सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (05 अक्टूबर, 2026 से 09 अक्टूबर, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
1956 के उत्तराधिकार कानून के तहत हिंदू विधवा का सीमित अधिकार पूर्ण अधिकार बन गया: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 14(1) के तहत कृषि भूमि में हिंदू विधवा का सीमित अधिकार पूर्ण स्वामित्व में बदल सकता है। उत्तराधिकार का निर्धारण उसकी मृत्यु के समय लागू व्यक्तिगत कानून को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने लगभग 45 बीघा कृषि भूमि को लेकर हुए विवाद पर सुनवाई की। यह विवाद एक महिला के पहले पति के परिवार के वारिसों और उसकी दूसरी शादी से हुए दो बेटों के बीच है।
Case Title : Sultan Singh (Dead) Through LRs and Others v. The Financial Commissioner, Government of NCT of Delhi and Others
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दिल्ली में ट्रेनें और मेट्रो पूरी तरह बंद नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट; प्रतिबंधों को आनुपातिक रखने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली के लिए ट्रेन सेवाओं और मेट्रो स्टेशनों को पूरी तरह बंद न किया जाए। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन को नियंत्रित तरीके से जारी रखा जाए, ताकि आम नागरिकों को असुविधा न हो।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ CPI(M) महासचिव एमए बेबी और अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में प्रदर्शन से पहले अधिकारियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती दी गई थी।
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आरोपी ही नहीं, पीड़ित को भी स्पीडी ट्रायल का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्पीडी ट्रायल का अधिकार केवल आरोपी तक सीमित नहीं है बल्कि पीड़ित को भी समय पर न्याय पाने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि मुकदमे की सुनवाई में हो रही देरी को लेकर पीड़ित पक्ष का अदालत का दरवाजा खटखटाना गलत नहीं है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट का वह आदेश रद्द किया, जिसमें पीड़िता की याचिका खारिज करते हुए उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने कहा कि पीड़ित या उसका कानूनी अभिभावक मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाने के लिए याचिका दायर कर सकता है। इसके लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट का रुख किया जा सकता है।
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Delhi Women Safety | सुप्रीम कोर्ट का आदेश: पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाएं, कैब-बस ड्राइवरों की जांच करें और गैर-कानूनी शराब की दुकानें बंद करें
दिल्ली-NCR में हाल ही में हुई रेप की घटनाओं पर खुद संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 अक्टूबर) को दिल्ली पुलिस, स्थानीय प्रशासन और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट को तुरंत बचाव के उपाय करने का निर्देश दिया। इन निर्देशों में बीट पेट्रोलिंग बढ़ाना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट ड्राइवरों की सघन जांच और गैर-कानूनी शराब की दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने चिंता जताते हुए कहा कि सवाल सिर्फ़ यह नहीं है कि सही निर्देश मौजूद हैं या नहीं, बल्कि यह है कि क्या उन निर्देशों का ज़मीनी स्तर पर लगातार, दिखने वाला और वेरिफ़ाई किया जा सकने वाला असर हो रहा है।
Case Title : In Re: Recent Rape Incidents in Delhi NCR
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अगर ब्रेकअप के बाद कोई आत्महत्या कर ले तो इसे हमेशा आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला की आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में छह लोगों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। महिला के पार्टनर ने कथित तौर पर उससे शादी करने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि शादी से इनकार करना, भले ही उसके बाद आत्महत्या हो जाए, अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला नहीं बनता।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि लोग स्थितियों पर अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं और ब्रेकअप के बाद आत्महत्या करने को अपने आप आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता।
Case Title : Chittibarika Chandra Shekar & Ors. Versus The State of Telangana & Anr.
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रेगुलर होने के बाद सालाना इंक्रीमेंट देने से मना करने का आधार 'शुरुआत में डेली वेजर होना' नहीं हो सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (6 अक्टूबर) को कहा कि डेली-वेज पर काम करने वाले कुशल (Skilled) कर्मचारियों को, जिन्हें सरकारी आदेश के तहत स्थायी कर्मचारी माना गया और रेगुलर पे-स्केल और रिटायरमेंट के फायदे दिए गए, उन्हें रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले सालाना इंक्रीमेंट से सिर्फ़ इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वे शुरुआत में डेली वेजर के तौर पर रखे गए।
गुजरात हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच का फैसला रद्द करते हुए जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने गुजरात सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि अपील करने वाले इंक्रीमेंट के हकदार नहीं थे क्योंकि उनकी शुरुआती नियुक्ति डेली-वेज वर्कर के तौर पर हुई।
Case Title : Chhaganbhai Kohyabhai Pateliya & Ors. v. State of Gujarat & Ors.
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Shiv Sena Row | स्पीकर का अयोग्य न ठहराने का फ़ैसला गलत निकलता है तो ECI के चुनाव-चिह्न आवंटन पर फिर से विचार करना पड़ सकता है: सुप्रीम कोर्ट
शिवसेना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कल इस बात पर विचार किया कि क्या चुनाव आयोग (ECI) के उस फ़ैसले पर फिर से विचार करना होगा, जिसमें उसने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना माना और पार्टी का आरक्षित चुनाव चिह्न उन्हें दिया। यह विचार तब करना पड़ सकता है अगर कोर्ट यह पाए कि महाराष्ट्र के स्पीकर ने उस गुट के विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं को गलत तरीके से खारिज कर दिया था।
Case Title : Sunil Prabhu v. Eknath Shinde
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ज्यूडिशियल सर्विस के लिए बेंच क्लर्क का अनुभव लॉ क्लर्क के अनुभव के बराबर नहीं माना जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (6 अक्टूबर) को एक रिट याचिका खारिज की। इस याचिका में मांग की गई थी कि न्यायिक सेवा परीक्षा में शामिल होने के लिए ज़रूरी एक साल की कानूनी प्रैक्टिस की शर्त को पूरा करने के मकसद से, ज़िला न्यायपालिका में बेंच क्लर्क के अनुभव को लॉ क्लर्क के अनुभव के बराबर माना जाए। कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि बेंच क्लर्क का अनुभव "प्रशासनिक" (मिनिस्टीरियल) प्रकृति का होता है और लॉ क्लर्क के अनुभव से अलग होता है, इसलिए कोर्ट ने मामला खारिज किया।
Case : TAPASMITA SUTAR Vs UNION OF INDIA | W.P.(C) No. 1224/2026 T
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सिर्फ़ कागज़ात न होने से यह नहीं माना जा सकता कि मवेशियों को काटने के लिए ले जाया जा रहा है: सुप्रीम कोर्ट ने की सज़ा रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ ट्रांसपोर्ट के कागज़ात न होने से यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि मवेशियों को काटने के लिए ले जाया जा रहा है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने छत्तीसगढ़ कृषि पशु संरक्षण अधिनियम, 2004 के तहत एक व्यक्ति की सज़ा रद्द की। उस पर 32 बैलों को काटने के लिए ले जाने का आरोप है। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी कागज़ात के मवेशियों को ले जाने से यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि उन्हें सिर्फ़ काटने के मकसद से ले जाया जा रहा था।
Case Title : Saurabh Bajaj Versus State of Chhattisgarh & Ors.
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दादा की जगह पोता भी पा सकता है अनुकंपा नियुक्ति: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले में दख़ल देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार किया, जिसमें रेलवे अधिकारियों को एक मृत रेलवे कर्मचारी के पोते को अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का निर्देश दिया गया। जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने भारत सरकार और रेलवे की उस याचिका को खारिज किया, जिसमें हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें रेलवे को प्रतिवादी (रेस्पॉन्डेंट) के अनुकंपा नियुक्ति के मामले पर विचार करने के लिए कहा गया।
Case Title : UNION OF INDIA & ORS. VERSUS JITENDRA VERMA