राज�थान हाईकोट

RPwD Act के तहत प्रोबेशनर भी कर्मचारी, सर्विस के दौरान विकलांगता होने पर नौकरी से नहीं निकाला जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि सर्विस के दौरान विकलांग होने वाले प्रोबेशनरी सरकारी कर्मचारी को 'दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016' (RPwD Act) की धारा 20 के तहत सुरक्षा पाने का अधिकार है, और उसे सिर्फ़ इसलिए नौकरी से नहीं निकाला जा सकता क्योंकि वह प्रोबेशन पर था।जस्टिस रेखा बोराना की बेंच ने एक कॉन्स्टेबल को राहत दी, जिसकी सर्विस प्रोबेशन पीरियड के दौरान एक दुर्घटना में 100% विकलांगता होने के बाद खत्म कर दी गई। कोर्ट ने कहा कि रेगुलर भर्ती प्रक्रिया से नियुक्त कर्मचारी सिर्फ़ इसलिए "कर्मचारी" नहीं रह...

POCSO और किशोर मामलों की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों को कानूनी प्रशिक्षण दिया जाए: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि POCSO और किशोरों से जुड़े मामलों की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों को आयु निर्धारण से संबंधित कानूनी प्रावधानों का समुचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह टिप्पणी एक पॉक्सो मामले में जमानत देते हुए की, जहां जांच के दौरान पीड़िता की आयु निर्धारित करने की वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।जस्टिस अशोक कुमार जैन ने कहा कि राजस्थान के पुलिस महानिदेशक को इस बात पर विचार करना चाहिए कि ऐसे मामलों की जांच करने वाले अधिकारियों को व्यापक कानूनी प्रशिक्षण दिया जाए...

गिरफ़्तारी के लिखित कारण न देने से आरोपी को ज़मानत का अधिकार नहीं मिलता, जब तक कि कोई नुकसान न हुआ हो: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि गिरफ़्तारी के लिखित कारण न देने से आरोपी को ज़मानत का अधिकार अपने-आप नहीं मिल जाता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि इससे उसे कोई नुकसान हुआ है। [2026 LiveLaw (Raj) 307]कोर्ट ने कहा कि हालांकि गिरफ़्तारी के लिखित कारण देना ज़रूरी होता है, लेकिन असली बात यह है कि क्या आरोपी को गिरफ़्तारी के कारणों के बारे में बताया गया, क्या गिरफ़्तारी की जानकारी परिवार वालों को दी गई, और क्या प्रक्रिया में हुई किसी चूक से आरोपी को सच में कोई नुकसान हुआ।जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की बेंच...

होटलों के लिए उदयपुर की पहाड़ियों को बेरहमी से काटा गया, शहर की हालत दयनीय: हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर की पहाड़ियों के बड़े पैमाने पर विनाश पर दुख जताया। कोर्ट ने कहा कि शहर की पहाड़ियों और पर्वतों को "बेरहमी से काटा गया" और उनकी जगह होटल, रिसॉर्ट और कमर्शियल इमारतें बना दी गई हैं, जिससे शहर की हालत "दयनीय" हो गई।जस्टिस समीर जैन की सिंगल-जज बेंच ने बसंत होटल्स प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बातें कहीं। कंपनी ने अपने होटल प्रोजेक्ट पर 2018 की हिल पॉलिसी लागू करने को चुनौती दी थी और अधिकारियों पर भेदभावपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया।24 जुलाई को सुनवाई के...

गवाहों को धमकाना या सामाजिक बहिष्कार करना कानून के राज पर हमला, जांच अधिकारी तत्काल करें कार्रवाई: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि गवाहों को धमकाना, उन पर दबाव बनाना या उनका सामाजिक बहिष्कार करना कानून के शासन की मूल भावना पर सीधा प्रहार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान गवाहों को डराने-धमकाने या सामाजिक रूप से अलग-थलग करने का प्रयास आपराधिक न्याय व्यवस्था में गंभीर हस्तक्षेप है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने जांच अधिकारी (IO) को निर्देश दिया कि यदि किसी गवाह की ओर से धमकी, दबाव या सामाजिक बहिष्कार की शिकायत दी जाती है तो उसका निष्पक्ष...

बड़ी साजिश का खुलासा होने पर दूसरी FIR दर्ज करना वैध, भले ही जानकारी पहली जांच में मिली हो: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पहली FIR की जांच के दौरान ऐसा नया तथ्य सामने आता है, जिससे किसी अलग आपराधिक गतिविधि, अलग घटना या बड़ी साजिश का खुलासा होता है तो उसके आधार पर दूसरी FIR दर्ज करना पूरी तरह वैध है। केवल इस वजह से कि दूसरी एफआईआर का आधार पहली जांच के दौरान मिला, उसे अवैध नहीं माना जा सकता।जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने यह टिप्पणी करते हुए दूसरी FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज की।याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उनके खिलाफ दर्ज दूसरी FIR उसी लेनदेन से संबंधित है, जिसके लिए...

NDPS मामले में आरोपी नहीं है मालिक तो सिर्फ वाहन का रजिस्ट्रेशन न होना अंतरिम सुपुर्दगी रोकने का आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी NDPS मामले में वाहन का मालिक आरोपी नहीं है तो केवल इस आधार पर कि वाहन का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है, उसे अंतरिम सुपुर्दगी देने से इनकार नहीं किया जा सकता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल बेंच ने NDPS मामले में जब्त अपंजीकृत कार को उसके मालिक के सुपुर्द करने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने शर्त रखी कि वाहन मालिक 30 दिनों के भीतर उसका पंजीकरण कराएगा और तब तक उसे सार्वजनिक सड़क पर नहीं चलाएगा।मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी...

POCSO मामले में बरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने बिना सुनवाई के पुलिस अधिकारी से मुआवज़ा वसूलने का आदेश रद्द किया

राजस्थान हाईकोर्ट ने हाल ही में POCSO मामले में पुलिस अधिकारी से ₹3 लाख का मुआवज़ा वसूलने का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि उन्हें पहले नोटिस दिए बिना और सुनवाई का मौका दिए बिना उनके खिलाफ कोई भी प्रतिकूल आदेश नहीं दिया जा सकता।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की सिंगल जज बेंच ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना याचिकाकर्ता-पुलिस अधिकारी से मुआवज़ा वसूलने का आदेश देकर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया।याचिकाकर्ता ने कोटा के POCSO मामलों के स्पेशल जज के आदेश को चुनौती दी...

आत्महत्या मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने टीचर्स को दी राहत, कहा- छात्रा को पढ़ाई और उपस्थिति को लेकर डांटना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी छात्र या छात्रा को अनियमित उपस्थिति, कमजोर शैक्षणिक प्रदर्शन या अनुशासनहीनता के लिए डांटना अथवा अनुशासनात्मक कार्रवाई करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता।अदालत ने कहा कि जब तक आत्महत्या के लिए उकसाने, जानबूझकर सहायता करने या आवश्यक आपराधिक मंशा का स्पष्ट प्रमाण न हो, तब तक ऐसा मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 305 के तहत नहीं बनता।जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने कक्षा 12 की एक छात्रा की आत्महत्या के मामले में शिक्षकों के खिलाफ धारा 305...

जोधपुर में मांस दुकानों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर दखल से हाईकोर्ट का इनकार

राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर में कथित अवैध पशु वध और बिना लाइसेंस संचालित मांस दुकानों की जांच की मांग वाली जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि शहर में मांस व्यापार को नियंत्रित करने के लिए पहले से ही कानूनी व्यवस्था मौजूद है। ऐसे में अदालत को नियामकीय व्यवस्था के सूक्ष्म पहलुओं में हस्तक्षेप करने या विस्तृत जांच के आदेश देने की आवश्यकता नहीं है।डॉ. जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि यदि कोई दुकान आवश्यक लाइसेंस के बिना संचालित होती पाई...

रील बनाकर लोकप्रियता हासिल करना पुलिस अधिकारी का गंभीर कदाचार: राजस्थान हाईकोर्ट, DGP को जांच के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर रील बनाकर लोकप्रियता हासिल करने के आरोपों में एक पुलिस निरीक्षक के खिलाफ जांच के आदेश दिए।अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारी द्वारा अपने बेटे के साथ रील बनाना और उन्हें सोशल मीडिया मंचों पर साझा कर प्रशंसकों की संख्या बढ़ाने का प्रयास बेहद गंभीर कदाचार है। जस्टिस अशोक कुमार जैन ने राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) को पूरे मामले की जांच कर दो महीने के भीतर रिपोर्ट अदालत में पेश करने का निर्देश दिया।मामला एक जमानत याचिका से जुड़ा था जिसमें आरोपी पर लापरवाही से वाहन...

विचाराधीन कैदी भी बेच सकता है अपनी संपत्ति, जेल से पावर ऑफ अटॉर्नी करना वैध: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी विचाराधीन कैदी को जेल में रहने मात्र से अपनी संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं छिन जाता।अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसा व्यक्ति जेल से विधिवत पंजीकृत सामान्य या विशेष पावर ऑफ अटॉर्नी निष्पादित कर सकता है और उसके अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से संपत्ति की बिक्री भी कानूनी रूप से की जा सकती है।जस्टिस अनूप कुमार ढांढ की एकलपीठ ने कहा,"कानून पूरी तरह स्पष्ट है कि विचाराधीन कैदी अपनी संपत्ति के हस्तांतरण के अधिकार से वंचित नहीं होता। वह जेल अधीक्षक के...

रिवीजन कोर्ट ट्रायल कोर्ट को संज्ञान लेने का निर्देश नहीं दे सकती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुनर्विचार अधिकार का प्रयोग करते हुए अदालत ट्रायल कोर्ट को किसी आरोपी के खिलाफ संज्ञान लेने का निर्देश नहीं दे सकती। अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 398 केवल आगे की जांच या आगे की न्यायिक पड़ताल का आदेश देने का अधिकार देती है संज्ञान लेने का निर्देश देने का नहीं।जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने एडिशनल सेशन जज का आदेश रद्द किया जिसमें ट्रायल कोर्ट को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेने का निर्देश दिया गया...

इस्तीफे के बाद जारी चेक बाउंस होने पर पूर्व प्राचार्य पर नहीं चल सकता मुकदमा: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक स्कूल के पूर्व प्राचार्य के खिलाफ चेक अनादरण (चेक बाउंस) मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की।अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति ने चेक जारी होने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया हो, उसके खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) के तहत आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने कहा कि इस्तीफा देने के साथ ही याचिकाकर्ता और स्कूल के बीच नियोक्ता-कर्मचारी का संबंध समाप्त हो गया था। इसलिए उनके इस्तीफे के बाद जारी किए गए चेक के लिए उन्हें आपराधिक रूप से...

परिवार के दबाव में दर्ज हुई थी दुष्कर्म की FIR: पीड़िता के बयान के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने रद्द की कार्यवाही

राजस्थान हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में दर्ज FIR से उपजी आपराधिक कार्यवाही रद्द की।अदालत ने यह फैसला उस समय दिया, जब पीड़िता ने स्वयं कहा कि FIR परिवार के दबाव में दर्ज कराई गई। साथ ही, उसने बताया कि वह आरोपी से विवाह कर चुकी है और दोनों अब पति-पत्नी के रूप में सुखद वैवाहिक जीवन बिता रहे हैं। जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने कहा कि दोनों पक्षों ने वर्ष 2020 में विवाह किया था और आपराधिक मुकदमा लंबित रहने के बावजूद उनका रिश्ता लगभग छह वर्षों तक कायम रहा। ऐसे में मुकदमे को जारी रखने से दोनों...

राजस्थान हाईकोर्ट ने मंदिर के रेनोवेशन के लिए पुलिस सुरक्षा का आदेश दिया, कहा- न्यायिक आदेश सिर्फ़ कागज़ी आदेश बनकर नहीं रह सकते

राजस्थान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द किया, जिसमें भगवान महादेव मंदिर के रेनोवेशन से जुड़े विवाद में याचिकाकर्ता के पक्ष में जारी अंतरिम रोक (इंजंक्शन) को लागू करने के लिए पुलिस सहायता की मांग वाली अर्ज़ी खारिज की गई थी। [2026 LiveLaw (Raj) 298]जस्टिस फरजंद अली ने कहा कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के ऑर्डर XXXIX नियम 2-A के तहत कार्यवाही (जो सज़ा देने वाली प्रकृति की होती है) और मौजूदा रोक आदेश को लागू करने के लिए पुलिस सहायता की मांग करने वाली अर्ज़ी के बीच स्पष्ट अंतर है।कोर्ट...

सिर्फ निजी जांचकर्ता की रिपोर्ट से ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी नहीं माना जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल किसी निजी जांचकर्ता की रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनी यह दावा नहीं कर सकती कि दुर्घटना करने वाले वाहन चालक का ड्राइविंग लाइसेंस फर्जी था। यदि बीमा कंपनी इस आधार पर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है तो उसे संबंधित लाइसेंस जारी करने वाले प्राधिकरण के अधिकारी को गवाह के रूप में पेश कर यह साबित करना होगा कि लाइसेंस वास्तव में उसी कार्यालय से जारी नहीं हुआ।जस्टिस आशुतोष कुमार ने यह फैसला नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से दायर दो अपीलों को खारिज करते हुए...

राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया: कोर्ट भर्ती के लिए योग्यता की शर्तें तय या बढ़ा नहीं सकते

राजस्थान हाईकोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर (व्याकरण), असिस्टेंट प्रोफेसर (साहित्य) और असिस्टेंट प्रोफेसर (सामान्य संस्कृत) के पदों पर नियुक्ति चाहने वाले उम्मीदवारों की कई रिट याचिकाओं को खारिज किया। कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों के तहत तय की गई योग्यता शर्तों को कोर्ट बढ़ा नहीं सकता।जस्टिस गणेश राम मीना ने कहा कि एक नियोक्ता (Employer) के तौर पर राज्य ही भर्ती के लिए ज़रूरी योग्यताओं को तय करने के लिए सबसे सही है और कोर्ट नियमों में ऐसी योग्यताएं नहीं जोड़ सकता जो तय नहीं की गईं।ये याचिकाएं उन...