ताज़ा खबरें
मां के लिए फैसला AIIMS नहीं कर सकता: नाबालिग की गर्भ-समापन अनुमति के खिलाफ AIIMS की क्यूरेटिव याचिका सुनने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने 15 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता की 30 सप्ताह की गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति के खिलाफ दायर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली की क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई से इनकार किया।अदालत ने स्पष्ट कहा कि मां के लिए यह निर्णय एम्स नहीं ले सकता और अंतिम विकल्प नाबालिग पीड़िता तथा उसके परिवार का होगा। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि AIIMS केवल मेडिकल सलाह दे सकता है, लेकिन अपना निर्णय पीड़िता पर थोप नहीं सकता।अदालत ने कहा,“AIIMS...
क्या बैंकों का एसोसिएशन 'कॉशन लिस्ट' के ज़रिए वकीलों को ब्लैकलिस्ट कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया। इस याचिका में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) द्वारा जारी और बैंकों को भेजी गई 'कॉशन लिस्ट' (सावधानी सूची) को चुनौती दी गई। इस लिस्ट में एक वकील का नाम शामिल है, जिस पर आरोप है कि उसने लापरवाही बरतकर कर्ज़ लेने वाले को धोखाधड़ी करने में मदद की।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने वकील की SLP (विशेष अनुमति याचिका) पर फ़ैसला सुरक्षित रखा। यह याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर की गई, जिसमें हाईकोर्ट ने कॉशन...
अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के भाषणों में कोई हेट स्पीच का अपराध नहीं: वृंदा करात की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट
CPI(M) नेता वृंदा करात की उस याचिका पर, जिसमें उन्होंने 2020 में BJP नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा द्वारा कथित हेट स्पीच (नफ़रत भरे भाषण) दिए जाने का आरोप लगाया, सुप्रीम कोर्ट ने यह राय दी कि FIR दर्ज करने लायक कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह फ़ैसला सुनाया। यह फ़ैसला दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली वृंदा करात की याचिका पर आया था, जिसमें हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के उस फ़ैसले को सही ठहराया कि FIR दर्ज करने का निर्देश नहीं दिया जा...
'JAO, IT री-असेसमेंट नोटिस जारी नहीं कर सकते': सुप्रीम कोर्ट ने Finance Act 2026 के आधार पर रद्द किए हाईकोर्ट के फ़ैसले
एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने Income-tax Act, 1961 के तहत री-असेसमेंट नोटिस जारी करने के अधिकार से जुड़े मुद्दे पर नए सिरे से विचार करने के लिए हज़ारों टैक्स अपीलों को संबंधित हाईकोर्ट्स को वापस भेज दिया। Finance Act, 2026 द्वारा किए गए संशोधन पर ध्यान देते हुए—जो यह साफ़ करता है कि ऐसे अधिकार Jurisdictional Assessing Officers (JAO) के पास होते हैं, न कि फ़ेसलेस यूनिट्स के पास—कोर्ट ने इस मामले पर मेरिट के आधार पर फ़ैसला न करने का फ़ैसला किया। इसके बजाय High Courts को निर्देश दिया कि वे...
9 साल हिरासत में रहने के बावजूद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नहीं दी जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने की आलोचना
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हत्या के आरोपी को ज़मानत दी, जिसने हत्या के मामले में विचाराधीन कैदी के तौर पर जेल में लगभग नौ साल बिताए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हाई कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी के 'जल्द सुनवाई के मौलिक अधिकार' को समझने में नाकाम रहा।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के ज़मानत न देने के आदेश पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की। बेंच ने इस मामले को "बहुत चौंकाने वाला" और विवादित आदेश को "बहुत निराशाजनक" बताया। कोर्ट ने कहा कि ट्रायल खत्म...
जो महिलाएं भगवान अयप्पा की सच्ची भक्त हैं, वे 50 साल की उम्र तक सबरीमाला नहीं जाएंगी: सुप्रीम कोर्ट
सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मौखिक रूप से टिप्पणी की कि जो महिलाएं भगवान अयप्पा की सच्ची भक्त हैं, वे 50 साल की उम्र तक सबरीमाला मंदिर नहीं जाएंगी।मामले की सुनवाई के दसवें दिन, 9 जजों की बेंच सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह की दलीलें सुन रही थी। इंदिरा जयसिंह उन दो महिलाओं का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, जिन्होंने 2018 के उस फैसले के बाद सबरीमाला मंदिर में प्रवेश किया, जिसमें सभी उम्र की महिलाओं को इस पहाड़ी मंदिर में प्रवेश का अधिकार दिया गया।जयसिंह ने दलील दी कि...
बेल कैंसल होने के बाद भी सरेंडर न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने UP Police से पूछा - सतिंदर सिंह भसीन को गिरफ़्तार क्यों नहीं किया?
बिजनेसमैन सतिंदर सिंह भसीन को तुरंत सरेंडर करने का आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारियों से सवाल किया कि जब भसीन ने बेल कैंसल होने के बाद सरेंडर नहीं किया तो उन्होंने उसे गिरफ़्तार क्यों नहीं किया।कहा जा रहा है कि कोर्ट ने यह राय ज़ाहिर की कि पुलिस भसीन के साथ मिलीभगत करती हुई लग रही है। अधिकारियों द्वारा गिरफ़्तारी के लिए और समय मांगने पर इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार के लिए तय की गई।सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने अधिकारियों का ध्यान संविधान के अनुच्छेद 144 की ओर दिलाया,...
विदेश यात्रा की ठोस योजना बताए बिना पासपोर्ट नहीं लौटाया जाएगा: तीस्ता सीतलवाड़ को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने सोशल एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ की पासपोर्ट रिहाई संबंधी याचिका का निस्तारण करते हुए फिलहाल पासपोर्ट लौटाने से इनकार किया।अदालत ने कहा कि बिना स्पष्ट विदेश यात्रा योजना बताए पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता।जस्टिस दिपांकर दत्ता, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सीतलवाड़ को यह स्वतंत्रता दी कि जब भी वह विदेश यात्रा करना चाहें, तब नई अर्जी दाखिल कर सकती हैं।सुनवाई के दौरान सीतलवाड़ की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने कहा कि फिलहाल उनकी कोई निर्धारित विदेश...
हत्या मामले में दोषपूर्ण जांच पर सुप्रीम कोर्ट की असम पुलिस को फटकार, 16 आरोपियों की गलत दोषसिद्धि पर जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में त्रुटिपूर्ण जांच के कारण 16 लोगों के विरुद्ध गलत अभियोजन चलने पर असम पुलिस को कड़ी फटकार लगाई।अदालत ने कहा कि पुलिस की पूर्वनियोजित और दोषपूर्ण जांच ने आपराधिक न्याय प्रक्रिया को गंभीर क्षति पहुंचाई और निर्दोष लोगों को सजा का सामना करना पड़ा।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा,“अक्षम जांच या पूर्वनियोजित जांच दोनों ही आपराधिक अभियोजन के लिए घातक हैं, लेकिन यदि पूरी तरह निर्दोष व्यक्तियों को फंसाया जाए तो उसके परिणाम और भी विनाशकारी होते...
NCLT में समाधान योजनाओं की मंजूरी में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, कहा- स्थिति बेहद गंभीर
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में समाधान योजनाओं की मंजूरी में हो रही भारी देरी पर स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे अत्यंत गंभीर स्थिति बताया।अदालत ने कहा कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने NCLT प्रधान पीठ नई दिल्ली के रजिस्ट्रार की रिपोर्ट पर विचार करते हुए कहा कि स्थिति बेहद चिंताजनक और निराशाजनक है।अदालत के समक्ष बताया गया कि समाधान योजनाओं की मंजूरी...
सार्वजनिक स्थान पर कॉफी पीना भी डर का कारण बन गया': अंतरधार्मिक जोड़ों की उत्पीड़न पर NHRC की चुप्पी पर हाईकोर्ट में तीखी टिप्पणी, बेंच में मतभेद
इलाहाबाद हाईकोर्ट में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की भूमिका को लेकर सुनवाई के दौरान खंडपीठ के दो जजों के बीच असामान्य मतभेद देखने को मिले।जस्टिस अतुल श्रीधरन ने NHRC की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अंतरधार्मिक संबंधों में रहने वाले लोगों के लिए सार्वजनिक स्थान पर साथ कॉफी पीना तक भय का कारण बन गया है, जबकि आयोग ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता।हालांकि जस्टिस विवेक सारन ने इन व्यापक टिप्पणियों से असहमति जताई और कहा कि बिना सभी पक्षों को सुने इस प्रकार की प्रतिकूल...
'लीगल प्रोफेशन में “ब्लैक शीप” पर तुरंत कार्रवाई जरूरी' : सुप्रीम कोर्ट ने BCI से मांगा जवाबदेही पर जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि विधिक पेशे (लीगल प्रोफेशन) में मौजूद “ब्लैक शीप” से तुरंत निपटना आवश्यक है, ताकि पेशे की साख और ईमानदारी बनी रहे। कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से उसके अनुशासनात्मक तंत्र की प्रभावशीलता और समयबद्धता पर सवाल उठाए।यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान की गई, जिसमें एक वकील को कथित रूप से धोखाधड़ी के आरोप में एक बैंक द्वारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। बैंक ने अन्य बैंकों को भी सूचित किया था कि संबंधित वकील भरोसेमंद नहीं है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस...
सबरीमाला सुनवाई: 'सुधार के नाम पर धर्म को खत्म नहीं कर सकते' – सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला संदर्भ मामले की सुनवाई के दसवें दिन बुधवार को 9-जजों की संविधान पीठ ने अहम मौखिक टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि सुधार के नाम पर धर्म को “खोखला” या समाप्त नहीं किया जा सकता और आस्था व अंतरात्मा के मामलों को न्यायिक बहस का विषय नहीं बनाया जा सकता।सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंग ने उन दो महिलाओं की ओर से दलीलें रखीं, जिन्होंने 2018 के फैसले के बाद सबरीमाला मंदिर में प्रवेश किया था। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25(1) के तहत व्यक्तियों को प्राप्त...
मदरसों की जांच का आदेश, लेकिन मॉब लिंचिंग पर स्वतः संज्ञान नहीं? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NHRC की भूमिका पर उठाए गंभीर सवाल
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि आयोग उत्तर प्रदेश के मदरसों की जांच जैसे मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, जबकि मॉब लिंचिंग, भीड़ हिंसा और सतर्कतावादी हमलों जैसे गंभीर मामलों में स्वतः संज्ञान लेने के उदाहरण सामने नहीं आते।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सरन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया ने वर्ष 2025 में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा उत्तर...
CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए मजिस्ट्रेट को पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट को CrPC की धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश देने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 196/197 के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होती।कोर्ट ने कहा,"CrPC की धारा 196 और 197 (या BNSS में संबंधित प्रावधानों) के तहत पहले से मंज़ूरी की ज़रूरत, संज्ञान लेने के चरण पर लागू होती है। यह CrPC की धारा 156(3)/BNSS की धारा 175(3) के तहत FIR दर्ज करने या जांच करने के संज्ञान-पूर्व चरण तक विस्तारित नहीं होती।" यह टिप्पणी CPI(M) नेता वृंदा...
BREAKING| हेट स्पीच पर कोई कानूनी खालीपन नहीं; केंद्र और राज्य विचार कर सकते हैं कि क्या संशोधनों की ज़रूरत है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि मौजूदा आपराधिक कानून हेट स्पीच के अपराध से निपटने के लिए पर्याप्त है। कोर्ट ने कहा कि यह सोचना गलत है कि हेट स्पीच का अपराध कानून के दायरे से बाहर है।कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि इस मामले में कोई कानूनी खालीपन नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि किसी अपराध को बनाना न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र से बाहर है, क्योंकि यह पूरी तरह से विधायिका का काम है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच उन याचिकाओं के समूह पर फ़ैसला सुना रही थी, जिनमें हेट स्पीच के बढ़ते खतरे से...
जाली वसीयत पर आधारित संपत्ति खरीदने वाला खरीदार आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी जाली वसीयत (Will) के आधार पर खरीदी गई संपत्ति के मामले में, यदि खरीदार को उस जालसाजी की जानकारी नहीं थी, तो उसे आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने एक खरीदार के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब खरीद के समय खरीदार को कथित फर्जी वसीयत की जानकारी नहीं थी और वह संबंधित अवधि में विदेश में था, तो उसे धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया...
सुप्रीम कोर्ट में PIL: UP IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को बंगाल चुनावों में चुनाव पर्यवेक्षक पद से हटाने की मांग
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें चुनाव आयोग के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसके तहत उत्तर प्रदेश कैडर के IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया।याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि यह अधिकारी "बेहद पक्षपाती" है और राजनीतिक उम्मीदवारों को धमका रहा है।'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' की धारा 20B का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता ने बताया कि पर्यवेक्षक का काम "चुनावों के संचालन पर नज़र रखना" होता है और उसे एक "तटस्थ संस्थागत...
Sabarimala Reference | अनुच्छेद 25(2)(b) में सिर्फ़ मंदिरों को सभी के लिए खोलने का ज़िक्र, क्योंकि दूसरे धर्मों में जाति-व्यवस्था नहीं: जस्टिस नागरत्ना
सबरीमाला मामले की सुनवाई के नौवें दिन सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि संविधान का अनुच्छेद 25(2)(b)—जो हिंदू सार्वजनिक मंदिरों को हिंदुओं के सभी वर्गों के लिए खोलने के लिए कानून बनाने की अनुमति देता है—उसे जान-बूझकर उस समय समाज में प्रचलित जाति-आधारित भेदभाव को दूर करने के लिए बनाया गया।जज ने टिप्पणी की कि इस प्रावधान में दूसरे धर्मों का ज़िक्र इसलिए नहीं किया गया, क्योंकि ऐसा भेदभाव सिर्फ़ हिंदू धर्म में ही प्रचलित है।उन्होंने यह टिप्पणी एक वकील द्वारा उठाए...
'ठाणे की 193 एकड़ ज़मीन 'प्राइवेट फॉरेस्ट' के तौर पर अधिग्रहण से मुक्त': सुप्रीम कोर्ट ने लगाई बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले पर रोक लगाई। इस फ़ैसले में ठाणे के मानपाड़ा में लगभग 193 एकड़ ज़मीन को 'निजी जंगल' के तौर पर अधिग्रहण से मुक्त करने के फ़ैसले को सही ठहराया गया था। साथ ही ज़मीन मालिक के विकास के अधिकारों (Development Rights) के दावे के लिए रास्ता साफ़ किया गया था।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने ठाणे नगर निगम द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर नोटिस जारी किया। बेंच ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के फ़ैसले का अमल अगली सुनवाई तक, जो 20 जुलाई...




















