Income Tax Act | S.245D(4A) के तहत सेटलमेंट एप्लीकेशन पर फ़ैसला लेने के लिए 18 महीने की समय-सीमा अनिवार्य, न केवल निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट

Shahadat

15 Aug 2026 10:45 AM IST

  • Income Tax Act | S.245D(4A) के तहत सेटलमेंट एप्लीकेशन पर फ़ैसला लेने के लिए 18 महीने की समय-सीमा अनिवार्य, न केवल निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    लखनऊ में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 245D(4A)(iii) के तहत सेटलमेंट एप्लीकेशन के निपटारे के लिए तय 18 महीने की अवधि अनिवार्य है, न कि केवल एक निर्देश। कोर्ट ने उस अवधि के खत्म होने के बाद 'इंटरिम बोर्ड फॉर सेटलमेंट' (IBS) द्वारा पारित आदेश रद्द किया।

    इनकम टैक्स एक्ट की धारा 245D(4A)(iii) के अनुसार, 1 जून 2010 या उसके बाद दी गई एप्लीकेशन के मामले में, जिस महीने में एप्लीकेशन दी गई, उसके खत्म होने के अठारह महीने के भीतर धारा 245D(4) के तहत आदेश पारित किया जाना ज़रूरी है।

    उस अवधि के खत्म होने के बाद 'इंटरिम बोर्ड फॉर सेटलमेंट' द्वारा पारित आदेश को रद्द करते हुए जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने कहा:

    "सेटलमेंट एप्लीकेशन के निपटारे के लिए धारा 245D(4A)(iii) के तहत तय अवधि अनिवार्य है और यह अवधि तब शुरू होती है जब याचिकाकर्ता की एप्लीकेशन सबसे पहले IBS-III, दिल्ली को सौंपी गई और उस पर कार्रवाई शुरू हुई।"

    4 अक्टूबर 2018 को एक्ट की धारा 132 के तहत बी.एल. एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के परिसर में तलाशी और ज़ब्ती की कार्रवाई की गई, जिसके बाद धारा 153A और 143(2) के तहत नोटिस जारी किए गए। फाइनेंस एक्ट, 2021 द्वारा इनकम टैक्स सेटलमेंट कमीशन को खत्म किए जाने के बाद हाईकोर्ट से मिली अनुमति के आधार पर 23 मार्च 2021 को कंपनी की सेटलमेंट एप्लीकेशन दाखिल की गई। इसे धारा 245A(eb) के तहत लंबित एप्लीकेशन माना गया और 'इंटरिम बोर्ड फॉर सेटलमेंट-III, दिल्ली' को सौंप दिया गया। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेस ने 13 जून 2022 के आदेश से इसे इंटरिम बोर्ड फ़ॉर सेटलमेंट-VII, चेन्नई को ट्रांसफ़र कर दिया। चेन्नई बोर्ड ने 30 अक्टूबर 2023 के आदेश से सेक्शन 245D(4) के तहत सेटलमेंट एप्लीकेशन खारिज की और 15 दिसंबर 2023 को सुधार (Rectification) एप्लीकेशन को भी खारिज किया, बिना इस आपत्ति पर विचार किए कि आदेश समय-सीमा (Limitation) के कारण अमान्य था। दोनों आदेशों को आर्टिकल 226 के तहत हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।

    याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि अठारह महीने की अवधि अनिवार्य थी और इंटरिम बोर्ड के बीच बाद में हुए ट्रांसफ़र से इसे बदला नहीं जा सकता। तर्क दिया गया कि समय-सीमा के बाद पारित आदेश अधिकार-क्षेत्र से बाहर और कानून की नज़र में शून्य (non est) था, और धारा 245HA(1)(iiia) के तहत परिकल्पित परिणामों का आधार नहीं बन सकता था।

    इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कहा कि धारा 245D(4A)(iii) के तहत निर्धारित अवधि केवल निर्देश के तौर पर थी, अनिवार्य नहीं, और भले ही इसके बाद कोई आदेश पारित किया गया हो, कार्यवाही धारा 245HA के तहत समाप्त (abate) हो जाएगी।

    कोर्ट ने माना कि धारा 245D(4A) के तहत निर्धारित समय-सीमा पर कानून कर्नाटक हाईकोर्ट के RNS इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड बनाम इनकम टैक्स सेटलमेंट कमिश्नर के फ़ैसले से तय हो चुका था, जिसमें समय-सीमा के बाद पारित आदेश रद्द कर दिया गया। कोर्ट ने गौर किया कि फ़ैसले में कहा गया कि सेटलमेंट कमीशन को निर्धारित अवधि के भीतर एप्लीकेशन का निपटारा करना चाहिए, सिवाय उन मामलों के जहाँ आवेदक के कारणों से देरी हुई हो; ऐसा न होने पर कार्यवाही धारा 245HA(1)(iv) के तहत समाप्त हो जाएगी, और यह अवधि अनिवार्य है, न कि केवल निर्देश के तौर पर।

    कोर्ट ने आगे गौर किया कि अठारह महीने के बाद पारित आदेश समय-सीमा के कारण अमान्य (Time-Barred) और शून्य (Nullity) होगा, उस फ़ैसले को उसी कोर्ट की डिवीज़न बेंच ने बरकरार रखा, और सुप्रीम कोर्ट में दायर स्पेशल लीव पिटीशन खारिज कर दी गई। कोर्ट ने माना कि चेन्नई बोर्ड का आदेश एक्ट की धारा 245D(4A)(iii) के साथ धारा 245D(9)(iii) और 245M(2) के तहत तय अठारह महीने की अनिवार्य समय-सीमा के बाद जारी किया गया। इसलिए कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2023 के आदेश और उसके बाद 15 दिसंबर 2023 को जारी आदेश को रद्द कर दिया और रिट याचिका को मंज़ूरी दी।

    कोर्ट ने साफ़ किया,

    "हमने सिर्फ़ सेटलमेंट एप्लीकेशन के निपटारे के लिए समय-सीमा के मुद्दे पर विचार किया। हमने इस मुद्दे पर कोई राय नहीं दी है कि कार्यवाही खत्म (abate) होगी या नहीं, और न ही कार्यवाही खत्म होने के नतीजों पर कोई बात की है।"

    कोर्ट ने आगे कहा कि चूंकि कार्यवाही खत्म होने के नतीजों पर कोई विचार नहीं किया गया, इसलिए उस मुद्दे पर 'रेस जुडिकाटा' (res judicata) और 'कंस्ट्रक्टिव रेस जुडिकाटा' (constructive res judicata) के सिद्धांत लागू नहीं होंगे।

    Case Title: M/s B.L. Agro Industries Limited, Bareilly Thru. Mr. Amit Kumar Authorised Signatory v. Union of India Ministry of Finance Deptt. Revenue Govt. of India New Delhi Thru. Secy. and others

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