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हमने अलग होने का फैसला कर लिया है: आपसी सहमति से तलाक के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे उमर अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला ने आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने का फैसला किया। दोनों ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत सुप्रीम कोर्ट में संयुक्त आवेदन दाखिल कर विवाह विच्छेद की मांग की।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने बताया कि दोनों पक्ष अब अलग होने पर सहमत हैं।सिब्बल ने अदालत से कहा,"दोनों ने आजादी को स्वीकार कर लिया। अनुच्छेद 142 के तहत आवेदन दाखिल किया गया है कृपया तलाक की डिक्री...

जेलों की निगरानी के लिए हर जिले में बोर्ड ऑफ विजिटर्स गठित करें: सुप्रीम कोर्ट का राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे मॉडल प्रिजन मैनुअल, 2016 के अनुसार प्रत्येक जिले में 'बोर्ड ऑफ विजिटर्स' (BoV) का गठन करें, जिसकी अध्यक्षता संबंधित जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Principal District Judge) करेंगे।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ जेलों में जाति, लिंग, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव से जुड़े स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई कर रही थी, जो सुकन्या शांता फैसले के अनुपालन से संबंधित...

हल्द्वानी हिंसा: भीड़ ने थाना जला दिया तो क्या हर मामले में UAPA लग जाएगा? सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से पूछा, जमानत बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने हल्द्वानी हिंसा मामले के आरोपी अब्दुल मलिक को मिली जमानत के खिलाफ उत्तराखंड सरकार की याचिका खारिज करते हुए मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि केवल भीड़ द्वारा पुलिस थाना जलाने से अपने आप यूएपीए लागू नहीं हो जाता।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने कहा कि भले ही हाईकोर्ट के आदेश में विस्तृत कारण न हों, लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामले में केवल इसी आधार...

ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलटकर सेशंस कोर्ट दोषसिद्धि दे तो हाईकोर्ट में अपील नहीं, केवल रिवीजन ही उपाय: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि सेशंस कोर्ट अपीलीय अधिकार का प्रयोग करते हुए ट्रायल कोर्ट के बरी करने के आदेश को पलटकर किसी आरोपी को दोषी ठहराता है, तो उसके खिलाफ दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 374 (अब BNSS की धारा 415) के तहत हाईकोर्ट में वैधानिक अपील दायर नहीं की जा सकती। ऐसे मामलों में आरोपी के पास केवल रिवीजन याचिका दाखिल करने का ही उपाय उपलब्ध होगा।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने कहा कि धारा 374 केवल उस अदालत के फैसले पर लागू होती है जिसने स्वयं...

RTI एक्टिविस्ट्स की सुप्रीम कोर्ट से मांग: कोर्ट क्लिप्स शेयर करने पर लगी पूरी रोक पर फिर से विचार करें

'नेशनल कैंपेन फॉर पीपल्स राइट टू इंफॉर्मेशन' (NCPRI) की को-कन्वीनर अंजलि भारद्वाज और ट्रांसपेरेंसी एक्टिविस्ट अमृता जौहरी ने सुप्रीम कोर्ट में अर्ज़ी दाखिल की। वह कोर्ट की कार्यवाही की लाइव-स्ट्रीमिंग और उसे फैलाने के नियमन से जुड़े लंबित मामले में दखल देना चाहती हैं। उनका तर्क है कि आधिकारिक कोर्ट रिकॉर्डिंग शेयर करने पर लगाई गई पाबंदियां बहुत सोच-समझकर और सीमित होनी चाहिए, और इनसे खुले न्याय, बोलने की आज़ादी और सूचना के अधिकार जैसे संवैधानिक सिद्धांतों को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।इस दखल की...

सिर्फ़ इसलिए कि कोई प्रशासनिक कार्रवाई औपचारिक आदेश के तौर पर जारी नहीं की गई, उसे रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (30 जुलाई) को कहा कि जब किसी अथॉरिटी के पास संबंधित कानून के तहत कार्रवाई करने की शक्ति होती है तो सिर्फ़ इस बात से कि कार्रवाई को औपचारिक "आदेश" के बजाय "सर्कुलर" या "कम्युनिकेशन" कहा गया है, वह अमान्य नहीं हो जाती।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा,"एक बार जब शक्ति मौजूद होती है और यह स्पष्ट होता है कि इस विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया गया है तो जिस तरीके से इसका इस्तेमाल किया गया, वह उस शक्ति का इस्तेमाल करने वाली अथॉरिटी की शक्ति को कमज़ोर या...

सुप्रीम कोर्ट ने एक्सपायर हो चुके लाइसेंस के साथ गाड़ी चलाने के नतीजों पर दिया ज़ोर, केंद्र से जागरूकता फैलाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (30 जुलाई) को कहा कि अगर दुर्घटना के समय ड्राइवर के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है तो बीमा कंपनी को इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) से आग्रह किया कि वे वैध ड्राइविंग लाइसेंस के महत्व को समझाने और लाइसेंस जारी करने व रिन्यू करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाएं।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा,"हमारा सुझाव है कि भारत सरकार के सड़क...

Indian Succession Act | पत्नी की मौत के बाद उसकी संपत्ति का मालिकाना हक किसे मिलता है? सुप्रीम कोर्ट ने ईसाई उत्तराधिकार कानून समझाया

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (30 जुलाई) को साफ़ किया कि ईसाई उत्तराधिकार कानून के तहत पति द्वारा अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी गई संपत्ति पत्नी की ही संपत्ति मानी जाती है। इसलिए उसकी मौत के बाद ऐसी संपत्ति का उत्तराधिकार उसकी अपनी मिल्कियत के आधार पर तय किया जाना चाहिए। इसे इंडियन सक्सेशन एक्ट, 1925 की धारा 33 लागू करने के मकसद से पति की संपत्ति नहीं माना जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई की। उस फैसले में...

Rape-Murder Of Ghaziabad Girl | पीड़ित बच्ची का इलाज करने से मना करने वाले प्राइवेट अस्पताल आपराधिक रूप से लापरवाह: सुप्रीम कोर्ट

गाज़ियाबाद में 4 साल की बच्ची के रेप और मर्डर केस में, जिसमें SIT जांच के आदेश दिए गए, सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि जिन प्राइवेट अस्पतालों ने बच्ची के जीवित रहते हुए उसका इलाज करने से मना किया, वे "आपराधिक रूप से लापरवाह" हैं।कोर्ट को यह भी बताया गया कि SIT ने अपनी रिपोर्ट में दो प्राइवेट अस्पतालों और संबंधित स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की।ASG ऐश्वर्या भाटी ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच को इस घटनाक्रम...

PC Act | मुकदमा चलाने की मंज़ूरी न देने के फ़ैसले की समीक्षा उन्हीं सबूतों के आधार पर नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988' (PC Act) के तहत किसी सरकारी कर्मचारी पर मुकदमा चलाने की मंज़ूरी न देने वाले आदेश की समीक्षा सक्षम अधिकारी द्वारा तब तक नहीं की जा सकती, जब तक कि कोई नई जानकारी या सबूत सामने न आए जो पहले उपलब्ध नहीं थे।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"सिर्फ़ उन्हीं सबूतों के आधार पर राय बदलने से मंज़ूरी न देने वाले पुराने आदेश की समीक्षा या उस पर पुनर्विचार का आधार नहीं बनाया जा सकता।" बेंच ने प्रतिवादी डॉक्टर...

चुनाव आयुक्तों से जुड़े कानून को चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी बेंच को मामला भेजने पर आदेश सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस शुरुआती मुद्दे पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया कि क्या 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023' की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को एक बड़ी बेंच के पास भेजा जाना चाहिए या नहीं।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने केंद्र सरकार और याचिकाकर्ताओं की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रख लिया।केंद्र ने कोर्ट से मामले को संविधान बेंच के पास भेजने का आग्रह किया। केंद्र का तर्क...

Election Commissioners Appointment | केंद्र की सुप्रीम कोर्ट में दलील: यह नहीं माना जा सकता कि प्रधानमंत्री लोकतंत्र के खिलाफ काम करेंगे

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि कोई संवैधानिक अदालत यह मानकर शुरुआत नहीं कर सकती कि प्रधानमंत्री लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ काम करेंगे।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच के सामने पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस आधार पर चयन समिति के गठन को अमान्य करना कि प्रधानमंत्री और कार्यपालिका गलत नीयत से काम करेंगे, निर्वाचित संस्थाओं में निहित...

न्यायिक सेवा में 3 वर्ष की वकालत अनिवार्य करने के फैसले पर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर सीधी भर्ती के लिए तीन वर्ष की वकालत को अनिवार्य बनाने वाले अपने फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा।साथ ही अदालत ने दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए तीन वर्ष की अनिवार्य वकालत की शर्त में छूट देने की मांग वाली एक रिट याचिका पर भी सुनवाई की।मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने की। पीठ ने विभिन्न पक्षों के वकीलों, हस्तक्षेपकर्ताओं और...

मानसिक स्वास्थ्य के आधार पर IIT खड़गपुर के स्टूडेंट का IIT रुड़की में तबादला मंजूर, सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का किया इस्तेमाल

सुप्रीम कोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे IIT खड़गपुर के स्टूडेंट को मेडिकल आधार पर IIT रुड़की में ट्रांसफर की अनुमति दी। अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश पारित किया, ताकि मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित किया जा सके।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने IIT खड़गपुर को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर स्टूडेंट को ट्रांसफर और प्रवासन प्रमाणपत्र सहित सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए, ताकि वह आईआईटी रुड़की...

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को वेबसाइट पर प्रमुखता से प्रदर्शित करें: BCI का सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश

बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के 24 जुलाई के अंतरिम आदेश और 17 जुलाई को जारी BCI के सोशल मीडिया एवं डिजिटल आचार-संहिता संबंधी परिपत्र को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर प्रमुखता से प्रकाशित करें।28 जुलाई को सभी राज्य बार काउंसिलों के अध्यक्षों और सचिवों को भेजे गए पत्र में BCI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का हालिया आदेश न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग के अनधिकृत उपयोग, संपादन, प्रसार और व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर उसकी पहले से...

पूर्व मुवक्किल से जुड़े मामले की सुनवाई: उत्तराखंड हाईकोर्ट जज पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- न्याय होता हुआ दिखना भी जरूरी

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के जज के आचरण पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी जज को अपने पूर्व मुवक्किल के पक्ष या विपक्ष से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं करनी चाहिए।अदालत ने कहा, "न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।" यह टिप्पणी जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट के अंतरिम आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संबंधित जज पहले प्रतीक रिसॉर्ट्स एंड बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से...