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सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए शौचालयों के निर्देशों पर अनुपालन रिपोर्ट के लिए  हाईकोर्ट्स को अंतिम अवसर दिया
सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं, दिव्यांगों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए शौचालयों के निर्देशों पर अनुपालन रिपोर्ट के लिए हाईकोर्ट्स को अंतिम अवसर दिया

सुप्रीम कोर्ट ने 16 जुलाई को हाईकोर्टों को 15 जनवरी के अपने फैसले में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का एक आखिरी मौका दिया। इस फैसले में देश भर के न्यायालय परिसरों और न्यायाधिकरणों में विशेष रूप से महिलाओं, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए शौचालय सुविधाओं के निर्माण के लिए निर्देश जारी किए गए थे। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने 2023 में राजीब कलिता द्वारा दायर एक रिट याचिका पर यह फैसला सुनाया। आज, निर्देशों के अनुपालन की स्थिति को लेकर मामला सामने आया है।जिन...

सुप्रीम कोर्ट ने मां से अलग होने के कारण बच्चे में तनाव पैदा होने पर पिता को कस्टडी देने के आदेश पर पुनर्विचार किया
सुप्रीम कोर्ट ने मां से अलग होने के कारण बच्चे में तनाव पैदा होने पर पिता को कस्टडी देने के आदेश पर पुनर्विचार किया

सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखते हुए अपने पिछले आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक नाबालिग बच्चे की स्थायी कस्टडी उसके जैविक पिता को दी गई थी। ज‌स्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने मां की पुनर्विचार याचिका को स्वीकार करते हुए, बच्चे की कस्टडी मां को बहाल कर दी। पीठ ने पहले के कस्टडी संबंधी फैसले के बाद बच्चे के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य पर गंभीर चिंताओं का हवाला दिया।न्यायालय ने दोहराया कि उसका पुनर्विचार क्षेत्राधिकार सीमित है और इसका प्रयोग केवल नए और...

भूमि अधिग्रहण मामलों में पुनर्वास आवश्यक नहीं, सिवाय उन लोगों के जिन्होंने अपना निवास या आजीविका खो दी है: सुप्रीम कोर्ट
भूमि अधिग्रहण मामलों में पुनर्वास आवश्यक नहीं, सिवाय उन लोगों के जिन्होंने अपना निवास या आजीविका खो दी है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि सरकार द्वारा अधिग्रहित भूमि के लिए मौद्रिक मुआवजे के अलावा, भूस्वामियों का पुनर्वास अनिवार्य नहीं है, हालांकि सरकार निष्पक्षता और समानता के मानवीय आधार पर अतिरिक्त लाभ प्रदान कर सकती है। हालांकि, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पुनर्वास उन मामलों में प्रदान किया जाना चाहिए जहाँ अधिग्रहण से आजीविका नष्ट होती है (जैसे, भूमि पर निर्भर समुदाय)।कोर्ट ने कहा,“जब किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए ज़मीन का अधिग्रहण किया जाता है, तो जिस व्यक्ति की ज़मीन ली जाती है, वह क़ानून...

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के जजों और ट्रिब्यूनल मेंबर्स के खिलाफ FIR संबंधी याचिका पर वकील को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के जजों और ट्रिब्यूनल मेंबर्स के खिलाफ FIR संबंधी याचिका पर वकील को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने ने गुरवार को एक वकील को ‌विभिन्न हाईकोर्ट्स के छह वर्तमान/पूर्व जजों और/या न्यायाधिकरणों के सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका दायर करने पर फटकार लगाई। हालांकि, याचिकाकर्ता के अनुरोध पर, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर (पूर्व न्यायाधीश, दिल्ली हाईकोर्ट) को न्यायमित्र नियुक्त किया।गौरतलब है कि याचिका में जस्टिस सी. हरिशंकर (दिल्ली हाईकोर्ट), जस्टिस गिरीश कठपालिया (दिल्ली हाईकोर्ट), जस्टिस सुरेश कुमार कैत...

सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी को पक्षकार बनाने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले में केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी को पक्षकार बनाने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ JD (S) सांसद एचडी कुमारस्वामी (केंद्रीय मंत्री) द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका में आज (17 जुलाई) को नोटिस जारी किया, जिसमें हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री के खिलाफ चल रही अवमानना कार्यवाही में नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट के 17 अप्रैल के आदेश को भी स्थगित कर दिया गया है, जिसमें उन्हें एक पक्ष के रूप में शामिल किया गया था।यह मुद्दा समाज परिवर्तन द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष दायर एक रिट याचिका से उत्पन्न हुआ है, जिसमें केंद्रीय मंत्री और उनके परिवार...

सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ एक्टर दर्शन को रेनुकास्वामी हत्या मामले में जमानत देने के हाईकोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने कन्नड़ एक्टर दर्शन को रेनुकास्वामी हत्या मामले में जमानत देने के हाईकोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने आज (17 जुलाई) मौखिक टिप्पणी की कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने रेणुकास्वामी हत्या मामले में अभिनेता दर्शन को जमानत देने में अपने विवेक का प्रयोग करने के तरीके से वह बिल्कुल भी आश्वस्त नहीं है। खंडपीठ ने दर्शन के वकीलों से मौखिक रूप से अच्छे कारण बताने को कहा कि अदालत को हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप क्यों नहीं करना चाहिए।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ कर्नाटक राज्य द्वारा 13 दिसंबर, 2024 को हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही...

रशियन माँ द्वारा बच्चे को लेकर भागने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – उसे ढूंढो और बच्चा पिता को दो
रशियन माँ द्वारा बच्चे को लेकर भागने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा – उसे ढूंढो और बच्चा पिता को दो

बच्चों की कस्टडी के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उस बच्चे का पता लगाने के लिए आज एक तरह का आदेश पारित किया जो अपनी रूसी मां की कस्टडी में आखिरी बार था। अदालत ने संघ और दिल्ली के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि रूसी महिला देश न छोड़े और साथ ही उसे ढूंढकर उसके भारतीय पिता को बच्चे को सौंप दिया जाए।जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ को सूचित किया गया कि रूसी मां और बच्चा जंगल में गायब हो गए हैं। कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश पारित किए: (i) आयुक्त सहित दिल्ली...

क्या बार काउंसिल्स नामांकन शुल्क परिसीमा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रही हैं? सुप्रीम कोर्ट ने BCI से मांगा जवाब
क्या बार काउंसिल्स नामांकन शुल्क परिसीमा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन कर रही हैं? सुप्रीम कोर्ट ने BCI से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने 15 जुलाई को आदेश पारित करते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन और सीनियर एडवोकेट मनन मिश्रा को अदालत में उपस्थित होने को कहा ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि 30 जुलाई, 2024 के फैसले में राज्य बार काउंसिल्स को नामांकन शुल्क के नाम पर अत्यधिक राशि वसूलने से रोकने के जो निर्देश दिए गए थे उनका पालन हुआ है या नहीं।गौरव कुमार बनाम भारत संघ इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल्स एडवोकेट्स एक्ट 1961 की धारा 24 के तहत निर्धारित फीस से अधिक शुल्क नहीं ले सकतीं।...

सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल पर रिपोर्ट के लिए FSSAI विशेषज्ञ समिति को समय दिया
सुप्रीम कोर्ट ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी लेबल पर रिपोर्ट के लिए FSSAI विशेषज्ञ समिति को समय दिया

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (15 जुलाई) को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अंतर्गत गठित विशेषज्ञ समिति को पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के आगे पोषण संबंधी चेतावनी लेबल में प्रस्तावित संशोधनों पर तीन महीने के भीतर अपनी सिफारिशें देने के लिए समय बढ़ा दिया।9 अप्रैल को न्यायालय ने समिति को पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर फ्रंट-ऑफ-पैकेज चेतावनी लेबल (FOPL) पर FSSAI द्वारा प्रस्तावित संशोधनों पर अपनी सिफारिशें देने के लिए तीन महीने का समय दिया था ताकि ग्राहक चीनी, नमक और वसा की मात्रा के बारे में...

पेंशन संवैधानिक अधिकार, उचित प्रक्रिया के बिना इसे कम नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
पेंशन संवैधानिक अधिकार, उचित प्रक्रिया के बिना इसे कम नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व कर्मचारी को राहत प्रदान की, जिसकी पेंशन निदेशक मंडल से परामर्श किए बिना एक-तिहाई कम कर दी गई थी। तर्क दिया गया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (कर्मचारी) पेंशन विनियम, 1995 ("विनियम") के तहत अनिवार्य है।न्यायालय ने दोहराया कि पेंशन कर्मचारी का संपत्ति पर अधिकार है, जो संवैधानिक अधिकार है, जिसे कानून के अधिकार के बिना अस्वीकार नहीं किया जा सकता, भले ही किसी कर्मचारी को कदाचार के कारण अनिवार्य रूप से रिटायर कर दिया गया हो।बैंक के विनियम 33 में स्पष्ट रूप...

Motor Accident Claims : क्या वाहन में बैठा यात्री थर्ड पार्टी पॉलिसी के तहत मुआवज़ा का दावा कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा
Motor Accident Claims : क्या वाहन में बैठा यात्री थर्ड पार्टी पॉलिसी के तहत मुआवज़ा का दावा कर सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने मामला बड़ी बेंच को भेजा

सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेज दिया कि क्या कार में बैठा यात्री बीमा दावों में थर्ड पार्टी पॉलिसी के तहत कवर होता है।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस पीबी वराले की खंडपीठ केरल हाईकोर्ट के आदेश को न्यू इंडिया इंश्योरेंस द्वारा चुनौती दी गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मोटर दुर्घटना मुआवज़ा न्यायाधिकरण (MACT) द्वारा ऑटो-रिक्शा में सवार एक यात्री को दिए गए मुआवज़ा बरकरार रखा गया था।रेत के मलबे से टकराने के बाद ऑटो-रिक्शा के पलटने से यात्री की मौत हो गई थी। मोटर...

केवल एक ही विषय पर लंबित दीवानी मामलों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट
केवल एक ही विषय पर लंबित दीवानी मामलों के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि पक्षकारों के बीच दीवानी विवादों का अस्तित्व आपराधिक कार्यवाही रद्द करने का आधार नहीं बनता, जहां प्रथम दृष्टया मामला बनता है।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की खंडपीठ ने कर्नाटक हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया, जिसमें प्रतिवादियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धारा 120बी, 415, 420 सहपठित धारा 34 के तहत शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी गई थी। यह कार्यवाही अपीलकर्ता और उसकी बहनों को वंश वृक्ष और विभाजन विलेख से धोखाधड़ी से बाहर करने और इस...

लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए एक पूरे समुदाय को बदनाम करने वाली फिल्म की अनुमति देना अकल्पनीय: उदयपुर फाइल्स पर बोले कपिल सिब्बल
लोकतांत्रिक राष्ट्र के लिए एक पूरे समुदाय को बदनाम करने वाली फिल्म की अनुमति देना अकल्पनीय: 'उदयपुर फाइल्स' पर बोले कपिल सिब्बल

सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि फिल्म "उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल टेलर मर्डर" एक खास समुदाय के खिलाफ नफरत पैदा कर रही है।विवादास्पद फिल्म से संबंधित राहत की मांग करने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा,"[उदयपुर फाइल्स] फिल्म हिंसा पैदा करती है, यह एक पूरे समुदाय को बदनाम करती है।"सीनियर एडवोकेट ने ज़ोर देकर कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में लाखों लोगों को ऐसी फिल्म देखने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जो एक समुदाय के खिलाफ नफरत पैदा करती हो।यह मामला जस्टिस सूर्यकांत...

सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सज़ा पाए व्यक्ति को बरी किया, कम सबूतों के आधार पर दोषी को सजा की जल्दबाज़ी की आलोचना की
सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सज़ा पाए व्यक्ति को बरी किया, कम सबूतों के आधार पर दोषी को सजा की 'जल्दबाज़ी' की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सज़ा पाए दोषी को इस आधार पर बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।अपीलकर्ता को 2013 में अपने गाँव के घर में अपने परिवार के चार सदस्यों, जिनमें उसकी पत्नी, साली और पाँच साल से कम उम्र के दो बच्चे शामिल थे, उनकी हत्या का दोषी ठहराया गया। उसने यह हत्या किसी आर्थिक विवाद के चलते अपने परिवार से रंजिश रखते हुए की थी।2020 में कपूरथला के एडिशनल सेशन जज ने उन्हें 'दुर्लभतम' श्रेणी में आने के कारण मृत्युदंड की सजा सुनाई, जिसे बाद में 2024 में पंजाब एंड...

असाधारण परिस्थितियों में पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर बलात्कार का मामला रद्द किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
असाधारण परिस्थितियों में पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर बलात्कार का मामला रद्द किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बलात्कार के अपराधों से संबंधित आपराधिक कार्यवाही असाधारण परिस्थितियों में मामले के तथ्यों के अधीन समझौते के आधार पर रद्द की जा सकती है।न्यायालय ने कहा,"सबसे पहले हम मानते हैं कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 के तहत अपराध निस्संदेह गंभीर और जघन्य प्रकृति का है। आमतौर पर पक्षकारों के बीच समझौते के आधार पर ऐसे अपराधों से संबंधित कार्यवाही रद्द करने की निंदा की जाती है और इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। हालांकि, न्याय के उद्देश्यों को सुनिश्चित करने के लिए CrPC की...

Do Not Pass Adverse Orders If Advocates Are Not Able To Attend Virtual Courts
वकीलों के विशेषाधिकारों के हनन का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका पर जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के विशेषाधिकारों के हनन के लिए शिकायत निवारण तंत्र की मांग करने वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की और इसे मुवक्किलों को दी गई कानूनी सलाह के आधार पर जांच एजेंसियों द्वारा वकीलों को तलब करने के संबंध में शुरू किए गए स्वतः संज्ञान मामले के साथ जोड़ दिया (संदर्भ: मामलों की जाँच और संबंधित मुद्दों के दौरान कानूनी राय देने वाले या पक्षकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों को तलब करने के संबंध...

ईशा फाउंडेशन ने मानहानिकारक खबरें रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
ईशा फाउंडेशन ने मानहानिकारक खबरें रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

सद्गुरु के ईशा फाउंडेशन ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर तमिल मीडिया संस्थान नक्खीरन पब्लिकेशंस को उसके खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक सामग्री प्रकाशित करने से रोकने की मांग की है।सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी (ईशा फाउंडेशन की ओर से पैरवी) ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ के समक्ष आज याचिका का उल्लेख किया। याद दिला दें कि पिछले साल ईशा फाउंडेशन ने नक्खीरन पब्लिकेशंस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिसमें दावा किया गया था कि इसकी कुछ सामग्री ने...

गुजरात के TRP गेम ज़ोन आग हादसे में सुप्रीम कोर्ट ने राजकोट के पूर्व फायर अधिकारी को दी जमानत
गुजरात के TRP गेम ज़ोन आग हादसे में सुप्रीम कोर्ट ने राजकोट के पूर्व फायर अधिकारी को दी जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने आज (15 जुलाई) को जिला मुख्य अग्निशमन अधिकारी इलेशकुमार वालाभाई खेर को जमानत दे दी, जब टीआरपी गेम ज़ोन आग की घटना हुई थी, जिसमें 25 मई, 2024 को राजकोट के नाना-मावा इलाके में गेम ज़ोन में लगी भीषण आग में चार बच्चों सहित सत्ताईस व्यक्तियों की मौत हो गई थी।न्यायालय ने मौखिक रूप से कहा कि इस मामले में मुख्य अग्निशमन अधिकारी की जिम्मेदारी "बेहद दूरस्थ" थी और अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ता को जमानत दी गई है, यह देखते हुए कि उसे एक साल की कैद का सामना करना पड़ा है और निकट भविष्य में...

सुप्रीम कोर्ट ने पावर ऑफ अटॉर्नी धारक द्वारा सेल डीड के रजिस्ट्रेशन पर उठाए सवाल, मामला बड़ी पीठ को सौंपा
सुप्रीम कोर्ट ने पावर ऑफ अटॉर्नी धारक द्वारा सेल डीड के रजिस्ट्रेशन पर उठाए सवाल, मामला बड़ी पीठ को सौंपा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार 15 जुलाई को महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर विचार करते हुए यह तय करने का मामला लार्ज बेंच को भेज दिया कि क्या पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) धारक बिना अतिरिक्त प्रमाणीकरण के सेल डीड को निष्पादक (Executant) के रूप में रजिस्ट्रेशन के लिए प्रस्तुत कर सकता है।जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की खंड़पीठ ने वर्ष 2009 के निर्णय राजनी टंडन बनाम दुलाल रंजन घोष दस्तिदार से असहमति जताई। इस फैसले में कहा गया था कि पावर ऑफ अटॉर्नी धारक ही सेल डीड का निष्पादक बन जाता है। उसे रजिस्ट्रेशन...