पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
'मातृ देवो भव': पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बुज़ुर्ग माँ को ₹30,000 का अंतरिम गुज़ारा-भत्ता सही ठहराया, बेटे की सैलरी से कटाने का निर्देश
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक आदेश को सही ठहराया, जिसमें दो बेटों को अपनी बुज़ुर्ग विधवा माँ को अंतरिम गुज़ारा भत्ते के तौर पर हर महीने ₹30,000 देने का निर्देश दिया गया था। साथ ही कोर्ट ने भुगतान के तरीके में बदलाव किया ताकि सैलरी से कटौती और बेटों के अकाउंट से माँ के अकाउंट में ऑटो-डेबिट के ज़रिए इस आदेश का असरदार तरीके से पालन सुनिश्चित किया जा सके।जस्टिस नीरजा के. कालसन ने कहा,"यह याद दिलाना ज़रूरी हो जाता है कि अपने माता-पिता का भरण-पोषण करने का बच्चे का फ़र्ज़ सिर्फ़ कानूनी नहीं है,...
आरोपी अग्रिम ज़मानत न मिलने के बाद बिना सरेंडर किए या हालात बदले बिना FIR रद्द करने की मांग नहीं कर सकता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, जिसमें FIR रद्द करने की मांग की गई। कोर्ट ने कहा कि अग्रिम ज़मानत न मिलने के बाद कोई भी आरोपी सीधे तौर पर कोर्ट के 'अंतर्निहित क्षेत्राधिकार' (inherent jurisdiction) का इस्तेमाल करके FIR रद्द करने की मांग नहीं कर सकता, खासकर तब जब उसने न तो सरेंडर किया हो और न ही जांच में सहयोग किया हो।जस्टिस सुमीत गोयल ने कहा,"याचिकाकर्ता की यह कोशिश 'प्रक्रियात्मक पैंतरा' है। इसका मकसद अलग-अलग कानूनी रास्तों को आपस में मिलाकर अपने खिलाफ आए फैसलों से बचने की एक चाल...
बच्चे की देखभाल करने वाली नानी CrPC की धारा 125 के तहत नाबालिग की याचिका दायर कर सकती है: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 125 के तहत नाबालिग बच्चे की ओर से भरण-पोषण की मांग करने वाली याचिका तब भी स्वीकार्य है, जब उसे बच्चे की नानी ने दायर किया हो—बशर्ते कि बच्चे की वास्तविक देखभाल वही कर रही हो।कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि याचिका की स्वीकार्यता को लेकर उठाई गई तकनीकी आपत्ति के पीछे एक गहरा मुद्दा छिपा है—कि क्या किसी नाबालिग के भरण-पोषण के वैधानिक अधिकार को केवल इसलिए खत्म किया जा सकता है, क्योंकि याचिका उसकी माँ ने दायर नहीं...
नियमित ज़मानत मिलने के बाद अग्रिम ज़मानत नहीं मिल सकती, भले ही बाद में कोई गंभीर अपराध जोड़ दिया गया हो: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जिस आरोपी को पहले ही नियमित ज़मानत मिल चुकी है, वह सिर्फ़ इसलिए अग्रिम ज़मानत नहीं मांग सकता कि बाद में उसके ख़िलाफ़ कोई ज़्यादा गंभीर अपराध जोड़ दिया गया। कोर्ट ने दोहराया कि ऐसे आरोपी को "कानून की हिरासत में" (Constructive Custody of Law) माना जाता है।जस्टिस मनीषा बत्रा ने कहा कि याचिकाकर्ता की पिछली याचिका को कोर्ट ने 06.04.2026 को ही खारिज किया था। उसके तुरंत बाद 16.04.2026 को यह मौजूदा याचिका दायर की गई।कोर्ट ने आगे कहा, "याचिका में...
दल बदल के बाद कार्रवाई का आरोप: ट्राइडेंट की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्राइडेंट लिमिटेड की उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें कंपनी ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा उसके बरनाला स्थित संयंत्र पर की गई कथित छापेमारी के बाद किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।कंपनी का आरोप है कि यह कार्रवाई उसके मालिक और सांसद राजिंदर गुप्ता द्वारा आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद की गई।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बोर्ड को केवल कानून और विधिसम्मत...
आदेश लिखाते समय टोकने पर वकील को अवमानना नोटिस, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना का नोटिस जारी किया, जिसने वर्चुअल सुनवाई के दौरान अदालत द्वारा आदेश लिखाए जाते समय कार्यवाही में व्यवधान डाला और खुले तौर पर अदालत के विचारों पर आपत्ति जताई।जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मंचंदा की खंडपीठ ने कहा कि अपील पर बहस पूरी हो चुकी थी। अदालत ओपन कोर्ट में आदेश लिखवा रही थी। उसी दौरान अपीलकर्ता की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित अधिवक्ता सुनील कुमार मुखी ने कार्यवाही में हस्तक्षेप शुरू किया।अदालत के...
झूठी पहचान बताने वाली महिला की गवाही अविश्वसनीय: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दुष्कर्म दोषी को बरी किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 2002 के अपहरण और दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी किया।अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी तब ढह गई जब यह सामने आया कि शिकायतकर्ता महिला ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर एक मृत महिला का नाम अपनाया था और अदालत के समक्ष झूठी जानकारी दी थी। जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने कहा कि जिस महिला ने अपनी पहचान के बारे में झूठ बोला हो, उसकी गवाही को बिना परीक्षण के स्वीकार नहीं किया जा सकता।अदालत ने टिप्पणी की कि “धोखाधड़ी और न्याय साथ-साथ नहीं चल सकते” और...
लॉरेंस ऑफ पंजाब विवाद: रिलीज रोकने के निर्देश पर Zee की याचिका, पंजाब-केन्द्र से जवाब तलब
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने OTT मंच Zee5 पर प्रस्तावित सीरीज लॉरेंस ऑफ पंजाब की रिलीज रोकने संबंधी निर्देशों को चुनौती देने वाली Zee एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड की याचिका पर पंजाब सरकार और केन्द्र सरकार से जवाब मांगा।जस्टिस जगमोहन बंसल ने मामले की सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया और दोनों सरकारों से जवाब दाखिल करने को कहा।अब मामले की अगली सुनवाई 11 मई को होगी।याचिका में Zee एंटरटेनमेंट ने 23 और 24 अप्रैल 2026 को जारी उन पत्रों को चुनौती दी, जिनमें उसे गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के जीवन पर...
16 वर्ष बाद दर्ज कराई बलात्कार की FIR हाईकोर्ट ने की रद्द, कहा- संबंध सहमति से था
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 16 वर्ष की देरी से दर्ज दुष्कर्म FIR रद्द करते हुए कहा कि लंबे समय तक चले सहमति आधारित संबंध को केवल विवाह के झूठे वादे के आधार पर दुष्कर्म नहीं माना जा सकता, विशेषकर जब शिकायत दर्ज कराने में असाधारण और अस्पष्ट देरी हो।जस्टिस एन.एस. शेखावत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 और 506 के तहत दर्ज FIR निरस्त करते हुए कहा कि मामले के तथ्यों से दुष्कर्म का अपराध प्रथमदृष्टया स्थापित नहीं होता।अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता स्वयं स्वीकार करती है कि उसे वर्ष 2001-02 से ही...
प्राइवेट ट्रस्ट के साथ सर्विस विवाद रिट अधिकार क्षेत्र के तहत सुनवाई योग्य नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 'द ट्रिब्यून ट्रस्ट' के कर्मचारी द्वारा दायर रिट याचिका खारिज की। कोर्ट ने माना कि किसी निजी संस्था के साथ पूरी तरह से संविदात्मक रोज़गार से उत्पन्न होने वाले सर्विस विवाद संविधान के अनुच्छेद 226/227 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र के दायरे में नहीं आते।जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा,"प्रतिवादी-ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है, जिसके अपने नियम हैं, जो उसके कर्मचारियों की सेवा के आंतरिक विनियमन के लिए बनाए गए हैं। इसके अलावा... किसी भी वैधानिक नियम के अभाव में...
हरभजन सिंह पंजाब में नहीं रह रहे हैं: राज्य सरकार ने उनकी सुरक्षा हटाने को चुनौती देने वाली याचिका पर कहा
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को याचिका पर नोटिस जारी किया। यह याचिका पूर्व क्रिकेटर और अब सांसद (MP) बने हरभजन सिंह ने दायर की थी। इसमें उन्होंने अपनी सुरक्षा हटाए जाने को चुनौती दी और आरोप लगाया कि यह राजनीतिक बदले की भावना से किया गया और इसमें सही प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ।इस याचिका में 25 अप्रैल, 2026 का आदेश रद्द करने की मांग की गई। इस आदेश के तहत सिंह की सुरक्षा कथित तौर पर बिना किसी नए खतरे के आकलन, बिना किसी नोटिस या सुनवाई का मौका दिए हटा दी गई थी।पंजाब के एडवोकेट जनरल...
पंजाब के एंटी-सेक्रिलेज कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिका की सुनवाई पर रोक, याचिकाकर्ता के आचरण पर हाईकोर्ट सख्त
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब के एंटी-सेक्रिलेज कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर तत्काल कोई आदेश पारित करने से इनकार करते हुए कहा कि पहले यह देखा जाएगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं।चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के पूर्ववृत्त और तथ्यों को कथित रूप से छिपाने के आरोपों के मद्देनजर अदालत पहले याचिका की सुनवाई योग्यता पर विचार करेगी।मामला जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026” की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली...
MNC में काम करने वाली पढ़ी-लिखी महिला ने महीनों तक FIR दर्ज नहीं कराई: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द किया रेप का केस
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज रेप का मामला रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि दो समझदार लोगों के बीच लंबे समय तक चले आपसी सहमति वाले रिश्ते को शादी के वादे के टूटने के आधार पर रेप का मामला बनाकर आपराधिक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।जस्टिस एन.एस शेखावत ने कहा,"यहां तक कि दूसरे व्यक्ति से तलाक लेने से पहले भी प्रतिवादी नंबर 2 (महिला) 09.10.2022 से 17.10.2022 तक याचिकाकर्ता के साथ बाली गई। दोनों ने कई जगहों का दौरा किया और अलग-अलग हिल स्टेशनों पर एक ही होटल में साथ-साथ रुके। इसके...
BNSS की धारा 129 के तहत चल रही कार्यवाही के दौरान निवारक हिरासत वैध होने के लिए सख्त कानूनी मानकों को पूरा करना अनिवार्य: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने यह फैसला दिया कि यद्यपि पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत निवारक हिरासत का इस्तेमाल तब भी किया जा सकता है, जब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 129 के तहत कार्यवाही चल रही हो, लेकिन ऐसी हिरासत को सख्त कानूनी मानकों को पूरा करना अनिवार्य है। ऐसा न होने पर उसे अवैध माना जाएगा।कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि समानांतर निवारक कार्यवाही के अस्तित्व से, हिरासत में लेने वाले प्राधिकारी द्वारा स्वतंत्र रूप से अपने विवेक का इस्तेमाल करने की आवश्यकता कम नहीं...
शादीशुदा महिला इतनी समझदार होती है कि नतीजों को समझ सके: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर रेप का मामला रद्द किया
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर रेप के आरोपी व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक शिकायत और समन आदेश रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि एक शादीशुदा महिला, जिसने अपने अलग रह रहे पति से तलाक नहीं लिया था, यह नहीं कह सकती कि उसने यौन संबंध बनाने की सहमति देते समय "तथ्यों की गलतफहमी" के तहत काम किया।जस्टिस एन.एस. शेखावत ने कहा,"शिकायतकर्ता खुद एक शादीशुदा महिला है, जिसने साल 2008 में बूर सिंह से शादी की थी। हालांकि, साल 2010 में वह अपने पति से अलग रहने लगी और शिकायत दर्ज होने की तारीख तक गांव पंजे...
Gurugram Demolitions: हाईकोर्ट ने अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की इजाज़त दी, कहा - सही प्रक्रिया का पालन ज़रूरी
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को गुरुग्राम में उन अतिक्रमणों को हटाने की इजाज़त दी, जो नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करते पाए गए। साथ ही कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि ऐसी कार्रवाई में सही कानूनी प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।गुरुग्राम के निवासियों की तरफ से पेश हुए सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में मौखिक रूप से यह बात उठाई और गुरुग्राम में "स्टिल्ट प्लस फोर" इमारतों को निशाना बनाकर चल रहे तोड़फोड़ अभियान पर प्रकाश डाला।हाईकोर्ट ने अप्रैल में...
कार्यस्थल विवाद में गाली देना यौन उत्पीड़न नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द की FIR
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि कार्यस्थल पर विवाद के दौरान “फ*** ऑफ” जैसे अपशब्द का प्रयोग, भले ही अनुचित हो, लेकिन यदि उसमें यौन आशय या संकेत न हो तो इसे यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता।जस्टिस कीर्ति सिंह ने कहा कि किसी एक बार की अभद्र टिप्पणी, जिसमें यौन तत्व या लगातार ऐसा व्यवहार न हो उसे दंडनीय यौन उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।अदालत ने कहा, “सिर्फ एक अपमानजनक टिप्पणी, जिसमें यौन आशय न हो, कानून के उस स्तर को पूरा नहीं करती जो लैंगिक उत्पीड़न के लिए...
21 साल बाद बलात्कार के दोषी को हाईकोर्ट ने किया बरी, गवाही में विरोधाभास और सबूतों की कमी बनी वजह
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने वर्ष 2005 में बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी किया। अदालत ने कहा कि पीड़िता के बयानों में गंभीर विरोधाभास, ठोस साक्ष्यों का अभाव और फोरेंसिक रिपोर्ट में असंगतियों के कारण दोषसिद्धि को बरकरार रखना सुरक्षित नहीं है। गौरतलब है कि अपील लंबित रहने के दौरान आरोपी की मृत्यु हो चुकी थी।जस्टिस रुपिंदरजीत चहल ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता ने अलग-अलग चरणों पर घटना के बारे में भिन्न-भिन्न बयान दिए। उन्होंने पुलिस के समक्ष दिए गए बयान, दंड प्रक्रिया संहिता...
'पंजाब अपवित्रीकरण विरोधी कानून' को हाईकोर्ट में चुनौती
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई, जिसमें "जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026" (अपवित्रीकरण विरोधी अधिनियम) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई।यह याचिका पंजाब के रहने वाले कानून के स्नातक सिमरनजीत सिंह ने दायर की, जिन्होंने खुद व्यक्तिगत रूप से कोर्ट का रुख किया।यह याचिका 2026 के संशोधन अधिनियम की वैधता को चुनौती देती है, जिसे 17 अप्रैल, 2026 को राज्यपाल की मंज़ूरी मिली थी और 20 अप्रैल, 2026 को अधिसूचित किया गया।इसमें यह तर्क दिया गया कि यह...
एक ही FIR में दोबारा गिरफ्तारी पर कारण दोबारा बताना जरूरी नहीं: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला देते हुए कहा कि एक ही FIR में दूसरी बार गिरफ्तारी होने पर पुलिस को हर बार गिरफ्तारी के कारण दोबारा देने की आवश्यकता नहीं होती, यदि पहले ही यह प्रक्रिया पूरी की जा चुकी हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार आरोपी को गिरफ्तारी के आधार बता दिए जाएं तो कानून में उन्हें बार-बार दोहराने की कोई अनिवार्यता नहीं है।जस्टिस जसजीत सिंह बेदी इस मामले में दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल कर अपनी दोबारा...

















