प्राइवेट एम्प्लॉयर और एजुकेशनल इंस्टिट्यूट एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति की जानकारी अनिवार्य रूप से नहीं मांग सकते: मद्रास हाईकोर्ट

  • प्राइवेट एम्प्लॉयर और एजुकेशनल इंस्टिट्यूट एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति की जानकारी अनिवार्य रूप से नहीं मांग सकते: मद्रास हाईकोर्ट

    मद्रास हाईकोर्ट की जस्टिस सी.वी. कार्तिकेयन और जस्टिस आर. शक्तिवेल डिवीज़न बेंच ने कहा कि तमिलनाडु में कोई भी प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट या प्राइवेट एम्प्लॉयर एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति या समुदाय की जानकारी अनिवार्य रूप से नहीं मांग सकता।

    पृष्ठभूमि की जानकारी

    याचिकाकर्ता ने मद्रास हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिकाकर्ता ने तमिलनाडु सरकार से यह निर्देश देने की मांग की कि वह राज्य के भीतर प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट और प्राइवेट एम्प्लॉयर को एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जाति या समुदाय की जानकारी अनिवार्य रूप से इकट्ठा करने से रोके, जब तक कि कानूनी प्रावधानों के तहत इसकी विशेष रूप से आवश्यकता न हो। याचिकाकर्ता ने तमिलनाडु सरकार से ऐसे उचित रेगुलेटरी उपाय बनाने का निर्देश देने की भी मांग की जो प्राइवेट इंस्टिट्यूट में भेदभाव-विरोधी सुरक्षा सुनिश्चित करें।

    इसके अलावा, जी. बालकृष्णन बनाम तमिलनाडु राज्य के मामले में भी इसी तरह की राहत की मांग की गई। उच्च और स्कूली शिक्षा विभागों के अधिकारियों को स्कूल शिक्षा (C-2) विभाग के 31.07.2000 के G.O.Ms.No.205 को लागू करने के लिए तुरंत कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई।

    यह मांग की गई कि एजुकेशनल इंस्टिट्यूट को माता-पिता/अभिभावकों के उस अधिकार के बारे में उचित निर्देश जारी किए जाएं, जिसके तहत उन्हें एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में एडमिशन लेते समय अपना धर्म/जाति बताने के लिए मजबूर न किया जाए। साथ ही ऐसे लोगों को संबंधित कॉलम में 'कोई धर्म नहीं' और 'कोई जाति नहीं' लिखने की अनुमति दी जाए।

    एक और निर्देश की मांग की गई कि राज्य में एजुकेशनल इंस्टिट्यूट संबंधित एजुकेशनल इंस्टिट्यूट द्वारा जारी ट्रांसफर सर्टिफिकेट में छात्र के धर्म/जाति का उल्लेख न करें।

    याचिकाकर्ता ने कहा कि तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी 31.07.2000 के G.O.Ms.No.205 का उल्लंघन किया गया। इस पर फिर से ज़ोर देने की ज़रूरत है।

    याचिकाकर्ता ने आगे तर्क दिया कि यदि जाति का उल्लेख नहीं किया गया तो उम्मीदवार के साथ भेदभाव किया गया और उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।

    अदालत की बातें और निष्कर्ष

    डिविज़न बेंच ने पाया कि बिना भेदभाव वाले समाज (Classless Society) का लक्ष्य पाने के लिए तमिलनाडु राज्य सरकार ने 31.07.2000 को G.O.Ms.No.205 जारी किया। तमिलनाडु सरकार के इस आदेश में कहा गया कि जो लोग सेकेंडरी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट में अपना धर्म या जाति नहीं बताना चाहते, उन्हें उन कॉलम में 'कोई धर्म नहीं' (No Religion) या 'कोई जाति नहीं' (No Caste) लिखने या उन कॉलम को खाली छोड़ने की इजाज़त दी जाए।

    तमिलनाडु सरकार के आदेश में यह भी कहा गया कि एडमिशन लेते समय या किसी भी अन्य समय, जब माता-पिता धर्म और जाति का खुलासा नहीं करना चाहते या नहीं कर पाते हैं तो उन पर ऐसा करने के लिए ज़ोर नहीं दिया जाना चाहिए।

    डिविज़न बेंच ने तमिलनाडु सरकार को यह भी निर्देश दिया कि वह तमिलनाडु सरकार के इस आदेश का व्यापक प्रचार-प्रसार करे, ताकि जो लोग अपनी जाति या धर्म का खुलासा नहीं करना चाहते, उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर न किया जाए।

    ट्रांसफर सर्टिफिकेट के संबंध में बेंच ने कहा कि वह ऐसा अनिवार्य निर्देश जारी नहीं कर सकती कि जाति का खुलासा नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ लोग ऐसा करना चाह सकते हैं। हालांकि, यदि कोई व्यक्ति अपनी जाति का खुलासा नहीं करना चाहता है, तो तमिलनाडु सरकार के आदेश को देखते हुए ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

    इसके अलावा, डिविज़न बेंच ने निर्देश दिया कि तमिलनाडु के भीतर कोई भी निजी शिक्षण संस्थान या निजी नियोक्ता अनिवार्य रूप से जाति का विवरण नहीं ले सकता है।

    उपर्युक्त बातों के साथ याचिकाकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका का डिविज़न बेंच द्वारा निपटारा कर दिया गया।

    Case Title : N. Vikraman vs. State of Tamil Nadu & Others

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