दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज़ नहीं: राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप वाली याचिका खारिज

Shahadat

2 Sept 2026 8:33 PM IST

  • दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज़ नहीं: राहुल गांधी के ब्रिटिश नागरिक होने के आरोप वाली याचिका खारिज

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते उस रिट याचिका को वापस लेने की अनुमति दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं।

    इस याचिका में रायबरेली से लोकसभा सदस्य का पद संभालने के गांधी के अधिकार पर भी सवाल उठाया गया। याचिकाकर्ताओं द्वारा याचिका में लगाए गए आरोपों और दावों के समर्थन में एक भी दस्तावेज़ पेश न कर पाने के बाद इसे वापस लेने की अनुमति देते हुए खारिज कर दिया गया।

    जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की बेंच वकील अशोक पांडे और एक अन्य व्यक्ति द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस याचिका में राहुल गांधी (जिन्हें याचिका में "श्री राहुल गांधी @ राउल विंची" कहा गया) के खिलाफ 'को वारंटो' (अधिकार-पृच्छा) रिट जारी करने की मांग की गई।

    यह याचिका इस "अनुमानित आधार" पर आधारित थी कि वे भारतीय नागरिक नहीं, बल्कि ग्रेट ब्रिटेन के नागरिक हैं।

    कोर्ट ने गौर किया कि याचिकाकर्ताओं ने पहले 2015 और 2019 में भी ऐसी ही रिट याचिकाएं दायर की थीं, जिनमें राहुल गांधी की कथित तौर पर भारतीय नागरिकता खत्म होने का मुद्दा उठाया गया और उन्हें ब्रिटिश नागरिक घोषित करने की मांग की गई।

    कोर्ट ने पाया कि 2015 की याचिका में एक समान बेंच ने कहा कि नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(2) के तहत ऐसी शिकायत का समाधान केंद्र सरकार के पास ही हो सकता है।

    कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि 2019 की कार्यवाही में इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के पास पहले ही अभ्यावेदन (रिप्रेजेंटेशन) दायर किया जा चुका था और उस पर विचार किया जाना अभी बाकी था।

    कोर्ट ने यह भी गौर किया कि याचिकाकर्ता नंबर 2 का अभ्यावेदन 3 मई, 2019 को दायर किया गया और केंद्र सरकार ने 29 जून, 2019 को इसकी प्राप्ति स्वीकार की थी। इस मामले के लंबित रहने के दौरान, याचिकाकर्ताओं ने कई अधिकारियों से संपर्क किया, जिसमें 2024 के आम चुनावों के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर भी शामिल थे।

    इस पृष्ठभूमि में, कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ताओं ने फिर से हाईकोर्ट का रुख किया और तर्क दिया कि चूंकि सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनके अभ्यावेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, इसलिए कोर्ट को खुद इस मुद्दे पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।

    हालांकि, बेंच ने पाया कि कम से कम चार रिट याचिकाओं में पहले ही ऐसी ही मांगें की जा चुकी थीं। इसके बावजूद, जब याचिकाकर्ता ने खुद बेंच के सामने अपना पक्ष रखने पर ज़ोर दिया तो कोर्ट ने उनकी बात सुनी।

    मुख्य दलील यह थी कि राहुल गांधी ने 21 अगस्त 2003 को ब्रिटेन के 'रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़' (कंपनीज़ हाउस) में यूके की एक कंपनी, M/s बैकऑप्स लिमिटेड (Backops Limited) बनाई।

    याचिकाकर्ताओं के अनुसार, राहुल गांधी ने कथित तौर पर खुद को कंपनी का डायरेक्टर और मुख्य शेयरहोल्डर, और साथ ही ब्रिटिश नागरिक बताया। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि वे भारतीय नागरिक बने रहकर लोकसभा सदस्यता के लिए चुनाव कैसे लड़ सकते हैं।

    इन दलीलों पर विचार करते हुए कोर्ट ने कहा कि हालांकि यह तर्क आकर्षक लग रहा था, लेकिन याचिकाकर्ता अपने मामले को दस्तावेज़ी सबूतों से साबित करने में नाकाम रहे।

    आगे कहा गया,

    "...हालांकि, जब उनसे उनकी इस दलील का आधार पूछा गया तो याचिकाकर्ता रिकॉर्ड पर ऐसा कोई भी दस्तावेज़ नहीं दिखा सके, जो कंपनी के गठन, ब्रिटेन के रजिस्ट्रार ऑफ़ कंपनीज़ के रिकॉर्ड, या इस बात की किसी घोषणा से संबंधित हो कि राहुल गांधी उर्फ़ राउल विंची ने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया।"

    बेंच ने गौर किया कि याचिकाकर्ता ने जिस एकमात्र दस्तावेज़ का सहारा लिया, वह कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी द्वारा जारी किया गया एक कथित कन्फर्मेशन लेटर था, जिसमें राउल विंची की पढ़ाई की पुष्टि की गई। कोर्ट ने कहा कि यह दस्तावेज़ मौजूदा याचिका में लगाए गए किसी भी आरोप को किसी भी तरह से साबित नहीं करता।

    समर्थन में दस्तावेज़ न दिखा पाने के कारण याचिकाकर्ता नंबर 2 ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और रिट याचिका को वापस ली गई मानकर खारिज कर दिया।

    Case title - Ashok Pandey And Another vs. Sri Rahul Gandhi @ Raul Vinci New Delhi And 2 Others 2026 LiveLaw (AB) 646

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