हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (10 अगस्त, 2026 से 14 अगस्त, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
प्रमोशन से पिछली खराब एंट्रीज़ खत्म नहीं होतीं, अनिवार्य रिटायरमेंट के लिए पूरा सर्विस रिकॉर्ड ज़रूरी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी के अनिवार्य रिटायरमेंट के मामले पर विचार करते समय, प्रमोशन से पहले मिली खराब एंट्रीज़ (Adverse Entries) प्रमोशन के बाद खत्म नहीं हो जातीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मूल्यांकन में पूरे सर्विस रिकॉर्ड को देखा जाना चाहिए और ईमानदारी से जुड़ी एक भी एंट्री कर्मचारी को अनिवार्य रूप से रिटायर करने के लिए काफ़ी हो सकती है।
जस्टिस अनीश कुमार गुप्ता ने कहा, “..स्थापित स्थिति यह है कि सरकारी कर्मचारी के अनिवार्य रिटायरमेंट के मामले पर विचार करने के लिए पूरे रिकॉर्ड को देखना ज़रूरी है और यह भी देखा गया है कि ईमानदारी के संबंध में एक भी एंट्री किसी व्यक्ति को अनिवार्य रूप से रिटायर करने के लिए काफ़ी है।”
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश: अवध बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए 30% आरक्षण; 2028 से रोटेशन के आधार पर अध्यक्ष का पद आरक्षित
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को आदेश दिया कि अवध बार एसोसिएशन, हाईकोर्ट, लखनऊ की गवर्निंग/एग्जीक्यूटिव काउंसिल में 30% पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाएं। हाईकोर्ट ने पद-वार आरक्षण और रोटेशन का शेड्यूल भी तय किया, जिसके तहत 2028 से हर 3 साल में अध्यक्ष का पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा।
जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की बेंच ने अवध बार एसोसिएशन में महिला वकीलों के लिए आरक्षण से जुड़ी दो PIL याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।
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Income Tax Act | S.245D(4A) के तहत सेटलमेंट एप्लीकेशन पर फ़ैसला लेने के लिए 18 महीने की समय-सीमा अनिवार्य, न केवल निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट
लखनऊ में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 245D(4A)(iii) के तहत सेटलमेंट एप्लीकेशन के निपटारे के लिए तय 18 महीने की अवधि अनिवार्य है, न कि केवल एक निर्देश। कोर्ट ने उस अवधि के खत्म होने के बाद 'इंटरिम बोर्ड फॉर सेटलमेंट' (IBS) द्वारा पारित आदेश रद्द किया।
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 245D(4A)(iii) के अनुसार, 1 जून 2010 या उसके बाद दी गई एप्लीकेशन के मामले में, जिस महीने में एप्लीकेशन दी गई, उसके खत्म होने के अठारह महीने के भीतर धारा 245D(4) के तहत आदेश पारित किया जाना ज़रूरी है।
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NEET-UG 2026: नतीजे घोषित होने के बाद उम्मीदवार EWS आरक्षण का दावा नहीं कर सकते: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि जिन उम्मीदवारों ने NEET-UG 2026 के लिए जनरल अनरिजर्व्ड या OBC-NCL कैटेगरी के तहत आवेदन किया, वे नतीजे घोषित होने और काउंसलिंग शुरू होने के बाद इकोनॉमिकली वीकर सेक्शन (EWS) कैटेगरी के तहत आरक्षण का दावा नहीं कर सकते।
जस्टिस अमृता सिन्हा ने कहा कि काउंसलिंग के चरण में उम्मीदवारों को अपनी कैटेगरी बदलने की अनुमति देने से ऑल-इंडिया मेरिट लिस्ट प्रभावित होगी और उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा जिन्होंने NEET आवेदन जमा करते समय अपना EWS स्टेटस बताया था।
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साइबर फ्रॉड में पूरे बैंक खाते को फ्रीज नहीं कर सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि साइबर फ्रॉड के मामले में यदि जांच एजेंसी ने केवल एक निश्चित राशि को विवादित बताया है, तो पूरे बैंक खाते को फ्रीज नहीं किया जा सकता। केवल विवादित रकम पर ही लियन लगाया जा सकता है।
जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अब्धेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कारोबारी रितेश यादव के मामले में यह आदेश दिया। उनके खाते में ₹36,000 के विवादित लेनदेन के बाद कई बैंक खातों पर डेबिट फ्रीज लगा दिया गया था।
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दोबारा नौकरी के लिए अप्लाई करने वाले रिटायर हो चुके आर्म्ड फोर्सेस के कर्मचारी एक्स-सर्विसमैन का दर्जा पाने के हकदार: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार की डिवीज़न बेंच ने कहा कि रिटायर हो चुके आर्म्ड फोर्सेस के कर्मचारी, जो तय सर्विस पूरी करने के बाद दोबारा नौकरी के लिए अप्लाई करते हैं, वे एक्स-सर्विसमैन का दर्जा पाने के हकदार हैं। बाद में नए कारण बताकर उनकी योग्यता को नकारा नहीं जा सकता।
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'बेटे' में सौतेला बेटा भी शामिल, मकान मालिक सौतेले बेटे की असली ज़रूरत के आधार पर किरायेदार को बेदखल कर सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एक्ट की धारा 2 के तहत परिवार के सदस्य की परिभाषा में सौतेला बेटा भी शामिल है। इसलिए एमपी अकोमोडेशन कंट्रोल एक्ट, 1961 की धारा 12(1) के तहत बेदखली के मकसद से उसे 'बेटा' ही माना जाएगा। [2026 LiveLaw (MP) 323]
किरायेदार के खिलाफ बेदखली के मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को बहाल करते हुए जस्टिस आशीष श्रोती की बेंच ने कहा कि मकान मालिक खुद के लिए या परिवार के किसी अन्य सदस्य (जिसमें सौतेला बेटा भी शामिल है) की असली ज़रूरत के आधार पर किरायेदार को बेदखल करने की मांग कर सकता है।
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RTE के शिक्षक-छात्र अनुपात से शिक्षकों की स्थानांतरण नीति को चुनौती नहीं दी जा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी शिक्षक को स्थानांतरण का कोई अंतर्निहित वैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। स्थानांतरण के मामले में शिक्षक को वही अधिकार मिल सकते हैं, जो सरकार की स्थानांतरण नीति के तहत दिए गए हों।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के अंतर-जिला स्थानांतरण की नीति लागू करने के लिए तैयार की गई जिला-वार छात्र-शिक्षक अनुपात की सूची का शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की अनुसूची से कोई संबंध नहीं है।
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वोटर लिस्ट में जीवनसाथी का नाम होना वैध हिंदू विवाह का सबूत नहीं: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट में जीवनसाथी के तौर पर किसी व्यक्ति का नाम होने से ही वैध हिंदू विवाह साबित नहीं होता। जहां विवाह पर ही विवाद हो, वहां दावा करने वाले पक्ष को यह साबित करना होगा कि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 7 के तहत ज़रूरी रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ संपन्न हुआ था।
जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस राणा विक्रम सिंह की डिवीजन बेंच ने एक महिला की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। महिला ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें कहा गया कि वह प्रतिवादी की कानूनी रूप से विवाहित पत्नी नहीं है।
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पति की स्वेच्छा से लिए गए कर्ज से पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी कम नहीं होगी: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि पति द्वारा भविष्य में संपत्ति बनाने के उद्देश्य से लिया गया स्वैच्छिक कर्ज सामान्यतः पत्नी के भरण-पोषण या स्थायी गुजारा भत्ते की जिम्मेदारी को कम करने का आधार नहीं बन सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संपत्ति निर्माण के लिए लिए गए कर्ज की किस्तों को पति की आय से केवल इस आधार पर घटाकर नहीं देखा जा सकता कि इससे उसकी उपलब्ध आय कम हो गई ।
जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एक वैवाहिक अपील पर सुनवाई करते हुए की। पति ने फैमिली कोर्ट द्वारा उसकी तलाक की याचिका खारिज किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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Fair Compensation Act | राज्य सरकार के पास कानूनी अधिकार के बिना ज़मीन अधिग्रहण रद्द होने पर DM के अर्ध-न्यायिक आदेश पर रोक लगाने की शक्ति नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013' की धारा 24 के तहत अधिग्रहण के रद्द होने (lapse) के दावे पर ज़िला मजिस्ट्रेट (DM) का फ़ैसला अर्ध-न्यायिक प्रकृति का होता है, और राज्य सरकार किसी कार्यकारी आदेश से उस पर रोक नहीं लगा सकती या उसे रद्द नहीं कर सकती। कोर्ट ने कहा कि धारा 24 राज्य सरकार को समीक्षा (review) की कोई शक्ति नहीं देती है।
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गन लाइसेंस पाना मौलिक अधिकार नहीं, नौकरी की ज़रूरत से लाइसेंस रिन्यूअल का हक नहीं मिलता: गुवाहाटी हाईकोर्ट
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने कहा कि गन लाइसेंस पाने या उसे रिन्यू कराने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने माना कि आर्म्स एक्ट, 1959 के तहत लाइसेंस मिलना सिर्फ़ एक कानूनी सुविधा है। जस्टिस संजय कुमार मेधी की सिंगल बेंच ने तीन लोगों की याचिका खारिज करते हुए यह बात कही। इन लोगों का दावा था कि गन लाइसेंस की मियाद खत्म होने से वे बेरोजगार हो गए, क्योंकि उनके काम के लिए लाइसेंस की ज़रूरत थी।
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मजिस्ट्रेट कस्टडी में हुई मौत के लिए ज़िम्मेदार लोगों का नाम बता सकते हैं, CrPC की धारा 176(1A) के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दे सकते हैं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि कस्टडी में हुई मौत की जांच CrPC की धारा 176(1A) के तहत करने वाले ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट का काम सिर्फ़ मौत का कारण पता करना ही नहीं है, बल्कि वे उन लोगों की पहचान करने के लिए भी अधिकृत हैं, जो पहली नज़र में कस्टडी में हुई मौत के लिए ज़िम्मेदार हैं और उनके ख़िलाफ़ FIR दर्ज करने का निर्देश भी दे सकते हैं। [2026 LiveLaw (MP) 319]
जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने धार ज़िला जेल के सुपरिटेंडेंट और डॉक्टरों की एक टीम द्वारा दायर रिट याचिकाओं को खारिज करते हुए ये टिप्पणियां कीं। इन याचिकाओं में जेल के एक कैदी की कथित कस्टडी में हुई मौत के संबंध में न्यायिक जांच रिपोर्ट और उसके बाद दर्ज FIR को चुनौती दी गई।
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विधवा द्वारा गोद लिए गए बच्चे को उसके मृत पति की संपत्ति का अधिकार मिल सकता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिर से कहा कि पति की मौत के बाद विधवा द्वारा गोद लिए गए बेटे को मृत पति का भी गोद लिया हुआ बेटा माना जाएगा और उसे पति का हिस्सा मिलेगा। 'सुभाष मिसिर (श्री जनार्दन तिवारी के संरक्षण में) बनाम ठगाई मिसिर' मामले में हाई कोर्ट के पहले के फैसले का पालन करते हुए, जस्टिस चंद्र कुमार राय ने कहा, "इस कोर्ट ने 1966 RD 255 'सुभाष मिसिर (श्री जनार्दन तिवारी के संरक्षण में) बनाम ठगाई मिसिर' मामले में यह माना है कि पति की मौत के बाद विधवा द्वारा गोद लिए गए बेटे को पति का भी गोद लिया हुआ बेटा माना जाएगा।"
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जो वकील प्रोविज़नल एनरोलमेंट के 2 साल के अंदर AIBE पास नहीं कर पाते, वे प्रैक्टिस जारी नहीं रख सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि जिन वकीलों ने 2009-10 या उसके बाद के एकेडमिक सेशन में लॉ की डिग्री ली और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में प्रोविज़नल तौर पर एनरोल हुए वे प्रोविज़नल एनरोलमेंट के 2 साल के अंदर ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) पास न करने पर प्रैक्टिस जारी नहीं रख सकते।
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कहा कि अगर ऐसे वकील 2 साल की अवधि में AIBE पास नहीं कर पाते हैं तो वे "किसी भी कोर्ट, ट्रिब्यूनल या किसी अन्य अथॉरिटी" में प्रैक्टिस करने के हकदार नहीं होंगे।