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अवैध संबंध साबित करने के लिए कोर्ट मंगवा सकता है मोबाइल लोकेशन : दिल्ली हाईकोर्ट
अवैध संबंध साबित करने के लिए कोर्ट मंगवा सकता है मोबाइल लोकेशन : दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि वैवाहिक विवादों में अगर पति-पत्नी के बीच व्यभिचार का आरोप लगता है तो अदालत मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मंगवाने का आदेश दे सकती है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने साफ किया कि ऐसे मामलों में सबूत अक्सर परिस्थितिजन्य होते हैं। यानी होटल में ठहरना लगातार बातचीत या मोबाइल लोकेशन जैसे तथ्य अदालत के लिए अहम हो सकते हैं।कोर्ट ने कहा,"ऐसा डेटा सीधे विवाद से जुड़ा है और इसे फिशिंग इन्क्वायरी नहीं कहा जा सकता। बशर्ते कि यह केवल...

केवल जिला जज ही जिला उपभोक्ता आयोगों का नेतृत्व कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर
'केवल जिला जज ही जिला उपभोक्ता आयोगों का नेतृत्व कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर

सुप्रीम कोर्ट ने गणेशकुमार राजेश्वरराव सेलुकर एवं अन्य बनाम महेंद्र भास्कर लिमये एवं अन्य मामले में 21 मई, 2025 को एक फैसला दिया, जिसमें एक पुनर्विचार याचिका दायर की गई है। इस फैसले में राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोगों के अध्यक्षों एवं सदस्यों की नियुक्ति, पात्रता, चयन और कार्यकाल के संबंध में निर्देश जारी किए गए थे। इस फैसले में जारी एक महत्वपूर्ण निर्देश यह था कि केवल सेवारत या सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश ही जिला उपभोक्ता आयोगों के अध्यक्ष हो सकते हैं। केंद्र सरकार को इन निर्देशों के अनुसार...

व्यभिचार के आधार पर तलाक की मांग करते समय जीवनसाथी के कथित प्रेमी को पक्षकार बनाना अनिवार्य: दिल्ली हाईकोर्ट
व्यभिचार के आधार पर तलाक की मांग करते समय जीवनसाथी के कथित प्रेमी को पक्षकार बनाना अनिवार्य: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि व्यभिचार के आधार पर तलाक की मांग करते समय जीवनसाथी के कथित प्रेमी को पक्षकार बनाना न केवल आवश्यक है, बल्कि अनिवार्य भी है।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने कहा,"ऐसी (तलाक) याचिकाओं को नियंत्रित करने वाले प्रक्रियात्मक ढांचे के अनुसार, कथित वैवाहिक अपराध (व्यभिचार) का पूरा विवरण प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है, जिसमें कथित रूप से शामिल व्यक्ति की पहचान भी शामिल है। न्यायालयों ने न्यायनिर्णयन में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ऐसे व्यक्ति को...

भर्ती प्रक्रिया में पात्रता के लिए किसी संगठन के लिए काम करना, उसमें काम करने के समान नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
भर्ती प्रक्रिया में पात्रता के लिए किसी संगठन के लिए काम करना, उसमें काम करने के समान नहीं माना जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी संगठन के लिए काम करना, किसी संगठन में काम करने के समान नहीं माना जा सकता और भर्ती नियमों की व्याख्या करते समय 'रोज़गार' और 'पैनल में शामिल' को अलग-अलग माना जाना चाहिए।जस्टिस मनोज जैन ने भारतीय मानक ब्यूरो में सहायक निदेशक (विधि) की याचिका पर विचार करते हुए कहा,"निस्संदेह, विज्ञापन में दिए गए मुख्य शब्द केंद्र/राज्य उपक्रम में संबंधित क्षेत्र में 'तीन वर्ष' का अनुभव हैं। मैं उपरोक्त मानदंडों में प्रयुक्त शब्द "में" पर ज़ोर देना चाहूंगा। कोई व्यक्ति न्यायालय के समक्ष...

अमेरिकी गांजा भारतीय गांजे से ज़्यादा महंगा होने से NDPS Act के तहत दोषसिद्धि नहीं बढ़ती: दिल्ली हाईकोर्ट
'अमेरिकी गांजा' 'भारतीय गांजे' से ज़्यादा महंगा होने से NDPS Act के तहत दोषसिद्धि नहीं बढ़ती: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि "सिर्फ़ इसलिए कि अमेरिकी गांजा भारतीय गांजे से ज़्यादा महंगा है, अमेरिकी गांजा में दोषसिद्धि नहीं बढ़ती।"जस्टिस गिरीश कठपालिया ने NDPS Act के आरोपी की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।याचिकाकर्ता को 871 ग्राम गांजा रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, जो कि एक छोटी मात्रा था।उसकी ज़मानत का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता के पास से अमेरिकी गांजा बरामद किया गया, जो भारतीय गांजे से कहीं ज़्यादा महंगा है।इस तर्क को खारिज करते हुए...

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भारत-पाक युद्ध में घायल हुए सैनिक को दिव्यांगता लाभ देने से इनकार करने पर केंद्र सरकार की निंदा की
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भारत-पाक युद्ध में घायल हुए सैनिक को दिव्यांगता लाभ देने से इनकार करने पर केंद्र सरकार की निंदा की

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने 1971 के भारत-पाक युद्ध में विस्फोट के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए सैनिक को दिव्यांगता लाभ देने से इनकार करने पर केंद्र सरकार की आलोचना की।न्यायालय ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (AFT) के उस आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका खारिज की, जिसके तहत मृतक सैनिक की पत्नी को पेंशन लाभ प्रदान किया गया।शाम सिंह को पाकिस्तान की ओर से आए एक बम के उनके पास फटने से चोटें आईं और हमले के कारण उनकी आँखों की रोशनी चली गई। उन्हें लगी यह चोट न तो सैन्य सेवा के कारण थी और न ही...

राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाने वाले व्यक्ति को मिली सुरक्षा, हाईकोर्ट ने कहा- बहुत प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा
राहुल गांधी की नागरिकता पर सवाल उठाने वाले व्यक्ति को मिली सुरक्षा, हाईकोर्ट ने कहा- बहुत प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने गुरुवार को भारत सरकार को निर्देश दिया कि वह उस व्यक्ति को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल से निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) तत्काल उपलब्ध कराए, जिसने सांसद प्रियंका वाड्रा और सांसद एवं विपक्ष के नेता राहुल गांधी के विरुद्ध कई मामलों में लगातार धमकियां मिलने का दावा किया था, जिसमें उनकी नागरिकता पर सवाल उठाना भी शामिल है।जस्टिस संगीता चंद्रा और जस्टिस बृज राज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश एस विग्नेश शिशिर की सुनवाई के दौरान पारित किया, जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) की कर्नाटक...

वसीयत की प्रति के साथ प्रोबेट प्रदान करना वैध निष्पादन का निर्णायक प्रमाण: झारखंड हाईकोर्ट
'वसीयत की प्रति के साथ प्रोबेट प्रदान करना वैध निष्पादन का निर्णायक प्रमाण': झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाईकोर्ट ने माना कि एक बार वसीयत की प्रति के साथ प्रोबेट प्रदान कर दिए जाने पर यह निष्पादक की नियुक्ति और वसीयत के वैध निष्पादन को निर्णायक रूप से सिद्ध कर देता है। न्यायालय ने दोहराया कि प्रोबेट कार्यवाही में निर्धारण का एकमात्र मुद्दा वसीयत की वास्तविकता और उचित निष्पादन है, न कि संपत्ति के स्वामित्व या अस्तित्व से संबंधित प्रश्न।जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 276 सहपठित धारा 300 के तहत बीरेन पोद्दार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें...

पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस एम. रवींद्र भट सिंगापुर के आर्बिट्रेशन चैंबर्स में पहले भारतीय सदस्य बने
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस एम. रवींद्र भट सिंगापुर के आर्बिट्रेशन चैंबर्स में पहले भारतीय सदस्य बने

सिंगापुर के मध्यस्थता चैंबर्स ने दो नए सदस्यों सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एम. रवींद्र भट और एलन एंड ग्लेडहिल के पार्टनर तथा सीआईएसी के पूर्व सीईओ एवं रजिस्ट्रार मिन निंग ऊ की नियुक्ति के साथ अपने पैनल का विस्तार किया।जस्टिस भट मध्यस्थता चैंबर्स के पहले भारतीय सदस्य बने हैं। 2009 में दिल्ली इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर की स्थापना में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। अपने न्यायिक करियर के दौरान, उन्होंने कई ऐतिहासिक संविधान पीठों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन्होंने महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों...

क्या सरकारी रियायतों पर बने अस्पताल EWS/BPL मरीजों को मुफ्त उपचार प्रदान करते हैं? निगरानी की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
'क्या सरकारी रियायतों पर बने अस्पताल EWS/BPL मरीजों को मुफ्त उपचार प्रदान करते हैं?' निगरानी की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट सरकारी जमीन पर या सरकारी रियायतों के साथ बने निजी अस्पतालों में EWS/BPL मरीजों के लिए मुफ्त इलाज की कमी से जुड़ी जनहित याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस एनवी अंजारिया और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने इस मामले में भारत संघ, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया।यह याचिका मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध सोशल एक्टिविस्ट संदीप पांडे द्वारा दायर की गई।यह याचिका ऐसे प्राइवेट अस्पतालों द्वारा...

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में शहरी गरीबों के लिए दो आश्रय गृहों पर NALSA से रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में शहरी गरीबों के लिए दो आश्रय गृहों पर NALSA से रिपोर्ट मांगी

दिल्ली के आनंद विहार और सराय काले खां में बेघर लोगों के लिए अस्थायी आश्रय गृहों के स्थानांतरण से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने NALSA को प्रस्तावित नए आश्रय गृहों में राज्य द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं की क्षमता और गुणवत्ता पर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई, जस्टिस एनवी अंजारिया और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच देश भर में शहरी बेघरों के लिए आश्रय गृह स्थापित करने के मुद्दे पर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।केंद्र सरकार के वकीलों ने दलील दी...

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बंगाली प्रवासी कामगारों को केवल भाषा के कारण विदेशी बताकर हिरासत में लिए जाने के आरोपों की पुष्टि करने को कहा
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से बंगाली प्रवासी कामगारों को केवल भाषा के कारण विदेशी बताकर हिरासत में लिए जाने के आरोपों की पुष्टि करने को कहा

पश्चिम बंगाल के प्रवासी मुस्लिम कामगारों को बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिए जाने का विरोध करने वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या बंगाली भाषी प्रवासियों को केवल विशेष भाषा के प्रयोग के कारण विदेशी बताकर हिरासत में लिया गया था।जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने मामले की सुनवाई की और याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर अंतरिम आवेदन पर नोटिस जारी किया, जिसमें प्रतिवादी-प्राधिकारियों को किसी भी व्यक्ति...