देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (01 अगस्त, 2026 से 04 सितंबर, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

CrPC की धारा 125(3) के तहत एक साल की समय-सीमा DV Act के तहत मेंटेनेंस की वसूली के लिए वेतन की कुर्की को नहीं रोकती: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा कि CrPC की धारा 125(3) के पहले प्रावधान (Proviso) के तहत एक साल की समय-सीमा तभी लागू होती है, जब कोई व्यक्ति उस प्रावधान के तहत बकाया मेंटेनेंस की वसूली के लिए वारंट की मांग करता है। यह मेंटेनेंस के बकाया को खत्म नहीं करता और न ही 'महिलाओं को घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम, 2005' (DV एक्ट) की धारा 20(6) के तहत सैलरी अटैचमेंट को रोकता है।

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UP Panchayat Raj Act | फंड के दुरुपयोग के लिए ग्राम प्रधान के खिलाफ जांच उनका कार्यकाल पूरा होने पर ही खत्म नहीं हो जाती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यू.पी. पंचायत राज एक्ट, 1947 की धारा 95(1)(g) के तहत ग्राम प्रधान के खिलाफ चल रही जांच को सिर्फ इसलिए बेकार नहीं माना जा सकता या रोका नहीं जा सकता कि उनका कार्यकाल खत्म हो गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी कार्यवाही को तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाना चाहिए, क्योंकि एक्ट की धारा 95(2) और धारा 27 के तहत कार्यकाल खत्म होने के बाद भी कुछ परिणाम बने रहते हैं।

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जीवनसाथी को सिर्फ़ 'आपत्तिजनक स्थिति' में देखने का आरोप लगाने से व्यभिचार साबित नहीं होता: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने एक पति की अपील खारिज की, जिसमें उसने व्यभिचार और क्रूरता के आधार पर अपनी शादी खत्म करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी को सिर्फ़ "आपत्तिजनक स्थिति" में देखने से यह साबित नहीं होता कि उसने किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध बनाए।

जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की डिवीजन बेंच ने मधुबनी के फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज का फैसला बरकरार रखा, जिन्होंने पति के तलाक का मामला खारिज कर दिया।

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बिना वारंट रात में NDPS की तलाशी वैध, आपात स्थिति में धारा 42 की कार्रवाई बाद में हो सकती है: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ मामले में जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि पुलिस को गश्त के दौरान ऐसी सूचना मिलती है, जिस पर तत्काल कार्रवाई जरूरी हो तो रात में बिना वारंट तलाशी लेने की स्थिति में NDPS Act की धारा 42 के तहत आवश्यक कार्रवाई को उचित समय तक टाला जा सकता है। हालांकि प्रावधानों का पूरी तरह पालन न करना स्वीकार्य नहीं है।

जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने कहा कि आपात स्थिति में धारा 42 के तहत अनुपालन को उचित अवधि के लिए स्थगित किया जा सकता है लेकिन प्राप्त सूचना और बिना वारंट तलाशी लेने के कारणों को दर्ज करना तथा उन्हें निर्धारित समय में वरिष्ठ अधिकारी तक पहुंचाना जरूरी है।

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498A की शिकायत करना अपने आप में क्रूरता नहीं, तलाक का आधार भी नहीं: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि पति और उसके परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न और क्रूरता के आरोप में शिकायत दर्ज कराना अपने आप में पत्नी की ओर से क्रूरता नहीं माना जा सकता। केवल इस आधार पर तलाक नहीं दिया जा सकता भले ही बाद में आपराधिक मामले में पति और उसके परिवार को बरी कर दिया गया हो।

जस्टिस के. लक्ष्मण और जस्टिस के. सुजाना की खंडपीठ ने कहा कि यदि पति हिंदू विवाह अधिनियम के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक मांगता है तो क्रूरता के आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करने की जिम्मेदारी उसी की है। केवल खुद गवाही देना और आरोप लगा देना पर्याप्त नहीं है।

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पेंशन और पारिवारिक पेंशन पाने वाले सीनियर सिटीजन को भरण-पोषण का अधिकार नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि नियमित पेंशन और फैमिली पेंशन प्राप्त कर रहे तथा स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम सीनियर सिटीजन को माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम 2007 की धारा 4 के तहत भरण-पोषण का दावा करने का अधिकार नहीं है।

जस्टिस नंदेश एस. देशपांडे ने 65 वर्षीय पिता की याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। पिता ने वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिकरण और अपीलीय प्राधिकारी के उन आदेशों को चुनौती दी थी, जिनमें अधिनियम की धारा 5 के तहत उनकी अर्जी खारिज कर दी गई। याचिकाकर्ता प्रतिवादी नंबर 1 के पिता और प्रतिवादी नंबर 2 के ससुर हैं।

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लखनऊ कोर्ट हिंसा | हाईकोर्ट के आदेश में बदलाव: अब वकीलों की गुप्त जांच IB नहीं, UP Police का इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट करेगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को लखनऊ कोर्ट हिंसा मामले में स्वतः संज्ञान (suo moto) लेते हुए अपने पिछले आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि जिन वकीलों पर आरोप लगे हैं, उनके बैकग्राउंड और गतिविधियों की गुप्त जांच इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के बजाय उत्तर प्रदेश पुलिस का इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट करेगा।

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने लखनऊ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 21 जुलाई, 2026 को हुई घटना से जुड़ी स्वतः संज्ञान कार्यवाही में यह आदेश पारित किया।

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संयुक्त परिवार के सदस्यों के बीच बंटवारे के मुकदमे में बाहरी व्यक्ति द्वारा की गई संपत्ति की बिक्री को चुनौती नहीं दी जा सकती: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि संयुक्त परिवार की संपत्ति को किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने को परिवार के सदस्यों के बीच चल रहे बंटवारे के मुकदमे का हिस्सा नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जिस बाहरी व्यक्ति ने संपत्ति हस्तांतरित की है, उसके पास उस संपत्ति का मालिकाना हक था या नहीं, यह सवाल संयुक्त परिवार की संपत्तियों के बंटवारे से जुड़े मुकदमे में तय नहीं किया जा सकता।

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अवैध संपत्ति का हिसाब करते समय खेती से हुई आय नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने कहा कि बिहार स्पेशल कोर्ट्स एक्ट, 2009 के तहत अवैध संपत्ति का पता लगाते समय "अपील करने वाले की खेती से हुई आय पर विचार न करना कानून की नज़र में गलत है"। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ज़ब्ती की कार्यवाही के दौरान किसी सरकारी कर्मचारी की मौत हो जाती है तो ऐसी कार्यवाही "दोषी सरकारी कर्मचारी की मौत के साथ ही खत्म हो जानी चाहिए" और इसे सिर्फ़ बरी किए गए सह-आरोपी द्वारा दिए गए दस्तावेज़ों के आधार पर जारी नहीं रखा जा सकता।

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शादी जैसे रिश्ते में भी IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का प्रावधान लागू हो सकता है: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A, 420 और 384 के तहत चल रही कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली आपराधिक पुनरीक्षण याचिका (Criminal Revision Petition) खारिज की। कोर्ट ने कहा कि औपचारिक रूप से वैध पारंपरिक शादी न होने का मतलब यह नहीं है कि शादी जैसे रिश्ते में क्रूरता के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

जस्टिस उदय कुमार ने कहा कि धारा 498A लागू करने के लिए "पूरी तरह सही और कानूनी रूप से निर्विवाद शादी" का होना ज़रूरी नहीं है, बशर्ते सबूतों से शादी जैसी घरेलू व्यवस्था और क्रूरता के आरोप सामने आ रहे हों।

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'हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम' के तहत जैविक पिता अपने ही नाजायज़ बेटे को गोद ले सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, 1956' के तहत किसी हिंदू पुरुष को अपने ही नाजायज़ बेटे को गोद लेने से इसलिए नहीं रोका जा सकता, क्योंकि वह बच्चे का जैविक पिता है।

जस्टिस अरुण कुमार की बेंच ने 1970 में कथित तौर पर किए गए एक दत्तक ग्रहण (गोद लेने की प्रक्रिया) से जुड़ी दूसरी अपील पर फैसला सुनाते हुए यह बात कही। कोर्ट ने निचली अदालतों के इन फैसलों को सही ठहराया कि मूल वादी (राम केश) को बडलू ने कानूनी रूप से गोद लिया था, जो उसका जैविक पिता भी है।

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हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों के आधार पर पंचायत समिति अध्यक्ष का चुनाव नहीं रोक सकता SDM: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि चुनाव में कथित खरीद-फरोख्त या धनबल के इस्तेमाल की शिकायत की पुलिस जांच चल रही है। कोर्ट ने SDM की ओर से चुनाव टालने की कार्रवाई को पूरी तरह अस्वीकार्य, स्पष्ट रूप से अवैध और कानून के शासन के विपरीत बताया।

जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ ने कहा कि पंचायत समिति, इंदौरा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव रोकने के लिए SDM की कार्रवाई का कोई वैधानिक आधार नहीं था। अधिकारी ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में मिली शक्तियों से आगे जाकर कार्रवाई की और संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन किया।

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गैर-कानूनी हिरासत और ड्यूटी से हटकर मारपीट के मामले में पुलिस कॉन्स्टेबल पर केस चलाने के लिए मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और रिविज़नल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि अपील करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के लिए CrPC की धारा 197 के तहत मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं थी। उस अधिकारी पर आरोप था कि उसने प्रतिवादी (Respondent) को तब बुरी तरह पीटा था जब वह कथित तौर पर गैर-कानूनी हिरासत में था।

जस्टिस रवि चिरानिया की बेंच ने माना कि याचिकाकर्ता का काम उसकी आधिकारिक ड्यूटी का हिस्सा नहीं कहा जा सकता, बल्कि उसने अपनी ड्यूटी की सीमा से बाहर जाकर काम किया।

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'मुस्लिम' शब्द आगे या पीछे लगाने से जाति प्रमाण पत्र रद्द नहीं किया जा सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि 'मुस्लिम' एक धर्म है, न कि कोई जाति। इसलिए सिर्फ़ इसलिए जाति प्रमाण पत्र को अमान्य नहीं किया जा सकता, क्योंकि जाति के नाम के आगे या पीछे 'मुस्लिम' शब्द लिखा है।

कोर्ट ने जाति जांच समिति के उस फ़ैसले को रद्द किया, जिसमें 12वीं कक्षा के एक छात्र का प्रमाण पत्र इस आधार पर अमान्य कर दिया गया था कि जिन दस्तावेज़ों पर उसने भरोसा किया - जिनमें उसके पूर्वजों के संविधान-पूर्व (आज़ादी से पहले के) दस्तावेज़ भी शामिल थे - उनमें उनकी जाति 'मुसलमान लोहार', 'लोहार मुस्लिम' आदि लिखी हुई थी।

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दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज़ नहीं: राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप वाली याचिका खारिज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते उस रिट याचिका को वापस लेने की अनुमति दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं। इस याचिका में रायबरेली से लोकसभा सदस्य का पद संभालने के गांधी के अधिकार पर भी सवाल उठाया गया।

याचिकाकर्ताओं द्वारा याचिका में लगाए गए आरोपों और दावों के समर्थन में एक भी दस्तावेज़ पेश न कर पाने के बाद इसे वापस लेने की अनुमति देते हुए खारिज कर दिया गया।

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नोएडा मजदूर प्रदर्शन: स्टूडेंट एक्टिविस्ट आकृति चौधरी की रासुका हिरासत रद्द, हाईकोर्ट ने राज्य की कहानी को बताया 'गढ़ी हुई'

नोएडा में अप्रैल 2026 में हुए मजदूर प्रदर्शन से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 25 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत बुधवार को रद्द की।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका मंजूर करते हुए कहा कि आकृति की हिरासत राज्य की ओर से पेश की गई एक 'गढ़ी हुई कहानी' पर आधारित थी। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि किसी अन्य मामले में उनकी गिरफ्तारी जरूरी न हो तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।

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रजिस्टर्ड सेल डीड से भी आदिवासी जमीन का अवैध हस्तांतरण वैध नहीं हो सकता: झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 की धारा 46(1) का उल्लंघन कर किया गया आदिवासी जमीन का हस्तांतरण केवल इस आधार पर वैध नहीं हो सकता कि उसके लिए रजिस्टर्ड सेल डीड तैयार की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून द्वारा प्रतिबंधित लेनदेन को रजिस्टर्ड सेल डीड वैधता प्रदान नहीं कर सकती।

जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी ने यह टिप्पणी हजारीबाग के तत्कालीन उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आयुक्त की ओर से 10 मई 2013 को पारित आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए की। आयुक्त ने अतिरिक्त कलेक्टर के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम की धारा 46(4) के तहत जमीन बहाली का आदेश दिया गया था।

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केंद्र की योजनाओं के तहत काम करने वाले DRDA कर्मचारियों पर Regularisation Rules लागू नहीं: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि District Rural Development Agency (DRDA) में कार्यरत कर्मचारियों को उत्तर प्रदेश के 2016 के नियमितीकरण नियमों का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि DRDA सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत एक सोसाइटी है और केंद्र सरकार की योजनाओं एवं परियोजनाओं के तहत कार्य करती है।

जस्टिस अनिश कुमार गुप्ता ने यह फैसला उन याचिकाओं पर सुनाया, जिनमें DRDA में लंबे समय से काम कर रहे Data Entry Operator, Computer Operator और Programmer पदों पर कार्यरत लोगों ने नियमितीकरण और नियमित वेतनमान की मांग की थी।

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पासपोर्ट से पूर्व पति का नाम हटाने के लिए तलाक की डिक्री जरूरी नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि तलाकशुदा व्यक्ति को पासपोर्ट से पूर्व पति या पत्नी का नाम हटाने के लिए तलाक की डिक्री या न्यायिक पृथक्करण का आदेश प्रस्तुत करना जरूरी नहीं है। जस्टिस मुरली पुरुषोत्तमन ने कहा कि Passports Rules, 1980 के तहत ऐसी स्थिति में तलाक की डिक्री की आवश्यकता नहीं है, इसलिए केवल एक ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए यह अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती।

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'सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट' एक्सपायर होने पर शादी से इनकार नहीं कर सकता विवाह अधिकारी: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह अधिकारी केवल इस आधार पर विवाह कराने से इनकार नहीं कर सकता कि विदेशी नागरिक द्वारा प्रस्तुत किया गया 'सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट' एक्सपायर हो चुका है।

जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने एक नेपाली महिला से विवाह करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए विवाह अधिकारी को नोटिस ऑफ इंटेंडेड मैरिज के आधार पर विवाह संपन्न कराने की अनुमति देने का निर्देश दिया।

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Drugs & Cosmetics Act | 28 दिन में दोबारा जांच की मांग नहीं की तो सरकारी रिपोर्ट अंतिम मानी जाएगी: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी दवा के निर्माता या संबंधित व्यक्ति ने सरकारी विश्लेषक की जांच रिपोर्ट को चुनौती देने और नमूने की दोबारा जांच कराने का अधिकार तय 28 दिन के भीतर नहीं इस्तेमाल किया तो उस रिपोर्ट को अंतिम और निर्णायक साक्ष्य माना जाएगा। कोर्ट ने दवा निर्माता, स्टॉकिस्ट, वितरक और थोक विक्रेताओं की ओर से दायर तीन याचिकाएं खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

जस्टिस संजय परिहार की पीठ मैकनिम प्लस टैबलेट से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी। इस दवा के एक नमूने को जांच में 'मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं' पाया गया। दवा निर्धारित समय में घुलने की जांच में विफल रही थी। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 18(ए)(i) के साथ धारा 27(डी) के तहत आपराधिक कार्यवाही शुरू की गई।

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सुल्तानपुर बार एसोसिएशन चुनाव: हाईकोर्ट ने महिलाओं के लिए 30% आरक्षण का आदेश दिया, अहम पदों के लिए रोटेशन तय किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में सुल्तानपुर बार एसोसिएशन को निर्देश दिया कि वह अपनी एग्जीक्यूटिव कमेटी और गवर्निंग काउंसिल में महिला वकीलों के लिए 30% आरक्षण लागू करे। कोर्ट ने आदेश दिया कि आने वाले चुनावों में अहम पद रोटेशन के आधार पर महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित किए जाएंगे।

जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ला की बेंच ने यह निर्देश एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिए। यह याचिका बार एसोसिएशन में महिला वकीलों के प्रतिनिधित्व के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों (दीक्षा एन. अमृतश बनाम कर्नाटक राज्य मामले में) के पालन से जुड़ी थी।

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मुस्लिम कानून में संयुक्त परिवार मान्य नहीं होते, भाई नाबालिग भाई-बहनों की ज़मीन नहीं बेच सकता: गुवाहाटी हाईकोर्ट

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने फिर से कहा कि मुस्लिम कानून के तहत हर वारिस का हिस्सा अलग और स्वतंत्र होता है। इसलिए चार नाबालिग भाई-बहनों का भाई उनका अभिभावक (गार्जियन) बनकर उनकी ज़मीन नहीं बेच सकता, क्योंकि इस कानून में 'प्रतिनिधित्व के सिद्धांत' (थ्योरी ऑफ़ रिप्रेजेंटेशन) या 'संयुक्त परिवार' की अवधारणा को मान्यता नहीं दी गई।

ऐसा करते हुए कोर्ट ने ज़मीन के एक टुकड़े पर वादी (Plaintiff) के 30-33 साल के कब्ज़े और प्रतिवादियों (Defendants) द्वारा समय-सीमा के भीतर अपना दावा पेश न कर पाने को आधार मानते हुए वादी के अधिकार, मालिकाना हक और हित को पक्का माना। यह तब भी माना गया जब चार नाबालिगों के चार-पांचवें हिस्से के संबंध में बिक्री विलेख (Sale Deed) अमान्य है।

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