Codeine Syrup 'Racket' | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NDPS Act FIR में कथित सरगना और अन्य सह-आरोपियों को अंतरिम राहत दी

  • Codeine Syrup Racket | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने NDPS Act FIR में कथित सरगना और अन्य सह-आरोपियों को अंतरिम राहत दी

    पिछले हफ़्ते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कथित सरगना शुभम जायसवाल और कुछ अन्य सह-आरोपियों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत दर्ज FIR के संबंध में गिरफ़्तारी पर अंतरिम रोक लगाई, यह मामला संदिग्ध कोडीन कफ़ सिरप रैकेट से जुड़ा है।

    शुभम जायसवाल सहित कई लोगों ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर कर NDPS Act की धारा 8, 21 और 25 के तहत उनके खिलाफ़ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की थी। उन पर नशे के लिए कोडीन-आधारित कफ़ सिरप की कथित खरीद-बिक्री और इसके लिए उचित दस्तावेज़ न रखने का आरोप है।

    यह दलील दी गई कि जांच क्षेत्राधिकार से बाहर है, क्योंकि NDPS Act के प्रावधान कोडीन-आधारित कफ़ सिरप पर लागू नहीं होते हैं, क्योंकि ये न तो नारकोटिक ड्रग हैं और न ही साइकोट्रॉपिक पदार्थ।

    याचिकाकर्ता ने बताया कि एबॉट हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित फेन्सेडिल कफ़ सिरप, D&C नियमों के तहत परिभाषित एक शेड्यूल 'H1' दवा है। फेन्सेडिल में "कोडीन" (लगभग 0.2%) होता है, जो अकेले में एक नारकोटिक पदार्थ होगा।

    इसके अलावा, यह तर्क दिया गया कि केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में जारी धारा 2(xi)(b) के तहत 14.11.1985 की अधिसूचना (सीरियल नंबर 35) के अनुसार, प्रति खुराक इकाई में कोडीन की एक निर्दिष्ट सीमा वाला घोल या तैयारी को 'निर्मित दवा' नहीं माना जा सकता।

    इसलिए यदि धारा 2(xiv) और 2(xi)(b) के प्रावधानों को 14.11.1985 की अधिसूचना के संदर्भ में देखा जाए तो यह निष्कर्ष निकालना होगा कि कोडीन-आधारित कफ़ सिरप, अपने आप में "नारकोटिक ड्रग" या "निर्मित दवा" नहीं होंगे। क्योंकि जवाब देने वालों के पास अपनी बात रखने के लिए समय कम है।

    इसलिए जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने यह कहा:

    "हालांकि, चूंकि याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि सभी याचिकाकर्ता जांच में सहयोग करने को तैयार हैं, इसलिए हम यह आदेश देते हैं कि जांच जारी रह सकती है, लेकिन अगली सुनवाई की तारीख तक याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।"

    कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता जांच अधिकारियों के सामने तब पेश होंगे जब उन्हें बुलाया जाएगा।

    मामलों की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को होगी।

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