BNS की धारा 69 के तहत महिला के खिलाफ नहीं चल सकता मामला: कर्नाटक हाईकोर्ट

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    कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 69 के तहत किसी महिला को आरोपी नहीं बनाया जा सकता। यह धारा धोखे से या शादी का झूठा वादा कर, बिना उसे पूरा करने की मंशा के, किसी महिला के साथ यौन संबंध बनाने को अपराध बनाती है, बशर्ते वह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में न आता हो।

    जस्टिस अनंत रामनाथ हेगड़े ने एक महिला के खिलाफ दर्ज FIR को आंशिक रूप से रद्द करते हुए यह टिप्पणी की। महिला को मामले में आरोपी नंबर-2 बनाया गया था, जबकि उसका पति आरोपी नंबर-1 था।

    कोर्ट ने कहा कि धारा 69 का अपराध अपने स्वरूप में ऐसा है, जिसे आरोपी महिला के खिलाफ लागू नहीं किया जा सकता।

    कोर्ट ने आदेश में कहा,

    “याचिकाकर्ता एक महिला है और उसे आरोपी नंबर-2 बनाया गया है। BNS, 2023 की धारा 69 के तहत अपराध याचिकाकर्ता के खिलाफ आकर्षित नहीं होता और शिकायत में भी याचिकाकर्ता द्वारा ऐसा कोई कृत्य किए जाने का आरोप नहीं है।”

    क्या है पूरा मामला?

    महिला ने अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। FIR में उसके साथ उसके पति को भी आरोपी बनाया गया था।

    शिकायतकर्ता के अनुसार, उसका आरोपी नंबर-1 यानी महिला के पति के साथ संबंध था। आरोप है कि पति ने यह बताया था कि उसका वैवाहिक जीवन ठीक नहीं चल रहा है। इसके बाद उसने शिकायतकर्ता से शादी करने का वादा किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

    शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी नंबर-1 ने उसके कुछ निजी फोटो और वीडियो भी बनाए और उसकी जानकारी एवं सहमति के बिना उन्हें एक तीसरे व्यक्ति के साथ साझा किया।

    बाद में दोनों आरोपियों द्वारा कथित तौर पर ब्लैकमेल किए जाने के बाद शिकायतकर्ता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    महिला पर कौन-कौन से आरोप थे?

    महिला के खिलाफ BNS की धारा 69, 308(2) (जबरन वसूली), 351(2) (आपराधिक धमकी) और धारा 3(5) के तहत आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66E (निजता का उल्लंघन) और 67A (यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण) के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।

    हाईकोर्ट ने हालांकि अन्य आरोपों को लेकर जांच जारी रखने की अनुमति दी।

    कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता के निजी फोटो और वीडियो के कथित ट्रांसमिशन से संबंधित आरोपों की जांच आवश्यक है।

    कोर्ट ने कहा कि यदि जांच के दौरान यह सामने आता है कि याचिकाकर्ता ने कोई डेटा ट्रांसफर नहीं किया था या उसकी सहमति के बिना ऐसा किया गया था, तो संबंधित अपराध के लिए उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की जा सकती।

    धारा 69 BNS क्या कहती है?

    BNS की धारा 69 के तहत यदि कोई व्यक्ति धोखे से या किसी महिला से शादी करने का झूठा वादा करके, जिसे पूरा करने का उसका इरादा नहीं था, उसके साथ यौन संबंध बनाता है, और वह कृत्य बलात्कार के अपराध की श्रेणी में नहीं आता, तो उसे 10 साल तक की सजा और जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

    कर्नाटक हाईकोर्ट ने इसी प्रावधान की भाषा पर गौर करते हुए स्पष्ट किया कि इस अपराध के लिए महिला को आरोपी नहीं बनाया जा सकता।

    अदालत ने महिला की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए धारा 69 BNS के तहत उसके खिलाफ दर्ज आरोप को रद्द कर दिया, जबकि बाकी आरोपों की जांच जारी रखने का निर्देश दिया।

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    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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