हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (14 सिंतबर, 2026 से 18 सितंबर, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी नहीं दी गई: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि असली क्वालिफिकेशन के आधार पर मिली नियुक्ति को सिर्फ़ इसलिए रद्द नहीं किया जा सकता कि नियुक्त व्यक्ति ने अपनी पिछली नियुक्ति रद्द होने की जानकारी नहीं दी थी, जबकि उस बात का उसकी योग्यता या चयन पर कोई असर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी जानकारी न देने पर नियुक्ति तभी रद्द की जा सकती है, जब जानकारी न देने और नियुक्ति मिलने के बीच कोई साफ़ और सीधा संबंध हो।
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नीलामी में संपत्ति बिकना मौजूदा किरायेदारों को बेदखल करने का आधार नहीं: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी संपत्ति की बिहार स्टेट फाइनेंशियल कॉरपोरेशन (BSFC) द्वारा नीलामी में बिक्री अपने आप वहां रह रहे किरायेदारों को बेदखल करने का आधार नहीं बन सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किरायेदारों की बेदखली केवल झारखंड बिल्डिंग (लीज, रेंट एंड एविक्शन) कंट्रोल एक्ट में निर्धारित आधारों के अनुसार ही की जा सकती है।
जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ किरायेदारों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में BSFC द्वारा जारी उस नोटिस को चुनौती दी गई, जिसमें संपत्ति बिक जाने का हवाला देते हुए किरायेदारों को परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया।
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BCI के अनुशासनात्मक आदेश को आपराधिक कार्यवाही में चुनौती नहीं दे सकते वकील: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अनुशासनात्मक आदेश को केवल एडवोकेट्स एक्ट (Advocate Act) की धारा 38 के तहत सुप्रीम कोर्ट में अपील के जरिए चुनौती दी जा सकती है। वकील आपराधिक कार्यवाही शुरू कराकर या हाईकोर्ट के पुनरीक्षण अधिकार क्षेत्र का सहारा लेकर BCI के अनुशासनात्मक आदेश को अप्रत्यक्ष रूप से चुनौती नहीं दे सकता।
जस्टिस पुरुषैंद्र कुमार कौरव ने यह टिप्पणी वकील पी. बालासुब्रमणियन की याचिका खारिज करते हुए की। याचिका में प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज-सह-स्पेशल जज (PC Act) के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें कुछ व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग वाली उनकी शिकायत खारिज कर दी गई।
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बिना वैलिड परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट के गाड़ी चलाना इंश्योरेंस पॉलिसी का उल्लंघन: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बिना वैलिड परमिट और फिटनेस सर्टिफिकेट के ट्रांसपोर्ट गाड़ी चलाना इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनी पर मुआवज़े की पूरी ज़िम्मेदारी नहीं डाली जा सकती, लेकिन "पे एंड रिकवर" (पहले भुगतान करें और फिर वसूलें) सिद्धांत लागू करते हुए इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि वह पहले मुआवज़े की रकम का भुगतान करे और फिर गाड़ी के मालिक से वह रकम वसूल ले।
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वकील की अपनी संलिप्तता प्रथमदृष्टया सामने हो तो कार्यालय की तलाशी संभव, वकील-मुवक्किल गोपनीयता पूर्ण सुरक्षा नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वकील-मुवक्किल के बीच कानूनी रूप से संरक्षित गोपनीय संवाद और दस्तावेजों की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन यह सुरक्षा वकील के खिलाफ जांच में पूर्ण बाधा नहीं बन सकती। यदि जांच एजेंसियों के सामने प्रथमदृष्टया ऐसी सामग्री हो, जिससे संकेत मिले कि वकील केवल कानूनी सलाहकार की भूमिका तक सीमित नहीं है और खुद जांच के दायरे में आए मामलों में शामिल हो सकता है, तो उसके कार्यालय की तलाशी ली जा सकती है।
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चार्जशीट के बिना तीन महीने से अधिक सरकारी कर्मचारी का निलंबन जारी नहीं रह सकता: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी का निलंबन सामान्य तौर पर तीन महीने से आगे जारी नहीं रखा जा सकता, यदि इस अवधि में उसे चार्जशीट नहीं दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यवाही शुरू किए बिना लंबे समय तक निलंबन जारी रखना उसे दंड के रूप में इस्तेमाल करने जैसा होगा।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) के आदेश को चुनौती दी गई। अधिकरण ने लंबे समय से निलंबित डाक विभाग के कर्मचारी को राहत देते हुए निलंबन समाप्त करने का आदेश दिया।
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फर्जी TET प्रमाणपत्र से मिली नौकरी शुरू से ही शून्य, बर्खास्तगी से पहले नियमित विभागीय जांच जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि सरकारी नियुक्ति जिस प्रमाणपत्र के आधार पर हुई, वह निर्णायक रूप से फर्जी पाया जाता है तो ऐसी नियुक्ति शुरू से ही शून्य मानी जाएगी। ऐसी नियुक्ति को रद्द करना दंडात्मक बर्खास्तगी नहीं है, इसलिए उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत नियमित विभागीय जांच कराना जरूरी नहीं है। जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा कि ऐसे मामलों में कारण बताओ नोटिस देना और प्राकृतिक न्याय के व्यापक सिद्धांतों का पालन करना पर्याप्त है।
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UAPA के तहत संपत्ति कुर्की की पुष्टि के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील हो सकती है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) की धारा 25(6) के तहत आतंकवाद की आय बताकर किसी संपत्ति की जब्ती या कुर्की की पुष्टि करने वाले आदेश को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम, 2008 की धारा 21 के तहत हाईकोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा आदेश अंतरिम प्रकृति का नहीं, बल्कि अंतिम आदेश होता है।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की डिवीजन बेंच ने कहा कि UAPA की धारा 25(6) के तहत संपत्ति की जब्ती या कुर्की की पुष्टि से संबंधित आदेश अपने स्तर पर अंतिम होता है। बाद में इसी संपत्ति को UAPA की धारा 26 के तहत जब्त किया जा सकता है, लेकिन कुर्की की पुष्टि और संपत्ति जब्त किए जाने की प्रक्रिया अलग-अलग चरण हैं।
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मकान-मालिक के साथ बिक्री का समझौता करने से किरायेदारी खत्म नहीं होती और न ही किरायेदार का कब्ज़ा 'पार्ट परफॉर्मेंस' में बदलता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई किरायेदार अपने मकान-मालिक से किराये पर ली गई प्रॉपर्टी खरीदने का समझौता करता है तो सिर्फ़ समझौता करने से किरायेदारी खत्म नहीं होती और न ही इससे किरायेदार का कब्ज़ा 'ट्रांसफर ऑफ़ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882' की धारा 53-A के तहत समझौते के आंशिक पालन (पार्ट परफॉर्मेंस) के तौर पर माना जाता है।
कोर्ट ने कहा कि किरायेदार को यह साबित करना होगा कि किरायेदारी को साफ़ तौर पर या इशारों में खत्म (सरेंडर) कर दिया गया और उसके बाद उसका कब्ज़ा बिक्री के समझौते के आधार पर था।
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आयूष मलिक धर्मांतरण मामला: हाईकोर्ट की पिता को फटकार, कहा- उसने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम अपनाया
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 31 साल के आयुष मलिक को आज़ाद किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम अपनाया और आरोप लगाया कि इसके बाद उनके पिता ने उन्हें धमकाया और गैर-कानूनी तरीके से नज़रबंद करके रखा।
जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि बालिग़ व्यक्ति को आम तौर पर अपनी अंतरात्मा के अनुसार अपना धर्म चुनने का अधिकार है। इस पसंद को "सिर्फ़ इसलिए नहीं बदला जा सकता क्योंकि यह उसके परिवार वालों को मंज़ूर नहीं है"।
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हिंदू मैरिज एक्ट के तहत आपसी सहमति से तलाक, IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता का केस रद्द करने का वैध आधार: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों का बाद में आपसी समझौते से निपटारा और उसके बाद हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13-B के तहत आपसी सहमति से तलाक के ज़रिए शादी खत्म होना, इंडियन पीनल कोड (IPC) की धारा 498A के तहत आपराधिक कार्यवाही रद्द करने के लिए हाईकोर्ट के इनहेरेंट अधिकार क्षेत्र (Inherent Jurisdiction) का इस्तेमाल करने का एक वैध आधार है।
जस्टिस उदय कुमार ने कहा कि जहां वैवाहिक विवाद पूरी तरह से सुलझ गया हो, पार्टियों ने आपसी सहमति से तलाक की डिक्री हासिल कर ली हो और आपराधिक कार्यवाही जारी रखने से कोई फ़ायदा न हो, वहां हाईकोर्ट न्याय सुनिश्चित करने के लिए कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर (CrPC) की धारा 482 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है।
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पति की पहली शादी के बारे में न जानने वाली दूसरी पत्नी पर क्रूरता और दूसरी शादी का केस नहीं चलाया जा सकता: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि जिस महिला को अपने पति की पहली शादी के बारे में जानकारी नहीं थी, उस पर BNS की धारा 82 के तहत बाइगैमी (दूसरी शादी) का केस नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि दूसरी पत्नी "पति के रिश्तेदार" की परिभाषा में नहीं आएगी और उस पर BNS की धारा 85 (जो IPC की धारा 498A के बराबर है) के तहत केस नहीं चलाया जा सकता। [2026 LiveLaw (Mad) 445]
जस्टिस एन. रमेश ने कहा कि यह प्रावधान ऐसे व्यक्ति तक सीमित है, जो पति से खून, शादी या गोद लेने के रिश्ते से जुड़ा हो। कोर्ट ने माना कि दूसरी पत्नी, जिसे पति की पहली शादी के बारे में पता नहीं था, पति की रिश्तेदार नहीं मानी जाएगी। कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसे मामलों में, पति ने दोनों महिलाओं को धोखा दिया है और वे आरोपी और पीड़ित नहीं हैं।
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पैकेज पॉलिसी के तहत यात्रियों को कवर करने पर यात्री के तौर पर यात्रा कर रहे वाहन मालिक को मुआवज़ा पाने का हक: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अगर किसी कॉम्प्रिहेन्सिव/पैकेज इंश्योरेंस पॉलिसी में खास तौर पर यात्रियों को कवर किया गया है तो यात्री के तौर पर यात्रा कर रहे वाहन मालिक को सिर्फ़ इसलिए मुआवज़े से वंचित नहीं किया जा सकता, क्योंकि वह वाहन का मालिक है।
कोर्ट ने पाया कि उस खास इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों में नौ यात्रियों के लिए साफ़ तौर पर कवरेज दिया गया, जिसके लिए अलग से प्रीमियम लिया गया। जस्टिस पंकज पुरोहित मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसने सड़क दुर्घटना में लक्ष्मण सिंह की मौत से जुड़े मुआवज़े का दावा खारिज कर दिया था।
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FIR दर्ज कराने के चरण में मृतक का मीडिया को दिया बयान मृत्यु पूर्व बयान नहीं माना जा सकता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि FIR दर्ज कराने की मांग के चरण में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सामने मृतक द्वारा कथित रूप से दिए गए बयान को निर्णायक रूप से मृत्यु पूर्व बयान नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे बयान की प्रामाणिकता, सामग्री और साक्ष्य के रूप में उसकी अहमियत का निर्धारण सबूतों के आधार पर किया जाना जरूरी है।
जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने मृतक की पत्नी की उस अर्जी को खारिज किया, जिसमें पुलिस अधिकारियों पर उसके पति के साथ मारपीट करने और इसके कारण उसकी मौत होने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई।
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वक्फ बोर्ड नियमों को दरकिनार कर एड हॉक समिति नहीं बना सकता: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट की धारवाड़ पीठ ने कहा कि वक्फ बोर्ड वैधानिक प्रक्रिया को दरकिनार कर किसी वक्फ संस्था के प्रबंधन के लिए अपनी मर्जी से एड हॉक समिति नियुक्त नहीं कर सकता। हाईकोर्ट ने राज्य वक्फ बोर्ड की ओर से 11 महीने के लिए बनाई गई 11 सदस्यीय तदर्थ समिति से संबंधित कार्यालय ज्ञापन रद्द किया। जस्टिस सचिन शंकर मगदुम ने मुडलगि की बज्मे तौहीद तंजीम समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
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UP Municipalities Act | निजी ज़मीन पर भी मवेशी बाज़ार के लिए लाइसेंस देने का अधिकार नगर पंचायत के पास: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नगर पंचायत के पास उत्तर प्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1916 के तहत अपनी स्थानीय सीमा के भीतर मवेशी बाज़ारों को लाइसेंस देने और उन्हें रेगुलेट करने का अधिकार है। कोर्ट ने मवेशी बाज़ार लगाने के लिए दिए गए लाइसेंस को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह बात कही।
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिसंबर 2025 और मार्च 2026 के आदेशों को चुनौती दी गई। इन आदेशों में प्रतिवादी नंबर 7 को मथुरा ज़िले के महावन शहर में एक जगह पर बुधवार और शनिवार को मवेशी बाज़ार लगाने की मंज़ूरी दी गई।
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बड़े पैमाने पर चलने वाले बूचड़खाने के लिए रेगुलर FSSAI लाइसेंस ज़रूरी, सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट काफ़ी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'छोटे फ़ूड बिज़नेस' (Petty Food Business) के लिए तय क्षमता से ज़्यादा क्षमता पर चलने वाले बड़े पैमाने के बूचड़खाने के लिए 'फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006' (FSSAI) के तहत रेगुलर लाइसेंस की ज़रूरत होती है और सिर्फ़ रजिस्ट्रेशन सर्टिफ़िकेट से ऐसी गतिविधि की इजाज़त नहीं मिल सकती।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 19(1)(g) के तहत व्यापार या कारोबार करने का मौलिक अधिकार, फ़ूड सेफ़्टी और पब्लिक हेल्थ के हित में लागू वैध लाइसेंसिंग की ज़रूरत को खत्म नहीं करता है।
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सीनियर सिटिज़न के अपने बच्चे ज़िंदा हों तो भरण-पोषण के लिए बहू ज़िम्मेदार नहीं: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि 'माता-पिता और सीनियर सिटिज़न के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत बहू तब ज़िम्मेदार नहीं है, जब सीनियर सिटिज़न के बच्चे ज़िंदा हों। [2026 LiveLaw (Ker) 499] जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने कहा कि जब सीनियर सिटिज़न के दूसरे बच्चे हों तो बहू इस अधिनियम के तहत 'बच्चे' या 'रिश्तेदार' की परिभाषा में नहीं आएगी।
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S.164 Electricity Act | पावर ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए ज़मीन मालिक की मंज़ूरी ज़रूरी नहीं, मुआवज़े का अधिकार बना रहेगा: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि बिजली ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए ज़मीन मालिक की पहले से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं है, अगर बिजली कंपनी को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 164 के तहत टेलीग्राफ अथॉरिटी की शक्तियां दी गई हैं। [2026 LiveLaw (MP) 366]
एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीज़न बेंच ने साफ़ किया कि एक बार ऐसी शक्तियां मिल जाने के बाद कंपनी इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 (ITA) की धारा 10 और 16 के तहत टेलीग्राफ अथॉरिटी को मिली शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है।