'सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट' एक्सपायर होने पर शादी से इनकार नहीं कर सकता विवाह अधिकारी: केरल हाईकोर्ट

Praveen Mishra

31 Aug 2026 3:35 PM IST

  • सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट एक्सपायर होने पर शादी से इनकार नहीं कर सकता विवाह अधिकारी: केरल हाईकोर्ट

    केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह अधिकारी केवल इस आधार पर विवाह कराने से इनकार नहीं कर सकता कि विदेशी नागरिक द्वारा प्रस्तुत किया गया 'सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट' एक्सपायर हो चुका है।

    जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने एक नेपाली महिला से विवाह करने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए विवाह अधिकारी को नोटिस ऑफ इंटेंडेड मैरिज के आधार पर विवाह संपन्न कराने की अनुमति देने का निर्देश दिया।

    क्या था मामला?

    याचिकाकर्ता ने एक नेपाली नागरिक महिला से विवाह करने के इरादे से विशेष विवाह अधिनियम के तहत नोटिस जमा किया था। इसके साथ नेपाल दूतावास द्वारा जारी 'सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट' भी लगाया गया था।

    हालांकि, विवाह अधिकारी ने यह कहते हुए विवाह कराने से इनकार कर दिया कि प्रस्तुत सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट की वैधता समाप्त हो चुकी है।

    इसके बाद याचिकाकर्ता ने केरल हाईकोर्ट का रुख किया।

    सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट अनिवार्य नहीं

    याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के दो पूर्व फैसलों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया था कि विशेष विवाह अधिनियम के तहत विवाह पंजीकरण के लिए सिंगल स्टेटस सर्टिफिकेट पर जोर नहीं दिया जा सकता।

    राज्य सरकार की ओर से पेश सरकारी वकील ने भी स्वीकार किया कि कानून में ऐसा कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है, जिसके तहत इस प्रमाणपत्र की मांग की जानी जरूरी हो।

    हाईकोर्ट ने क्या कहा?

    दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने संबंधित सब-रजिस्ट्रार/विवाह अधिकारी को निर्देश दिया कि वह नोटिस बोर्ड पर प्रकाशित विवाह संबंधी नोटिस के आधार पर याचिकाकर्ता को विवाह संपन्न करने की अनुमति दें।

    कोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को उसके आवेदन के अनुसार विवाह solemnize करने दिया जाए।

    इसके साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।

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    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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