S. 16(1) UP Gangsters Act: अटैच की गई प्रॉपर्टी रिलीज़ करने की अर्ज़ी खारिज करने के बाद मामला कोर्ट भेजेगा डीएम: इलाहाबाद हाईकोर्ट

  • S. 16(1) UP Gangsters Act: अटैच की गई प्रॉपर्टी रिलीज़ करने की अर्ज़ी खारिज करने के बाद मामला कोर्ट भेजेगा डीएम: इलाहाबाद हाईकोर्ट

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि 'गैंगस्टर्स एक्ट' के तहत अटैच की गई प्रॉपर्टी को रिलीज़ करने की अर्ज़ी खारिज करने के बाद डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) को 'उत्तर प्रदेश गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1986' की धारा 16(1) के तहत मामला सक्षम कोर्ट को भेजना होगा।

    जस्टिस अजय भनोट और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने फ़िरोज़ाबाद के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का वह आदेश रद्द करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें अटैच की गई प्रॉपर्टी को रिलीज़ करने की अर्ज़ी खारिज की गई थी।

    कोर्ट ने गौर किया कि धारा 15 (प्रॉपर्टी रिलीज़ करना) के तहत प्रॉपर्टी रिलीज़ करने से इनकार करने के बाद डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने मामला उस कोर्ट को नहीं भेजा जिसके पास 'गैंगस्टर्स एक्ट' के तहत अपराध की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र है, जैसा कि धारा 16(1) [कोर्ट द्वारा प्रॉपर्टी हासिल करने के तरीके की जांच] के तहत ज़रूरी है।

    कोर्ट ने आदेश रद्द करते हुए कहा,

    "विवादित आदेश 'गैंगस्टर्स एक्ट' की धारा 16(1) का उल्लंघन है।"

    याचिकाकर्ता ने 'गैंगस्टर्स एक्ट' की धारा 16 के तहत शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए फ़िरोज़ाबाद के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा 9 मार्च, 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी थी।

    याचिकाकर्ता की प्रॉपर्टी को पहले 'गैंगस्टर्स एक्ट' की धारा 14(1) (प्रॉपर्टी अटैच करना) के तहत 22 जुलाई, 2025 के आदेश से अटैच किया गया।

    अटैचमेंट से परेशान होकर याचिकाकर्ता ने प्रॉपर्टी रिलीज़ करने के लिए एक्ट की धारा 15 के तहत अर्ज़ी दी।

    डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के खारिज करने वाले आदेश में सुशील कुमार उर्फ़ सट्टा के आपराधिक इतिहास का ज़िक्र किया गया, जिसमें कहा गया कि वह 2011 में अपराध की दुनिया में आया था और उसके ख़िलाफ़ 19 मामले दर्ज किए गए।

    आदेश में डकैती, दंगा, अपहरण, रेप, आपराधिक धमकी, घर में घुसपैठ, मारपीट, जान से मारने की धमकी, जुआ, अवैध हथियार रखना, हत्या की कोशिश और हत्या जैसे अपराधों के आरोपों का ज़िक्र किया गया।

    डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने यह भी दर्ज किया कि सुशील कुमार की पत्नी ने अचल संपत्तियां कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों से कमाए गए पैसे से खरीदी थीं।

    निष्कर्ष यह निकला कि प्रॉपर्टी को वैध आय के स्रोत से हासिल किए जाने का ठोस सबूत पेश करने में अर्जी नाकाम रही, इसलिए प्रॉपर्टी को रिलीज़ करने की मांग वाली अर्जी खारिज की गई।

    हाईकोर्ट ने गैंगस्टर्स एक्ट की धारा 16(1) का हवाला दिया, जिसमें प्रावधान है कि यदि धारा 15 के तहत तय समय-सीमा के भीतर कोई अर्जी नहीं दी जाती, या यदि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट धारा 15(2) के तहत प्रॉपर्टी को रिलीज़ नहीं करते हैं, तो उन्हें अपनी रिपोर्ट के साथ मामले को उस कोर्ट को भेजना होगा, जिसके पास इस एक्ट के तहत अपराध की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र है।

    कोर्ट ने इस प्रकार टिप्पणी की:

    "गैंगस्टर्स एक्ट की धारा 16(1) के आदेशानुसार, यदि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट गैंगस्टर्स एक्ट की धारा 15(1) के तहत अर्जी पर अटैच की गई प्रॉपर्टी को रिलीज़ करने से इनकार करते हैं, तो उन्हें मामले को अधिकार क्षेत्र वाले कोर्ट को भेजना होगा"।

    बेंच ने गौर किया कि मौजूदा मामले में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट ने ऐसा कोई रेफरेंस नहीं भेजा था।

    निर्देश मिलने पर AGA ने इस तथ्य पर कोई विवाद नहीं किया।

    डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के आदेश को यूपी गैंगस्टर्स एक्ट की धारा 16(1) के तहत कानूनी आवश्यकता के विपरीत पाते हुए हाईकोर्ट ने आदेश रद्द किया।

    कोर्ट ने मामले को फिरोजाबाद के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास वापस भेज दिया और निर्देश दिया कि वे हाईकोर्ट के आदेश की सर्टिफाइड कॉपी मिलने की तारीख से दो महीने के भीतर, कानून के अनुसार, प्रॉपर्टी को रिलीज़ करने की मांग करने वाले याचिकाकर्ता की अर्जी पर नए सिरे से फैसला करें।

    तदनुसार, कोर्ट ने बताई गई हद तक रिट याचिका स्वीकार की।

    Case Title : Pooja Devi vs. State Of U.P. And 3 Others 2026 LiveLaw (AB) 791

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