राज�थान हाईकोट

बैंक अकाउंट फ्रीज़ करने से पहले सतर्क रहें: DGP ने जारी की गाइडलाइन, राजस्थान हाईकोर्ट को राज्य सरकार ने दी जानकारी
बैंक अकाउंट फ्रीज़ करने से पहले सतर्क रहें: DGP ने जारी की गाइडलाइन, राजस्थान हाईकोर्ट को राज्य सरकार ने दी जानकारी

राजस्थान हाईकोर्ट में यह सवाल उठने पर कि क्या केवल पुलिस (जांच एजेंसी) के पत्र के आधार पर बिना CrPC की धारा 102 की प्रक्रिया अपनाए किसी का बैंक खाता फ्रीज़ किया जा सकता है राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि अब इस संबंध में दिशानिर्देश तैयार कर दिए गए।राज्य ने जानकारी दी कि DGP (साइबर क्राइम) ने 09 मई, 2025 को छह बिंदुओं वाली गाइडलाइन जारी की, जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सभी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस और एसीपी को आदेश दिया गया कि वे जांच एजेंसियों को बैंक...

Right To Education | बच्चे के आधार कार्ड पर निवास वार्ड नंबर का न होना RTE Act के तहत एडमिशन अस्वीकार करने का आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
Right To Education | बच्चे के आधार कार्ड पर निवास वार्ड नंबर का न होना RTE Act के तहत एडमिशन अस्वीकार करने का आधार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) के तहत प्राइवेट स्कूल में एडमिशन के लिए आवेदन अस्वीकार किए जाने वाले नाबालिग को राहत प्रदान करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21-ए के तहत किसी मौलिक अधिकार को केवल प्रक्रियात्मक आधार या तकनीकी कारणों से समाप्त या सीमित नहीं किया जा सकता।वर्तमान मामले में बच्चे का आवेदन इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया कि सत्यापन के लिए प्रस्तुत आधार कार्ड पर उसके निवास वार्ड का नंबर नहीं था।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने कहा कि एक बार जब याचिकाकर्ता का लॉटरी...

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: न्यायिक डिक्री सिर्फ दिखावा नहीं, तकनीकी आधार पर राहत देने से इनकार नहीं कर सकता कोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: न्यायिक डिक्री सिर्फ दिखावा नहीं, तकनीकी आधार पर राहत देने से इनकार नहीं कर सकता कोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम न्यायालय द्वारा पारित डिक्री को केवल कागज़ी दस्तावेज़ या दीवार पर टंगी शो-पीस बनाकर नहीं छोड़ा जा सकता। निष्पादन न्यायालय तकनीकी कारणों के आधार पर वास्तविक राहत से इनकार नहीं कर सकता।जस्टिस फ़र्ज़न्द अली ने कहा,“डिक्री का उद्देश्य महज़ कागज़ पर बने रहना नहीं है। इसे वास्तविकता में लागू किया जाना चाहिए ताकि सफल पक्षकार को वह संपूर्ण लाभ मिल सके, जो निर्णय और डिक्री में निहित है। अन्यथा, पूरा न्यायिक प्रक्रिया ही निरर्थक हो जाएगी।”मामला ऐसे समझौता आधारित...

बाजार में जनता के लिए बना मंदिर निजी नहीं, इसके आसपास मांस की दुकानों के संचालन पर प्रतिबंध लागू: राजस्थान हाईकोर्ट
बाजार में जनता के लिए बना मंदिर निजी नहीं, इसके आसपास मांस की दुकानों के संचालन पर प्रतिबंध लागू: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 269 सहपठित धारा 340 के तहत जारी 22 मार्च 2021 के मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के खंड 4 के अनुसार पूजा स्थलों के 50 मीटर के दायरे में स्थापित मांस की दुकानों के लाइसेंस रद्द करने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की।जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने याचिकाकर्ता द्वारा मंदिर के कुछ दुकानदारों की निजी संपत्ति होने के तर्क को खारिज किया। साथ ही कहा कि जब तक अन्यथा साबित न हो प्रत्येक मंदिर एक सार्वजनिक संपत्ति है चूंकि और विचाराधीन मंदिर एक खुले...

पहली बार 164 CrPC के बयान में लगाए गए बलात्कार के आरोप भी चार्ज फ्रेमिंग के दौरान नज़रअंदाज़ नहीं किए जा सकते :राजस्थान हाईकोर्ट 
पहली बार 164 CrPC के बयान में लगाए गए बलात्कार के आरोप भी चार्ज फ्रेमिंग के दौरान नज़रअंदाज़ नहीं किए जा सकते :राजस्थान हाईकोर्ट 

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि पीड़िता ने बलात्कार का आरोप पहली बार दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के तहत दर्ज बयान में लगाया हो तो केवल इस आधार पर उस आरोप को चार्ज फ्रेमिंग (आरोप तय करने) के चरण पर ख़ारिज नहीं किया जा सकता।मामले की पृष्ठभूमिजस्टिस संदीप शाह की एकलपीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें याचिकाकर्ता ने सेशन कोर्ट द्वारा उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों ग़लत तरीके से प्रवेश, अवैध रूप से रोकना, चोट पहुचाना महिला की लज्जा भंग करना और बलात्कार को चुनौती दी थी।याचिकाकर्ता का कहना...

राजस्थान हाईकोर्ट ने 2021 उपनिरीक्षक भर्ती रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक, कहा- SIT रिपोर्ट बिना शपथपत्र के पेश की गई
राजस्थान हाईकोर्ट ने 2021 उपनिरीक्षक भर्ती रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक, कहा- SIT रिपोर्ट बिना शपथपत्र के पेश की गई

राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार (8 सितंबर) को उस एकल पीठ के फैसले पर रोक लगाई, जिसमें 2021 की उपनिरीक्षक भर्ती को कथित अनियमितताओं के चलते रद्द कर दिया गया।चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने उन अपीलों पर सुनवाई की, जिनमें उपनिरीक्षक चयन और पूरे भर्ती प्रक्रिया रद्द किए जाने को चुनौती दी गई। अदालत ने पाया कि एकल पीठ ने जिन महत्वपूर्ण दस्तावेजों पर भरोसा किया, वे संबंधित अधिकारियों के शपथपत्र से समर्थित नहीं थे।खंडपीठ ने विशेष रूप से उस SIT रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिसे...

ज़मानती अपराध की आरोपी महिलाओं को 43 दिनों तक हिरासत में क्यों रखा गया?: राजस्थान हाईकोर्ट ने DGP को जांच का निर्देश दिया
ज़मानती अपराध की आरोपी महिलाओं को 43 दिनों तक हिरासत में क्यों रखा गया?: राजस्थान हाईकोर्ट ने DGP को जांच का निर्देश दिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने दो महिलाओं पर दुःख और पीड़ा व्यक्त की, जिन्हें ज़मानती अपराधों में आरोपित होने के बावजूद 43 दिनों की न्यायिक हिरासत में रखा गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट और एडीजे ने उनकी ज़मानत याचिकाएं लापरवाही और यांत्रिक तरीके से खारिज कीं और अपने विवेक का सही ढंग से प्रयोग नहीं किया।जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने खेद व्यक्त करते हुए डीजीपी को निर्देश दिया कि वह ज़मानती प्रकृति के मामले में याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी के लिए संबंधित जांच अधिकारी से "स्पष्टीकरण" मांगें। तदनुसार, आगे की कार्रवाई करें।...

किशोरावस्था साबित करने का पैमाना कठोर सबूत नहीं, संदेह की स्थिति में आरोपी के पक्ष में झुके अदालतें: राजस्थान हाईकोर्ट
किशोरावस्था साबित करने का पैमाना कठोर सबूत नहीं, संदेह की स्थिति में आरोपी के पक्ष में झुके अदालतें: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी आरोपी की जुवेनाइल (किशोर) होने की दलील पर सुनवाई के दौरान सबूत का पैमाना उतना कठोर नहीं होना चाहिए जितना कि किसी आपराधिक मुकदमे में “बियोंड रीज़नेबल डाउट” की कसौटी पर परखा जाता है। यदि दो दृष्टिकोण संभव हों तो सीमा-रेखा वाले मामलों में अदालत को आरोपी के पक्ष में झुकना चाहिए।जस्टिस संदीप शाह की एकल पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 की धारा 94 में जिन दस्तावेजों को प्राथमिकता दी गई, जैसे...

राजस्थान हाईकोर्ट ने डेंटल कॉलेज पर लगाई गई 7.5 लाख रुपये प्रति स्टूडेंट जुर्माने की कार्यवाही पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने डेंटल कॉलेज पर लगाई गई 7.5 लाख रुपये प्रति स्टूडेंट जुर्माने की कार्यवाही पर लगाई रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने एकल पीठ के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें व्‍यास डेंटल कॉलेज पर शैक्षणिक सत्र 2018-19 और 2019-20 के दौरान डेंटल स्टूडेंट्स को अनियमित दाखिले देने के लिए प्रति स्टूडेंट 7.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।चीफ जस्टिस मुन्नुरी लक्ष्मण और जस्टिस बिपिन गुप्ता की खंडपीठ ने कॉलेज की अपील पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।कॉलेज की ओर से दलील दी गई कि इतनी बड़ी और असंगत सजा बिना किसी पूर्व सूचना या प्रार्थना के दी गई, जबकि इसी मामले में राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS)...

कथित तौर पर जाली दस्तावेज जमा करने के आपराधिक मामले में बरी होने से सेवा के लिए पात्रता नहीं मिलती: राजस्थान हाईकोर्ट
कथित तौर पर जाली दस्तावेज जमा करने के आपराधिक मामले में बरी होने से सेवा के लिए पात्रता नहीं मिलती: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान जाली दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के आरोप में याचिकाकर्ता की बर्खास्तगी को बरकरार रखा, जबकि संबंधित विभाग द्वारा दर्ज जालसाजी, मनगढ़ंत और धोखाधड़ी के एक आपराधिक मामले में याचिकाकर्ता को बरी कर दिया गया था। जस्टिस आनंद शर्मा ने कहा कि सिर्फ़ इसलिए कि याचिकाकर्ता को बरी कर दिया गया था, यह अनुमान नहीं लगाया जा सकता कि इस तरह की बरी किए जाने से याचिकाकर्ता को संबंधित पद पर रहने की पात्रता प्राप्त हो जाती है।"वैसे भी, सिर्फ़ इस तथ्य से कि याचिकाकर्ताओं को...

जातिगत भेदभाव को रोकने और सम्मानजनक अंतिम संस्कार को सक्षम बनाने के लिए मृत्यु के बाद के संस्कारों को सरकारी नीति के अंतर्गत लाया जाना चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट
जातिगत भेदभाव को रोकने और सम्मानजनक अंतिम संस्कार को सक्षम बनाने के लिए मृत्यु के बाद के संस्कारों को सरकारी नीति के अंतर्गत लाया जाना चाहिए: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि "जाति" या अन्य आधारों पर अंतिम संस्कार स्थलों के सीमांकन के कारण मृत्यु के बाद "व्यक्ति की गरिमा" प्रभावित होती है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि अब समय आ गया है कि राज्य मृत्यु के बाद के संस्कारों के लिए सार्वजनिक स्थान के संबंध में सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू एक समान नीति बनाए।कंचन पाटिल (मिरासी) समाज द्वारा राज्य द्वारा अंतिम संस्कार के लिए सार्वजनिक भूमि के उपयोग की अनुमति न दिए जाने के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह...

मामले के निपटारे के बाद दायर आवेदन में निपटान शर्तों को संशोधित करने का DRT के पास कोई अधिकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
मामले के निपटारे के बाद दायर आवेदन में निपटान शर्तों को संशोधित करने का DRT के पास कोई अधिकार नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने माना कि ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) को सहमति वसूली प्रमाण पत्र के आधार पर मामले के निपटारे के बाद दायर आवेदन के संबंध में एकमुश्त निपटान (ओटीएस)/निपटान के नियमों और शर्तों को फिर से लिखने/संशोधित करने का कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ डीआरटी के उस आदेश के विरुद्ध एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें प्रतिवादी द्वारा राशि चुकाने के लिए और समय मांगने हेतु दायर आवेदन को स्वीकार कर लिया गया था, जबकि SRFAESI अधिनियम के तहत मामले का निपटारा डीआरटी द्वारा...

विवादित जल निकायों की पहचान विशेषज्ञ करें, केवल राजस्व रिकॉर्ड प्रविष्टियां सत्यापन के लिए पर्याप्त नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
'विवादित' जल निकायों की पहचान विशेषज्ञ करें, केवल राजस्व रिकॉर्ड प्रविष्टियां सत्यापन के लिए पर्याप्त नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने विवादित जल निकायों की पहचान और संरक्षण के लिए तकनीकी विशेषज्ञ मूल्यांकन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केवल राजस्व अभिलेख प्रविष्टियाँ ही पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि ज़मीनी हकीकत का सत्यापन सक्षम विशेषज्ञ प्राधिकारी द्वारा किया जाना आवश्यक है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहे थे जिसमें याचिकाकर्ता के आवंटित खनन क्षेत्र में जाने के अधिकार को राज्य सरकार ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि संबंधित भूमि चारागाह होने के साथ-साथ एक जल निकाय भी है।यह देखते हुए...

राजस्थान हाईकोर्ट ने अनियमितताओं के कारण 2021 SI भर्ती रद्द की; RPSC में प्रणालीगत कदाचार का स्वतः संज्ञान लिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने अनियमितताओं के कारण 2021 SI भर्ती रद्द की; RPSC में प्रणालीगत कदाचार का स्वतः संज्ञान लिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा उप-निरीक्षकों के पदों पर 2021 में की गई भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया में व्यवस्थागत अनियमितताएं - पेपर लीक, परीक्षा के दौरान नकल, फर्जी उम्मीदवारों का इस्तेमाल - सामने आई थीं। अदालत ने कहा कि ऐसी भर्ती प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए और यह रद्दीकरण "सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं के संचालन में राज्य की अखंडता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है"। ऐसा करते हुए, अदालत ने राज्य में RPSC के भीतर "व्यवस्थागत कदाचार" का स्वतः...

घनी आबादी वाले बाज़ार में शराब की दुकान खोलना संविधान के अनुच्छेद 21 और 47 का उल्लंघन : राजस्थान हाईकोर्ट
घनी आबादी वाले बाज़ार में शराब की दुकान खोलना संविधान के अनुच्छेद 21 और 47 का उल्लंघन : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने घनी आबादी वाले बाज़ार में शराब की दुकान आवंटन को संविधान के अनुच्छेद 21 और 47 के प्रावधानों के खिलाफ़ करार दिया। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है और साथ ही संयम नीति प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।मामला जयपुर के किशनपोल बाज़ार का है, जहां वर्ष 2021-22 की आबकारी नीति के तहत एक महिला को शराब की दुकान आवंटित की गई। लेकिन 13 अगस्त 2025 को आबकारी विभाग ने जन आक्रोश का हवाला देते हुए दुकान को किसी आपत्तिहीन क्षेत्र में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। इसी...

मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने निजी मकान के बाहर डेयरी बूथ लगाने पर लगाई रोक
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा मामला: राजस्थान हाईकोर्ट ने निजी मकान के बाहर डेयरी बूथ लगाने पर लगाई रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर में निजी आवास के बाहर प्रस्तावित डेयरी बूथ की स्थापना पर रोक लगाते हुए मामले की जांच के लिए कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया।जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने माना कि यह मामला याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 21) के उल्लंघन से जुड़ा है। साथ ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 152 (सार्वजनिक उपद्रव को हटाने की प्रक्रिया) के दायरे में आता है।याचिकाकर्ता का कहना था कि बिना बिजली, पुलिस, पीडब्ल्यूडी आदि विभागों से एनओसी लिए ही डेयरी बूथ को उसके घर के सामने लगाने की...

S.10 CCA के तहत S.34 याचिका के साथ आवेदन दायर करना S.34 A&C एक्ट की आवश्यकताओं को पूरा करता है: राजस्थान हाईकोर्ट
S.10 CCA के तहत S.34 याचिका के साथ आवेदन दायर करना S.34 A&C एक्ट की आवश्यकताओं को पूरा करता है: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की खंडपीठ ने कहा है कि यदि वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम ("सीसीए") की धारा 10 के अंतर्गत दायर आवेदन में शीर्षक में मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम ("एसीए") की धारा 34 का उल्लेख नहीं है, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उस आवेदन को धारा 34, एसीए के अंतर्गत आवेदन नहीं माना जा सकता। धारा 10, सीसीए के अंतर्गत आवेदन दायर करना और धारा 34 की याचिका को संलग्न करना धारा 34 की आवश्यकताओं को पूरा करता है और ऐसा आवेदन कानून की दृष्टि से...