हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों के आधार पर पंचायत समिति अध्यक्ष का चुनाव नहीं रोक सकता SDM: हिमाचल हाईकोर्ट

Amir Ahmad

3 Sept 2026 12:13 PM IST

  • हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों के आधार पर पंचायत समिति अध्यक्ष का चुनाव नहीं रोक सकता SDM: हिमाचल हाईकोर्ट

    हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव केवल इस आधार पर नहीं रोका जा सकता कि चुनाव में कथित खरीद-फरोख्त या धनबल के इस्तेमाल की शिकायत की पुलिस जांच चल रही है। कोर्ट ने SDM की ओर से चुनाव टालने की कार्रवाई को पूरी तरह अस्वीकार्य, स्पष्ट रूप से अवैध और कानून के शासन के विपरीत बताया।

    जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ ने कहा कि पंचायत समिति, इंदौरा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव रोकने के लिए SDM की कार्रवाई का कोई वैधानिक आधार नहीं था। अधिकारी ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में मिली शक्तियों से आगे जाकर कार्रवाई की और संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन किया।

    मामला कांगड़ा जिले की पंचायत समिति इंदौरा का है। मई 2026 में हुए पंचायती राज चुनाव के बाद 26 सदस्य निर्वाचित हुए। सभी निर्वाचित सदस्यों ने 8 जून 2026 को शपथ भी ले ली थी लेकिन इसके बाद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं कराया गया।

    निर्वाचित सदस्यों में से एक अंकुश इंदौरिया ने हाईकोर्ट का रुख किया। याचिका में कहा गया कि संबंधित अधिकारियों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए बैठक बुलाने की अपनी वैधानिक जिम्मेदारी पूरी नहीं की।

    चुनाव टालने को लेकर उपमंडल अधिकारी ने दलील दी कि चुनाव में खरीद-फरोख्त, धन का प्रलोभन देने और सदस्यों को प्रभावित करने के प्रयासों की शिकायत SDPO, इंदौरा के समक्ष जांच के लिए लंबित है। इसी आधार पर चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई।

    हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 79 के तहत निर्वाचित सदस्यों के शपथ लेने के तुरंत बाद पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव कराया जाना जरूरी है।

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव नियमों के नियम 85(1-ए) में निर्धारित सात दिन की अवधि को बाद में हटा दिया गया लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अधिनियम की धारा 79 के तहत चुनाव कराने की मूल वैधानिक बाध्यता समाप्त हो गई।

    कोर्ट ने कहा कि चुनाव में कथित खरीद-फरोख्त या धनबल की जांच लंबित होने को चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि शिकायत करने वाला व्यक्ति पंचायत समिति का निर्वाचित सदस्य नहीं था और किसी भी निर्वाचित सदस्य ने ऐसी शिकायत नहीं की थी।

    हाईकोर्ट ने कहा कि पंचायती राज अधिनियम में चुनाव को चुनौती देने के लिए अलग और स्पष्ट व्यवस्था मौजूद है। चुनाव के बाद चुनाव याचिका के माध्यम से भ्रष्ट आचरण जैसे आधारों पर चुनाव को चुनौती दी जा सकती है और उचित स्थिति में उसे रद्द भी कराया जा सकता है। इसलिए ऐसी शिकायत को आधार बनाकर कार्यकारी अधिकारी चुनाव को ही टाल नहीं सकता।

    राज्य की ओर से कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में एसडीएम को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत मिली शक्तियों का भी हवाला दिया गया। हाईकोर्ट ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि BNSS की धारा 14 और धारा 31 से 33 ऐसी परिस्थिति पर लागू नहीं होतीं और इन प्रावधानों से SDM को पंचायती राज अधिनियम और चुनाव नियमों की स्पष्ट व्यवस्था को दरकिनार कर चुनाव रोकने का अधिकार नहीं मिलता।

    कोर्ट ने कहा कि SDM की निष्क्रियता से लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई संस्था का कामकाज प्रभावित हुआ और मतदाताओं की इच्छा कमजोर हुई। वैधानिक आधार के बिना चुनावी प्रक्रिया में कार्यपालिका का हस्तक्षेप संवैधानिक व्यवस्था और स्थानीय स्वशासन की लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है।

    हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि बाद में अधिकारियों ने 13 अगस्त 2026 को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए बैठक की तारीख तय कर दी थी। इसके बाद कोर्ट ने अधिकारियों को कानून के अनुसार बैठक बुलाकर चुनाव कराने का निर्देश दिया और याचिका का निपटारा कर दिया।

    फैसले में हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों की जांच अपनी जगह चल सकती है, लेकिन केवल ऐसी जांच लंबित होने के आधार पर पंचायत समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव रोकने का अधिकार SDM के पास नहीं है।

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