मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

पेंशन कर्मचारी का वैधानिक अधिकार, गंभीर कदाचार साबित हुए बिना नहीं रोकी जा सकती: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पेंशन किसी सरकारी कर्मचारी का वैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकार है, जिसे विधि द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना छीना या रोका नहीं जा सकता।अदालत ने स्पष्ट किया कि पेंशन में कटौती या उसे रोके जाने जैसी कठोर सजा तभी दी जा सकती है जब कर्मचारी के खिलाफ गंभीर कदाचार का स्पष्ट निष्कर्ष दर्ज हो और यह भी स्थापित हो कि यदि वह सेवा में होता तो उसके कृत्य के कारण उसे बर्खास्त किया जा सकता था। जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की एकलपीठ ने यह टिप्पणी...

BJP MLA संजय पाठक के खिलाफ मानहानि शिकायत पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का नोटिस, राज्य सरकार से मांगा जवाब

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी विधायक (BJP MLA) संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ दायर मानहानि शिकायत पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। यह याचिका कटनी के लाइसेंसी शस्त्र विक्रेता नाजिम खान ने दायर की, जिसमें उनकी शिकायत पर विचार कर निर्णय लेने के निर्देश देने की मांग की गई।जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने राज्य सरकार की ओर से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगने की प्रार्थना स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की।याचिका के अनुसार वर्ष 2024...

प्रक्रिया से जुड़ी उलझन को दूर करने के लिए मांगी गई स्पष्टीकरण की पुनर्विचार याचिका पर विचार किया जा सकता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर समीक्षा याचिका, जिसमें प्रक्रिया से जुड़ी उलझन या भविष्य में बेकार के मुकदमों को रोकने के लिए स्पष्टीकरण मांगा गया हो, उस पर विचार किया जा सकता है।जस्टिस जय कुमार पिल्लई की बेंच ने कहा:"भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत समीक्षा अधिकार क्षेत्र का दायरा स्वाभाविक रूप से सीमित है। न्यायिक अनुशासन का यह स्थापित सिद्धांत है कि समीक्षा असल में अपील नहीं होती है। हालांकि, जब कोई पक्ष प्रक्रिया से जुड़ी उलझन को दूर करने और यह...

एमपी में शादी करने वाली महिला सरकारी नौकरी में आरक्षण के लिए अपने मूल राज्य से जारी जाति प्रमाण पत्र पर निर्भर नहीं रह सकती: हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि एक महिला को उस राज्य में आरक्षण का लाभ मिल सकता है, जहां उसकी शादी हुई है, बशर्ते वह उस राज्य के सक्षम अधिकारी से जाति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करे और उसे प्राप्त करे। [2026 LiveLaw (MP) 223]जस्टिस विशाल धगट की बेंच ने आगे स्पष्ट किया कि महिला को उसके मूल राज्य द्वारा मूल रूप से जारी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किसी अन्य राज्य में आरक्षण पाने के लिए नहीं किया जा सकता है।बेंच ने कहा:"यदि किसी लड़की की जाति को दोनों राज्यों में आरक्षण का लाभ पाने के लिए अधिसूचित किया...

बरी होने के बाद जब्ती आदेश नहीं रह सकता प्रभावी, संपत्ति की जब्ती नागरिक अधिकारों पर गंभीर असर डालती है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि जब किसी आरोपी को सक्षम अदालत आपराधिक मामले में बरी कर देती है तो मध्य प्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 47ए के तहत कलेक्टर द्वारा पारित जब्ती आदेश स्वतंत्र रूप से प्रभावी नहीं रह सकता। अदालत ने कहा कि संपत्ति की जब्ती नागरिक के संवैधानिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों पर गंभीर प्रभाव डालती है, इसलिए आरोप सिद्ध न होने की स्थिति में ऐसे आदेश को जारी रखना कानूनसम्मत नहीं है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने भिंड कलेक्टर द्वारा 22 जनवरी 2025...

खाद्य नमूने की केंद्रीय प्रयोगशाला से जांच के अधिकार की जानकारी न देना अभियोजन को अवैध बनाता है: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किसी आरोपी को खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम, 1954 की धारा 13(2) के तहत उपलब्ध उसके वैधानिक अधिकार की जानकारी नहीं दी जाती, तो पूरा अभियोजन ही प्रभावित हो जाता है। अदालत ने कहा कि आरोपी को यह बताना अनिवार्य है कि वह खाद्य नमूने की जांच केंद्रीय खाद्य प्रयोगशाला से कराने का आवेदन कर सकता है।जस्टिस हिमांशु जोशी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए दो आरोपियों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी वकील की कलंकपूर्ण बर्खास्तगी रद्द की, कहा - सही प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिवपुरी ज़िला अदालत के एडिशनल सरकारी वकील/एडवोकेट की बर्खास्तगी का आदेश रद्द किया। कोर्ट ने पाया कि न तो कोई नियमित विभागीय जांच की गई और न ही कोई चार्जशीट जारी की गई; बल्कि सीधे बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया, जो कलंकपूर्ण, अस्पष्ट, बिना कारण बताए और बिना तर्क के था। [2026 LiveLaw (MP) 221]जस्टिस आनंद सिंह बहरावत की बेंच ने कहा:"ऊपर की गई चर्चा से यह स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता को कोई चार्जशीट जारी नहीं की गई और न ही कोई नियमित विभागीय जांच की गई। विवादित आदेश...

हाईकोर्ट जज के तौर पर मिली ग्रेच्युटी, लोकायुक्त के तौर पर सेवा के लिए अलग ग्रेच्युटी पाने में रुकावट नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अपनी सेवाओं के लिए ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं और यह हाईकोर्ट जज के तौर पर मिलने वाले फायदों से अलग है। [2026 LiveLaw (MP) 218]तत्कालीन चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस द्वारकाधीश बंसल की डिवीजन बेंच ने कहा,"...याचिकाकर्ता क्रमशः लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त के तौर पर दी गई सेवा के लिए 'डेथ-कम-रिटायरमेंट ग्रेच्युटी' (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति ग्रेच्युटी) का लाभ पाने के हकदार हैं, भले ही उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज का पद संभालने के कारण...

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मेडिकल यूनिवर्सिटी द्वारा आंसर शीट के डिजिटल मूल्यांकन को सही ठहराया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबलपुर की एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी द्वारा आंसर शीट के डिजिटल मूल्यांकन को चुनौती देने वाली दो रिट याचिकाओं को खारिज किया। कोर्ट ने पाया कि फिजिकल (हाथ से) स्वतंत्र मूल्यांकन से मिले अंकों में कोई खास अंतर नहीं था। [2026 LiveLaw (MP) 217]एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार और टेक्नोलॉजी पार्टनर 'माइंड लॉजिक्स इन्फ्रा' (Mindlogicx Infra) को सिस्टम की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए कुछ उपाय सुझाए:"सिंबल (चिह्न),...

अभिषेक बनर्जी की गिरफ़्तारी को हरी झंड़ी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने BJP नेता के मानहानि केस में गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक हटाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार (17 जून) को मानहानि के मामले में TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट के अमल पर लगी अंतरिम रोक हटाई, क्योंकि इस मामले में उनकी ओर से कोई पेश नहीं हुआ। [2026 LiveLaw (MP) 215]बनर्जी ने BJP नेता आकाश विजयवर्गीय द्वारा दायर मानहानि के मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। 12 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने एक अंतरिम आदेश में भोपाल के MP/MLA स्पेशल जज द्वारा जारी...

हिरासत में मौत और पुलिसिया हिंसा के मामलों में अभियोजन मंजूरी जरूरी नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि हिरासत में मौत या पुलिसिया हिंसा के मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 197 के तहत पूर्व सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती। अदालत ने दो पुलिस आरक्षकों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे कृत्यों का सरकारी कर्तव्य के निर्वहन से कोई उचित संबंध नहीं माना जा सकता।जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ इंदौर में वर्ष 2015 में हुई एक युवक की कथित हिरासत मौत से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।...

सिर्फ आशंका के आधार पर हर्बल हुक्का पर रोक नहीं लगाई जा सकती, लाउंज के खिलाफ कार्रवाई पर रोक: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि केवल संभावित दुरुपयोग की आशंका के आधार पर हर्बल हुक्का पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता। अदालत ने 'द हाई ट्राइब' नामक लाउंज को राहत देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उसके खिलाफ कोई दंडात्मक या जबरन कार्रवाई न करें, बशर्ते वहां केवल तंबाकू और निकोटिन रहित हर्बल हुक्का ही परोसा जाए और सभी कानूनी नियमों का पालन किया जाए।जस्टिस हिमांशु जोशी की सिंगल बेंच ने कहा कि संबंधित कानूनों का उद्देश्य तंबाकू और उससे जुड़े पदार्थों के सेवन एवं...

EWS अभ्यर्थी आयु सीमा में छूट का दावा अधिकार के रूप में नहीं कर सकते, नियमों में प्रावधान जरूरी: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के अभ्यर्थी केवल संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर आयु सीमा में छूट का दावा अधिकार के रूप में नहीं कर सकते। यदि संबंधित भर्ती नियमों या सरकारी नीति में ऐसी छूट का प्रावधान नहीं है तो अदालत उसे प्रदान करने का निर्देश नहीं दे सकती।जस्टिस प्रणय वर्मा और जस्टिस जय कुमार पिल्लई की खंडपीठ ने सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी पद की भर्ती में आयु सीमा में छूट की मांग करने वाले अभ्यर्थी की अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी...

अपने खिलाफ विभागीय कार्रवाई संभालने वाले अधिकारी को उसी विभाग का प्रभार देना कानून के खिलाफ: एमपी हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि जिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित या लंबित हो, उसे उसी विभाग का प्रभार देना, जहां उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की प्रक्रिया चल रही हो, कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।अदालत ने राज्य सरकार के फैसले को रद्द करते हुए इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया।जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने कहा कि संबंधित अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपने का निर्णय अदालत की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है।अदालत ने टिप्पणी की कि...

क्या पुलिस वाले के जान जोखिम में डालकर किए गए बचाव अभियान को सिर्फ़ रोज़मर्रा की पुलिस ड्यूटी माना जा सकता है? एमपी हाईकोर्ट ने बताया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साफ़ किया कि किसी पुलिस अफ़सर द्वारा जान जोखिम में डालकर किए गए बचाव कार्य को, आउट-ऑफ़-टर्न प्रमोशन (समय से पहले प्रमोशन) से इनकार करने के लिए सिर्फ़ रोज़मर्रा की ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना जा सकता। [2026 LiveLaw (MP) 210]जस्टिस विवेक कुमार सिंह की बेंच ने बताया कि उक्त पुलिस अफ़सर ने अपनी ड्यूटी से आगे बढ़कर काम किया। उन्होंने अंधेरे में सिर्फ़ एक रस्सी के सहारे लटककर, 200 फ़ीट गहरी खाई में फँसे एक ओवरलोडेड ट्रक में मौजूद दो लोगों की जान बचाई। कोर्ट ने इसे "असाधारण...

बालिग महिला के पार्टनर के साथ रहने के फ़ैसले को बाहरी ताकतों से सुरक्षा मिलनी चाहिए: एमपी हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक 26 साल के पुरुष के साथ रह रही महिला को पुलिस सुरक्षा दी। कोर्ट ने कहा कि वह बालिग है और इसलिए अपनी मर्ज़ी से रहने के उसके फ़ैसले को बाहरी ताकतों से सुरक्षा मिलनी चाहिए।जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता की बेंच ने कहा,"चूंकि वह बालिग है, इसलिए उसे अपनी मर्ज़ी से रहने का अधिकार है। अगर वह ऐसा फ़ैसला करती है तो उसके फ़ैसले को बाहरी ताकतों से सुरक्षा मिलनी चाहिए।"यह जोड़ा अपने पिता (प्रतिवादी नंबर 4) और उनके साथियों से उचित सुरक्षा और मदद पाने के लिए हाईकोर्ट पहुंचा। जोड़े के...

प्रसूति वार्ड में महिलाओं का वीडियो बनाने के आरोपी को जमानत, हाईकोर्ट ने कहा- राज्य पक्ष कोई ठोस सामग्री पेश नहीं कर सका

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रसूति एवं लेबर वार्ड में भर्ती महिलाओं का वीडियो बनाने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत दी। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य पक्ष मामले की डायरी से आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं कर सका।जस्टिस द्वारका धीश बंसल की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि राज्य की ओर से ऐसी कोई सामग्री नहीं दिखाई गई, जिससे आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोपों की पुष्टि हो सके।अदालत ने कहा कि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना आरोपी को जमानत दिए जाने का अनुरोध स्वीकार किया जाता है...

पत्नी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने की कोशिश का आरोप: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पति को अग्रिम ज़मानत देने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ऐसे पति को अग्रिम ज़मानत देने से इनकार किया, जिस पर 5 लाख रुपये की मांग को लेकर पत्नी को चोट पहुँचाने और उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने की कोशिश करने का आरोप है। कोर्ट ने माना कि ये आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की बेंच ने कहा:"दोनों पक्षों के वकीलों को सुनने और केस डायरी, FIR, मेडिकल रिपोर्ट और रिकॉर्ड पर मौजूद अन्य सामग्री को देखने के बाद इस कोर्ट की यह राय है कि मौजूदा आवेदक के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।अभियोजन पक्ष का मामला बताता है...