सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (19 अक्टूबर, 2026 से 23 अक्टूबर, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
पक्की कानूनी सहमति होने से पहले सार्वजनिक संपत्ति की कीमत बढ़ाने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण नीलामी पर फिर से विचार कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी सार्वजनिक संपत्ति के मामले में, पक्की कानूनी सहमति (बाइंडिंग कॉन्ट्रैक्ट) होने से पहले, उसकी कीमत अधिकतम करने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरण नीलामी पर फिर से विचार कर सकता है। इसके साथ ही कोर्ट ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द किया, जिसमें चंडीगढ़ प्रशासन के उस निर्णय को खारिज कर दिया गया था, जिसके तहत बेदी अस्पताल की ₹12.58 करोड़ की बोली (नर्सिंग होम साइट के लिए) को रद्द कर दिया गया था।
Case Title : SATINDER PAL SINGH & ORS. VERSUS BEDI HOSPITAL & ORS
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ट्रायल से पहले की हिरासत को 'बिना ट्रायल के सजा' में नहीं बदला जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल से पहले की लंबी हिरासत को 'बिना ट्रायल के सजा' में नहीं बदला जा सकता। कोर्ट ने दोहराया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत विचाराधीन कैदी (अंडरट्रायल) को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जल्द ट्रायल का अधिकार है। वित्तीय गड़बड़ी के गंभीर आरोपों वाले मामलों में भी इस अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने महेश चंद्र जोशी (पूर्व कांग्रेस मंत्री) और मुकेश पाठक को नियमित जमानत देते समय यह टिप्पणी की। इन दोनों पर राजस्थान में 'जल जीवन मिशन' के तहत सैकड़ों करोड़ रुपये के टेंडरों में कथित अनियमितताओं से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में आरोप हैं।
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BNSS में लोक सेवकों के लिए सुरक्षा उपायों का विस्तार: FIR दर्ज करने के न्यायिक आदेश से पहले मिलेगी सुरक्षा- पिनाराई विजयन केस में सुप्रीम कोर्ट ने किया स्पष्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (21 अक्टूबर) को कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175(4) के तहत लोक सेवकों को मिलने वाले सुरक्षा उपायों का दायरा बढ़ाया गया। इसके तहत मजिस्ट्रेट द्वारा उनके खिलाफ जांच का आदेश देने से पहले उन्हें सुरक्षा मिलती है। यह CrPC की पुरानी धारा 156(3) से अलग है।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी तब की, जब उन्होंने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और अन्य याचिकाकर्ताओं को CMRL-एक्सलॉजिक (Exalogic) मामले में FIR दर्ज करने के केरल हाईकोर्ट के सिंगल जज के निर्देश को चुनौती देने की अनुमति दी।
Case Title : Pinarayi Vijayan v Adv KM Shajahan
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रिश्वत मांगने के मामले में PC Act की धारा 17A लागू नहीं होती, क्योंकि इसका सरकारी कर्तव्यों से कोई लेना-देना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 'भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम' (Prevention of Corruption Act), 1988 की धारा 17A, जिसके तहत सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ किसी जांच या पूछताछ से पहले पूर्व अनुमति लेना जरूरी होता है, वह रिश्वत मांगने के मामलों में लागू नहीं होगी। ऐसा इसलिए है, क्योंकि रिश्वत मांगना सरकारी कर्तव्यों के पालन से जुड़ा हुआ काम नहीं है।
जस्टिस एसवीएन भट्टी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि यह प्रावधान केवल तब लागू होता है, जब कथित अपराध किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा अपने आधिकारिक कार्यों या कर्तव्यों का पालन करते समय दी गई सिफारिश या लिए गए निर्णय से जुड़ा हो।
Case Title : Tejaram v. State of Rajasthan
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चुनाव में गलत हलफनामा देने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ RP Act की धारा 125A के तहत निजी शिकायत दर्ज करा सकते हैं मतदाता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आम नागरिक, चुने गए उम्मीदवारों के खिलाफ 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951' (Representation of the People Act, 1951) की धारा 125A के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसमें यह आरोप लगाया जा सकता है कि उम्मीदवार ने अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी दी है या कोई जानकारी छिपाई है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा कि ऐसी शिकायतों पर 'दंड प्रक्रिया संहिता, 1973' (CrPC) की धारा 195(1) के तहत लगी पाबंदियां लागू नहीं होतीं। धारा 195(1) के तहत कुछ खास अपराधों के लिए केवल संबंधित लोक सेवक (Public Servant) द्वारा ही शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
Case Title : Rajkumar Madki v. Dr. Shailendra Beldale
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बच्चों को 'सेफ'-'अनसेफ' टच के बारे में सिखाया जाना चाहिए; शिक्षकों को 'ग्रूमिंग' और दुर्व्यवहार की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से सेक्स एजुकेशन और डिजिटल सुरक्षा पाठ्यक्रम के तहत उनके शरीर, 'सेफ' (सुरक्षित) और 'अनसेफ' (असुरक्षित) टच के बीच के अंतर, और 'सहमति' (Consent) के महत्व के बारे में शुरुआती स्तर से ही सिखाया जाना चाहिए।
कोर्ट ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को यह भी निर्देश दिया कि वे हर क्लासरूम, हॉस्टल, लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब में बाल सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करें। साथ ही शिक्षकों और अन्य स्टाफ को 'ग्रूमिंग' (बच्चों को बहला-फुसलाकर गलत काम के लिए तैयार करना), दुर्व्यवहार और ऑनलाइन उत्पीड़न की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित करें, ताकि अगर कोई बच्चा किसी घटना के बारे में बताए तो वे सही तरीके से कदम उठा सकें।
Case Title : Case Title – Just Rights for Children Alliance & Anr. v. S. Harish & Ors.
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इंटरनेट का इस्तेमाल करना बच्चों समेत हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार, इससे पूरी तरह वंचित करना बेतुका होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि इंटरनेट तक पहुंच और उसके इस्तेमाल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अधिकार में बच्चे भी शामिल हैं और उनकी उम्र चाहे जो भी हो, उन्हें इससे पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि बच्चों को इंटरनेट इस्तेमाल करने के अधिकार से पूरी तरह वंचित करना उतना ही बेतुका होगा, जितना यह कहना कि एक निश्चित उम्र से कम बच्चों की अंतरात्मा की रक्षा करने या उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को महत्व देने की जरूरत नहीं है।