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क्या आंसर शीट दिखाने के मामले में राज्य PSC के नियम RTI Act से ऊपर हैं? सुप्रीम कोर्ट करेगा जांच
सुप्रीम कोर्ट अब इस बात की जांच करेगा कि क्या कोई राज्य लोक सेवा आयोग (State Public Service Commission) यह तय कर सकता है कि भर्ती परीक्षा से जुड़ी जानकारी किस चरण में दी जाएगी, और क्या उम्मीदवार उस चरण से पहले ऐसी जानकारी मांगने के लिए 'सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005' (RTI Act) का सहारा ले सकते हैं।कोर्ट ने कहा,"इन याचिकाओं में हमारे विचार के लिए जो सवाल सामने आया है, वह यह है: 'क्या कोई राज्य लोक सेवा आयोग - जो एक संवैधानिक संस्था है - अपने खुद के नियम बना सकता है, जो यह तय करें कि उसके द्वारा...
अगर नियुक्ति 'अगले आदेश तक' की शर्त पर है तो पूरा कार्यकाल करने का कोई अधिकार नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (28 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि अगर किसी नियुक्ति आदेश में कार्यकाल को "अगले आदेश तक" की शर्त के अधीन रखा गया है तो इससे कर्मचारी को पूरे कार्यकाल तक पद पर बने रहने का कोई ऐसा अधिकार नहीं मिल जाता, जिसे वह कानूनी तौर पर लागू करवा सके।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सही ठहराया, जिसमें प्रतिवादी अधिकारियों द्वारा अपीलकर्ता का कार्यकाल कम किए जाने का फैसला बरकरार रखा गया था। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि हालांकि...
मौत की सज़ा वाले संभावित मामलों में सज़ा सुनाने से पहले ट्रायल कोर्ट को कम करने वाले और बढ़ाने वाले कारकों पर रिपोर्ट मंगानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि ट्रायल कोर्ट को नियमित प्रक्रिया के तौर पर मौत की सज़ा वाले संभावित मामलों में दोषी ठहराए जाने के तुरंत बाद और सज़ा तय करने से पहले सज़ा को कम करने वाले और बढ़ाने वाले हालात पर रिपोर्ट मंगानी चाहिए। कोर्ट ने पाया कि शुरुआती चरण में ऐसी रिपोर्ट न मिलने से सज़ा सुनाने की संतुलित प्रक्रिया कमज़ोर होती है और सुधार से जुड़े कारकों पर सही ढंग से विचार करने में देरी होती है।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने पटना हाईकोर्ट के फैसले के...
RTE Act | स्कूल, राज्य द्वारा आवंटित स्टूडेंट का एडमिशन योग्यता पर विवाद का बहाना बनाकर नहीं रोक सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि प्राइवेट "पड़ोस के स्कूलों" को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के तहत राज्य द्वारा आवंटित स्टूडेंट्स को तुरंत एडमिशन देना होगा। इस मामले में वे इस आधार पर एडमिशन से मना नहीं कर सकते कि छात्र की योग्यता को लेकर कोई विवाद अभी लंबित है।कोर्ट ने साफ किया कि भले ही स्कूल को किसी स्टूडेंट की योग्यता को लेकर कोई शक हो तो भी वह स्पष्टीकरण के लिए अधिकारियों से संपर्क कर सकता है, लेकिन इस बीच वह एडमिशन नहीं रोक सकता।जस्टिस पमिदिघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक...
लंबित अपील के कारण सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के दोषी की सजा निलंबित की, जमानत दी
सुप्रीम कोर्ट ने एक असाधारण परिस्थिति में हत्या के एक दोषी की सजा निलंबित कर दी, यह देखते हुए कि उसकी 2018 की आपराधिक अपील अभी तकमध्य प्रदेश हाईकोर्ट में लंबित है और निकट भविष्य में उसकी सुनवाई की संभावना नहीं है।जस्टिस जे. बी. पारडीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट ने अपनी पत्नी की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस सजा को चुनौती देते हुए उसने 2018 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आपराधिक अपील दायर...
सबरीमाला सुनवाई: सुप्रीम कोर्ट ने अप्रासंगिक दलीलों पर वकील को फटकारा
सुप्रीम कोर्ट की 9-जजों की संविधान पीठ ने सबरीमाला संदर्भ मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय को अप्रासंगिक और विषय से बाहर की दलीलें देने पर कड़ी फटकार लगाई। पीठ ने उन्हें कई बार निर्देश दिया कि वे अपने तर्क केवल विचाराधीन मुद्दों तक सीमित रखें।सुनवाई के दौरान उपाध्याय ने “धर्म” को “रिलिजन” से बड़ा बताते हुए कहा कि धार्मिक मतभेदों के कारण भारत का विभाजन हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत को अपने फैसले के दूरगामी प्रभावों पर विचार करना होगा और यह तय करेगा कि भारत भविष्य में किस...
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के ए.एन. झा पार्क से हिरणों को राजस्थान भेजने की मंज़ूरी दी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के हौज खास में स्थित ए.एन. झा डियर पार्क से हिरणों को राजस्थान के टाइगर रिज़र्व में भेजने के फ़ैसले को सही ठहराया। साथ ही कोर्ट ने पूरे देश में वन्यजीवों को एक जगह से दूसरी जगह भेजने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए कई अहम निर्देश भी जारी किए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला बरकरार रखा, जिसमें हिरणों को दिल्ली से बाहर दूसरी जगहों पर भेजने और उनमें से कुछ को ए.एन. झा पार्क में ही रखने की बात कही गई।केंद्रीय अधिकार प्राप्त...
'संवेदनशील मुद्दा': गोद लेने से पहले बच्चों के DNA वेरिफिकेशन और लापता बच्चों के बचाव के उपायों की मांग वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें लापता और तस्करी का शिकार हुए बच्चों के बचाव और पुनर्वास से जुड़े राहत उपायों की मांग की गई। अन्य बातों के अलावा, याचिकाकर्ता ने यह प्रार्थना की है कि अवैध गोद लेने और तस्करी को रोकने के लिए, गोद लिए जाने वाले बच्चों की पहचान के DNA वेरिफिकेशन को अनिवार्य किया जाए।इस मामले को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया। खंडपीठ ने याचिकाकर्ता दीपक कंसल से कहा कि वह PIL में उठाए गए...
'पहले ठगे गए घर खरीदारों की सुरक्षा करें, उसके बाद ही ज़मानत': मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक से कहा
एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायक धर्म सिंह छोकर से पूछा कि उनकी ज़मानत याचिका पर सुनवाई क्यों की जानी चाहिए, जबकि उन्होंने अभी तक उन घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा नहीं की है, जिन्हें कथित तौर पर ठगा गया था।कोर्ट ने आदेश दिया,"जब तक याचिकाकर्ता उन घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा नहीं करता, जिन्हें साफ तौर पर ठगा गया, तब तक याचिकाकर्ता यह बताए कि यह कोर्ट इस याचिका में की गई प्रार्थना पर सुनवाई क्यों करे।" चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत...
S.27 Evidence Act | अलग-अलग आरोपियों के संयुक्त बयान तभी स्वीकार्य, जब उनसे अलग-अलग नई बातें सामने आती हों: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि अलग-अलग आरोपियों द्वारा दिए गए संयुक्त या एक साथ दिए गए खुलासे के बयान साक्ष्य अधिनियम की धारा 27 के तहत तभी स्वीकार्य हैं, जब ऐसे बयानों से अपराध से जुड़े अलग और प्रासंगिक तथ्यों का पता चलता हो।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह फैसला कर्नाटक से जुड़े हत्या के मामले में अपनी दोषसिद्धि को चुनौती देने वाले दो दोषियों द्वारा दायर आपराधिक अपीलों पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने अंततः अपीलकर्ताओं को बरी किया, लेकिन भारतीय साक्ष्य अधिनियम,...
उमेश पाल मर्डर केस | सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद के ड्राइवर की ज़मानत याचिका पर जारी किया नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज में फरवरी 2023 में वकील उमेश पाल और दो पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी कैश अहमद द्वारा दायर ज़मानत याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने अहमद की याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसका जवाब 25 मई, 2025 तक देना है। अहमद ने अपनी याचिका में इलाहाबाद हाई कोर्ट के 7 नवंबर, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें ज़मानत देने से इनकार किया गया था।याचिकाकर्ता ने कहा कि वह दिवंगत गैंगस्टर और सह-आरोपी अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता...
2026 SCBA चुनाव में उपाध्यक्ष पद महिलाओं के लिए आरक्षित, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
समावेशिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2026 के सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की कार्यकारिणी समिति चुनाव में उपाध्यक्ष पद महिला वकीलों के लिए आरक्षित करने का आदेश दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह आदेश पारित करते हुए आगामी 2026 चुनाव के लिए उपाध्यक्ष पद सहित कुछ अन्य कार्यकारिणी पदों को महिला वकीलों के लिए आरक्षित किया।अदालत ने निर्देश दिया कि वर्तमान SCBA कार्यकारिणी समिति 29 मई तक चुनाव समिति का गठन अधिसूचित करे।...
7 साल तक की सजा वाले गैर-जमानती अपराधों में धारा 480(3) BNSS की शर्तें लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ऐसे गैर-जमानती अपराध जिनमें अधिकतम सजा सात वर्ष तक है, उनमें जमानत देते समय Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की धारा 480(3) के तहत निर्धारित शर्तें लागू नहीं की जा सकतीं।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी को Madhya Pradesh Excise Act (मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम) के तहत अवैध शराब रखने के आरोप में जमानत दी गई थी। इस अपराध में अधिकतम सजा तीन वर्ष निर्धारित है।मध्य...
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट ने नए AORs को SCAORA चुनावों में वोट देने की अनुमति दी
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के पदाधिकारियों के आगामी चुनावों में नए रजिस्टर्ड एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड (AORs) को अस्थायी रूप से वोट देने की अनुमति दी।कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश SCAORA चुनावों की वोटर लिस्ट से नए रजिस्टर्ड एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड को बाहर किए जाने को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका पर नोटिस जारी करते हुए पारित किया।कोर्ट ने आदेश दिया,"नोटिस जारी किया जाए। इस बीच जो एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड 16 अप्रैल को रजिस्टर्ड हुए, उन्हें अस्थायी रूप से अपना...
महिला एडवोकेट पर पति के बर्बर हमले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महिला अधिवक्ता पर हुए कथित बर्बर हमले के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई शुरू की और उन आरोपों की जांच के निर्देश दिए, जिनमें कहा गया है कि तीन अस्पतालों ने उन्हें आपातकालीन उपचार देने से इनकार कर दिया।चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। यह मामला एडवोकेट स्नेहा कलिता द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर दर्ज किया गया, जिसमें कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली उनकी सहयोगी पर हुए हमले का जिक्र किया गया था।सुनवाई के...
गुरुग्राम ध्वस्तीकरण के खिलाफ याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप से इनकार, आज ही हाईकोर्ट जाने की दी अनुमति
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को गुरुग्राम में चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ताओं को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट जाने की सलाह दी। साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को आज ही हाईकोर्ट में मामले का त्वरित उल्लेख करने की अनुमति दी और मुख्य न्यायाधीश से इसे दोपहर 1 बजे या लंच के बाद सुनने का अनुरोध किया।मामला चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ के समक्ष सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन द्वारा उल्लेखित किया गया। याचिकाकर्ताओं की ओर...
असम CM की पत्नी की FIR: अग्रिम जमानत रद्द करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कांग्रेस नेता पवन खेड़ा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। यह याचिका असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई FIR के संबंध में थी, जिसमें खेड़ा ने उन पर कई पासपोर्ट रखने का आरोप लगाया था।विवादित आदेश के ज़रिए गुवाहाटी हाईकोर्ट ने खेड़ा को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि खेड़ा ने राजनीतिक फ़ायदा उठाने के लिए एक 'निर्दोष महिला' को इस विवाद में घसीटा है।इससे...
Article 227 | हाईकोर्ट ट्रायल कोर्ट द्वारा विचार किए गए सबूतों का दोबारा मूल्यांकन नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के लिए संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत अपने सुपरवाइजरी अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए निचली अदालतों के फैसलों में दखल देना गलत है।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए यह बात कही, जिसमें हाईकोर्ट ने अपील कोर्ट का फैसले में दखल दिया था, जिसमें अपीलकर्ता को बेदखली के मुकदमे में संशोधन करने की इजाज़त दी गई थी।बेंच ने कहा, "यह बात अच्छी तरह से तय है कि इस तरह के अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते समय...
मकान मालिक के कानूनी वारिस बेदखली के मुकदमे में 'वास्तविक ज़रूरत' जोड़ने के लिए संशोधन कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की है कि यदि कोई मकान मालिक, जिसने अपने और अपने परिवार के लिए 'वास्तविक ज़रूरत' (bona fide requirement) के आधार पर बेदखली का मुकदमा दायर किया था, उसका निधन हो जाता है तो उसके कानूनी वारिस मुकदमे की दलीलों में संशोधन करके 'वास्तविक ज़रूरत' के अतिरिक्त आधारों को शामिल कर सकते हैं; बशर्ते कि ऐसे संशोधन मुकदमे के मूल आधार से न तो टकराते हों और न ही उसे बदलते हों।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की खंडपीठ ने मकान मालिक के कानूनी वारिसों (पत्नी और बच्चों)...
अग्रिम ज़मानत खारिज करते समय कोर्ट आरोपी को सरेंडर करने का निर्देश नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने ज़ोर देकर कहा कि अग्रिम ज़मानत खारिज करते समय किसी आरोपी को ट्रायल कोर्ट के सामने सरेंडर करने का निर्देश देने का अधिकार कोर्ट के पास नहीं है।कोर्ट ने टिप्पणी की,"अगर कोर्ट अग्रिम ज़मानत खारिज करना चाहता है, तो वह ऐसा कर सकता है, लेकिन कोर्ट के पास यह कहने का अधिकार नहीं है कि याचिकाकर्ता को अब सरेंडर कर देना चाहिए।" जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर धोखाधड़ी और जालसाज़ी का आरोप है। यह याचिका झारखंड...




















