कर दी, यह देखते हुए कि उसकी 2018 की आपराधिक अपील अभी तकमध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित है और निकट भविष्य में उसकी सुनवाई की संभावना नहीं है।जस्टिस जे. बी. पारडीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट ने अपनी पत्नी की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस सजा को चुनौती देते हुए उसने 2018 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर...
सबरीमाला सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने अप्रासंगिक दलीलों पर वकील को फटकारा
सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला संदर्भ मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय को अप्रासंगिक और विषय से बाहर की दलीलें देने पर कड़ी फटकार लगाई। पीठ ने उन्हें कई बार निर्देश दिया कि वे अपने तर्क केवल विचाराधीन मुद्दों तक सीमित रखें।सुनवाई के दौरान उपाध्याय ने “धर्म” को “रिलिजन” से बड़ा बताते हुए कहा कि धार्मिक मतभेदों के कारण भारत का विभाजन हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को अपने फैसले के दूरगामी प्रभावों पर विचार करना होगा और यह तय करेगा कि भारत भविष्य में किस...
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के ए.एन. झा पार्क से हिरणों को राजस्थान भेजने की मंज़ूरी दी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के हौज खास में स्थित ए.एन. झा डियर पार्क से हिरणों को राजस्थान के टाइगर रिज़र्व में भेजने के फ़ैसले को सही ठहराया। साथ ही कोर्ट ने पूरे देश में वन्यजीवों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए कई अहम निर्देश भी जारी किए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला बरकरार रखा, जिसमें हिरणों को दिल्ली से बाहर दूसरी जगहों पर भेजने और उनमें से कुछ को ए.एन. झा पार्क में ही रखने की बात कही गई।केंद्रीय अधिकार प्राप्त...




















