SC/ST Act | विरोध याचिका पर विचार करते समय स्पेशल कोर्ट को पुलिस की रेफर रिपोर्ट जांचकर कारणयुक्त आदेश देना अनिवार्य: केरल हाइकोर्ट

Amir Ahmad

16 Feb 2026 12:38 PM IST

  • SC/ST Act | विरोध याचिका पर विचार करते समय स्पेशल कोर्ट को पुलिस की रेफर रिपोर्ट जांचकर कारणयुक्त आदेश देना अनिवार्य: केरल हाइकोर्ट

    केरल हाइकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत दायर विरोध याचिका (प्रोटेस्ट शिकायत) पर विचार करते समय स्पेशल कोर्ट को जांच अधिकारी द्वारा दाखिल की गई रेफर रिपोर्ट का परीक्षण करना होगा और उसे स्वीकार या अस्वीकार करने के संबंध में कारणयुक्त आदेश पारित करना अनिवार्य है।

    जस्टिस ए. बदरुद्दीन एक अपील पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें स्पेशल कोर्ट द्वारा SC/ST Act की धारा 3(1)(r) और 3(1)(s) के तहत संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी गई।

    मामले में शिकायतकर्ता ने पुलिस के समक्ष निजी शिकायत दर्ज कराई। जांच के बाद जांच अधिकारी ने कार्यवाही समाप्त करने की सिफारिश करते हुए स्पेशल कोर्ट में रेफर रिपोर्ट दाखिल की। शिकायतकर्ता को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद उसने विरोध याचिका दायर की।

    स्पेशल कोर्ट ने विरोध याचिका पर विचार करते हुए संज्ञान लेने का आदेश पारित किया, जिसे अपर्याप्त बताते हुए चुनौती दी गई। अपील में SC/ST Act की धारा 14ए(3) के दूसरे प्रावधान की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी गई।

    शिकायतकर्ता ने हाइकोर्ट में अपील का विरोध करते हुए कहा कि भले ही आदेश विस्तृत नहीं है लेकिन अपराध के प्रथमदृष्टया तत्व मौजूद हैं। यह भी दलील दी गई कि आदेश पांच गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद पारित किया गया।

    रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाइकोर्ट ने पाया कि स्पेशल कोर्ट के आदेश में उन सामग्रियों का उल्लेख नहीं है जिनके आधार पर अपराध के प्रथमदृष्टया गठन का निष्कर्ष निकाला गया।

    अदालत ने कहा,

    “यह स्थापित विधि है कि जब जांच अधिकारी द्वारा कार्यवाही समाप्त करने का अनुरोध करते हुए अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जाती है और शिकायतकर्ता को सूचना दी जाती है, तब अदालत का दायित्व है कि वह उस रिपोर्ट का परीक्षण कर यह तय करे कि उसे स्वीकार करना है, अस्वीकार करना है या आगे की जांच का आदेश देना है। वर्तमान मामले में ऐसा कोई प्रक्रिया अपनाई गई प्रतीत नहीं होती। आदेश न तो कारणयुक्त है और न ही उसमें यह स्पष्ट है कि रेफर रिपोर्ट पर स्पेशल जज का क्या रुख था।”

    अदालत ने आगे कहा,

    “जब SC/ST Act की गंभीर धाराएं 3(1)(r) और 3(1)(s) आरोपित हों, तब स्पेशल कोर्ट को संज्ञान लेने का औचित्य स्पष्ट करते हुए ठोस और कारणयुक्त आदेश देना चाहिए। केवल संक्षिप्त और सामान्य आदेश पर्याप्त नहीं होगा।”

    धारा 14ए(3) पर टिप्पणी

    धारा 14ए(3) की संवैधानिकता के प्रश्न पर अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर पूर्व निर्णय का पालन किया जाना चाहिए। अदालत ने उल्लेख किया कि नौशाद वी.टी.के बनाम राज्य केरल में पहले ही यह कहा जा चुका है कि 180 दिन के बाद अपील दायर करने के अधिकार को सीमित करना असंवैधानिक है विशेषकर तब जब विलंब की क्षमा के लिए कोई स्पष्ट प्रावधान न हो।

    हाइकोर्ट ने कहा,

    “अपील के अधिकार को सीमित कर देना और पर्याप्त कारण दर्शाने पर विलंब को माफ करने की व्यवस्था न रखना न्यायोचित नहीं है। इसलिए नौशाद वी.टी.के के निर्णय का पालन किया जाना चाहिए और वर्तमान में SC/ST Act 2018 की धारा 14ए(3) असंवैधानिक बनी हुई।”

    इन टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए स्पेशल कोर्ट का आदेश निरस्त किया। अदालत ने स्पेशल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए मामले पर पुनः विचार करे और संज्ञान लेने या न लेने के संबंध में कारणयुक्त, स्पष्ट आदेश पारित करे।

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