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Motor Accident Claim | केस पार्टी बनाई गई बीमा कंपनी सभी आधार उठा सकती है और मुआवज़े की रकम को चुनौती दे सकती है: सुप्रीम कोर्ट
Motor Accident Claim | केस पार्टी बनाई गई बीमा कंपनी सभी आधार उठा सकती है और मुआवज़े की रकम को चुनौती दे सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बीमा कंपनी की उस अपील को मंज़ूरी दी, जो बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ थी। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को मोटर दुर्घटना मुआवज़े की रकम के बारे में अपनी दलीलें रखने से रोक दिया था।कोर्ट ने कहा कि जब किसी मोटर दुर्घटना मुआवज़े के केस में बीमा कंपनी को एक पार्टी-प्रतिवादी (Respondent) के तौर पर शामिल किया जाता है तो उसे सभी उपलब्ध आधारों पर दावे को चुनौती देने का अधिकार होता है। यानी, उसे सिर्फ़ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 149(2) में बताए गए आधारों (जैसे, पॉलिसी की...

महाभारत जैसी वैवाहिक लड़ाई: 10 साल अलग रह रहे दंपत्ति के बीच चल रहे थे 80 से ज़्यादा केस, सुप्रीम कोर्ट ने शादी खत्म करने के साथ किए रद्द
'महाभारत जैसी वैवाहिक लड़ाई': 10 साल अलग रह रहे दंपत्ति के बीच चल रहे थे 80 से ज़्यादा केस, सुप्रीम कोर्ट ने शादी खत्म करने के साथ किए रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 अप्रैल) को एक ऐसे जोड़े की शादी खत्म की, जो पिछले 10 सालों से अलग रह रहे थे और जिन्होंने एक-दूसरे, अपने रिश्तेदारों और वकीलों के खिलाफ 80 से ज़्यादा केस दायर किए। कोर्ट ने इसे "महाभारत जैसी वैवाहिक लड़ाई" का अंत बताया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने प्रतिवादी-पति (जो पेशे से वकील है) के रवैये की कड़ी आलोचना की। बेंच ने कहा कि उसने अपनी कानूनी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके जान-बूझकर मुकदमे को लंबा खींचा। कोर्ट ने पाया कि उसने पत्नी के वकीलों को भी...

Sabarimala Reference | केंद्र ने संवैधानिक नैतिकता के आधार पर व्यभिचार और समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाले फ़ैसलों पर उठाए सवाल
Sabarimala Reference | केंद्र ने 'संवैधानिक नैतिकता' के आधार पर व्यभिचार और समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाले फ़ैसलों पर उठाए सवाल

सबरीमाला पुनर्विचार कार्यवाही में भारत संघ की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के 2018 के जोसेफ़ शाइन फ़ैसले की आलोचना की। इस फ़ैसले में IPC की धारा 497 के तहत व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया। मेहता ने तर्क दिया कि यह फ़ैसला "संवैधानिक नैतिकता" पर निर्भरता के ज़रिए न्यायिक पुनर्विचार के अनुमेय विस्तार को दर्शाता है।उन्होंने कहा कि कुछ फ़ैसलों में संवैधानिक नैतिकता का इस्तेमाल ग़लत तरीके से "न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करने के लिए किया गया, जब किसी...

बच्चों की तस्करी को हल्के में न लें, पूरे देश में गिरोह सक्रिय हैं: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के गृह सचिवों से कहा
बच्चों की तस्करी को हल्के में न लें, पूरे देश में गिरोह सक्रिय हैं: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के गृह सचिवों से कहा

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे बच्चों की तस्करी को हल्के में न लें। साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया कि यह मुद्दा कानून-व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चिंताओं वाला है और इस पर राज्य के अधिकारियों के स्तर पर तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत है।जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा,"कृपया इस मुद्दे को बहुत-बहुत गंभीरता से लें। बच्चों की तस्करी बेकाबू हो चुकी है। पूरे देश में गिरोह सक्रिय हैं। अगर आप सभी इस पर ध्यान नहीं देंगे तो हालात काबू से बाहर हो जाएंगे। इस मामले में केवल राज्य सरकार...

कई अपराधों के लिए जब जेल की सज़ाएं एक साथ चलती हैं तो जुर्माना भी एक साथ ही चलता है: सुप्रीम कोर्ट
कई अपराधों के लिए जब जेल की सज़ाएं एक साथ चलती हैं तो जुर्माना भी एक साथ ही चलता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जहां अलग-अलग अपराधों के लिए दी गई सज़ाओं को एक साथ (Concurrently) चलाने का निर्देश दिया गया हो, वहां हर अपराध के लिए अलग से जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि दो अपराधों की सज़ा के हिस्से के तौर पर अलग से लगाया गया जुर्माना भी, जेल की सज़ाओं के साथ-साथ ही माना जाएगा।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच ने कहा,"IPC की धारा 53 में जुर्माने को भी सज़ा का एक हिस्सा माना गया। इस नज़रिए से जब सज़ा को एक...

Sabarimala Reference | अंधविश्वास से जुड़ी प्रथाओं की न्यायिक पुनर्विचार पर रोक नहीं: सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट
Sabarimala Reference | अंधविश्वास से जुड़ी प्रथाओं की न्यायिक पुनर्विचार पर रोक नहीं: सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट

सबरीमाला मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि अदालतों को ऐसी प्रथाओं या 'अंधविश्वासों' को रद्द करने से नहीं रोका जा सकता, जो सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य का उल्लंघन करती हों। भले ही संविधान के अनुच्छेद 25(2)(b) के तहत धर्म सुधार के लिए कानून बनाने की शक्ति विधायिका के पास हो।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी 'आवश्यक धार्मिक प्रथा' (ERP) को केवल संबंधित धर्म के दार्शनिक दृष्टिकोण से ही देखा जाना चाहिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली...

भगवान अयप्पा के भक्त न होने वाले लोग सबरीमाला की प्रथा को कैसे चुनौती दे सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा
भगवान अयप्पा के भक्त न होने वाले लोग सबरीमाला की प्रथा को कैसे चुनौती दे सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट ने पूछा

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से जुड़े संवैधानिक सवालों पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने पूछा कि जो लोग भगवान अयप्पा के भक्त नहीं हैं, वे मंदिर की प्रथा को चुनौती कैसे दे सकते हैं।"इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन" नाम के एक संगठन द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर ही सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सबरीमाला के भगवान अयप्पा मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को हटा दिया था।9 जजों की बेंच का हिस्सा रहीं जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता...

CCS Pension Rules | कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने पर ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
CCS Pension Rules | कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने पर ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी नियोक्ता उस कर्मचारी की ग्रेच्युटी का भुगतान रोकने का हकदार है, जिसके खिलाफ कोई न्यायिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम के एक पूर्व क्लर्क द्वारा दायर अपील खारिज की। इस क्लर्क की ग्रेच्युटी परिवहन निगम ने उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही के लंबित होने के कारण रोक दी थी।रिटायरमेंट के बाद अपीलकर्ता की ग्रेच्युटी प्रतिवादी विभाग द्वारा रोक दी गई थी। इसका कारण उसके...

Motor Accident Claim | सिर्फ इसलिए सैलरी से कटौती नहीं की जा सकती कि मृतक रिटायरमेंट के करीब था: सुप्रीम कोर्ट
Motor Accident Claim | सिर्फ इसलिए सैलरी से कटौती नहीं की जा सकती कि मृतक रिटायरमेंट के करीब था: सुप्रीम कोर्ट

मोटर दुर्घटना मुआवज़ा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मृतक की सैलरी से 50 प्रतिशत की कटौती को गलत ठहराया। यह कटौती इस आधार पर की गई कि मृतक की नौकरी के सिर्फ 6 महीने बचे थे।जस्टिस राजेश बिंदल और विजय बिश्नोई की बेंच ने दावेदारों (मृतक के परिवार वालों) को दिए जाने वाले मुआवज़े की रकम बढ़ा दी। बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट और मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने मुआवज़े की रकम तय करते समय मृतक की सैलरी से 50% की कटौती करके गलती की थी।बेंच ने कहा,"हमारे सामने जो मामला है, उसमें ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट...

बिना लाइसेंस वाले साहूकारों के खिलाफ जांच के लिए नए कानून का इंतज़ार ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
बिना लाइसेंस वाले साहूकारों के खिलाफ जांच के लिए नए कानून का इंतज़ार ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में साफ किया कि बिना इजाज़त के पैसे उधार देने के मामले में खुद से शुरू की गई (suo motu) कार्रवाई को बंद करने वाले उसके पिछले आदेश का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि इस विषय पर अभी कोई कानून मौजूद नहीं है, या यह कि कानून लागू करने वाली कार्रवाई के लिए राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नए कानून बनाने का इंतज़ार करना होगा।अदालत ने साफ किया कि बिना लाइसेंस वाले साहूकारों के खिलाफ राज्यों के पैसे उधार देने से जुड़े कानूनों और भारतीय न्याय संहिता के तहत मौजूदा...

अपील खारिज होने पर डिक्री के क्रियान्वयन के लिए नई लिमिटेशन अवधि शुरू होगी: सुप्रीम कोर्ट
अपील खारिज होने पर डिक्री के क्रियान्वयन के लिए नई लिमिटेशन अवधि शुरू होगी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपील को गैर-हाजिरी (default) के कारण खारिज किया जाता है, तो उससे एक नया लिमिटेशन पीरियड शुरू होता है, और ऐसे में 12 साल के भीतर दायर की गई एग्जीक्यूशन पिटीशन (डिक्री के क्रियान्वयन की अर्जी) मान्य होगी।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा कि यह तर्क सही नहीं है कि एग्जीक्यूशन पिटीशन की 12 साल की अवधि केवल डिक्री पास होने की तारीख से ही गिनी जाए, खासकर तब जब उस डिक्री के खिलाफ अपील लंबित रही हो।कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच...

सुप्रीम कोर्ट का मेरठ में 44 अवैध संपत्तियां सील करने का आदेश, ध्वस्तीकरण रोकने पर अधिकारी को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट का मेरठ में 44 अवैध संपत्तियां सील करने का आदेश, ध्वस्तीकरण रोकने पर अधिकारी को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को उत्तर प्रदेश के मेरठ में 44 संपत्तियों को तुरंत सील करने का आदेश दिया, जहां रिहायशी प्लॉट्स को अवैध रूप से दुकानों, स्कूलों और अस्पतालों में बदल दिया गया था। इन इमारतों में न तो स्वीकृत नक्शे थे और न ही फायर सेफ्टी की बुनियादी व्यवस्था।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच इस मामले में अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने पूर्व मेरठ मंडल आयुक्त ऋषिकेश भास्कर यशोद के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई, जो व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में...

सबरीमला केस: सॉलिसिटर जनरल ने संवैधानिक नैतिकता पर उठाए सवाल, बोले—ट्रांसफॉर्मेटिव कॉन्स्टिट्यूशनलिज्म समझ नहीं आया
सबरीमला केस: सॉलिसिटर जनरल ने 'संवैधानिक नैतिकता' पर उठाए सवाल, बोले—ट्रांसफॉर्मेटिव कॉन्स्टिट्यूशनलिज्म समझ नहीं आया

सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 'परिवर्तनकारी संवैधानिकता' और 'संवैधानिक नैतिकता' जैसे सिद्धांतों के उपयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 'संवैधानिक नैतिकता' को न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं बनाया जा सकता और यह अवधारणा स्पष्ट नहीं है।उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से 'परिवर्तनकारी संवैधानिकता' के बारे में सुन रहे हैं, लेकिन उनकी समझ में यह सिद्धांत ठीक से नहीं आता।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने स्पष्ट किया कि...

गुरुग्राम मासूम दुष्कर्म मामला: मैक्स अस्पताल की डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई, कहा- मैंने अपनी राय नहीं बदली
गुरुग्राम मासूम दुष्कर्म मामला: मैक्स अस्पताल की डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट में दी सफाई, कहा- "मैंने अपनी राय नहीं बदली"

गुरुग्राम में 4 साल की मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में एक नया मोड़ आया। मैक्स अस्पताल की डॉक्टर बबिता जैन, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था, उन्होंने अपना जवाब दाखिल किया। डॉक्टर ने कोर्ट के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने बच्ची की स्थिति को लेकर अपनी मेडिकल राय में कोई बदलाव नहीं किया।मैक्स हेल्थकेयर में बाल रोग विभाग की प्रमुख डॉ. बबिता जैन ने अपने हलफनामे में उन आरोपों को गलत बताया, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने किसी दबाव में आकर अपनी रिपोर्ट बदली।उन्होंने...

अगर संस्था को नुकसान हुआ है तो विचार करेंगे: सुप्रीम कोर्ट ने यतिन ओझा के अवमानना ​​मामले में आदेश सुरक्षित रखा
'अगर संस्था को नुकसान हुआ है तो विचार करेंगे': सुप्रीम कोर्ट ने यतिन ओझा के अवमानना ​​मामले में आदेश सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट यतिन ओझा की उस अपील पर आदेश सुरक्षित रखा, जो उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट के 2020 के आदेश के खिलाफ दायर की थी। उस आदेश में उन्हें हाईकोर्ट पर न्याय प्रशासन में कुप्रबंधन के आरोप लगाने के लिए आपराधिक अवमानना ​​का दोषी ठहराया गया था।आदेश सुरक्षित रखते हुए जस्टिस जेके माहेश्वरी ने कहा कि कोर्ट इस घटना के वीडियो देखेगा और मामले की जांच "संस्था" (हाई कोर्ट) के नज़रिए से करेगा।जस्टिस माहेश्वरी ने कहा,"कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि नुकसान किसी व्यक्ति को हुआ है या...

सबरीमाला फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं होगा, सिर्फ़ संवैधानिक सवालों पर विचार होगा: सुप्रीम कोर्ट
सबरीमाला फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं होगा, सिर्फ़ संवैधानिक सवालों पर विचार होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई शुरू की। इस मामले में क़ानून से जुड़े कई बड़े सवाल उठाए गए, जिनमें धार्मिक संप्रदाय और ज़रूरी धार्मिक प्रथाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।बहस की शुरुआत सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने की। उन्होंने केंद्र सरकार का पक्ष साफ़ करते हुए कहा कि 2018 का सबरीमाला फ़ैसला, जिसमें सभी वर्गों की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई, ग़लत था। हालांकि, बेंच ने कहा कि चूंकि मौजूदा मामले का दायरा अनुच्छेद 25 (अंतरात्मा की स्वतंत्रता...

अनारक्षित श्रेणी में PwD के लिए क्षैतिज रूप से आरक्षित पद SC/ST/OBC दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी खुले हैं: सुप्रीम कोर्ट
अनारक्षित श्रेणी में PwD के लिए क्षैतिज रूप से आरक्षित पद SC/ST/OBC दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी खुले हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जब किसी अनारक्षित सीट पर क्षैतिज आरक्षण लागू होता है तो उस अनारक्षित सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अधिकार उन सभी उम्मीदवारों को होता है जिनके पास वह क्षैतिज विशेषता (Horizontal Attribute) मौजूद है, चाहे वे SC, ST, OBC या सामान्य श्रेणी के हों।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस मामले में वेस्ट बंगाल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर सिविल इंजीनियर के एक पद को यूआर...

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने वाला फ़ैसला ग़लत: 9-जजों की बेंच के सामने बोली केंद्र सरकार
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति देने वाला फ़ैसला ग़लत: 9-जजों की बेंच के सामने बोली केंद्र सरकार

सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान, केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि 2018 का वह फ़ैसला, जिसमें सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई, ग़लत था और इसे एक ग़लत क़ानून घोषित किया जाना चाहिए।केंद्र सरकार की ओर से पेश होते हुए एडिशनल जनरल तुषार मेहता ने 9-जजों की बेंच के सामने दलील दी कि 2018 के फ़ैसले पर क़ानूनी आधार पर फिर से विचार करने और उसे पलटने की ज़रूरत है।सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने कहा,"मेरा पक्ष यह है कि यह फ़ैसला ग़लत था और...