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NI Act में चेक बाउंस केस की ट्रायल प्रक्रिया
इस एक्ट में यह प्रोसेस है कि चेक बाउंस के केस का समरी ट्रायल किया जाएगा। लेकिन इस समरी ट्रायल केस में भी वर्षों का समय लग जाता है। चेकों के अनादरण को अपराध के रूप में अधिनियम में उपबन्धित करने के बाद चेक अनादरण के मामलों में वृद्धि हुई। धारा 138 के अधीन परिवादों की संख्या में इतनी अधिक संख्या में वृद्धि हो गई कि न्यायालयों को इन्हें युक्तियुक्त समय में सम्भालना असम्भव सा हो गया और इसका न्यायालयों के आपराधिक के सामान्य कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगा। अतः कुछ और अनुतोषीय उपाय को लाना आवश्यक...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (21 अप्रैल, 2025 से 25 अप्रैल, 2025) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।गिफ्ट डीड का पंजीकरण मुस्लिम कानून के तहत संपत्ति की घोषणा या औपचारिक स्वीकृति के बिना वैध नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इसलिए कि मुस्लिम कानून के तहत उपहार पंजीकृत है, उपहार के अमान्य होने की संभावना को समाप्त नहीं करता है। अदालत ने कहा कि उपहार विलेख निष्पादित...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (21 अप्रैल, 2025 से 25 अप्रैल, 2025 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।सरकार को टेंडर रद्द करने और नया टेंडर आमंत्रित करने का पूरा अधिकार: सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि टेंडर मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप न्यूनतम होना चाहिए और केवल दुर्भावनापूर्ण या घोर मनमानी के मामलों में ही इसकी अनुमति दी जानी चाहिए। जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले...
Order 43 Rule 1A स्वतंत्र अपील नहीं बनाता है, समझौता डिक्री के खिलाफ सीधे अपील नहीं कर सकती पक्षकार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि एक समझौता डिक्री के लिए एक पक्ष पहले ट्रायल कोर्ट से संपर्क किए बिना अपीलीय अदालत के समक्ष समझौते को सीधे चुनौती नहीं दे सकता है।कोर्ट ने कहा, "यदि कोई व्यक्ति पहले से ही मुकदमे में एक पक्ष था, और इस बात से इनकार करता है कि कोई वैध समझौता कभी हुआ है, तो CPC को उस व्यक्ति को Order XXIII Rule 3 के प्रावधान के तहत ट्रायल कोर्ट में वापस जाने की आवश्यकता होती है और उस अदालत से यह तय करने के लिए कहता है कि समझौता वैध है या नहीं।, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस...
अधिकार तभी सार्थक जब नागरिक जागरूक हों: जस्टिस बीआर गवई
"अधिकार होना पर्याप्त नहीं है, यह आवश्यक है कि नागरिकों को पता होना चाहिए कि उनके पास संवैधानिक, वैधानिक अधिकार हैं। जब तक उन्हें जागरूक नहीं किया जाता है, वे उन्हें लागू करने के लिए आगे नहीं आएंगे, "सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई ने शनिवार (26 अप्रैल) को राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण के 30 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम में बोलते हुए कहा।जस्टिस गवई गुजरात के केवडिया में पश्चिमी क्षेत्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे, जो प्राधिकरण के 3 दशकों का जश्न मना रहा है, जिसे एनएएलएसए और गुजरात...
सेवा से लंबे समय तक निलंबन दंड को प्रतिबिंबित करता है: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि भले ही निलंबन कानूनी रूप से जुर्माना नहीं है, लेकिन एक अंतरिम उपाय है, लेकिन जब लंबे समय तक घसीटा जाता है तो सजा या "प्रच्छन्न" सजा दिखाई देती है।ऐसा करने में अदालत ने कार्मिक विभाग के सचिव के माध्यम से राजस्थान राज्य को एक परमादेश जारी किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी सक्षम प्राधिकारी सरकारी कर्मचारियों को निलंबित करने की शक्ति के साथ निहित हैं, लंबित आपराधिक कार्यवाही के कारण पारित निलंबन आदेश के बाद आगे की कार्रवाई करने के लिए उचित समय-सीमा का...
देश के न्याय का पैमाना सबसे गरीब और हाशिए पर पड़े लोगों द्वारा महसूस की गई सुरक्षा की भावना में निहित: जस्टिस सूर्यकांत
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस सूर्यकांत ने शनिवार (26 अप्रैल) को गुजरात में राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के 30 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा, "किसी देश के न्याय का पैमाना यह है कि उसके कितने नागरिकों को कभी अन्याय का डर नहीं रहा"।जस्टिस सूर्यकांत गुजरात के केवड़िया में NALSA और गुजरात राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (GSLSA) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित पश्चिमी क्षेत्रीय सम्मेलन में बोल रहे थे।इस कार्यक्रम में NALSA के 3 दशक पूरे होने का जश्न मनाया...
मैनुअल सीवर क्लीनर की मौत: मुआवजे के दावे पर विचार न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को तलब किया
सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के लिए तलब किया, क्योंकि कोर्ट ने पाया कि हरियाणा सरकार कोर्ट के आदेश का पालन करने में विफल रही है। कोर्ट के इस आदेश में उन्हें 30 लाख रुपये के मुआवजे के लिए याचिकाकर्ता के प्रतिनिधित्व पर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था, जिसके पति की सीवर टैंक की सफाई करते समय जहरीली गैस की वजह से मृत्यु हो गई थी।दो याचिकाकर्ताओं ने क्रमशः 2021 और 2022 में सीवर की सफाई करते समय जहरीली गैस की वजह से अपने पति की मृत्यु के...
धारा 41, राजस्थान न्यायालय शुल्क अधिनियम 1961 के तहत मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद में न्यायालय शुल्क की गणना
राजस्थान कोर्ट फीस और वाद मूल्यांकन अधिनियम, 1961 (Rajasthan Court Fees and Suits Valuation Act, 1961) किराया संबंधी मुकदमों में Court Fee (न्यायालय शुल्क) की गणना का स्पष्ट आधार प्रदान करता है। ऐसे मुकदमे, जो मकान मालिक (Landlord) और किरायेदार (Tenant) के बीच होते हैं, आमतौर पर किराए, कब्जे या पट्टे (Lease) के विवाद से जुड़े होते हैं। धारा 41 (Section 41) विशेष रूप से ऐसे ही विवादों में लागू होती है और यह बताती है कि Court Fee किस आधार पर ली जाएगी।इस लेख में हम धारा 41 के अंतर्गत आने वाले...
धारा 434 और 435, BNSS, 2023 : अपीलीय न्यायालय के अंतिम निर्णय और अपील करने वाले की मृत्यु पर अपील का अंत
आपराधिक न्याय व्यवस्था (Criminal Justice System) में अपील (Appeal) का अधिकार एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। जब किसी पक्ष को लगता है कि ट्रायल कोर्ट (Trial Court) में कोई गलती हुई है, तो वह उच्च न्यायालय (Higher Court) से फैसले की समीक्षा (Review) की मांग कर सकता है। लेकिन यह अधिकार भी अनंत नहीं होता। एक समय आता है जब अपीलीय न्यायालय (Appellate Court) का निर्णय अंतिम और बाध्यकारी (Final and Binding) माना जाता है। धारा 434 इसी "Finality" से जुड़ा हुआ है।वहीं दूसरी ओर, धारा 435 एक विशेष...
राजस्व न्यायालयों और नियंत्रण प्रणाली की संरचना: राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराएँ 20-A से 23
राज्य में भूमि से जुड़े विवादों की संख्या बहुत अधिक होती है, और इनमें निर्णय लेने के लिए एक न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता होती है। राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम, 1956 में पहले ही राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति और उनके अधिकारों का वर्णन किया गया है।अब Sections 20-A से 23 में राजस्व अपीलीय प्राधिकारी, पद के अनुसार की गई नियुक्तियाँ, उनकी अधिसूचना, और न्यायिक तथा गैर-न्यायिक कार्यों पर नियंत्रण से संबंधित प्रावधानों को दर्शाया गया है। Section 20-A – राजस्व अपीलीय प्राधिकारी (Revenue...
क्या बैंक किसी Borrower को Fraud घोषित करने से पहले उसका पक्ष सुने बिना निर्णय ले सकते हैं?
State Bank of India v. Rajesh Agarwal नामक ऐतिहासिक निर्णय में, जो 27 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाया गया, एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न पर विचार किया गया कि क्या किसी Borrower (उधारकर्ता) को Fraudulent (धोखाधड़ी करने वाला) घोषित करने से पहले उसे सुनवाई का अवसर (Right to be Heard) देना ज़रूरी है या नहीं।कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि Reserve Bank of India (RBI) की Master Directions on Frauds, 2016 को संविधान की मूल भावना और न्यायसंगत प्रक्रिया (Fair Procedure) के अनुसार पढ़ा जाना चाहिए। ...
एक वर्ष से अधिक अलग रहने के बाद आपसी सहमति से तलाक पर सहमत होना, अलगाव को निष्प्रभावी नहीं करता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि पति-पत्नी एक वर्ष से अधिक समय तक अलग रहने के बाद आपसी सहमति से तलाक के लिए सहमत हुए हैं, अदालत पूर्व के अलगाव काल को नजरअंदाज नहीं कर सकती।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तलाक के लिए सहमति बनने से पहले का अलगाव काल भी हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13-बी(1) के तहत गिना जाएगा।हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 13-बी के अंतर्गत आपसी सहमति से तलाक का प्रावधान करती है। अधिनियम की उप-धारा (1) के अनुसार दोनों पक्ष मिलकर तलाक की याचिका दायर कर सकते हैं। यदि वे एक...
Savarkar Defamation Case: राहुल गांधी मिली को सावरकर द्वारा लिखी गई किताबों की कॉपी कोर्ट में रखने की अनुमति
सावरकर मानहानि मामले में घटनाक्रम में पुणे के स्पेशल एमपी/एमएलए कोर्ट ने कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा हिंदू महासभा नेता द्वारा लिखी गई दो किताबों की प्रतियां रखने के लिए दायर आवेदन को अनुमति दी, जिन्हें शिकायतकर्ता सत्यकी सावरकर (सावरकर के पोते) ने सबूत के तौर पर आधार बनाया है।स्पेशल जज अमोल शिंदे ने गांधी द्वारा अपने वकील मिलिंद पवार के माध्यम से दायर आवेदन को अनुमति दी, जिसमें सावरकर द्वारा लिखी गई दो किताबों - "माझी जन्मथेप" (मेरा आजीवन कारावास) और "हिंदुत्व" की...
चूक के लिए मुकदमा खारिज करने से उसी कारण से नया मुकदमा दायर करने पर रोक नहीं लगती : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि CPC के आदेश IX के नियम 2 या 3 के तहत चूक के लिए मुकदमा या आवेदन खारिज करने से नया मुकदमा दायर करने पर रोक नहीं लगती, क्योंकि ऐसी बर्खास्तगी कोई निर्णय या डिक्री नहीं है। इसलिए रिस ज्यूडिकाटा का सिद्धांत लागू नहीं होता।अदालत ने टिप्पणी की,“इसलिए यह स्पष्ट है कि CPC के आदेश IX के नियम 2 या नियम 3 के तहत किसी मुकदमे या आवेदन को खारिज करने का आदेश न तो कोई निर्णय है और न ही कोई डिक्री है और न ही यह अपील योग्य आदेश है। यदि ऐसा है तो CPC के आदेश IX के नियम 2 या नियम 3 के तहत...
पंजाब में हाइब्रिड धान बीजों की बिक्री पर प्रतिबंध: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कृषि विभाग की कानूनी शक्ति पर उठाए सवाल
एक अहम घटनाक्रम में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार द्वारा राज्य में हाइब्रिड धान बीजों की बिक्री पर लगाए गए प्रतिबंध के पीछे की वैधानिक शक्ति पर सवाल उठाए।जस्टिस कुलदीप तिवारी ने पंजाब सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि 7 अप्रैल को पारित किए गए उक्त आदेश के पीछे कौन-सी कानूनी शक्ति है, जिसके आधार पर राज्य में हाइब्रिड धान बीजों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया गया।इसके साथ ही कोर्ट ने कृषि और किसान कल्याण विभाग के निदेशक को यह हलफनामा दायर करने को कहा,“क्या उनके पास ऐसा आदेश पारित करने की...
सिख आमतौर पर पहनते हैं 'कड़ा', व्यक्तिगत वस्तु: दिल्ली हाईकोर्ट ने कस्टम विभाग का जब्ती आदेश रद्द किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि सिख लोग धार्मिक आस्था के तहत आमतौर पर कड़ा पहनते हैं। इस आधार पर दुबई निवासी एक यात्री के सोने के कड़े को कस्टम विभाग द्वारा जब्त किए जाने को रद्द कर दिया।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"स्पष्ट रूप से तस्वीरों को देखने और यह तथ्य जानने के बाद कि यह एक कड़ा है, जिसे आमतौर पर याचिकाकर्ता जैसे सिख लोग पहनते हैं। कोर्ट के मन में कोई संदेह नहीं रहा कि यह याचिकाकर्ता की व्यक्तिगत वस्तु थी।"याचिकाकर्ता एक पर्यटक हैं, जो दिल्ली...
अपील प्राधिकारी को मामले को पुनः विचार हेतु भेजते समय दोषपूर्ण आदेश रद्द करना चाहिए: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि जब कोई अपीलीय प्राधिकारी किसी मामले को पुनः निर्णय के लिए निचली अदालत को भेजता है तो उसे दोषपूर्ण आदेश (Impugned Order) को स्पष्ट रूप से रद्द करना चाहिए और मामले के निपटारे के लिए निश्चित समयसीमा भी तय करनी चाहिए ताकि अनावश्यक विलंब से बचा जा सके।जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने मामले की सुनवाई करते हुए टिप्पणी की,"जब किसी मामले को पुनः विचार के लिए भेजा जाता है तो अपीलीय न्यायालय का यह कर्तव्य बनता है कि वह दोषपूर्ण आदेश को निरस्त करे जो कि इस मामले में नहीं किया गया।"कोर्ट...
[POCSO Act] नशे में नाबालिग की छाती छूने की कोशिश बलात्कार का प्रयास नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि एक व्यक्ति द्वारा शराब के नशे में एक नाबालिग लड़की की छाती छूने की कोशिश यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) के तहत बलात्कार के प्रयास की श्रेणी में नहीं आती, क्योंकि इसमें कोई 'प्रवेश की कोशिश' नहीं की गई थी। हालांकि यह कृत्य 'गंभीर यौन उत्पीड़न' के प्रयास की श्रेणी में आ सकता है।जस्टिस अरिजीत बनर्जी और जस्टिस बिस्वरूप चौधरी की खंडपीठ ने कहा,“पीड़िता और मेडिकल रिपोर्ट के साक्ष्य से यह स्पष्ट नहीं होता कि आरोपी ने कोई बलात्कार...
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत पर आधारित संगीत रचनाएं, राग और ताल के समान होने के बावजूद हो सकती हैं मौलिक: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉपीराइट कानून और भारतीय शास्त्रीय संगीत से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत पर आधारित कोई भी संगीत रचना, भले ही वह समान शैली (Genre), राग और ताल से संबंधित हो, फिर भी वह मौलिक (Original) रचना हो सकती है।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह ने कहा कि यदि किसी संगीत रचना की रचना मूल रूप से संगीतकार द्वारा की गई है तो वह कॉपीराइट अधिनियम 1957 के तहत संरक्षण प्राप्त करने की हकदार है।कोर्ट ने कहा,“संगीतकार उस रचना के संबंध में कॉपीराइट अधिनियम के तहत सभी अधिकारों,...



















![[POCSO Act] नशे में नाबालिग की छाती छूने की कोशिश बलात्कार का प्रयास नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट [POCSO Act] नशे में नाबालिग की छाती छूने की कोशिश बलात्कार का प्रयास नहीं: कलकत्ता हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2023/11/06/500x300_502168-pocsoact.jpg)
