High Courts

देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (05 अक्टूबर, 2026 से 09 अक्टूबर, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।

प्राइवेट एम्प्लॉयर और एजुकेशनल इंस्टिट्यूट एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति की जानकारी अनिवार्य रूप से नहीं मांग सकते: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल डिवीज़न बेंच ने कहा कि तमिलनाडु में कोई भी प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट या प्राइवेट एम्प्लॉयर एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति या समुदाय की जानकारी अनिवार्य रूप से नहीं मांग सकता।

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रोस्टर बदलने के बाद बेंच बदलने की मांग अधिकार के तौर पर नहीं की जा सकती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि कोई मुक़दमेबाज़ सिर्फ़ रोस्टर बदलने की वजह से बेंच बदलने का दावा अधिकार के तौर पर नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि किसी ऐसे मामले को, जिसकी सुनवाई कुछ हद तक हो चुकी है (Part-Heard Matter), उसे बेंच से हटाने का फ़ैसला हर मामले के तथ्यों और हालात पर निर्भर करता है।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि बेंच को मामले सौंपना चीफ़ जस्टिस का प्रशासनिक अधिकार है। किसी ऐसे मामले को, जिसकी सुनवाई कुछ हद तक हो चुकी है, उसी बेंच के पास रहने दिया जाए या हटा दिया जाए, इसका फ़ैसला कार्यवाही के चरण और मामले में पहले ही लग चुके न्यायिक समय जैसे कारकों पर विचार करने के बाद किया जाना चाहिए।

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OBC को 14% कोटा मिलना चाहिए, 27% नहीं: एमपी हाईकोर्ट ने 2019 का संशोधन रद्द किया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एमपी पब्लिक सर्विसेज़ (रिज़र्वेशन) अमेंडमेंट एक्ट, 2019 को रद्द किया। इस एक्ट में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) कैटेगरी के उम्मीदवारों के लिए 27% और EWS उम्मीदवारों के लिए 10% आरक्षण का प्रावधान था। [2026 LiveLaw (MP) 411]

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कानूनी अधिकार के बिना डेवलपमेंट अथॉरिटी 'इम्पैक्ट फ़ीस' और 'ओपन एरिया पेनल्टी' नहीं लगा सकती: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि डेवलपमेंट अथॉरिटी 'इम्पैक्ट फ़ीस' या 'ओपन एरिया पेनल्टी' नहीं लगा सकती। कोर्ट ने माना कि उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 15(2-A) के तहत अथॉरिटी केवल डेवलपमेंट फ़ीस, म्यूटेशन चार्ज, स्टैकिंग फ़ीस और पानी की फ़ीस ही वसूल सकती है।

इन दो तरह के शुल्क (लेवी) को लगाने के अधिकार पर नहीं, बल्कि उनकी गणना (कैलकुलेशन) की दर पर सवाल उठाया गया। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक अदालत द्वारा कानून की व्याख्या शुरुआत से ही लागू मानी जाती है। याचिकाकर्ता को इसके लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।

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कैंसर पीड़ित दो माह के बच्चे के खून के लिए अस्पताल ने वसूले 9 हजार रुपये, आयुष्मान योजना से हटाने का फैसला बरकरार

ब्लड कैंसर से पीड़ित दो माह के बच्चे को चढ़ाए जाने वाले खून की दो यूनिट के लिए 9 हजार रुपये वसूलने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निजी अस्पताल को राहत देने से इनकार किया। अदालत ने आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अस्पताल का पंजीकरण समाप्त करने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा। योजना के तहत पात्र मरीजों को निर्धारित उपचार और सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने अस्पताल की ओर से दाखिल याचिका खारिज की।

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सिर्फ़ जाली जाति प्रमाण-पत्र देने से वकील को स्टेट रोल से नहीं हटाया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ़ जाली जाति प्रमाण-पत्र जमा करने के आधार पर किसी वकील को स्टेट बार रोल से नहीं हटाया जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि कथित धोखाधड़ी या गलत जानकारी का एनरोलमेंट (पंजीकरण) हासिल करने से कोई संबंध है।

जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा, "...एनरोलमेंट रिकॉर्ड में धोखाधड़ी वाले दस्तावेज़ का होना ही अपने आप में धोखाधड़ी से एनरोलमेंट हासिल करने के बराबर नहीं माना जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि उस एनरोलमेंट को हासिल करने में धोखाधड़ी की अहम भूमिका है।"

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वक्फ ट्रिब्यूनल CPC के ऑर्डर XI के तहत इंटरोगेटरीज़ की इजाज़त दे सकता है: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने कहा कि वक्फ ट्रिब्यूनल के पास पार्टियों को सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के ऑर्डर XI के तहत इंटरोगेटरीज़ (सवाल-जवाब) भेजने की इजाज़त देने का अधिकार है, क्योंकि वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 83(5) के तहत इसे सिविल कोर्ट माना जाता है।

जस्टिस अनिल के. नरेंद्रन और जस्टिस मुरली कृष्णा एस. की डिवीज़न बेंच ने केरल राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा दायर अपीलों पर यह फैसला सुनाया। इन अपीलों में वक्फ ट्रिब्यूनल के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी जिनमें राज्य वक्फ बोर्ड को इंटरोगेटरीज़ भेजने की इजाज़त दी गई।

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BNS की धारा 69 के तहत महिला के खिलाफ नहीं चल सकता मामला: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 69 के तहत किसी महिला को आरोपी नहीं बनाया जा सकता। यह धारा धोखे से या शादी का झूठा वादा कर, बिना उसे पूरा करने की मंशा के, किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाने को अपराध बनाती है, बशर्ते वह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में न आता हो।

जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े ने एक महिला के खिलाफ दर्ज FIR को आंशिक रूप से रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। महिला को मामले में आरोपी नंबर-2 बनाया गया था, जबकि उसका पति आरोपी नंबर-1 था।

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एमपी हाईकोर्ट का आदेश: अगर पिता दोबारा शादी करता है या लिव-इन रिलेशनशिप में जाता है तो बेटी की कस्टडी माँ को सौंपनी होगी

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने चार साल की बच्ची की कस्टडी उसके पिता को तब तक के लिए दी है, जब तक कि वे दोबारा शादी नहीं कर लेते या लिव-इन रिलेशनशिप में नहीं चले जाते। [2026 LiveLaw (MP) 408] यह देखते हुए कि बच्ची की माँ (पत्नी) किसी दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही है और अपने पति के पास वापस नहीं लौटना चाहती, चीफ जस्टिस अल्पेश वाई. कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की बेंच ने पिता को कस्टडी देना सही समझा।

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पुलिस स्टेशन बुलाकर पूछताछ से पहले भी बताना होगा वकील रखने का अधिकार, गिरफ्तारी टालकर सुरक्षा से नहीं बच सकती पुलिस: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 38 के तहत पुलिस को किसी संदिग्ध को पूछताछ के दौरान अपनी पसंद के वकील की मौजूदगी के अधिकार के बारे में औपचारिक गिरफ्तारी से पहले भी बताना होगा। पुलिस किसी व्यक्ति को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किए बिना थाने बुलाकर कई घंटे पूछताछ करके इस कानूनी सुरक्षा से बच नहीं सकती।

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की डिवीजन बेंच ने कहा कि पुलिस यदि किसी संदिग्ध को पूछताछ के लिए थाने लाती है तो उस समय भी उसे अपने पसंद के वकील को साथ रखने के अधिकार की जानकारी देना पुलिस का दायित्व है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि वकील को पूरी पूछताछ के दौरान लगातार मौजूद रहना अनिवार्य होगा।

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स्पेशल TET से इन-सर्विस शिक्षकों को भविष्य की भर्ती में वरीयता नहीं मिलेगी, अनुच्छेद 14-16 का उल्लंघन भी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पहले से सेवा में कार्यरत शिक्षकों के लिए स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी स्पेशल TET आयोजित करने का फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं करता।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह विशेष परीक्षा केवल इन-सर्विस शिक्षकों को वह अनिवार्य योग्यता हासिल करने का अवसर देती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने उनके लिए जरूरी माना है। इससे नियमित TET पहले ही पास कर चुके उम्मीदवारों की तुलना में इन शिक्षकों को भविष्य की भर्ती में कोई अतिरिक्त वरीयता नहीं मिलती।

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पति की सहमति के बिना भी मुस्लिम पत्नी ले सकती है 'खुला': केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मुस्लिम पत्नी द्वारा विवाह-विच्छेद के लिए 'खुला (Khula)' का सहारा लेने पर पति की सहमति या स्वीकृति आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि खुला मुस्लिम पत्नी को प्राप्त विवाह-विच्छेद का स्वतंत्र अधिकार है और इसकी वैधता पति की सहमति पर निर्भर नहीं करती। जस्टिस जे. निशा बानू और जस्टिस शोबा अन्नम्मा ईपेन की डिवीजन बेंच ने कहा कि 'खुला' पत्नी को उसी प्रकार प्राप्त तलाक का अधिकार है, जिस प्रकार 'तलाक' पति को प्राप्त है।

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अगर शोर से जुड़े नियमों का पालन किया जाए तो सहारनपुर मस्जिद में 5 बार अज़ान में दखल न दें: इलाहाबाद हाईकोर्ट का पुलिस को निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहारनपुर पुलिस और ज़िला प्रशासन को निर्देश दिया कि वे शहर की आयशा मस्जिद में याचिकाकर्ताओं के पांच बार अज़ान पढ़ने के अधिकार में दखल न दें। यह निर्देश इस शर्त पर दिया गया कि वे 'ध्वनि प्रदूषण (नियमन और नियंत्रण) नियम, 2000' और अज़ान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर हाईकोर्ट के 2020 के फ़ैसले का सख्ती से पालन करेंगे।

जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत शहनवाज़ खान और पांच अन्य लोगों की याचिका का निपटारा करते हुए यह निर्देश जारी किया।

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ट्रायल शुरू होने से पहले PMLA मामले में आगे की जांच के लिए ED को कोर्ट की अनुमति जरूरी नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट

कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल किए जाने के बाद भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) आगे की जांच कर सकता है। इसके लिए ट्रायल कोर्ट की पूर्व अनुमति जरूरी नहीं है, बशर्ते मुकदमा अभी शुरू न हुआ हो।

जस्टिस कृष्ण राव ने महेश कुमार केजरीवाल की ओर से दायर याचिका खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिका में केजरीवाल और उनकी पत्नी को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 50 के तहत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने ईडी को आगे की जांच करने से रोकने की मांग की थी।

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सहकारी समिति के चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की बैठक सिर्फ जिलाधिकारी बुला सकते हैं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सहकारी समिति के चेयरमैन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक बुलाने का अधिकार केवल जिलाधिकारी के पास है। उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 के नियम 465 के तहत जिलाधिकारी ही निर्धारित प्राधिकारी हैं और यह अधिकार किसी दूसरे अधिकारी को सौंपा या आगे हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।

जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि यदि किसी अन्य अधिकारी ने अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक की तारीख, समय और स्थान तय किया है तो वह कानूनन सक्षम प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र के बिना की गई कार्रवाई होगी और ऐसी बैठक में पारित प्रस्ताव टिक नहीं सकता।

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शिक्षा मित्र प्री-TET इन-सर्विस शिक्षकों के बराबर होने का अधिकार नहीं, उन्हें बाहर रखना अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि इन-सर्विस शिक्षकों (सेवा में पहले से मौजूद शिक्षकों) के लिए आयोजित 'स्पेशल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट' (Special TET) से शिक्षा मित्रों को बाहर रखना भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि जब 'टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट' (TET) अनिवार्य किया गया, तब जो शिक्षक पहले से सेवा में थे, वे एक अलग श्रेणी (class) में आते हैं। 'स्पेशल TET' अंतरिम उपाय है, जो उस श्रेणी के शिक्षकों को वह योग्यता हासिल करने में मदद करता है, जो सेवा में आने के बाद उन पर लागू की गई।

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S. 16(1) UP Gangsters Act: अटैच की गई प्रॉपर्टी रिलीज़ करने की अर्ज़ी खारिज करने के बाद मामला कोर्ट भेजेगा डीएम: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि 'गैंगस्टर्स एक्ट' के तहत अटैच की गई प्रॉपर्टी को रिलीज़ करने की अर्ज़ी खारिज करने के बाद डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) को 'उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986' की धारा 16(1) के तहत मामला सक्षम कोर्ट को भेजना होगा।

जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने फ़िरोज़ाबाद के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का वह आदेश रद्द करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें अटैच की गई प्रॉपर्टी को रिलीज़ करने की अर्ज़ी खारिज की गई थी।

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