हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (16 फरवरी, 2026 से 20 फरवरी, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
घर के पास सार्वजनिक मूत्रालय और खुला कूड़ादान अनुच्छेद 21 का उल्लंघन: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के घर के ठीक पास सार्वजनिक मूत्रालय और खुला कूड़ादान होना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त गरिमापूर्ण जीवन और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण के अधिकार का उल्लंघन है। जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि स्वस्थ जीवन का अभिन्न पहलू स्वच्छ और स्वच्छतापूर्ण वातावरण है। इसके अभाव में व्यक्ति के गरिमा के साथ जीने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
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उचित समय में मकान न बनाने पर आवासीय पट्टा निरस्त कर सकता है कलेक्टर: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने कहा कि यदि आवंटित आवासीय भूखंड पर उचित समय के भीतर मकान का निर्माण नहीं किया जाता है तो कलेक्टर को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता नियमावली 2016 के नियम 64(2)(ख) के तहत पट्टा निरस्त करने का अधिकार है, बशर्ते संबंधित पक्ष को पूर्व सूचना दी गई हो।
जस्टिस आलोक माथुर ने कहा, “आवासीय भूखंडों के आवंटन संबंधी प्रावधानों को प्रभावी बनाने और उनका पालन सुनिश्चित करने के लिए यह आवश्यक है कि भूमि का उपयोग उचित समय के भीतर मकान निर्माण के लिए किया जाए। यदि किसी कारणवश पट्टाधारी मकान निर्माण नहीं कर पाता है तो उसे निर्धारित समय में निर्माण करने के लिए नोटिस दिया जाना चाहिए। यदि वह निर्धारित समय में भी निर्माण नहीं करता है तो कलेक्टर नियम 64 के उपखंड (2)(ख) के तहत पट्टा निरस्त करने की शक्ति का प्रयोग कर सकता है।”
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पति के वेतन का विवरण व्यक्तिगत सूचना, पत्नी की RTI याचिका खारिज: राजस्थान हाइकोर्ट
राजस्थान हाइकोर्ट ने राज्य सरकार का आदेश बरकरार रखा, जिसमें पत्नी द्वारा दायर सूचना अधिकार (RTI) आवेदन के तहत पति के वेतन संबंधी विवरण देने से इनकार किया गया था। अदालत ने कहा कि किसी कर्मचारी के वेतन और सेवा संबंधी विवरण व्यक्तिगत सूचना की श्रेणी में आते हैं।
मामले में याचिकाकर्ता ने संबंधित विभाग में कार्यरत अपने पति के एक निश्चित अवधि के वेतन पर्ची और वेतन भुगतान का विवरण मांगा। राज्य ने यह कहते हुए सूचना देने से इनकार किया कि मांगी गई जानकारी व्यक्तिगत प्रकृति की है, जो एक तृतीय पक्ष से संबंधित है और सूचना अधिकार के तहत अपवाद में आती है। इसके बाद याचिका हाइकोर्ट में दायर की गई।
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पैतृक या विरासत में मिली संपत्ति भी धन शोधन कानून के तहत कुर्क हो सकती है: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पैतृक या विरासत में मिली संपत्तियां भी धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 (PMLA) के तहत कुर्क की जा सकती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून में ऐसी संपत्तियों को कोई विशेष छूट नहीं दी गई।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडे़जा की खंडपीठ ने अरुण सूरी द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अपील में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पीतमपुरा स्थित एक आवासीय संपत्ति की कुर्की को चुनौती दी गई।
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पति द्वारा पत्नी को बिना बताए माता-पिता के घर रात भर रुकने पर थप्पड़ मारने की 'एक घटना' क्रूरता नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि पति द्वारा अपनी पत्नी को बिना बताए माता-पिता के घर रात भर रुकने पर थप्पड़ मारने की "एक घटना" IPC की धारा 498A के तहत क्रूरता नहीं मानी जाएगी। 23 साल बाद क्रूरता और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी पति को बरी करते हुए कोर्ट ने आगे कहा कि पति द्वारा लगातार, असहनीय पिटाई के आरोप को साबित करने के लिए ठोस सबूत की ज़रूरत होगी कि इसी वजह से पत्नी ने आत्महत्या की।
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माता-पिता की देखभाल को लेकर भाइयों के बीच अचानक हुई लड़ाई, जिससे मौत हुई, मर्डर नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सज़ा घटाकर 14 साल की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दो भाइयों की सज़ा को मर्डर से गैर-इरादतन हत्या में यह कहते हुए बदल दिया कि बूढ़े माता-पिता के भरण-पोषण की ज़िम्मेदारी को लेकर अचानक हुए पारिवारिक झगड़े से हुआ जानलेवा हमला पहले से सोचा-समझा नहीं था। इसलिए इसमें IPC की धारा 302 नहीं लगती।
जस्टिस राजशेखर मंथा और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की एक डिवीजन बेंच ने नादिया में ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सज़ा के खिलाफ ऐमुद्दीन शेख और एक अन्य की अपील को कुछ हद तक मंज़ूरी दी।
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CAPF भर्ती में मेडिकल बोर्ड की राय आखिरी, कोर्ट गलत इरादे या प्रोसेस में कमी के अलावा अपील नहीं कर सकता: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPFs) की भर्ती के मामलों में कोर्ट के दखल की सीमित गुंजाइश पर ज़ोर देते हुए जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने कहा कि रिव्यू मेडिकल बोर्ड का फैसला आखिरी है और प्रोसेस में गलती या गलत इरादे जैसी खास स्थितियों को छोड़कर कोर्ट द्वारा आगे रिव्यू या दोबारा जांच नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि CAPFs की भर्ती को कंट्रोल करने वाला कानूनी ढांचा दूसरी मेडिकल जांच के बाद दी गई मेडिकल राय को आखिरी दर्जा देता है। कोर्ट को ऐसे एक्सपर्ट फैसलों को बदलने में धीमा होना चाहिए।
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सीनियर सिटीजन एक्ट के तहत भरण-पोषण न्यायाधिकरण बच्चों को बेदखल करने का आदेश नहीं दे सकता: कलकत्ता हाइकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत गठित भरण-पोषण न्यायाधिकरण को धारा 4 और 5 की कार्यवाही में बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि न्यायाधिकरण की शक्तियां केवल मासिक भरण-पोषण तय करने तक सीमित हैं, उन्हें परिसर खाली कराने तक विस्तारित नहीं किया जा सकता।
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जेल में बंद आरोपी पर भी लगाया जा सकता है रासुका, यदि रिहाई पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग होने की आशंका हो: इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कहा कि यदि सक्षम प्राधिकारी को यह संतोष हो कि जेल में बंद आरोपी के जमानत पर रिहा होने की वास्तविक संभावना है और रिहाई के बाद वह सार्वजनिक व्यवस्था के प्रतिकूल गतिविधियों में संलग्न हो सकता है तो राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के तहत निरोधात्मक आदेश पारित किया जा सकता है। जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस बबीता रानी की खंडपीठ ने सुनील कुमार गुप्ता द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
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फॉरेनर्स एक्ट के तहत सेविंग्स क्लॉज़ के रद्द होने के बाद नई कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं देता: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साफ़ किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक घर के मालिक के खिलाफ तय समय में फॉर्म सी जमा न करने पर दर्ज FIR को यह कहते हुए रद्द किया कि इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के लागू होने के बाद फॉरेनर्स एक्ट, 1946 के तहत नई कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती।
जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने कहा, "सेविंग क्लॉज़ रद्द हो चुके फॉरेनर्स एक्ट, 1946 को फिर से लागू करने के लिए काम नहीं करता, और न ही यह इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 के लागू होने के बाद होने वाले कामों या चूक के संबंध में नई कार्रवाई शुरू करने या उसके तहत अपराधों के रजिस्ट्रेशन का अधिकार देता है।"
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आयु में छूट लेने वाले पूर्व सैनिक अनारक्षित पदों का दावा नहीं कर सकते: दिल्ली हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में छूट का लाभ लेने वाले पूर्व सैनिक अनारक्षित (यूआर) पदों पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते, भले ही उनके अंक अनारक्षित श्रेणी के चयनित अभ्यर्थियों से अधिक क्यों न हों। यह निर्णय जस्टिस संजीव नरूला ने पारित किया। उक्त मामला एयर ऑथोरिटी द्वारा उत्तरी क्षेत्र में गैर-कार्यकारी संवर्ग की भर्ती से संबंधित था। याचिकाकर्ता पूर्व सैनिक थे, जिन्होंने दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए गए अभ्यर्थियों की सूची से अपने नाम हटाए जाने को चुनौती दी।
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ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का अधिकार: DM का प्रमाणपत्र जेंडर की अंतिम पुष्टि, पासपोर्ट प्राधिकरण मेडिकल जांच की मांग नहीं कर सकता : इलाहाबाद हाइकोर्ट
इलाहाबाद हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम 2019 की धारा 7 के तहत जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया प्रमाणपत्र जेंडर/पहचान का अंतिम और निर्णायक प्रमाण है। पासपोर्ट प्राधिकरण ऐसे मामले में दोबारा मेडिकल जांच या जन्म प्रमाणपत्र में बदलाव की शर्त नहीं रख सकता।
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने खुश आर गोयल की याचिका का निस्तारण करते हुए यह टिप्पणी की।
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अधिक आयु की अभ्यर्थी लंबी पार्ट-टाइम सेवा के आधार पर नियमित नियुक्ति का दावा नहीं कर सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने निर्णय दिया कि जो अभ्यर्थी निर्धारित कट-ऑफ तिथि पर अधिक आयु (ओवरएज) की हो, वह केवल इस आधार पर नियमित पद पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकती कि उसने लंबे समय तक पार्ट-टाइम लाइब्रेरियन के रूप में सेवा दी।
जस्टिस संजीव नरूला ने दिल्ली सरकार से सहायता प्राप्त एक विद्यालय में लाइब्रेरियन पद की चयन प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की। याचिकाकर्ता वर्ष 2002 से पार्ट-टाइम लाइब्रेरियन के रूप में कार्यरत थीं। उन्होंने वर्ष 2018 में शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया के तहत चयनित एक अन्य अभ्यर्थी की नियुक्ति को चुनौती दी।
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मजिस्ट्रेट शुरुआती चार्जशीट पर कॉग्निजेंस लेने के बाद भी बाद की 'क्लोजर रिपोर्ट' पर विचार करने के लिए मजबूर: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि मजिस्ट्रेट पुलिस द्वारा फाइल की गई फाइनल रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) पर विचार करने और ऑर्डर पास करने के लिए कानूनी रूप से मजबूर है, उन मामलों में भी जहां उसने पहले की चार्जशीट के आधार पर अपराध का कॉग्निजेंस लिया।
जस्टिस अनिल कुमार-X की बेंच ने कहा कि अगर मजिस्ट्रेट फाइनल रिपोर्ट पर विचार किए बिना मामले में आगे बढ़ता है तो ऐसी कोई कार्रवाई न करना "प्रोसिजरल गैर-कानूनी" माना जाएगा।
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SC/ST Act | विरोध याचिका पर विचार करते समय स्पेशल कोर्ट को पुलिस की रेफर रिपोर्ट जांचकर कारणयुक्त आदेश देना अनिवार्य: केरल हाइकोर्ट
केरल हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत दायर विरोध याचिका (प्रोटेस्ट शिकायत) पर विचार करते समय स्पेशल कोर्ट को जांच अधिकारी द्वारा दाखिल की गई रेफर रिपोर्ट का परीक्षण करना होगा और उसे स्वीकार या अस्वीकार करने के संबंध में कारणयुक्त आदेश पारित करना अनिवार्य है।
जस्टिस ए. बदरुद्दीन एक अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें स्पेशल कोर्ट द्वारा SC/ST Act की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई।
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BNSS की धारा 346(2) | पहले से हिरासत में बंद आरोपी को 15 दिन से अधिक रिमांड अवैध नहीं, हर मामले में हैबियस कॉर्पस नहीं चलेगा: गुजरात हाइकोर्ट
गुजरात हाइकोर्ट ने कहा कि यदि कोई आरोपी पहले से न्यायिक हिरासत में है तो उसे 15 दिन से अधिक अवधि के लिए रिमांड पर रखना अवैध नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि हैबियस कॉर्पस याचिका हर ऐसे मामले में स्वीकार्य नहीं होगी, जब तक यह न दिखाया जाए कि रिमांड आदेश पूरी तरह अवैध, अधिकार क्षेत्र से बाहर या यांत्रिक ढंग से पारित किया गया।
जस्टिस एन.एस. संजय गौड़ा और जस्टिस डी.एम. व्यास की खंडपीठ दो जुड़ी हुई हैबियस कॉर्पस याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिन्हें विनोदभाई तिलकधारी तिवारी ने अपने पुत्रों की रिहाई के लिए दायर किया। उनके पुत्र भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और गुजरात पुलिस अधिनियम के तहत दर्ज एक आपराधिक मामले में न्यायिक हिरासत में हैं।
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अपराधी को प्रोबेशन पर रिहा किया जाता है तो सरकारी नौकरी के लिए अयोग्यता खत्म हो जाती है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट की धारा 12 के तहत प्रोबेशन पर रिहा करने से सरकारी नौकरी के लिए सज़ा से जुड़ी अयोग्यता खत्म हो जाती है, भले ही सज़ा खुद खत्म न हो।
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पत्नी का सिर्फ़ नौकरी करना गुज़ारा भत्ता देने से मना करने का कोई आधार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में पति की क्रिमिनल रिवीजन याचिका खारिज की, जिसमें उसने CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी की अर्जी पर पास हुए आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों की कमाई की क्षमता और फाइनेंशियल स्थिति में काफी अंतर है। बेंच ने कहा कि पत्नी को दी जाने वाली इनकम को इतना काफ़ी नहीं कहा जा सकता कि वह अपनी शादीशुदा ज़िंदगी के दौरान जिस तरह की ज़िंदगी जीती थी, उसे बनाए रख सके।