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आग हादसा नहीं लगती, बीमा कंपनी का 2.4 करोड़ का दावा खारिज करना सही: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 2.4 करोड़ रुपये के अग्नि बीमा दावे के मामले में न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि बीमा कंपनी ने दावा खारिज करने में उचित कार्रवाई की, क्योंकि बीमित कंपनी ने अपने दावे के समर्थन में गलत घोषणाएं की थीं और पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन किया।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ ने बीमा कंपनी की अपील मंजूर करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों से बीमित कंपनी का दावा...

केंद्र सरकार किसी भी अधिकारी को कंपनीज़ एक्ट के तहत धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करने के लिए अधिकृत कर सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार की वह समीक्षा याचिका खारिज की, जिसमें आर्थिक अपराधों के लिए बनी स्पेशल कोर्ट द्वारा कंपनीज़ एक्ट, 2013 के तहत धोखाधड़ी से जुड़े अपराधों का संज्ञान निजी शिकायत के आधार पर न लेने के फैसले को चुनौती दी गई थी।हालांकि, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जॉयमाल्य बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार, सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) के डायरेक्टर के अलावा, कंपनीज़ एक्ट की धारा 212(6) के दूसरे प्रावधान के तहत किसी...

क्या कमर्शियल कोर्ट के तौर पर नोटिफ़ाई किए गए सिविल जज ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुक़दमे सुन सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 सितंबर) को एक बड़ी बेंच को यह सवाल भेजा कि क्या कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 के तहत कमर्शियल कोर्ट के तौर पर नोटिफ़ाई किया गया सिविल जज (सीनियर डिवीज़न) ट्रेडमार्क उल्लंघन का मुक़दमा सुन सकता है, जबकि ट्रेड मार्क्स एक्ट, 1999 की धारा 134 साफ़ तौर पर ज़िला अदालत से निचली अदालत में ऐसे मुक़दमे दायर करने पर रोक लगाती है।ट्रेड मार्क्स एक्ट की धारा 134 में यह प्रावधान है कि रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क के उल्लंघन या कुछ अन्य खास राहतों से जुड़ा मुक़दमा ज़िला अदालत से निचली अदालत...

गिरफ्तारी के लिखित आधार नहीं बताए तो पुलिस अधिकारी पर होगी विभागीय जांच: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी ने यदि गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में उपलब्ध नहीं कराए हैं तो उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जानी चाहिए।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में और आरोपी की समझ वाली भाषा में देना अनिवार्य है। इसका पालन नहीं होने पर गिरफ्तारी गैरकानूनी मानी जाएगी। जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंद्रकुर की खंडपीठ ने कहा कि गिरफ्तारी के आधार...

'कोई भी प्राइवेट यूनिवर्सिटी मुनाफ़ा कमाने वाली संस्था के तौर पर नहीं चल सकती': सुप्रीम कोर्ट ने सभी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ से वित्तीय जानकारी मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ को मुनाफ़ा कमाने वाली संस्थाओं के तौर पर काम करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने देश भर की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ को निर्देश दिया कि वे अपने पिछले पांच सालों के ऑडिटेड वित्तीय रिकॉर्ड, फंड के इस्तेमाल, फ़ीस स्ट्रक्चर, सरप्लस इन्वेस्टमेंट और उन लोगों को किए गए भुगतान की जानकारी दें, जो सीधे तौर पर शैक्षणिक कार्यों से जुड़े नहीं हैं।केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया गया कि वे संबंधित यूनिवर्सिटीज़ और कॉलेजों से...

West Bengal SIR | 38 लाख अपीलों में से 22 लाख अपीलें उन वोटरों ने कीं, जिनके नाम लिस्ट से हटा दिए गए थे: ECI ने सुप्रीम कोर्ट में बताया
पश्चिम बंगाल में SIR मामले में भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। इसमें कहा गया कि अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने 22 लाख से ज़्यादा अपीलें उन लोगों ने दायर की थीं, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए।हलफनामे में बताया गया कि ट्रिब्यूनल के सामने दायर कुल 38,31,429 अपीलों में से 22,21,118 अपीलें उन वोटरों ने की हैं, जिनके नाम हटा दिए गए। इसके विपरीत, 16,10,311 अपीलें वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने को चुनौती देते हुए दायर की गईं।ECI के हलफनामे में अपीलीय ट्रिब्यूनल की संख्या...

एक बार सभी मुद्दों पर ट्रायल शुरू होने के बाद किसी मुद्दे पर शुरुआती सुनवाई नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट ने CPC के ऑर्डर XIV नियम 2(2) की व्याख्या की
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब सिविल कोर्ट सभी मुद्दों पर एक साथ सुनवाई शुरू कर देता है तो वह 'कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर, 1908' (CPC) के ऑर्डर XIV नियम 2(2) के तहत किसी मुद्दे पर शुरुआती सुनवाई का निर्देश नहीं दे सकता।जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच ने ट्रायल कोर्ट, पहली अपीलीय अदालत और केरल हाईकोर्ट के आदेशों को रद्द किया। ट्रायल कोर्ट ने शुरुआती मुद्दे पर केस को 'टाइम-बार्ड' (समय सीमा खत्म होने के कारण अमान्य) मानकर खारिज कर दिया था, जबकि वादी (Plaintiff) अपने सबूत पेश कर...

पुलिस का यह कहना कि 'चार्जशीट दाखिल करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है', इसका मतलब यह नहीं कि डिफ़ॉल्ट ज़मानत दी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (21 सितंबर) को कहा कि जांच एजेंसी का जांच की अवधि बढ़ाने के लिए आवेदन में सिर्फ़ यह कहना कि चार्जशीट दाखिल करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है, इसे जांच पूरी होने के तौर पर नहीं देखा जा सकता।दूसरे शब्दों में, कोर्ट ने कहा कि जब कोई जांच एजेंसी समय बढ़ाने की मांग करते हुए यह कहती है कि चार्जशीट दाखिल करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है, लेकिन उसे उपलब्ध सामग्री - जिसमें गवाहों के बयान, बैंक रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक सबूत और जांच से जुड़ी अन्य जानकारी शामिल है - का विश्लेषण...

BREAKING | गिरफ्तारी का कारण न बताने पर पहली गिरफ्तारी रद्द होने के बाद दोबारा गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम फ़ैसला सुनाया। इसमें आरोपी की दोबारा गिरफ्तारी की प्रक्रिया साफ़ की गई—खासकर तब, जब संविधान के आर्टिकल 22(1) के तहत गिरफ्तारी का कारण न बताने की वजह से पिछली गिरफ्तारी को गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया हो।जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने तय किया कि जिस व्यक्ति को आर्टिकल 22(1) के उल्लंघन के कारण रिहा किया गया था, उसे दोबारा गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को संबंधित ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने अर्ज़ी देनी होगी और मजिस्ट्रेट की मंज़ूरी लेनी...

सुप्रीम कोर्ट में यूपी SIT ने कहा- राम मंदिर चंदा चोरी मामले में दो दिन में दाखिल होगी चार्जशीट
अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मामले की चार्जशीट दो दिन के भीतर दाखिल कर दी जाएगी। सरकार की ओर से यह जानकारी उस समय दी गई, जब सुप्रीम कोर्ट में मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पहली गिरफ्तारी की तारीख से 90 दिन की अवधि 25 सितंबर को पूरी हो जाएगी। यदि इससे पहले...

आवारा पशुओं पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: NHAI ने मांगा स्पष्टीकरण, कहा- राज्यों की है मुख्य जिम्मेदारी
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने आवारा पशुओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट के 19 मई 2026 के आदेश पर स्पष्टीकरण की मांग की है। NHAI ने कहा है कि राष्ट्रीय राजमार्गों से आवारा पशुओं को हटाने, पकड़ने और उन्हें आश्रय देने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और हाईवे प्रशासन की है।सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NHAI की अर्जी का चीफ जस्टिस के समक्ष तत्काल उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की मांग की। CJI ने मामले को पहले निर्देश जारी करने वाली विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने पर...

गुरुग्राम निर्माण स्थल हादसा: 7 मजदूरों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और हरियाणा सरकार को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने 9 मार्च 2026 को गुरुग्राम में निर्माण स्थल पर हुए हादसे में सात मजदूरों की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय और हरियाणा सरकार के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह नोटिस National Campaign Committee for Central Legislation on Construction Labour की याचिका पर जारी किया।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि Occupational Safety,...

370 रुपये की बिरयानी विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन प्रनीत मोरे की FIRs को एक साथ करने की याचिका पर नोटिस जारी किया
370 रुपये की बिरयानी विवाद को लेकर कॉमेडियन प्रनीत मोरे के खिलाफ दर्ज अलग-अलग FIR को एक साथ जोड़ने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार तथा महाराष्ट्र और हरियाणा सरकारों को नोटिस जारी किया।मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI)सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। प्रनीत मोरे की ओर से पेश वकील ने अदालत में कहा कि उनके खिलाफ दर्ज सभी FIR में लगभग एक जैसे ही आरोप लगाए गए और वे एक ही घटना से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि मोरे सार्वजनिक रूप...

शॉर्ट अटेंडेंस पर PhD लॉ छात्रों को नहीं मिलेगी LLB छात्रों वाली राहत: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें PhD लॉ छात्रों को कम उपस्थिति (Short Attendance) के कारण परीक्षा से वंचित न करने की वही अंतरिम राहत देने की मांग की गई थी, जो पहले BA LLB और LLB छात्रों को दी गई थी।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ याचिका पर सुनवाई कर रही थी।पीठ ने स्पष्ट किया कि पहले दिया गया राहत आदेश केवल BA LLB और LLB पाठ्यक्रमों के छात्रों तक सीमित था। इसे PhD छात्रों तक विस्तारित नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा, “आप दिल्ली...

ममता बनर्जी की सुप्रीम कोर्ट से अपील: तृणमूल के चुनाव चिह्न पर रोक के खिलाफ याचिका पर जल्द सुनवाई हो
सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी की याचिका का ज़िक्र किया। इस याचिका में भारत के चुनाव आयोग (ECI) के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके तहत पार्टी के विरोधी गुटों के बीच विवाद के चलते 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' (AITC) नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न 'फूल और घास' (Flowers & Grass) पर रोक लगा दी गई।मामले पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए सिब्बल ने ECI के उस फैसले पर सवाल उठाया जिसके तहत कार्यवाही जारी रहने के दौरान ही पार्टी की पहचान पर रोक...

दशकों पहले 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' के आदेश के तहत हुई बिक्री को रिफंड का आदेश देकर रद्द करना गलत: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब बिक्री के समझौते के तहत 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' का आदेश बिक्री विलेख (सेल डीड) के निष्पादन और कब्ज़ा सौंपने के साथ पूरा हो जाता है तो उस पूरे हो चुके लेन-देन को केवल "इक्विटी (न्याय/संतुलन) बनाए रखने" के लिए ज़्यादा पैसे के रिफंड से नहीं बदला जा सकता।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने आगरा के पास लगभग पांच बीघा कृषि भूमि से संबंधित 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' के लिए 1979 के ट्रायल कोर्ट के आदेश को बहाल करते हुए यह टिप्पणी की।यह विवाद 16 जून,...

कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी देने के लिए मुख्य नियोक्ता ज़िम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब मुख्य नियोक्ता और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के बीच नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध न हो तो कॉन्ट्रैक्टर के ज़रिए रखे गए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी देने के लिए मुख्य नियोक्ता को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ONGC) को कॉन्ट्रैक्टर के ज़रिए रखे गए कर्मचारियों को ग्रेच्युटी देने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया था। कोर्ट ने कहा कि कंट्रोलिंग अथॉरिटी यह तय नहीं कर सकती कि...

Income Tax | CBDT का सर्कुलर कोर्ट पर बाध्यकारी नहीं : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फिर से कहा कि CBDT के सर्कुलर कोर्ट पर बाध्यकारी नहीं होते। कोर्ट ने हाल ही में उन टैक्सपेयर्स की अपीलों को खारिज किया, जिन्होंने अपने एक्सपोर्ट कोटा की बिक्री से मिले प्रीमियम पर सेक्शन 80HHC के तहत डिडक्शन (कटौती) का दावा किया था।धारा 80HHC भारतीय कंपनियों और रेजिडेंट टैक्सपेयर्स को एक्सपोर्ट से होने वाले मुनाफे पर टैक्स डिडक्शन की सुविधा देता था, लेकिन 1 अप्रैल 2005 से यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि एक्सपोर्ट कोटा बेचने...

सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (14 सितंबर, 2026 से 18 सितंबर, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।सभी मेडिकल ग्रेजुएट, चाहे वे भारतीय हों या विदेशी, उन्हें एक जैसा स्टाइपेंड मिलना चाहिए: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से यह पता लगाने को कहा कि क्या राजस्थान, आंध्र प्रदेश, केरल, गुजरात और झारखंड राज्यों में विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट को स्टाइपेंड का भुगतान किया गया, या...

कार्बन उत्सर्जन का बोझ गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाला जाता है: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन के लिए अक्सर विकासशील देशों को गलत तरीके से जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि भारत का प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधा से भी कम है और विकसित देशों का उत्सर्जन छह गुना अधिक है।पीएम मोदी नई दिल्ली में 'पर्यावरण और जलवायु गतिशीलता का भविष्य' (The Future of Environment and Climate Dynamics) पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि अक्सर कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी गलत तरीके से विकासशील देशों पर डाल...
